पंडित मदन मोहन मालवीय जीवनी।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ “महामना मालवीय जी”। ϒ

Mahamana Malviya ji

एक बार एक सेठ जी स्वयं महामना मालवीय जी के पास अपने एक प्रीतिभोज में सम्मिलित होने का निमंत्रण देने के लिए पहुँचे। महामना जी ने उनके इस निमंत्रण को इन विनम्र किंतु मर्मस्पर्शी शब्दों में अस्वीकार कर दिया : –
“यह आपकी कृपा है, जो मुझ अकिंचन के पास स्वयं निमंत्रण देने पधारें, किंतु जब तक मेरे इस देश में मेरे हजारों-लाखों भाई आधे पेट रहकर दिन काट रहे हों तो मैं विविध व्यंजनों से परिपूर्ण बड़े-बड़े भोजों मे कैसे सम्मिलित हो सकता हूँ – ये सुस्वादु पदार्थ मेरे गले कैसे उतर सकते हैं।’’ महामना जी की यह मर्मयुक्त बात सुन सेठ जी इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने प्रीतिभोज में व्यय होने वाला सारा धन गरीबों के कल्याण हेतु दान दे दिया। बाद में उनका हृदय इस सत्कार्य से आनन्दमग्न हो उठा।
शिक्षा – “अन्य लोगों के कष्टपीड़ित और अभावग्रस्त रहते स्वयं मौज- मस्ती में रहना मानवीय अपराध हैं।”

महामना पं० मदन मोहन मालवीय का जीवन-परिचय।
(१८६१-१९४६)

भारतीय ज्ञान-सम्पदा व सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिमूर्ति महामना पं० मदन मोहन मालवीय मध्य भारत के मालवा के निवासी पं० प्रेमधर के पौत्र तथा पं० विष्णु प्रसाद के प्रपौत्र थे। पं० प्रेमधर जी संस्कृत के मूर्धन्य विद्वान थे। पं० मदन मोहन मालवीय के पूर्वजों के तीर्थराज प्रयाग (इलाहाबाद) में बस जाने का मन बनाया, जबकि उनके परिवार के कुछ सदस्यों ने पड़ोसी शहर मीरजापुर को अपना निवास स्थान बनाया। पं० प्रेमधर जी भागवत की कथा को बड़े सरस ढंग से वाचन व प्रवचन करते थे। मदन मोहन अपने पिता पं० ब्रजनाथ जी के छः पुत्र-पुत्रियों में सबसे अधिक गुणी, निपुण एवं मेधावी रहे। उनका जन्म २५ दिसम्बर, १८६१ ई० (हिन्दू पंचाङ्ग के अनुसार पौष कृष्ण अष्टमी, बुधवार, सं० १९१८ विक्रम) को प्रयाग के लाल डिग्गी मुहल्ले (भारती भवन, इलाहाबाद) में हुआ था। उनकी माता श्रीमती मोना देवी, अत्यन्त धर्मनिष्ठ एवं निर्मल ममतामयी देवी रही। मदन मोहन की प्रतिभा में अनेक चमत्कारी गुण रहे, जिनके कारण उन्होंने ऐसे सपने देखे जो भारत-निर्माण के साथ-साथ मानवता के लिए श्रेष्ठ आदर्श सिद्ध हुए। इन गुणों के कारण ही उन्हें महामना के नाम-रूप में जाना-पहचाना जाता है।
शिक्षा – महामना की प्रारंभिक शिक्षा प्रयाग के महाजनी पाठशाला में ५ वर्ष की आयु में आरम्भ हुई थी। पं० मदन मोहन मालवीय जी ने अपने व्यवहार व चरित्र में हिन्दू संस्कारों को भली-भांति आत्मसात किया था। इसी के फलस्वरूप वे जब भी प्रातःकाल पाठशाला को जाते तो प्रथमतः हनुमान-मन्दिर में जाकर प्रणामाजंलि के साथ यह प्रार्थना अवश्य दुहराते थे:
मनोत्रवं मारूत तुल्य वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्
वातात्मजं वानरयूथ मुख्यं श्री रामदूतं शिरसा नमामि।
श्री कृष्णजन्माष्टमी के महोत्सव को वे सच्च मन व हृदय से धूमधाम के साथ मनाने थे। १५ वर्ष के किशोर वय में ही उन्होंने काव्य रचना आरम्भ कर दी थी जिसे वे अपने उपनाम मकरन्द से पहचाने जाते रहे। मैट्रिक परीक्षा सन १८६४ में प्रयाग राजकीय हाईस्कूल से उत्तीर्ण कर, म्योर सेण्ट्रल काॅलेज में दाखिल हुए। विद्यालय व कालेज दोनों जगहों पर उन्होंने अनेक सांस्कृतिक व सामाजिक आयोजनों में सहभागिता की। सन १८८० ई० में उन्होंने हिन्दू समाज की स्थापना की।
विवाह – उनका विवाह मीरजापुर के पं० नन्दलाल जी की पुत्री कुन्दन देवी के साथ १६ वर्ष की आयु में हुआ था।
सामाजिक कार्य – पं० मदन मोहन मालवीय जी कई संस्थाओं के संस्थापक तथा कई पत्रिकाओं के सम्पादक रहे। इस रूप में वे हिन्दू आदर्शों, सनातन धर्म तथा संस्कारों के पालन द्वारा राष्ट्र-निर्माण की पहल की थी। इस दिशा में प्रयाग हिन्दू सभा की स्थापना कर समसामयिक समस्याओं के संबंध में विचार व्यक्त करते रहे। सन १८८४ ई० में वे हिन्दी उद्धारिणी प्रतिनिधि सभा के सदस्य, सन १८८५ ई० में इण्डियन यूनियन का सम्पादन, सन १८८७ ई० में भारत-धर्म महामण्डल की स्थापना कर सनातन धर्म के प्रचार का कार्य किया। सन १८८९ ई० में हिन्दुस्तान का सम्पादन, १८९१ ई० में इण्डियन ओपीनियन का सम्पादन कर उन्होंने पत्रकारिता को नई दिशा दी। इसके साथ ही सन १८९१ ई० में इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत करते हुए अनेक महत्वपूर्ण व विशिष्ट मामलों में अपना लोहा मनवाया था। सन १९१३ ई० में वकालत छोड़ दी और राष्ट्र की सेवा का व्रत लिया ताकि राष्ट्र को स्वाधीन देख सकें।
यही नहीं वे आरम्भ से ही विद्यार्थियों के जीवन-शैली को सुधारने की दिशा में उनके रहन-सहन हेतु छात्रावास का निर्माण कराया। सन १८८९ ई० में एक पुस्तकालय भी स्थापित किया।
इलाहाबाद में म्युनिस्पैलिटी के सदस्य रहकर सन १९१६ तक सहयोग किया। इसके साथ ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रूप में भी कार्य किया।
सन १९०७ ई० में बसन्त पंचमी के शुभ अवसर पर एक साप्ताहिक हिन्दी पत्रिका अभ्युदय नाम से आरम्भ की, साथ ही अंग्रेजी पत्र लीडर के साथ भी जुड़े रहे।
पिता की मृत्यु के बाद पंडित जी देश-सेवा के कार्य को अधिक महत्व दिया। १९१९ ई० में कुम्भ-मेले के अवसर पर प्रयाग में प्रयाग सेवा समिति बनाई ताकि तीर्थयात्रियों की देखभाल हो सके। इसके बाद निरन्तर वे स्वार्थरहित कार्यो की ओर अग्रसर हुए तथा महाभारत, महाकाव्य के निम्नलिखित उदाहरण को अपना आदर्श जीवन बनाया –
न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं न पुनर्भवम ।
कामये दुःख तप्तानाम प्राणिनामार्तनाशनम ॥
उनका यह आदर्श बाद में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की पहचान बनी।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का निर्माण।
पं० मदन मोहन मालवीय जी के व्यक्तित्व पर आयरिश महिला डाॅ० एनीबेसेण्ट का अभूतपूर्व प्रभाव पड़ा, जो हिन्दुस्तान में शिक्षा के प्रचार-प्रसार हेतु दृढ़प्रतिज्ञ रहीं। वे वाराणसी नगर के कमच्छा नामक स्थान पर सेण्ट्रल हिन्दू काॅलेज की स्थापना सन १८८९ ई० में की, जो बाद में चलकर हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना का केन्द्र बना। पंडित जी ने तत्कालीन बनारस के महाराज श्री प्रभुनारायण सिंह की सहायता से सन १९०४ ई० में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना का मन बनाया। सन १९०५ ई० में बनारस शहर के टाउन हाल मैदान की आमसभा में श्री डी०एन०महाजन की अध्यक्षता में एक प्रस्ताव पारित कराया।
सन १९११ ई० में डाॅ० एनीबेसेण्ट की सहायता से एक प्रस्तावना को मंजूरी दिलाई जो २८ नवम्बर १९११ ई० में एक सोसाइटी का स्वरूप लिया। इस सोसायटी का उद्देश्य दि बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी की स्थापना करना था। २५ मार्च १९१५ ई० में सर हरकोर्ट बटलर ने इम्पिरीयल लेजिस्लेटिव एसेम्बली में एक बिल लाया, जो १ अक्टूबर सन १९१५ ई० को ऐक्ट के रूप में मंजूर कर लिया गया।
४ फरवरी, सन १९१६ ई० (माघ शुक्ल प्रतिपदा, संवत १९७२) को दि बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, की नींव डाल दी गई। इस अवसर पर एक भव्य आयोजन हुआ। जिसमें देश व नगर के अधिकाधिक गणमान्य लोग, महाराजगण उपस्थित रहे।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

कैसे परीक्षा के दबाव का सामना करें।

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ϒ कैसे परीक्षा के दबाव का सामना करें। ϒ

जब एक पेड़ को पानी कम मिलता है तो उसके बहुत सारे पत्ते सूखकर गिरने लगते हैं और पेड़ सीमित पत्तों के सहारे ही कम मात्रा में प्राप्त पानी का उपभोग कर अपने को बचाये रखता है। ऐसा तरीका तुम्हें भी अपनाना पड़ता है जब तुम पढ़ाई पर विशेष ध्यान नहीं देती और अचानक परीक्षा के समय दबाव बढ़ने पर केवल महत्वपूर्ण विषयों की ओर ध्यान देती हो, इससे दूसरे कम महत्वपूर्ण लगने वाले विषय कमजोर पड़ जाते हैं। लेकिन ज्ञान के दृष्टिकोण से तो सभी विषय महत्वपूर्ण हैं, कौन जानता है आने वाले कल में ये विषय ही अधिक महत्वपूर्ण हो जाएं।

इसलिए शुरू से ही सभी विषयों पर पूरा ध्यान और समय देना जरूरी है ताकि तुम्हारी रचना एक भरे-पूरे वृक्ष की तरह हो न कि झड़े हुए पत्ते वाले कमजोर वृक्ष की तरह।

कहते हैं गुलाब के पेड़ में पहले कांटे आते हैं और वो कांटों से भरा हुआ बिल्कुल भद्दा लगता है, लेकिन जल्दी ही वह अपने में फूल खिलाकर सबका ध्यान आकर्षित कर लेता है। तुम्हारी पढ़ाई के भी बहुत सारे पाठ ऐसे होते हैं जो तुमसे बिल्कुल ही जुड़ न पाते यानि तुम्हें बिल्कुल पसंद नहीं आते लेकिन इंतजार करना बुरी बात नहीं है, वे पाठ ही एक दिन तुम्हारे सबसे अधिक रूचिकर हो जाते हैं, जब उन्हें तुम थोड़ा बहुत समझने लगती हो और महसूस करती हो कि इनमें कितनी गूढ़ बातें छुपी हुई थी।

तुम्हें इस बात पर शत- प्रतिशत यकीन करना होगा कि कठिन एवम् दुर्गम चीजों को ही हल करने के बाद कोई सफल व्यक्ति कहलाता है। साधारण चीजों को हल करने वाला व्यक्ति हमेशा साधारण ही रह जाता है। लेकिन ये कठिन और दुर्गम रास्ते एक या दो दिन में पार नहीं किये जाते हैं, इन्हें पार करने में वर्षों की साधना करनी होती है, कठिनाईयों और मेहनत की एक बहुत लम्बी श्रृंखला से गुजरना होता है। जो लोग रूके हुए हैं वे तालाब की तरह हैं कभी सूख गए तो कभी भर गए। कुछ भी उनके हाथों में नहीं, सिवा एक सामान्य सा जीवन जीने के।

शरीर की पीड़ा को तुम जानती हो इसलिए उस जगह मरहम पट्टी कर उसका उपचार कर लेती हो, लेकिन में जब मन में पीड़ा पहुंचती है तुम उस स्थान को नहीं जानती, इसलिए उसका उपचार नहीं कर पाती। ये ही मानसिक जख्म बीच-बीच में पुरानी घटनाओं की याद दिलाकर तुम्हारे मन में टीस पहुंचाते रहते हैं। इन कारणों से अक्सर तुम अपना ध्यान पढ़ाई में केंद्रित नहीं कर पाती। जब तक मन को अलग-अलग क्रियाओं में बांटने वाली इन बीमारी का निवारण नहीं हो जाता, पढ़ाई में अपने आप को पूरी तरह समर्पित करना संभव नहीं होता। अच्छा तो यह होगा कि ऐसे झगड़ों में पड़ा ही नहीं जाए और अगर ऐसी घटना हो भी जाए तो जिन कारणों से परेशानी हो रही है उनसे समझौता कर लिया जाए। अपनी पढ़ाई को ही महत्वपूर्ण  समझते हुए, मानसिक द्वंद हटाने के लिए कुछ चीजों का त्याग करना पड़े तो भी वो उचित और शांतिदायक होगा।

अक्सर घरों के सामने वैसे पेड़ लगाये जाते हैं, जिनके पत्ते जाड़े में झड़ जाते हैं और धूप आने लगती है, फिर गर्मियों में उसी वृक्ष में पत्ते लौट आते हैं और चारों तरफ छाया हो जाती है। समय के अनुसार ही पहने कपड़े अच्छे लगते हैं और मौसम के अनुसार खान-पान भी। जिस तरह का समय चल रहा होता है उसी तरह के गाने, हमारी भाषा, हमारे नारे एवं नृत्य करने के तरीकों में बदलाव आता है। तुम में भी समय बीतने के साथ बदलाव आते हैं, उनकी तरफ भी निगरानी रखना, जीवन के प्रति तुम्हारी सजगता दर्शाता है।

जब भी तुम्हें चोट लगती होगी, शुरू में काफी दर्द होता होगा, लेकिन धीरे-धीरे दर्द सहने की आदत हो जाती है और फिर उतना दर्द महसूस नहीं होता। कई बार ढेर सारे विषय और पढ़ाई देखकर तुम्हारे मन में घबड़ाहट होती होगी जैसे इनकी और आगे बढ़ते ही तुम जख्मी हो जाओगी, लेकिन धीरे-धीरे मन को कठोर बनाकर इनसे जूझने की ताकत आ जाती है। कहते हैं जब तक एक सैनिक के शरीर में लड़ाई के जख्म नहीं रहे उसका सैनिक जीवन अधूरा ही रहा। जिस मार्ग का अनुशरण करने का फैसला तुमने किया है, उसमें हमेशा कठिनाईयां, भय आदि पहले आते हैं और खुशियां धीरे-धीरे और बाद में। इसलिए इन सारे अनुभवों को कड़ी दवा की तरह पीते जाना चाहिए क्योंकि तुम्हारा मार्ग आगे बढ़ने के लिए है न कि केवल मुश्किलों को देखते रहने के लिए।

जिन राजाओं के पास लड़ाई के लिए बड़ी सेना होती है उनके भय से ही छोटे-छोटे राज्य उनके अधीन हो जाते हैं। इस तरह से उनकी ताकत और सैनिक बल में वृद्धि होती रहती है। तुम्हारा ज्ञान भी जितना समृद्ध होगा वह नजर में आने वाले प्रत्येक ज्ञान को अपने कब्जे में करता जाएगा। इस तरह से तुम्हारे ज्ञान और कौशल में निरन्तर वृद्धि होती रहेगी फिर तुम किसी भी नयी चीज को देखकर नहीं घबराओगी।

जिन्हें छाया चाहिए उन्हें पेड़ मिल जाते हैं, जिन्हें गर्मी चाहिए उन्हें ऊन के कपड़े, जिन्हें जीभ की मिठास चाहिए उन्हें मीठे फल और जब तुम में सचमुच में ज्ञान पाने की जबर्दस्त इच्छा होती है तो अच्छी-अच्छी किताबें और अच्छे शिक्षक, किन्हीं न किन्हीं माध्यम से मिल ही जाते हैं।

जब तुम में पुस्तकों की ललक  होती है तुम पुस्तकालयों की तरफ भागती हो, विश्राम के समय भी शिक्षकों से जाकर अपने प्रश्नों का हल पूछती हो और पढ़ते-पढ़ते अपना भोजन करना भी भूल जाती हो। ऐसे प्रेम में पड़कर फिर वापस बाहर लौटना लगभग असंभव है।

इस दुनिया में अधिकतर लोग एक निर्देशित पढ़ाई में ही लगे रहते हैं, वे दूसरी तरफ बहुत कम ध्यान देते हैं। यह जीविकापर्जन के लिए हासिल किया जा रहा ज्ञान एक तरह का सीमित ज्ञान ही होता है, जबकि जिनमें वृहद ज्ञान की लालसा होती है वे अपने पैरों को इस तरह से नहीं बांधते तथा एक खुले पक्षी की तरह सारी दुनिया देखते हैं। तुम्हें भी विभिन्न तरह की चीजों एवं उनके कार्यकलापों में रुचि रखनी चाहिए तथा अपनी जानकारी को संचार माध्यमों एवं यात्राओं से बढ़ाते रहना चाहिए। अच्छे लोगों से वाद-विवाद एवं विचारों का आदान- प्रदान करना भी ज्ञान में वृद्धि का एक तरीका है।

कमरे में फूलों का गुलदस्ता रख दिया जाता है तो कमरा जीवंत हो उठता है, खिड़की के बाहर हरियाली हो तो ठंडी हवा भी जैसे हरापन लिए हुए हमारे पास आती हुई लगती है। सुन्दर-सुन्दर पर्वतों को देखने का भी एक सुख है और छोटी- सी झील में अनगिनत चीजें के समाहित‌ बिम्बों को देखने का भी एक अलग सुख है। एक अच्छी पुस्तक पढ़ते हुए भी हमें इस तरह की भावनात्मक अनुभूतियां होती है। हर बार लगता है, तुमसे ही कोई तुम्हारे मन की बात बोल रहा है। कोई अपने अनुभव बांट रहा है और अद्भूत होता है यह प्रेम कि तुम भूल जाती हो कि दुनिया में इससे भी अच्छा संबंध हमारा किसी चीज से हो सकता है।

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क्या करें – क्या ना करें।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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अपनी सफलता स्वयं सुनिश्चित करें।

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ अपनी सफलता स्वयं सुनिश्चित करें। ϒ

  • एक पेड़ में अगर फूल केवल कुछ ही जगहों पर न होकर चारों तरफ फैले होते हैं, तो उसकी खूबसूरती बढ़ जाती है। उसी तरह अगर कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे बहुत से हों तो उन्हें देखकर एक शिक्षक का मन खुश होता रहता है। उन्हें लगता है कक्षा का स्तर बढ़ा हुआ है, इन्हें और अधिक ऊंची बातें बतायी जा सकती है। क्योंकि हीरा हमेशा सोने जैसी बहुमूल्य धातुओं पर ही जड़ा जाता है लोहे पर नहीं। हमेशा श्रेष्ठ चीजें, श्रेष्ठ आधार पर ही शोभा पाती है, इसलिए तुम हमेशा कक्षा में एक श्रेष्ठ आधार बनने की कोशिश करो। ~Kmsraj51
  • अपनी सफलता स्वयं सुनिश्चित करें। अपने Mind काे कुछ इस तरह से खुराक दें। – किसी भी इंसान का माइंड(Mind) काेई भी बात ज्यादातर चित्र(Image) Form में सोचता हैं, इसलिए अपने लक्ष्य का चित्र व महत्वपूर्ण कार्य का जर्नल(नाेटबुक या डायरी) Hard और Soft दोनों प्रारूप में रखें तथा Daily Base पर अपने अवचेतन मन काे याद दिलाये सुबह उठते ही व रात्रि में साेने से पहले। ~Kmsraj51
  • जिस कर्म काे करने से आप अंदर से Strong महसूस करते है, वही अच्छे कर्म हैं।
    और जिस कर्म काे करने से आप अंदर से Weak महसूस करते है, वही बुरे कर्म हैं॥ ~Kmsraj51
  • समस्याएँ हमारी बुद्धि काे पूर्ण विकसित बनाती हैं और हमारी बहुत सारी सुषुप्त(साेई हुई या शिथिल) शक्तियों काे जगाने का कार्य करती हैं। ~Kmsraj51
  • आपको अपने असीमित आंतरिक शक्तियों को पहचानने की जरूरत हैं, तथा अपने असीमित आंतरिक शक्तियों काे संपूर्ण(आत्मा, तन, मन व धन) रूप व सही तरीके से अपने एक लक्ष्य काे पाने में लगा दें। आपको निश्चित रूप से सफलता मिलेगी। ~Kmsraj51
  • जीवन की कोई ऐसी परिस्थिति नहीं जिसे अवसर में ना बदला जा सके। हर परिस्थिति का “कुछ ना कुछ सन्देश” होता है। अगर तुम्हारे पास किसी दिन कुछ खाने को ना हो तो श्री सुदामा जी की तरह प्रभु को धन्यवाद दो “प्रभु आज आपकी कृपा से यह एकादशी जैसा पुण्य मुझे प्राप्त हो रहा है।”~Kmsraj51

  • धैर्य सदैव ही आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगी, सच्ची लगन आपकाे आपके मंजिल तक अवश्‍य पहुचाएगी और मूल्यवान है आपके ज़िन्दगी का हर लम्हा इसे व्यतीत न करे – बल्कि जी भर के जीएँ।~Kmsraj51
  • जाे मनुष्य हर बात काे भूल जाता है अर्थात किसी भी बात काे मन में रखकर ढोता नहीं, उसका मस्तिष्क निगेटिव एनर्जी से मुक्त रहता है। इसलिए भूलने में ही भला हैं।~Kmsraj51
  • समस्या से बचना ही आवश्यक नहीं है, समझदार वाे हैं जाे समस्या से टकराये, और उसे मिटाकर ही दम ले। इतिहास वही बदलते हैं जाे दिन में सपने देखते हैं।~Kmsraj51
  • अहंकार सदैव ही सर्वनाश की ओर लेकर जाता हैं।~Kmsraj51
  • सदैव आपकी यही कोशिश हाे कि आपका अगला क्षण, पिछले क्षण से अच्छा(Best) हाे।~Kmsraj51

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भगवान शिव की तस्वीरें।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

Life is queer with its twists and turns

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ Life is queer with its twists and turns ϒ

When things go wrong, as they sometimes will,
When the road you’re trudging seems all uphill,
When funds are low and the debts are high,
And you want to smile but you have to sigh,
When care is pressing you down a bit,
Rest if you must, but don’t you quit.
 
Life is queer with its twists and turns,
As every one of us sometimes learns,
And many a failure turns about,
When he might have won if he’d stuck it out.
Don’t give up, though the pace seems slow –
You may succeed with another blow.
 
Often the goal is nearer than
It seems to a faint and faltering man;
Often the struggler has given up
When he might have captured the victor’s cup,
And he learned too late, when the night slipped down,
How close he was to the golden crown.
 
Success is failure turned inside out –
The silver tint of the clouds of doubt,
And you never can tell how close you are –
It may be near when it seems afar;
So stick to the fight when you’re hardest hit –
It’s when things seem worst that you mustn’t quit.

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note::-

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Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

Lord Radha n Krishna

 

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ राधा-कृष्ण। ϒ

beautiful-radha-krishna-image-kmsraj51

श्री कृष्ण धरती(Earth) पर सतयुग में आये थे न कि द्वापर युग में। यह कलयुग का अंतिम समय चल रहा है, फिर से सतयुग आने वाला हैं।

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 ~Kmsraj51

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* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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Negative and positive energy of the mind

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ Positive And Negative Energy ϒ

Positive and negative energy is something which many people are unaware of. For you to achieve your goals, you must exert more positive energy than negative energy. This is an absolute fundamental to success and most be understood by you.

Positive And Negative Energy Cancel Each Other Out

When this happens, you end up with no manifestation. This is exactly why most people fail to manifest. The negative energy eats up any positive energy that is created, so nothing happens. When there is more negative than positive energy, negative manifestation happens. When there is more positive than negative energy, positive manifestation happens. Your objective is to bring the balance of energy as positive as possible.

You Must Generate More Positive Than Negative Energy

This is the only way you will achieve your goals. The negative energy must be minimized, and the positive energy must be maximized. This will have tremendous and huge effects on your life in a very short space of time. To do this best, you must be able to identify what negative and positive energy is: otherwise you are just wandering in the dark not having a clue. Here are some examples of negative energy:

a) Eating the wrong foods (the energy from these foods is assimilated into your system)
For example, all manner of dairy produce, meat, chicken and fish are strong negative energy sources. Meat and chicken are produced in artificial environments where the animals experience a high degree of suffering and stress for their whole lives. This energy is what you are taking in when you consume these types of animal. Fish contains many toxins and is worse when farmed artificially. If you want to consume meat, chicken etc, make sure that they are bred and raised in natural environments. This is will minimize the negative energy you get from them. Otherwise, they are an absolute no-no. They must be avoided, and you would be much better off going
vegetarian.

b) Verbal negative energy : criticizing, complaining, being egotistical, judging etc. These are all negative energy, and will create a vortex of negative energy if its allowed to increase unabated. To minimize these, you must simply remain quiet. It is always better to be quiet and only ever say good things, than it is to say something bad. Plus, if you say something bad, this is exactly what is inside of you as well. Say good things, and you are assured to be full of goodness.

c) Poor mindsets, behaviors and lifestyles :-

Poor mindsets, such as narrow minded thinking is obviously negative energy. You need to always have an open mind and see things in a positive, optimistic way that generates even more positive energy. Other things such as poor behaviors, lifestyles etc are obviously bad as well.

With that covered, here are some positive energy generators :

a) Eating healthy, wholesome foods, rich in nutrients
Examples are plenty of fruit, vegetables and staples such as brown rice, brown pasta, wholemeal breads etc. These are fantastic for your system and will make you feel good and on top of the world. Try it for 1 week and see how you feel. You will feel brilliant! The good feelings are the sign that you are being overwhelmed with positive, constructive and powerful energies. These energies will help you manifest like crazy.

b) Positive verbal energy : Gratitude, appreciation, good talk, expansionary talk etc.
Talking about things in a positive way will increase positive energy. You should always speak highly of people and see the best in them. What you see in others is what you see within yourself. You should talk about your goals and why you want to achieve them. You should provide people good advice and wisdom. You should always talk about how things are getting better and improving for you day by day. Always think and talk positive, and all good things will happen to you.

c) Good open mindedness, good behaviors and lifestyles
Being open minded to new possibilities, opportunities and situations allows your mind to expand in its power. This increases positive energy. Good behaviors through being driven, motivated and focused increase the positive energy depth even more.

You Must Be Appear Of The Signals Of Negative Energy

So the objective here is to minimize negative energy and maximize positive energy. You do this by actively expanding positive energy, whilst stamping down on negative energy whenever you get negative energy signals. These signals mostly come through your feelings. If you feel bad about something, this is negative energy. So change the feeling and the cause of it, and positive, healthy energies will be the result. In conclusion, increasing positive energies and minimizing the opposite is crucial to your success. The reason why so many mess-ups in life happen is because of a
lack of these understandings. Maximize your positive energy as much as possible, and watch the huge positive manifestations happen in your life.ImageImageImage

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∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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