ठंडे मौसम की गर्म सावधानियां ~ Hot cold weather precautions !!


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** ~ ठंडे मौसम की गर्म सावधानियां ~ **


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=> ठंडे मौसम की गर्म सावधानियां

मौसम अपने तेवर पल-पल बदल रहा है। कभी कड़ी धूप होती है और कभी ठंडी हवा सरसराने लगती है। जब ठंडी हवा चल रही हो तो सबसे पहले यही चिंता सताती है कि कहीं आपकी त्वचा तो खराब नहीं होगी?


यूं तो हर मौसम में चेहरे की देखभाल की जरूरत पड़ती है लेकिन सर्दी के मौसम में खासकर आरंभिक सर्दी में यह मेहनत थोड़ी बढ़ जाती है। केवल प्रोडक्ट इस्तेमाल कर लेने से पूरी देखभाल नहीं होती बल्कि इसके लिए थोड़ी-बहुत सावधानी भी रखनी पड़ती है!!

तो आइए जानते हैं क्या हैं वह सावधानियां और उपाय-


=> इस मौसम में जब भी घर से बाहर निकलें अपनी त्वचा को ठंडी हवाओं के संपर्क में न आने दें। चेहरे और हाथ-पैरों को गर्म कपड़ों से ढंककर रखें।


=> इस मौसम में चेहरे की नमी बनाए रखने के लिए अच्छी कंपनी के मॉइश्चराइजर इस्तेमाल करें। अगर आपकी त्वचा ज्यादा सूखी है तो दिन में दो बार आप इसे लगा सकती हैं। हां, इस बात का ध्यान रखें कि ये मॉइश्चराइजर चेहरे को क्लीनजिंग क्रीम से साफ करने के बाद ही लगाएं।


=> अगर आपकी त्वचा ज्यादा रूखी है तो आपको अतिरिक्त देखभाल करने की जरूरत है। इसके लिए हफ्ते में चार से पांच बार पूरे शरीर का मसाज बादाम के तेल से करें।


=> रोजाना नहाने से पहले पूरे शरीर का मसाज बादाम के तेल या जैतून के तेल से करें इससे नहाने के बाद आपकी त्वचा रूखी नहीं होगी।


=> इस मौसम में पैरों की ऐड़ियां भी फटने लगती हैं ऐसे में सोने से पहले पैरों को गुनगुने पानी में थोड़ी देर डुबोकर रखें। पानी से पैर निकालने के बाद उसे अच्छी तरह पोंछकर लोशन लगाएं।

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स्वस्थ रहने की 10 अच्छी आदतें ~ 10 Good Habits of Healthy Living !!

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* ~ स्वस्थ रहने की 10 अच्छी आदतें ~ *


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* कहीं भी बाहर से घर आने के बाद, किसी बाहरी वस्तु को हाथ लगाने के बाद, खाना बनाने से पहले, खाने से पहले, खाने के बाद और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यदि आपके घर में कोई छोटा बच्चा है तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। उसे हाथ लगाने से पहले अपने हाथ अच्छे से जरूर धोएं।

* घर में सफाई पर खास ध्यान दें, विशेषकर रसोई तथा शौचालयों पर। पानी को कहीं भी इकट्ठा न होने दें। सिंक, वॉश बेसिन आदि जैसी जगहों पर नियमित रूप से सफाई करें तथा फिनाइल, फ्लोर क्लीनर आदि का उपयोग करती रहें। खाने की किसी भी वस्तु को खुला न छोड़ें। कच्चे और पके हुए खाने को अलग-अलग रखें। खाना पकाने तथा खाने के लिए उपयोग में आने वाले बर्तनों, फ्रिज, ओवन आदि को भी साफ रखें। कभी भी गीले बर्तनों को रैक में नहीं रखें, न ही बिना सूखे डिब्बों आदि के ढक्कन लगाकर रखें।

* ताजी सब्जियों-फलों का प्रयोग करें। उपयोग में आने वाले मसाले, अनाजों तथा अन्य सामग्री का भंडारण भी सही तरीके से करें तथा एक्सपायरी डेट वाली वस्तुओं पर तारीख देखने का ध्यान रखें।

* बहुत ज्यादा तेल, मसालों से बने, बैक्ड तथा गरिष्ठ भोजन का उपयोग न करें। खाने को सही तापमान पर पकाएं और ज्यादा पकाकर सब्जियों आदि के पौष्टिक तत्व नष्ट न करें। साथ ही ओवन का प्रयोग करते समय तापमान का खास ध्यान रखें। भोज्य पदार्थों को हमेशा ढंककर रखें और ताजा भोजन खाएं।

* खाने में सलाद, दही, दूध, दलिया, हरी सब्जियों, साबुत दाल-अनाज आदि का प्रयोग अवश्य करें। कोशिश करें कि आपकी प्लेट में ‘वैरायटी ऑफ फूड’ शामिल हो। खाना पकाने तथा पीने के लिए साफ पानी का उपयोग करें। सब्जियों तथा फलों को अच्छी तरह धोकर प्रयोग में लाएं।

* खाना पकाने के लिए अनसैचुरेटेड वेजिटेबल ऑइल (जैसे सोयाबीन, सनफ्लॉवर, मक्का या ऑलिव ऑइल) के प्रयोग को प्राथमिकता दें। खाने में शकर तथा नमक दोनों की मात्रा का प्रयोग कम से कम करें। जंकफूड, सॉफ्ट ड्रिंक तथा आर्टिफिशियल शकर से बने ज्यूस आदि का उपयोग न करें। कोशिश करें कि रात का खाना आठ बजे तक हो और यह भोजन हल्का-फुल्का हो।

* अपने विश्राम करने या सोने के कमरे को साफ-सुथरा, हवादार और खुला-खुला रखें। चादरें, तकियों के गिलाफ तथा पर्दों को बदलती रहें तथा मैट्रेस या गद्दों को भी समय-समय पर धूप दिखाकर झटकारें।

* मेडिटेशन, योगा या ध्यान का प्रयोग एकाग्रता बढ़ाने तथा तनाव से दूर रहने के लिए करें।

* कोई भी एक व्यायाम रोज जरूर करें। इसके लिए रोजाना कम से कम आधा घंटा दें और व्यायाम के तरीके बदलते रहें, जैसे कभी एयरोबिक्स करें तो कभी सिर्फ तेज चलें। अगर किसी भी चीज के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे तो दफ्तर या घर की सीढ़ियां चढ़ने और तेज चलने का लक्ष्य रखें। कोशिश करें कि दफ्तर में भी आपको बहुत देर तक एक ही पोजीशन में न बैठा रहना पड़े।

* 45 की उम्र के बाद अपना रूटीन चेकअप करवाते रहें और यदि डॉक्टर आपको कोई औषधि देता है तो उसे नियमित लें। प्रकृति के करीब रहने का समय जरूर निकालें। बच्चों के साथ खेलें, अपने पालतू जानवर के साथ दौड़ें और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मनोरंजन का भी समय निकालें।


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तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा / कुमार विश्वास ~ Could never give you love / Kumar Vishwas !!

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** ~ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा / कुमार विश्वास ~ **

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ओ कल्पव्रक्ष की सोनजुही!
ओ अमलताश की अमलकली!
धरती के आतप से जलते…
मन पर छाई निर्मल बदली…
मैं तुमको मधुसदगन्ध युक्त संसार नहीं दे पाऊँगा|
तुम मुझको करना माफ तुम्हें मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा||

तुम कल्पव्रक्ष का फूल और
मैं धरती का अदना गायक
तुम जीवन के उपभोग योग्य
मैं नहीं स्वयं अपने लायक
तुम नहीं अधूरी गजल शुभे
तुम शाम गान सी पावन हो
हिम शिखरों पर सहसा कौंधी
बिजुरी सी तुम मनभावन हो.
इसलिये व्यर्थ शब्दों वाला व्यापार नहीं दे पाऊँगा|
तुम मुझको करना माफ तुम्हें मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा||

तुम जिस शय्या पर शयन करो
वह क्षीर सिन्धु सी पावन हो
जिस आँगन की हो मौलश्री
वह आँगन क्या वृन्दावन हो
जिन अधरों का चुम्बन पाओ
वे अधर नहीं गंगातट हों
जिसकी छाया बन साथ रहो
वह व्यक्ति नहीं वंशीवट हो
पर मैं वट जैसा सघन छाँह विस्तार नहीं दे पाऊँगा|
तुम मुझको करना माफ तुम्हें मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा||

मै तुमको चाँद सितारों का
सौंपू उपहार भला कैसे
मैं यायावर बंजारा साधू
सुर श्रृंगार भला कैसे
मैन जीवन के प्रश्नों से नाता तोड तुम्हारे साथ शुभे
बारूद बिछी धरती पर कर लूँ
दो पल प्यार भला कैसे
इसलिये विवश हर आँसू को सत्कार नहीं दे पाऊँगा|
तुम मुझको करना माफ तुम्हें मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा||

Post Inspired by Kumar Vishwas.
Lots of thanks to Mr.Kumar Vishwas
http://www.kumarvishwas.com/

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DOUBLE WHAMMY – A DAVIS WAY MYSTERY, GRETCHEN ARCHER

SERENDIPITY

Dble Whammy-NK-03

Double Dip, the second Davis Way mystery by Gretchen Archer is due for publication in January 28, 2014. Today seems a perfect time to take another look at Double Whammy.

Davis Way used to be a cop in Pine Apple, Alabama. Her name sounds like a road and the name of the town looks misspelled, but really, that’s her name and Pine Apple is indeed the town from which she hails. She used to be married. To Eddie. Twice. It didn’t work out the first time and it’s hard to figure why she married him a second time.

doubleWhammy

In the course of the second divorce from her first-and-second husband — she refers to him as her ex-ex — Davis and Eddie behaved badly. Badly enough to get her fired from the force by her father and for 2-way retraining orders to get slapped on Davis and her ex-ex. The…

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Rex, the ARM-Powered Robot board

Hackaday

REX

There are a million tutorials out there for building a robot with an Arduino or Raspberry Pi, but they all suffer from the same problem: neither the ‘duino nor the Raspi are fully integrated solutions that put all the hardware – battery connectors, I/O ports, and everything else on the same board. That’s the problem Rex, an ARM-powered robot controller, solves.

The specs for Rex include a 1GHz ARM Cortex-A8 with a Video SoC and DSP core, 512 MB of RAM, USB host port, support for a camera module, and 3.5mm jacks for stereo in and out. On top of that, there’s I2C expansion ports for a servo adapter and an input and output for a 6-12 V battery. Basically, the Rex is something akin to the Beaglebone Black with the hardware optimized for a robotic control system.

Because shipping an ARM board without any software would be rather…

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मिसाइल मैन- डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

मिसाइल मैन- डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम। 

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Dr. APJ Abdul Kalam


 

Name – Avul Pakir Jainulabdeen Abdul Kalam /  ऐ पी जे अब्दुल कलाम।

Born-Died – 15 October 1931 – 27th July 2015

Nationality – Indian

Field – Science and Technology

Achievement – Popularly known as Missile Man of India, Ex President of India, Bharat Ratna.

एक बेहद गरीब परिवार से होने के बावजूद अपनी मेहनत और समर्पण के बल पर बड़े से बड़े सपनो को साकार करने का एक जीता-जागता प्रमाण हैं अब्दुल कलाम।


 

मिसाइल मैन – डॉ॰ ए.पी.जे.अब्दुल कलाम। (Dr. A P J Abdul Kalam)
जन्मदिन15 अक्टूबर 1931 मृत्यु – 27th July 2015


“सपने वे नहीं होते जो आपको रात में सोते समय नींद में आए लेकिन सपने वे होते हैं जो रात में सोने न दें।”

ऐसी बुलंद सोच रखने वाले मिसाइल मैन अवुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम (डॉ॰ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम) ने जब देश के सर्वोच्च पद यानी 11वें राष्ट्रपति की शपथ ली तो देश के हर वैज्ञानिक का सर फक्र से ऊंचा हो गया।

मिसाइल मैन के नाम से जाने जाने वाले डॉ॰ ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भारतीय मिसाइल प्रोग्राम के जनक कहे जाते हैं।


 

जीवन सफर …..

“एक महान विचारक, विद्वान, विज्ञानविद और उच्च कोटी के मनुष्य, भारत के 11वें राषट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, एक ख्याती प्राप्त वैज्ञानिक इंजीनियर जिन्होने भारत को उन्नत देशों के समूह में सबसे आगे लाने के लिये प्रक्षेपण यानो तथा मिसाइल प्रऔद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।”

🌼 डॉ॰ कलाम का बचपन 🌼


आसमान की ऊंचाइयों को छूने के लिए हवाई जहाज और अन्य साधनों से भी जरूरी चीज है हौसला। हौसला आपकी सोच को वह उड़ान देता है जिसका शिखर कामयाबी की चोटी पर है। कामयाबी के शिखर तक पहुंचने की आपने यूं तो हजारों कहानियां पढ़ी होंगी लेकिन ऐसी ही एक जीती जागती कहानी हैं पूर्व राष्ट्रपति डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम की।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति जिन्हें दुनिया मिसाइलमैन के नाम से भी जानती है। इनका जन्म 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गाँव (रामेश्वरम, तमिलनाडु) में एक मध्यमवर्ग मुस्लिम परिवार में हुआ। इनके पिता जैनुलाब्दीन न तो ज़्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे। इनके पिता मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे। अब्दुल कलाम सयुंक्त परिवार में रहते थे। परिवार की सदस्य संख्या का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि यह स्वयं पाँच भाई एवं पाँच बहन थे और घर में तीन परिवार रहा करते थे। अब्दुल कलाम के जीवन पर इनके पिता का बहुत प्रभाव रहा। वे भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उनकी लगन और उनके दिए संस्कार अब्दुल कलाम के बहुत काम आए।

पाँच वर्ष की अवस्था में रामेश्वरम के पंचायत प्राथमिक विद्यालय में उनका दीक्षा-संस्कार हुआ था। उनके शिक्षक इयादुराई सोलोमन ने उनसे कहा था कि जीवन मे सफलता तथा अनुकूल परिणाम प्राप्त करने के लिए तीव्र इच्छा, आस्था, अपेक्षा इन तीन शक्तियो को भलीभाँति समझ लेना और उन पर प्रभुत्व स्थापित करना चाहिए।

 ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का पूरा नाम डॉक्टर अबुल पाकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम है।

कलाम अपने परिवार में काफी लाडले थे, लेकिन उनका परिवार छोटी-बड़ी मुश्किलों से हमेशा ही जूझता रहता था। उन्हें बचपन में ही अपनी जिम्मेदारियों का एहसास हो गया था। उस वक्त उनके घर में बिजली नहीं हुआ करती थी और वह केरोसिन तेल का दीपक जलाकर पढ़ाई किया करते थे।

अब्दुल कलाम मदरसे में पढ़ने के बाद सुबह रामेश्वरम के रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर जाकर समाचार पत्र एकत्र करते थे। अब्दुल कलाम अखबार लेने के बाद रामेश्वरम शहर की सड़कों पर दौड़-दौड़कर सबसे पहले उसका वितरण करते थे। बचपन में ही आत्मनिर्भर बनने की तरफ उनका यह पहला कदम रहा।


🌼 डॉ॰ कलाम की शिक्षा। 🌼

डॉ॰ कलाम जब मात्र 19 वर्ष के थे, तब द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका को भी महसूस किया। युद्ध की आग रामेश्वरम के द्वार तक पहुंच गई थी। इन परिस्थितियों में भोजन सहित सभी आवश्यक वस्तुओं का अभाव हो गया था। कलाम एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी में आए, तो इसके पीछे उनके पांचवीं कक्षा के अध्यापक सुब्रह्मण्यम अय्यर की प्रेरणा जरूर थी।

अध्यापक की बातों ने उन्हें जीवन के लिए एक मंजिल और उद्देश्य भी प्रदान किया। अभियांत्रिकी की शिक्षा के लिए उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में दाखिला लिया। वहां इन्होंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में अध्ययन किया।

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डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम।

🌼 मिसाइल क्रांति की तरफ कदम। 🌼

1962 में वे ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ में आए। डॉक्टर अब्दुल कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल है। अब्दुल कलाम भारत के मिसाइल कार्यक्रम के जनक माने जाते हैं।

उन्होंने 20 साल तक भारतीय अंतरिक्ष शोध संगठन यानी इसरो में काम किया और करीब इतने ही साल तक रक्षा शोध और विकास संगठन यानी डीआरडीओ में भी। वे 10 साल तक डीआरडीओ के अध्यक्ष रहे। साथ ही उन्होंने रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार की भूमिका भी निभाई। इन्होंने अग्नि एवं पृथ्वी जैसी मिसाइल्स को स्वदेशी तकनीक से बनाया था।

🌼 राष्ट्रपति का सफर। 🌼

18 जुलाई, 2002 को कलाम भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे। इन्हें भारतीय जनता पार्टी समर्थित एनडीए घटक दलों ने अपना उम्मीदवार बनाया था, जिसका वामदलों के अलावा समस्त दलों ने समर्थन किया। 25 जुलाई 2002 उन्होंने संसद भवन के अशोक कक्ष में राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। 25 जुलाई 2007 को उनका कार्यकाल समाप्त हो गया।

🌼 डॉ॰ ए.पी.जे अब्दुल कलाम को दिए गए सम्मान। 🌼

🌼  ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को विज्ञान के क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत के नागरिक सम्मान के रूप में 1981 में पद्म भूषण, 1990 में पद्म विभूषण दिया गया।

🌼 इन्हें 1997 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।

डॉक्टर कलाम के 79 वें जन्मदिन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाया गया था। इसके आलावा उन्हें लगभग चालीस विश्वविद्यालयों द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधियाँ प्रदान की गयी थीं। भारत सरकार द्वारा उन्हें 1981 में पद्म भूषण और 1990 में पद्म विभूषण का सम्मान प्रदान किया गया जो उनके द्वारा इसरो और डी आर डी ओ में कार्यों के दौरान वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिये तथा भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार के रूप में कार्य हेतु प्रदान किया गया था।

1997 में कलाम साहब को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया जो उनके वैज्ञानिक अनुसंधानों और भारत में तकनीकी के विकास में अभूतपूर्व योगदान हेतु दिया गया था।

वर्ष 2005 में स्विट्ज़रलैंड की सरकार ने डॉक्टर कलाम के स्विट्ज़रलैंड आगमन के उपलक्ष्य में 26 मई को विज्ञान दिवस घोषित किया।नेशनल स्पेस सोशायटी ने वर्ष 2013 में उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान सम्बंधित परियोजनाओं के कुशल संचलन और प्रबंधन के लिये वॉन ब्राउन अवार्ड से पुरस्कृत किया।

सम्मान का वर्ष सम्मान/पुरस्कार का नाम प्रदाता संस्था
2014 डॉक्टर ऑफ़ साइन्स एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, यूनाइटेड किंगडम
2012 डॉक्टर ऑफ़ लॉज़ (मानद उपाधि) साइमन फ़्रेज़र विश्वविद्यालय
2011 आइ॰ई॰ई॰ई॰ मानद सदस्यता आइ॰ई॰ई॰ई॰
2010 डॉक्टर ऑफ इन्जीनियरिंग यूनिवर्सिटी ऑफ़ वाटरलू
2009 मानद डॉक्टरेट ऑकलैंड विश्वविद्यालय
2009 हूवर मेडल ए॰एस॰एम॰ई॰ फाउण्डेशन, (सं॰रा॰अमे॰)
2009 वॉन कार्मन विंग्स अन्तर्राष्ट्रीय अवार्ड कैलीफ़ोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, (सं॰रा॰अमे॰)
2008 डॉक्टर ऑफ इन्जीनियरिंग (मानद उपाधि) नानयांग टेक्नोलॉजिकल विश्वविद्यालय, सिंगापुर
2008 डॉक्टर ऑफ साइन्स (मानद उपाधि) अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़
2007 डॉक्टर ऑफ साइन्स एण्ड टेक्नोलॉजी की मानद उपाधि कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय
2007 किंग चार्ल्स II मेडल रॉयल सोसायटी, यूनाइटेड किंगडम
2007 डॉक्टर ऑफ साइन्स की मानद उपाधि वूल्वरहैंप्टन विश्वविद्यालय, यूनाईटेड किंगडम
2000 रामानुजन पुरस्कार अल्वार्स शोध संस्थान, चेन्नई
1998 वीर सावरकर पुरस्कार भारत सरकार
1997 इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय एकता पुरस्कार भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस
1997 भारत रत्न भारत सरकार
1994 विशिष्ट शोधार्थी इंस्टीट्यूट ऑफ़ डायरेक्टर्स (इण्डिया)
1990 पद्म विभूषण भारत सरकार
1981 पद्म भूषण भारत सरकार

🌼 डॉ॰ ए.पी.जे अब्दुल कलाम के बारे में कुछ और खास बातें। 🌼 

🌼 1) डॉक्टर अब्दुल कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल है।

🌼 2जुलाई 1980 में इन्होंने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था।

🌼 3ए.पी.जे अब्दुल कलाम ने पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर विस्फोट भी परमाणु ऊर्जा के साथ मिलाकर किया। इस तरह भारत ने परमाणु हथियार के निर्माण की क्षमता प्राप्त करने में सफलता अर्जित की।

🌼 4इसके अलावा डॉक्टर कलाम ने भारत के विकास स्तर को 2020 तक विज्ञान के क्षेत्र में अत्याधुनिक करने के लिए एक विशिष्ट सोच भी प्रदान की।

🌼 5) कलाम ऐसे तीसरे राष्ट्रपति हैं जिन्हें भारत रत्न का सम्मान राष्ट्रपति बनने से पूर्व ही प्राप्त हुआ है, अन्य दो राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन और डॉक्टर जाकिर हुसैन हैं।

🌼 6) यह प्रथम वैज्ञानिक हैं जो राष्ट्रपति बने हैं और प्रथम राष्ट्रपति भी हैं जो अविवाहित हैं।

🌼 7) इसके अतिरिक्त कलाम ही ऐसे एकमात्र व्यक्ति हैं जो राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के बाद अभी जीवित हैं। इनके पूर्व के सभी राष्ट्रपति अब इस संसार में नहीं हैं।

🌼 8) एक राष्ट्रपति के अलावा वह एक आम इन्सान के तौर पर वह युवाओं की पहली पसंद और प्रेरक हैं। उनके बातें, उनका व्यक्तित्व, उनकी पहचान न केवल एक राष्ट्रपति के रूप में हैं बल्कि जब भी लोग खुद को कमजोर महसूस करते हैं कलाम का नाम ही उनके लिए प्रेरणा बन जाता है।

🌼 किताबें। 🌼

डॉक्टर कलाम ने साहित्यिक रूप से भी अपने विचारों को चार पुस्तकों में समाहित किया है, जो इस प्रकार हैं: ‘इण्डिया 2020 ए विज़न फ़ॉर द न्यू मिलेनियम’, ‘माई जर्नी’ तथा ‘इग्नाटिड माइंड्स- अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया’। इन पुस्तकों का कई भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। इस प्रकार यह भारत के एक विशिष्ट वैज्ञानिक थे, जिन्हें 40 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों से डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्राप्त हो चुकी है।

इंडिया 2020 : अ विज़न फॉर द न्यू मिलेमियम (English : India 2020 : A vision for the New Millenium) भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति ए॰पी॰जे॰ अब्दुल कलाम द्वारा लिखित एक किताब है। यह उन्होंने अपने राष्ट्रपति के कार्यकाल से पहले लिखी थी।

विंग्स आफ फायर : एन आटोबायोग्राफी आफ एपीजे अब्दुल कलाम (१९९९), भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की आत्मकथा है। इसके सह-लेखक अरुण तिवारी हैं। इसमें अब्दुल कलाम के बचपन से लेकर लगभग १९९९ तक के जीवन सफर के बारे में बताया गया है। मूल रुप में अंग्रेजी में प्रकाशित यह किताब, विश्व की १३ भाषाओ में अनूदित हो चुकी है। जिसमे भारत की प्रमुख भाषाएँ हिंदी, गुजराती, तेलगु, तमिल, मराठी, मलयालम के साथ-साथ कोरियन, चीनी और ब्रेल लिपि भी शामिल है।


 

डॉ. कलाम के दर्शन सिद्धान्त बेहद प्रभावशाली हैं।

🌼 मिसाइल मैन- डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम के ११ अनमोल वचन। 🌼

🌼 1) जो लोग जिम्मेदार, सरल, ईमानदार एवं मेहनती होते हैं, उन्हे ईश्वर द्वारा विशेष सम्मान मिलता है। क्योंकि वे इस धरती पर उसकी श्रेष्ठ रचना हैं।

🌼 2) किसी के जीवन में उजाला लाओ।

🌼 3) दूसरों का आर्शिवाद प्राप्त करो, माता-पिता की सेवा करो, बङों तथा शिक्षकों का आदर करो, और अपने देश से प्रेम करो इनके बिना जीवन अर्थहीन है।

🌼 4) देना सबसे उच्च एवं श्रेष्ठ गुणं है, परन्तु उसे पूर्णता देने के लिये उसके साथ क्षमा भी होनी चाहिये।

🌼 5) कम से कम दो गरीब बच्चों को आत्मर्निभर बनाने के लिये उनकी शिक्षा में मदद करो।

🌼 6) सरलता और परिश्रम का मार्ग अपनाओ, जो सफलता का एक मात्र रास्ता है।

🌼 7) प्रकृति से सिखो जहाँ सब कुछ छिपा है।

🌼 8) हमें मुस्कराहट का परिधान जरूर पहनना चाहिये तथा उसे सुरक्षित रखने के लिये हमारी आत्मा को गुणों का परिधान पहनाना चाहिये।

🌼 9) समय, धैर्य तथा प्रकृति, सभी प्रकार की पिङाओं को दूर करने और सभी प्रकार के जख्मो को भरने वाले बेहतर चिकित्सक हैं।

🌼 10) अपने जीवन में उच्चतम एवं श्रेष्ठ लक्ष्य रखो और उसे प्राप्त करो।

🌼 11) प्रत्येक क्षण रचनात्मकता का क्षण है, उसे व्यर्थ मत करो।

अब्दुल कलाम, सादा जीवन, उच्च विचार तथा कङी मेहनत के उद्देश्य को मानने वाले वो महापुरूष हैं जिन्होने सभी उद्देशों को अपने जीवन में निरंतर जीया भी है। उनका कहना है कि –

“सपने देखना बेहद जरूरी है, लेकिन सपने देखकर ही उसे हासिल नही किया जा सकता। सबसे ज्यादा जरूरी है जिन्दगी में खुद के लिये कोई लक्ष्य तय करना।”

मित्रों, हम सब अगर उपरोक्त बात को समझें और जीवन में उतारें तो अपने – अपने लक्ष्य में सफल हो सकते हैं। इसी विश्वास के साथ कलम को विराम देते हैं।

 

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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सकारात्मक सोच का जादू।

Kmsraj51 की कलम से…..

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सकारात्मक सोच का जादू 

सकारात्मक सोच का जादू

सकारात्मक सोच का जादू

एक ऋषि के दो शिष्य थे। जिनमें से एक शिष्य सकारात्मक सोच वाला था वह हमेशा दूसरों की भलाई का सोचता था और दूसरा बहुत नकारात्मक सोच रखता था और स्वभाव से बहुत क्रोधी भी था। एक दिन महात्मा जी अपने दोनों शिष्यों की परीक्षा लेने के लिए उनको जंगल में ले गये।
जंगल में एक आम का पेड़ था जिस पर बहुत सारे खट्टे और मीठे आम लटके हुए थे। ऋषि ने पेड़ की ओर देखा और शिष्यों से कहा की इस पेड़ को ध्यान से देखो।फिर उन्होंने पहले शिष्य से पूछा की तुम्हें क्या दिखाई देता है।

शिष्य ने कहा कि ये पेड़ बहुत ही विनम्र है लोग इसको पत्थर मारते हैं फिर भी ये बिना कुछ कहे फल देता है। इसी तरह इंसान को भी होना चाहिए, कितनी भी परेशानी हो विनम्रता और त्याग की भावना नहीं छोड़नी चाहिए। फिर दूसरे शिष्या से पूछा कि तुम क्या देखते हो, उसने क्रोधित होते हुए कहा की ये पेड़ बहुत धूर्त है बिना पत्थर मारे ये कभी फल नहीं देता इससे फल लेने के लिए इसे मारना ही पड़ेगा।

इसी तरह मनुष्य को भी अपने मतलब की चीज़ें दूसरों से छीन लेनी चाहिए। गुरु जी हँसते हुए पहले शिष्य की बढ़ाई की और दूसरे शिष्य से भी उससे सीख लेने के लिए कहा। सकारात्मक सोच हमारे जीवन पर बहुत गहरा असर डालती है। नकारात्मक सोच के व्यक्ति अच्छी चीज़ों मे भी बुराई ही ढूंढते हैं।

उदाहरण के लिए:- गुलाब के फूल को काँटों से घिरा देखकर नकारात्मक सोच वाला व्यक्ति सोचता है की “इस फूल की इतनी खूबसूरती का क्या फ़ायदा इतना सुंदर होने पर भी ये काँटों से घिरा है ” जबकि उसी फूल को देखकर सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति बोलता है की “वाह! प्रकर्ती का कितना सुंदर कार्य है की इतने काँटों के बीच भी इतना सुंदर फूल खिला दिया” बात एक ही है लेकिन फ़र्क है केवल सोच का।

तो मित्रों, अपनी सोच को सकारात्मक और बड़ा बनाइए तभी हम अपने जीवन में कुछ कर सकते हैं।

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