Happy New Year 2014 – नव वर्ष 2014

Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ नव वर्ष 2014 ϒ


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नया साल आते ही हमसब स्वंय से कुछ न कुछ वादा करते हैं। अपने-अपने कार्य क्षेत्र में सफलता की कामना लिए बेहतर प्रयास करते है, किन्तु सब लक्ष्य तक नही पहुँच पाते क्योंकि सफलता उन्ही को मिलती है जो हर बाधाओं को दृण संकल्प के साथ पूरी ईमानदारी से पार करते हैं।

कहते हैं, गहरी इच्छा हर उपलब्धी का शुरुआती बिन्दु होती है। जिस तरह आग की छोटी लपटें अधिक गर्मी नही दे सकती उसी तरह कमजोर इच्छा भी बङे नतीजे नही दे सकती। जीवन में सफल होने के लिए अपने लक्ष्य के प्रति जुनून होना भी बहुत जरूरी है। दूसरों पर निर्भर रह कर कामयाबी हासिल नही की जा सकती। कामयाबी के लिए थोङी बहुत रिस्क भी लेनी चाहिए। कहावत भी हैः- No Risk No Gain.

लाला लाजपत राय ने कहा था कि “मनुष्य अपने गुणों से आगे बढता है न की दूसरों की कृपा से।“ कहने का आशय ये है कि, सिर्फ सफल होने का प्रयास न करें बल्कि मुल्य आधारित जीवन जीने वाला इंसान बनने का भी प्रयास करें क्योंकि वास्तविक सफलता की ये प्रमुख ईकाइ है।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुलकलाम कहते हैं कि, “असफलता को भूलकर अपनी स्थिती और ऊर्जा को पहचानो। उसी पथ का निर्माण करो, जिसके लिए तुम बने हो, मंजिल तुम्हे जरूर मिलेगी। सपने जरूर देखो और उन सपनों को साकार करने की तीव्र चाह अपने मन में पैदा करो।“

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ यही कामना करते हैं कि, सभी के सपने साकार हों, 2014 की सुबह नई रौशनी का प्रकाश करे, जिसकी धूप से भारत में इंसानियत खिल उठे, बेटीयां सुरक्षित हों तथा वसुधैव कुटुम्बकम का शंखनाद हो।

नया साल सभी के लिए मंगलमय हो…..

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दासता की श्रृंखलाओं में बंधे रहने और अपना आत्म सम्मान खो देने के कारण आज भी हमारे देश में सभी व्यवस्थाएं अंग्रेजी केलेंडर के अनुसार ही चल रही हैं.वर्ष २०१३ विदाई ले रहा है और २०१४ अपने आगमन की तैयारी में हैं.जनवरी से प्रारम्भ होकर दिसम्बर तक चलने वाले सभी महीनों का नामकरण कैसे हुआ,इंटरनेट और पुस्तकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार उपलब्ध कुछ विवरण पढ़ें देखिये विरोधाभास ………
महीने के नामों को तो हम सभी जानते हैं, लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि महीनों के यह नाम कैसे पड़े एवं किसने इनका नामकरण किया। नहीं न! तो जानिए……

जनवरी : रोमन देवता ‘जेनस’ के नाम पर वर्ष के पहले महीने जनवरी का नामकरण हुआ। मान्यता है कि जेनस के दो चेहरे हैं। एक से वह आगे तथा दूसरे से पीछे देखता है। इसी तरह जनवरी के भी दो चेहरे हैं। एक से वह बीते हुए वर्ष को देखता है तथा दूसरे से अगले वर्ष को। जेनस को लैटिन में जैनअरिस कहा गया। जेनस जो बाद में जेनुअरी बना जो हिन्दी में जनवरी हो गया।

फरवरी : इस महीने का संबंध लेटिन के फैबरा से है। इसका अर्थ है ‘शुद्धि की दावत।’ पहले इसी माह में 15 तारीख को लोग शुद्धि की दावत दिया करते थे। कुछ लोग फरवरी नाम का संबंध रोम की एक देवी फेबरुएरिया से भी मानते हैं। जो संतानोत्पत्ति की देवी मानी गई है इसलिए महिलाएं इस महीने इस देवी की पूजा करती थीं ताकि वे प्रसन्न होकर उन्हें संतान होने का आशीर्वाद दें।

मार्च : रोमन देवता ‘मार्स’ के नाम पर मार्च महीने का नामकरण हुआ। रोमन वर्ष का प्रारंभ इसी महीने से होता था। मार्स मार्टिअस का अपभ्रंश है जो आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। सर्दियां समाप्त होने पर लोग शत्रु देश पर आक्रमण करते थे इसलिए इस महीने को मार्च नाम से पुकारा गया।

अप्रैल : इस महीने की उत्पत्ति लैटिन शब्द ‘एस्पेरायर’ से हुई। इसका अर्थ है खुलना। रोम में इसी माह कलियां खिलकर फूल बनती थीं अर्थात बसंत का आगमन होता था इसलिए प्रारंभ में इस माह का नाम एप्रिलिस रखा गया। इसके पश्चात वर्ष के केवल दस माह होने के कारण यह बसंत से काफी दूर होता चला गया। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के सही भ्रमण की जानकारी से दुनिया को अवगत कराया तब वर्ष में दो महीने और जोड़कर एप्रिलिस का नाम पुनः सार्थक किया गया।

मई : रोमन देवता मरकरी की माता ‘मइया’ के नाम पर मई नामकरण हुआ। मई का तात्पर्य ‘बड़े-बुजुर्ग रईस’ हैं। मई नाम की उत्पत्ति लैटिन के मेजोरेस से भी मानी जाती है।

जून : इस महीने लोग शादी करके घर बसाते थे। इसलिए परिवार के लिए उपयोग होने वाले लैटिन शब्द जेन्स के आधार पर जून का नामकरण हुआ। एक अन्य मतानुसार जिस प्रकार हमारे यहां इंद्र को देवताओं का स्वामी माना गया है उसी प्रकार रोम में भी सबसे बड़े देवता जीयस हैं एवं उनकी पत्नी का नाम है जूनो। इसी देवी के नाम पर जून का नामकरण हुआ।

जुलाई : राजा जूलियस सीजर का जन्म एवं मृत्यु दोनों जुलाई में हुई। इसलिए इस महीने का नाम जुलाई कर दिया गया।

अगस्त : जूलियस सीजर के भतीजे आगस्टस सीजर ने अपने नाम को अमर बनाने के लिए सेक्सटिलिस का नाम बदलकर अगस्टस कर दिया जो बाद में केवल अगस्त रह गया।

सितंबर : रोम में सितंबर सैप्टेंबर कहा जाता था। सेप्टैंबर में सेप्टै लेटिन शब्द है जिसका अर्थ है सात एवं बर का अर्थ है वां यानी सेप्टैंबर का अर्थ सातवां किन्तु बाद में यह नौवां महीना बन गया।

अक्टूबर : इसे लैटिन ‘आक्ट’ (आठ) के आधार पर अक्टूबर या आठवां कहते थे किंतु दसवां महीना होने पर भी इसका नाम अक्टूबर ही चलता रहा।

नवंबर : नवंबर को लैटिन में पहले ‘नोवेम्बर’ यानी नौवां कहा गया। ग्यारहवां महीना बनने पर भी इसका नाम नहीं बदला एवं इसे नोवेम्बर से नवंबर कहा जाने लगा।

दिसंबर : इसी प्रकार लैटिन डेसेम के आधार पर दिसंबर महीने को डेसेंबर कहा गया। वर्ष का 12वां महीना बनने पर भी इसका नाम नहीं बदला।

Good Bye 2013 Welcome 2014 - kms file

आज साल के आखिरी महीने का आखिरी दिन … लेकिन सब उदास होने के बदले खुश होते हैं ,क्यूँ कि कल से एक नई शुरुआत होगी …..


Happy New Year 2014-kms file

 

 

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Weight loss tips in hindi !!

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वजन घटाने के उपाय।

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वजन घटाने के उपाय।

मोटापा वैसे तो किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन महिलाओं में यह ज्‍यादा देखने को मिलता है। जानकारी के अनुसार मोटापा, न केवल गलत खान-पान की आदत से होता है, बल्कि मासिक धर्म की अनियमितता से भी होता है। आज हम इसी बात पर चर्चा करेगें कि महिलाओं में मोटापा बढ़ने का क्‍या कारण है और इसको किस विधि से कम किया जा सकता है। अगर आप भी महिला हैं, और बढ़ते वजन से परेशान हैं।

किस-किस जगह आता है मोटापा।

जांघे- थाई का स्‍थान सबसे पहले बढ़ता है, क्‍योंकि जो मासिक धर्म में अवरोध होता है खुल कर नहीं आ पाता है, तो जांघे मोटी होने लगती हैं और इतनी मोटी हो जाती हैं कि चलने फिरने में भी परेशानी आने लगती है।

पेट- पेट का बढ़ना आमतौर पर शौच और पीरियड पर ही निर्भर करता है और दर्द भी रहने लगता है। इससे भूख कम हो जाती है और गैस बनने लगती है। साथ ही पेट भारी रहने लगता है।

कमर- लंबे समय तक मोटापा कमर पर ही दिखाई देता है। फिर कमरे जैसा शरीर होने लगता है और बढ़े हुए वजन की वजह से घुटनों पर असर पड़ता है और वह दर्द होने लगता है।

छाती और पीठ- छाती और पीठ पर टाइट कपड़े पहनने से यह बढ़ता है।

मोटापा मिटाने का मूल मंत्र ।

इनपुट कम आउटपुट ज्‍यादा- इनपुट कम करें, आउटपुट बढ़ाएं यानी खाने में ऐसे पदार्थों का इस्‍मेमाल करें, जो आउटपुट बढ़ाते हैं। फल निष्‍कासन को तेज करते हैं जैसे नींबू पानी, गर्म पानी, छाछ, गुनगुना आंवला रस या कोई फल जैसे पपीता, अंगूर, अनार, संतरा, मौसमी आम या सब्‍जियां लौकी, पत्‍तागोभी, फूलगोभी और बैगन का प्रयोग करें।

योग- मोटापे को कम करने के लिए जितना मददगार योग होता है, उतना मददगार घूमना नहीं होता। योग में चक्‍की संचालन, साइकलिंग, धनुरासन और अश्‍वासन मुख्‍य है।

मसाज- मसाज पूरे शरीर के खून को सर्कुलेट करने में मदद करती है। इसके साथ ही मसाज मोटापे को कम करने का भी काम आसान करती है।

सूर्य स्‍नान- इससे जमा हुआ फैट बाहर निकलता है, कैल्शियम डी-1, डी-2, डी-3 की पूर्ती करता है। इसलिए 30 से 50 मिनट सूर्य स्‍नाना करना चाहिये। यह मोटापा कम करता है।

मोटापा बढ़ाने वाला तत्‍व- केला, अरबी, भिंडी, मैदा, मिठाइयां, सॉस, लंबे समय तक बैठना, दिन में सोना और बार बार खाना अधिक मोटापा बढ़ाता है। गरिष्‍ट और भारी भोजन शरीर में लंबे समय तक रुकता है।

क्‍या करें-

1. दिनभर गर्म पानी पीने की उपेक्षा सूर्य की रोशनी में रखा हुआ पानी पीना फायदेमंद है।

2. नीबू को बार-बार गर्म पानी में डाल कर न पिंए, सादे पानी से लें। गर्म पानी से कभी कभी ले सकते हैं पर इससे कमजोरी आने लगती है।

3. चाय के साथ नमकीन, ब्रेड और बिस्‍कुट नहीं लेना चाहिये। सिंपल चाय पिंए और चाय पीने के 10 मिनट बाद पानी पींए, मोटापा कम होगा।

4. पेट में जमने वाली वस्‍तु जैसे चॉक्‍लेट, टॉफी, ब्रेड, बिस्‍कुट आदी से परहेज करें। इन्‍हें बार-बार नहीं खाएं।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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आधुनिक समाज में महिलाओं का अस्तित्व।

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आधुनिक समाज में नारी का अस्तित्व।

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आम बोलचाल की भाषा में ‘लेडिज फर्स्ट’ एक ऐसा कथन है, जो नारी के लिए सम्मान स्वरूप है। इतिहास साक्षी है, सिन्धुघाटी की सभ्यता हो या पौराणिंक कथाएं हर जगह नारी को श्रेष्ठ कहा गया है।

“यत्र नार्यस्तु पूज्यते, रमन्ते तत्र देवता” वाले भारत देश में आज नारी ने अपनी योग्यता के आधार पर अपनी श्रेष्ठता का परिचय हर क्षेत्र में अंकित किया है। आधुनिक तकनिकों को अपनाते हुए जमीं से आसमान तक का सफर कुशलता से पूरा करने में सलंग्न है। फिर भी मन में ये सवाल उठता है कि क्या वाकई नारी को ‘लेडीज फर्स्ट’ का सम्मान यर्थात में चरितार्थ है या महज औपचारिकता है। अक्सर उन्हे भ्रूणहत्या और दहेज जैसी विषाक्त मानसिकता का शिकार होना पङता है। नारी की बढती प्रगति को भी यदा-कदा पुरूष के खोखले अंह का कोप-भाजन बनना पङता है।

आज की नारी शिक्षित और आत्मनिर्भर है। प्रेमचन्द युग में नारी के प्रति नई चेतना का उदय हुआ। अनेक शताब्दियों के पश्चात राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त ने नारी का अमुल्य महत्व पहचाना और प्रसाद जी ने उसे मातृशक्ति के आसन पर आसीन किया जो उसका प्राकृतिक अधिकार था। आजादी के बाद से नारी के हित में कई कानून बनाये गये। नारी को लाभान्वित करने के लिए नित नई योजनाओं का आगाज भी हो रहा है। बजट 2013-14 में तो महिलाओं के लिए ऐसे बैंक की नीव रखी गई जहाँ सभी कार्यकर्ता महिलाएं हैं। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कठोर से कठोर कानून भी बनाये गये हैं। इसके बावजूद समाज के कुछ हिस्से को दंड का भी खौफ नही है और नारी की पहचान को कुंठित मानसिकता का ग्रहंण लग जाता है। “नारी तुम श्रद्धा हो” वाले देश में उसका अस्तित्व तार-तार हो जाता है।

आधुनिकता की दुहाई देने वाली व्यवस्था में फिल्म हो या प्रचार उसे केवल उपभोग की वस्तु बना दिया गया है। लेडीज फर्स्ट जैसा आदर सूचक शब्द वास्तविकता में तभी सत्य सिद्ध होगा जब सब अपनी सोच को सकारात्मक बनाएंगे। आधुनिकता की इस अंधी दौङ में नारी को भी अबला नही सबला बनकर इतना सशक्त बनना है कि बाजारवाद का खुलापन उसका उपयोग न कर सके। नारी को भी अपनी शालीनता की रक्षा स्वयं करनी चाहिए तभी समाज में नारी की गरिमा को सम्पूर्णता मिलेगी और स्वामी विवेकानंद जी के विचार साकार होंगे।
विवेकानंद जी ने कहा था कि- “जब तक स्त्रियों की दशा सुधारी नही जायेगी तब तक संसार में समृद्धी की कोई संभावना नही है। पंक्षी एक पंख से कभी नही उङ पाता।”

इस उम्मीद के साथ कलम को विराम देते हैं कि, आने वाला पल नारी के लिए निर्भय और स्वछन्द वातावरण का निर्माण करेगा, जहाँ आधुनिकाता के परिवेश में वैचारिक समानता होगी। नारी के प्रति सोच में सम्मान होगा और सुमित्रानन्दन पंत की पंक्तियाँ साकार होंगी—

मुक्त करो नारी को मानव, चिर वन्दिनी नारी को।
युग-युग की निर्मम कारा से, जननी सखि प्यारी को।।

अनीता शर्मा जी।

Anita Sharma

अनीता शर्मा जी।

 

Post inspired by रौशन सवेरा,

We are grateful to Mrs. अनीता शर्मा जी।

 

एक अपील

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

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About The Author: KMSRAJ51
Krishna Mohan Singh(kmsraj51) is the CEO and Founder of https://kmsraj51.com/. With a long time passion for Entrepreneurship, Self development & Success, KMSRAJ51 started his website with the intention of educating and inspiring like minded people all over the world to always strive for success no matter what their circumstances. Kmsraj51 passion for what he does shows through the continual growth of https://kmsraj51.com/ online community. Follow kmsraj51 on Twitter or keep upto date with him on Facebook:

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गौतम बुद्ध के जीवन और समय का विस्तार।

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गौतम बुद्ध के जीवन और समय का विस्तार।

BUDDHA - KMSRAJ51


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सामान्य व्यक्ति से महापुरुष तक का सफर – महात्मा बुद्ध।

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भारत की पवित्र भूमि पर ऐसे कई महापुरुषों ने जन्म लिया है, जिन्होंने अपने कृत्यों और सिद्धांतों के बल पर मानव जीवन के भीतर छिपे गूढ़ रहस्यों को उजागर किया। इन्हीं में से एक हैं महात्मा बुद्ध।

जिन्होंने सामान्य मनुष्य के रूप में जन्म लेकर अध्यात्म की उस ऊंचाई को छुआ जहां तक पहुंचना किसी आम व्यक्ति के लिए मुमकिन नहीं है। ऐसे महान पुरुष के दिखलाए गए मार्ग को लोगों ने एक धर्म के रूप में ग्रहण किया जिसके परिणामस्वरूप भारत समेत सभी बड़े देशों में बौद्ध धर्म एक प्रमुख धर्म के रूप में स्वीकृत कर लिया गया।

महात्मा बुद्ध का वास्तविक नाम सिद्धार्थ था, किंतु गौतमी द्वारा पाले जाने के कारण उन्हें गौतम भी कहा गया। बुद्धत्व की प्राप्ति के बाद उनके नाम के आगे बुद्ध उपसर्ग जोड़ दिया गया और धीरे-धीरे वे महात्मा बुद्ध के तौर पर प्रख्यात हो गए।

गौतम बुद्ध के आदर्शों और बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए आज का दिन बेहद खास है। मान्यताओं के अनुसार बैसाख मास की पूर्णिमा के दिन महात्मा बुद्ध पृथ्वी पर अवतरित हुए थे, और इसी दिन उन्हें बुद्धत्व के साथ-साथ महापरिनिर्वाण की भी प्राप्ति हुई थी।

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महात्मा बुद्ध का जीवन।

सिद्धार्थ का जन्म शाक्य गणराज्य की राजधानी कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन के घर हुआ था। जन्म के सात दिन के भीतर ही सिद्धार्थ की मां का निधन हो गया था। उनका पालन पोषण शुद्धोधन की दूसरी रानी महाप्रजावती ने किया।

सिद्धार्थ के जन्म के समय ही एक महान साधु नेब यह घोषणा कर दी थी कि यह बच्चा या तो एक महान राजा बनेगा या फिर एक बेहद पवित्र मनुष्य के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा।

इस भविष्यवाणी को सुनकर राजा शुद्धोधन ने अपनी सामर्थ्य की हद तक सिद्धार्थ को दुःख से दूर रखने की कोशिश की। लेकिन छोटी सी आयु में ही सिद्धार्थ जीवन और मृत्यु की सच्चाई को समझ गए।

उन्होंने यह जान लिया कि जिस प्रकार मनुष्य का जन्म लेना एक सच्चाई है उसी प्रकार बुढ़ापा और निधन भी जीवन की कभी ना टलने वाली हकीकत है। संसार की सबसे बड़ी सच्चाई जानने के बाद महात्मा बुद्ध सांसारिक खुशियों और विलासिता भरे जीवन से पूरी तरह विमुख हो गए। राज पाठ के साथ, पत्नी और पुत्र को छोड़कर उन्होंने एक साधु का जीवन अपना लिया।

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बुद्धत्व की प्राप्ति।

दो अन्य ब्राह्मणों के साथ सिद्धार्थ ने अपने भीतर उपज रहे प्रश्नों के हल ढूंढ़ने शुरू किए। लेकिन समुचित ध्यान लगाने और कड़े परिश्रम के बाद भी उन्हें अपने प्रश्नों के हल नहीं मिले। हर बार असफलता हाथ लगने के बाद उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ कठोर तप करने का निर्णय लिया।

छ: वर्षों के कठोर तप के बाद भी वह अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने कठोर तपस्या छोड़कर आर्य अष्टांग मार्ग, जिसे मध्यम मार्ग भी कहां जाता है, ढूंढ़ निकाला।

वह एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए और निश्चय किया कि अपने प्रश्नों के उत्तर जाने बिना वह यहां से उठेंगे नहीं। लगभग 49 दिनों तक ध्यान में रहने के बाद उन्हें सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति हुई और मात्र 35 वर्ष की उम्र में ही वह सिद्धार्थ से महात्मा बुद्ध बन गए।

ज्ञान की प्राप्ति होने के बाद महात्मा बुद्ध दो व्यापारियों, तपुसा और भलिका, से मिले जो उनके पहले अनुयायी भी बने। वाराणसी के समीप स्थित सारनाथ में उन्होंने अपना पहला धर्मोपदेश दिया।

बुद्ध का महापरिनिर्वाण।

बौद्ध धर्म से जुड़े साहित्य के अनुसार 80 वर्ष की आयु में महात्मा बुद्ध ने यह घोषित कर दिया था कि बहुत ही जल्द वह महापरिनिर्वाण की अवस्था में पहुंच जाएंगे। इस कथन के बाद महात्मा बुद्ध ने एक लुहार के हाथ से आखिरी निवाला खाया।

इसके बाद वह बहुत ज्यादा बीमार हो गए। लुहार को लगा कि उसके हाथ से खाने के कारण महात्मा बुद्ध की यह हालत हुई है इसीलिए महात्मा बुद्ध ने अपने एक अनुयायी को कुंडा नामक लुहार को समझाने भेजा। वैद्य ने भी यह प्रमाणित कर दिया था कि उनका निधन वृद्धावस्था के कारण हुआ है ना कि विशाक्त खाद्य के कारण।

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बौद्ध धर्म की मुख्य-शिक्षा।

सम्यक दृष्टि – सम्यक दृष्टि का अर्थ है कि जीवन में हमेशा सुख-दुख आता रहता है हमें अपने नजरिये को सही रखना चाहिए। अगर दुख है तो उसे दूर भी किया जा सकता है।

सम्यक संकल्प – इसका अर्थ है कि जीवन में जो काम करने योग्य है, जिससे दूसरों का भला होता है हमें उसे करने का संकल्प लेना चाहिए और ऐसे काम कभी नहीं करने चाहिए जो अन्य लोगों के लिए हानिकारक साबित हो।

सम्यक वचन – इसका अर्थ यह है कि मनुष्य को अपनी वाणी का सदैव सदुपयोग ही करना चाहिए। असत्य, निंदा और अनावश्यक बातों से बचना चाहिए।

सम्यक कर्मांत – मनुष्य को किसी भी प्राणी के प्रति मन, वचन, कर्म से हिंसक व्यवहार नहीं करना चाहिए। उसे दुराचार और भोग विलास से दूर रहना चाहिए।

सम्यक आजीविका – गलत, अनैतिक या अधार्मिक तरीकों से आजीविका प्राप्त नहीं करना।

सम्यक व्यायाम – बुरी और अनैतिक आदतों को छोडऩे का सच्चे मन से प्रयास करना चाहिए. मनुष्य को सदगुणों को ग्रहण करने के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए।

सम्यक स्मृति – इसका अर्थ यह है कि हमें कभी भी यह नहीं भूलना चाहिए कि सांसारिक जीवन क्षणिक और नाशवान है।

सम्यक समाधि – ध्यान की वह अवस्था जिसमें मन की अस्थिरता, चंचलता, शांत होती है तथा विचारों का अनावश्यक भटकाव रुकता है।

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MERRY CHRISTMAS ALL OF HUMANITY ~ क्रिसमस की हार्दिक बधाई आप सभी को !!


::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
KMS

** ~ MERRY CHRISTMAS ~ **

** “क्रिसमस की हार्दिक बधाई के साथ यही कामना करते हैं कि महान ईशु का आर्शिवाद सभी के लिए हो।” **


kmsraj51 की कलम से …..
pen-kms

** मेरी तरफ से आप सभी को क्रिसमस की और आने वाले नए साल ~ 2014 ~ की हार्दिक बधाई!! **

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MERRY -

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Merry 5

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::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
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Google has installed the country’s first head-eyed daughter ~ देश की पहली बेटी जिसे गूगल ने बिठाया सिर आंखों पर !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
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kmsraj51 की कलम से …..
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** देश की पहली बेटी जिसे गूगल ने बिठाया सिर आंखों पर **

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भले ही कुछ लोगों में बेटियों के प्रति मानसिकता नहीं बदली हो, लेकिन इसमें कोई दोराए नहीं कि बेटियों ने ही देश का नाम रोशन किया है। एक ऐसी ही बेटी है जिन्होंने करिश्मा कर दिखाया है। 15 साल की उम्र में सृष्टि गूगल साइंस फेयर में टॉप-15 में जगह बनाने वाली पहली भारतीय छात्रा हैं। उनकी इस कामयाबी पर ना केवल पूरे देश को नाज है बल्कि इस बेटी ने लड़के और लड़कियों के प्रति भेदभाव रखने वालों को भी करारा जवाब दिया है।

देश में जहां बेटियों के लिए कई लोगों की सोच नहीं बदली वहीं मोहली की इस बेटी ने वो कर दिखाया जिस पर पूरे देश को नाज है। सृष्टि ने गूगल साइंस फेयर-2013 में दुनिया के 15 प्रतिभाशाली छात्रों में शामिल हुईं। ये पहला मौका था जब देश की किसी बेटी ने यह मुकाम हासिल किया।


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एक तकनीक ने हासिल कराया ये मुकाम

पंजाब में मोहाली के मिलेनियम स्कूल की 11वीं कक्षा की छात्रा सृष्टि अस्थाना को भी शायद नहीं पता था कि डिटर्जेंट वॉटर को ग्रीन टेक्नीक से ट्रीट करने का उसका प्रोजेक्ट उसे यह मुकाम दिलाएगा। सृष्टि को इस रिसर्च के बारे में तब ख्याल आया जब वो स्कूल ट्रिप के दौरान लुधियाना के टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज गईं और वहां पर डाई वॉटर से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखा।


वैज्ञानिक बनने का है सपना

वहीं से इंडस्ट्रियल वेस्ट से निकले बेकार डिटर्जेंट वॉटर को इको-फ्रेंडली विकल्प के रूप में बदलने के लिए ग्रीन सॉल्यूशन का विचार शुरू हुआ। पंजाब पुलिस के आईजी एसके अस्थाना की बेटी सृष्टि बड़ी होकर वैज्ञानिक बनना चाहती है।


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एक साल दिन-रात मेहनत करने पर मिली सफलता

सृष्टि ने इस प्रोजेक्ट को चुनौती के तौर पर लिया उसने सैकड़ों रिसर्च पेपर पढ़े, अपने टीचर्स की मदद ली साथ ही कई-कई घंटे लैब में बिताए। करीब एक साल तक दिन-रात मेहनत के बाद आखिरकार उसे अपने प्रोजेक्ट में सफलता मिली। जैसे ही सृष्टि को स्कूल से खबर मिली कि गूगल साइंस फेयर शुरू होने वाला है तो उन्होंने ऑन लाइन फॉर्म जमा कर दिया। इस प्रतियोगिता में 13 से 18 साल तक के स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया।


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अब सपना आईआईटियन बनने का

15 साल की सृष्टि ने अपने पैरेंट्स और टीचर्स के सपोर्ट से इस मुकाम को हासिल किया है। उनके पैर भले ही जमीन पर हैं लेकिन इरादे आसमान पर। सृष्टि ने इससे पहले भी कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं वो पिछले साल एनटीएसई स्कॉलर बनीं तो एक गर्ल चाइल्ड को अडॉप्ट किया। कोचिंग इंस्टीट्यूट से उसे 20 हजार रुपये स्कॉलरशिप मिलती है जिससे वो एक और गर्ल चाइल्ड की पढ़ाई स्पॉन्सर करेगी। सृष्टि की सपना अब आईआईटियन बनने का है। सृष्टि ने आज ना सिर्फ अपने माता-पिता बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है।


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