उठो लाल अब आंखें खोलो।


Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ उठो लाल अब आंखें खोलो। ϒ

“उठो लाल अब आंखें खोलो।
पानी लायी मुह धो लो॥

बीती रात कमल दल फुले।
जिनके ऊपर भावारे झूले॥

चिङिया चहक उठी पेडो पर।
बहने लगी हवा सुंदर॥

नभ में न्यारी लाली छाई।
धरती ने प्यारी छवि पायी॥

ऐसा सुन्दर समय न खो।
मेरे प्यारे अब मत सो॥”

अरे अब तो जागो………..

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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