MOOD………… KMSRAJ51

हर पाठ का एक मूड होता है जैसे वाणिज्य की पढ़ाई में व्यापारी मूड, गणित की पढ़ाई में जोड़-तोड़ का, भौतिकी की पढ़ाई में वैज्ञानिक, रसायन की पढ़ाई में प्रयोगशाला काइतिहास की पढ़ाई में प्राचीन, भूगोल में जलवायु आदि-आदि।  जब शिक्षक इस मूड को पूरी कक्षा में फैलाने में सक्षम होता है यानि पढ़ाई के विषय के अनुसार ही सभी उस मूड में खो जाएं तो उनका उद्देश्य पूरा हो जाता। जैसे कक्षा में अगर देश भक्ति की बात बतायी जाए तो छात्राओं में देश के लिए कुछ करने का जोश पैदा हो जाए। 

Always thinking deeply ………….. kmsraj51

किसी शिक्षक के तेवर गर्म होते हैं और उनके पढ़ाने  का तरीका आक्रामक होता है यानि जोर-शोर से अपने बातों पर दृढ़ता दिखलाते हुए, जैसे वे तुम्हें एक नई दिशा में अपने तरीके से ले जा रहे हों। कुछ शिक्षक नम्र तथा धीरे-धीरे पाठ को समझाने वाले एवं कुछ शिक्षक थोड़े निढाल जैसे, बस पढ़ाने भर का काम पूरा करना हो उन्हें जैसे।

इसी तरह से छात्र भी होते हैं कई बहुत अधिक उत्सुक एवम् जिज्ञासु, कई बस नाम के हाजिर, कई कुछ समझने की कोशिश में जूझते हुए तो कई कक्षा खत्म होने का  इंतजार करते हुए। इन सारी चीजों को गौर से देखोगी तो एक नाटक की तरह लगेगी तुम्हें यह कक्षा और सारे पात्र अलग-अलग तरह से इस नाटक को जीवंत करने का भरसक प्रयत्न करते हुए। 

Book a real friend ………….. kmsraj51

पुस्तकों के सामने झूठ, कपट, बेईमानी, लापरवाही, घमंड, ध्यानाभाव, आलस्य, शीघ्रता आदि दोषों से ग्रसित व्यक्ति बिल्कुल अलग-थलग हो जाता है। वो पुस्तकों की ऊंचाई तक नहीं पहुँच पाता। आश्चर्य होता होगा तुम्हें यह सोचकर की इतनी सारी बाधाओं को तोड़कर कितने संयम के साथ एक पुस्तक के निकट आ पाती हो और फिर एक अच्छे ज्ञान का विश्राम तुम्हें मिलता है। पुस्तकें ही वो जगह हैं जहां कोई निर्देश या कानून नहीं  लिखा हुआ है लेकिन तुम अपने आप नत्मस्तक होकर उसकी सत्ता को स्वीकार कर लेती हो। 

Anything is possible for you…………… kmsraj51

 चील काफी ऊंचाई पर उड़ती है लेकिन अभी भी उसके ऊपर एक काफी ऊंचा आकाश होता है छूने के लिए। इसलिए जब भी हम सोचते हैं कि हमने काफी कुछ कर लिया, काफी सारी सफलता प्राप्त कर ली तब भी हमारे पास प्राप्त करने हेतु इतना कुछ होता है कि जो हमने प्राप्त किया है वह नगण्य ही कहलाता है। जब हम में यह बोध होता है कि हम ने तो अभी नगण्य दूरी ही तय की है तो मन में अहम भावना का विनाश होता है और हम सरल होते जाते हैं और एक सरल व्यक्ति ही सबसे अधिक व्यावहारिक और मिलनसार होता है। वो सामाजिक होता है, सबसे प्यार करता है और अपने ज्ञान और प्रसि‌द्धी का बोझ खुद संभाल कर दूसरों पर हावी नहीं होता। ऐसे सरलतम् बोध ही हमारे जीवन को महान बनाते हैं।  

Always listen our inner Voice…………. kmsraj51

तुम पाओगी की प्रत्येक व्यक्ति में एक तरह की बैचेनी होती है। चाहे वह पैसे कमाने की हो, यात्रा पर जाने की हो, सुन्दर चीजें खरीदने की हो, घर बनाने या सजाने की हो, प्रेम पाने या देने की हो, पढ़ने की हो या पढ़ा हुआ दूसरों के बताने की हो, पौधे लगाने, चित्र बनाने, कलाकार बनने, डाक्टर बनने, ताकत हासिल करने की आदि-आदि। अनगिनत उदाहरण हो सकते हैं इसके।

इन्हीं में से एक या कुछ बेचैनी को लिए हुए मनुष्य जीता है और तुम्हारी यह बेचैनी जिस दिशा में जितनी प्रबल होगी, आदमी उसी दिशा में अधिक काम करेगा। इस बेचैनी की अधिकता ही तुम्हें पढ़ने-लिखने में अधिक सक्रिय बनाती और तुम इनके प्रति महत्वकांक्षी हो जाती हो। यह बेचैनी जैसे ही कम हुई, तुम्हारी इच्छा शक्ति भी कम हो जाती है। तुम देखोगी की एक अच्छा चित्रकार हमेशा कुछ न कुछ बनाने के लिए परेशान रहता है और एक अच्छा गायक हमेशा गाने के साज की ओर दौड़ता है जबकि पढ़ने वाले बच्चों की अंगुलियां पन्ने ही पन्ने पलटती रहती है। 

Always Run…….. kmsraj51

हर बार एक पुस्तक से ज्ञान प्राप्त कर लेने के बाद उस पुस्तक की तो मृत्यु हो जाती है लेकिन उसका ज्ञान तुम्हारे दिमाग में रह जाता है, जिसे तुम आगे बढ़ाती रहती हो। प्रत्येक पुस्तक बार-बार इसी तरह से अपनी मृत्यु चाहती है कि कोई उन्हें पढ़े और अलग रख दे, लेकिन उसमें निहित ज्ञान को हमेशा आगे की ओर बढ़ाता रहे ।