सहेजें आवाज की शक्ति को।


Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ सहेजें आवाज की शक्ति को। ϒ

  • किसी भी बात को कम शब्दों में और सारे तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया जाता है तो उसे अच्छा माना जाता है।
  • हमेशा लिखने का ढंग अपना निजी होना चाहिए न कि नकल किया हुआ।
  • इस तरह से सम्भव है कि किसी नयी  भाषा का जन्म हो जो तुम्हारे मन को तरंगित कर दे और निश्चित रूप से वह इतनी सरल हो कि आसानी से समझ में आ जाए।
  • साथ-साथ उस भाषा में अच्छी लय – ताल  हो जो एक वेग के साथ हमसे जुड़ जाए ताकि उसे बिना पढ़े या सुने, हम रह नहीं पायें।
  • उम्मीद है कि इस दिशा में तुम पर्याप्त परिश्रम करोगी/करोगे।
  • फूल कभी भी परेशान नहीं होते कि उन्हें कांटों के आस-पास खिलना होगा बल्कि स्वयं में और कांटों में फर्क दिखलाकर वे खुशबू बिखेरते दूर चले जाते हैं।
  • इसलिए जो अच्छे काम हैं वही तुम्हें करना चाहिए।
  • यह चिंता नहीं करनी चाहिए कि दूसरे कुछ लोग बुरे काम कर रहे हैं, या कुछ भी बुरा सोच रहे हैं वह तुम्हारे बारे में है। फिर दूसरों का मस्तिष्क या सोच तुम्हारें वश में भी तो नहीं है।
  • सारी चीजें पूरी होने में समय लेती हैं। बर्फीले पहाड़ों के थोड़े से ही हिस्से गर्मी में पिघल पाते हैं, जब तक वे पूरे पिघले, उसके पहले ही सर्दियां आ जाती हैं और वे पूर्ववत बने रहते हैं।
  • इसी तरह से मुसीबतें हमें पूरी तरह से निगल जाएं, उससे पहले ही उनसे बचाव किया जा सकता है।
  • इसलिए गलतियां करने के बाद भी संभलने के जो अवसर तुम्हें मिलते हैं उनमें संभल जाओ।
  • इस जिंदगी का यही नियम है, जहां बाधाएं हैं, उनसे बचाव के उपाय भी हैं।
  • अगर एक नदी अपने तट को रुका हुआ देखती रहती, तो खुद क्या भी रुक नहीं जाती?
  • यह हवा तो बिना थके परिश्रम करती रहती है।
  • अगर सभी अंधकार का ही अनुशरण करते, तो प्रकाश कौन फैलाता?
  • इसलिए वैसी चीजों की तरफ मत देखो जिनमें स्थिरता आ गयी है और जो जीवन में निराशा का संचार करती हैं।
  • तुम्हारे मन को छूने के लिए असीम चीजें हैं। अपनी झोली को इतना अधिक फैलाओ कि सब कुछ समा जाने के बाद भी खाली बच जाए, इसका कोई न कोई कोना।
  • फसल बोने के बाद भी डर लगा रहता है कि कहीं उसके अंकुरित होते छोटे-छोटे पौधों को चिडिय़ा खा नहीं जाएं या फसल के दानों को कीड़े चट न कर जाएं या रातों रात चोर इसे चोरी करके न ले जाएं। निरंतर प्रति दिन की सुरक्षा के बाद हमें हासिल होता है अन्न।
  • अतः हमारे ज्ञान को भी इसी तरह से संभाल कर रखना पड़ता है किसी कवच जैसी सुरक्षात्मक व्यवस्था से। जैसा कि हर घड़ी के ऊपर एक कांच लगा होता है।
  • हम हर अच्छी या बुरी चीज को देख सकते हैं। लेकिन सभी में हमारे दिमाग को लिप्त नहीं होने देना है। केवल अपने काम से मतलब रखने वाली जानकारियों को ही गहरी याददाश्त में रखना है अन्य को नहीं।
  • इस तरह का हमारा संयम ही हमारी सोच में आने वाली विकृतियों से हमें बचाए रखता है।
  • ये आंखें सचमुच में अंधी हैं। बिना प्रकाश के दो डग भी आगे नहीं बढ़ सकती। इन्हें प्रकाश चाहिए, अन्यथा बेकार। वैसे इतने सारे उपलब्ध प्रकाश का थोड़ा सा ही अंश ये लेती हैं बाकी इनके काम का नहीं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

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