वादा खुद से कर के निकले हैं – हिन्दी कविता

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वादा खुद से कर के निकले हैं
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वादा खुद से कर के निकले हैं
अब कदम रुक सकते नहीं
लक्ष्य हासिल किये बिना
थक के बैठ सकते नहीं!

विपत्ति का सामना जो हंस के कर पायेगा
जग में उसी का नाम रह जाएगा
तपने उपरान्त सोने की पहचान बनती है
सतत परिश्रम ही इंसान बनाती है!!

हार के जो बैठ गए घर में
उनका खुद भी साथ नहीं देता है
हिम्मत कर के जो उतरते हैं सागर में
ख़ुदा खुद ही उसे तिनके का सहारा देता है!!!

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About The Author: KMSRAJ51
Krishna Mohan Singh (kmsraj51) is the CEO and Founder of https://kmsraj51.wordpress.com/ . With a long time passion for Entrepreneurship, Self development & Success, KMSRAJ51 started his website with the intention of educating and inspiring likeminded people all over the world to always strive for success no matter what their circumstances. Kmsraj51 passion for what he does shows through the continual growth of https://kmsraj51.wordpress.com/ online community. Follow kmsraj51 on Twitter or keep upto date with him on Facebook: https://www.facebook.com/kmsraj51 & also Google+ kmsraj51 (Krishna Mohan Singh).
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चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व

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आज 31 मार्च, 2014 (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा ) से संवत्सर 2071 से नए संवत्सर का उदय होगा। इस नए संवत्सर का नाम `प्लवंग’ है।

समय भागता हुआ वह कालपुरुष है, जिसके सिर के पीछे बाल नहीं हैं। इस दृष्टांत का तात्पर्य यह है कि समय को पकड़ पाना संभव नहीं है क्योंकि गतिमान होने के साथ-साथ वह अनंत और असीम है। किंतु हमारे त्रिकालदर्शी ऋषियों ने समय को मापने का भरपूर प्रयत्न किया था। उन्होंने समय की सर्वाधिक सूक्ष्म इकाई (त्रुटि) से लेकर महायुग, कल्प, ब्राह्म वर्ष आदि वृहद इकाईयों में समय की गणना करके काल का निर्धारण किया है। लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व भारतीय ज्योतिषियों ने ऋषि परंपरा के अनुरूप कालगणना की वैज्ञानिक पद्धति का विकास कर लिया था जो आज विश्व के वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणाप्रद है।

चैत्रे मासि जगद् ब्रह्म ससर्ज प्रथमे अहनि, शुक्ल पक्षे समग्रेतु तु सदा सूर्योदयो सति. ब्रह्म पुराण में वर्णित इस श्लोक के अनुसार चैत्र मास के प्रथम सूर्योदय पर ब्रह्म जी ने सृष्टिï की रचना की थी. इसी दिन से विक्रमी संवत की शुरुआत होती है. आज भले ही ग्रेगेरियन कैलेंडर के अनुसार एक जनवरी को मनाया जाने वाला नववर्ष ज्यादा चर्चित हो, लेकिन इससे कहीं पहले से अस्तित्व में आया हिंदू विक्रमी संवत आज भी धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक कार्यों में तिथि व काल की गणना का आधार बना हुआ है. अपनी सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत को याद करते हुए एक नजर नवसंवत्सर पर-

विक्रमी संवत :
ग्रेगेरियन कैलेंडर से अलग देश में कई संवत प्रचलित है. इसमें विक्रम संवत, शक संवत, बौद्घ एवं जैन संवत और तेलुगू संवत प्रमुख है. इन हर एक संवत का अपना एक नया साल होता है. देश में सर्वाधिक प्रचलित विक्रम और शक संवत है.

शुरुआत :
विक्रम संवत को सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को पराजित करने के उपलक्ष्य में 57 ईसा पूर्व शुरू किया था. विक्रम संवत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है. भारतीय पंचांग और काल निर्धारण का आधार विक्रम संवत है.

खूबी:
विक्रमी संवत का संबंध किसी भी धर्म से न होकर सारे विश्व की प्रकृति, खगोल सिद्घांत और ब्रह्मांड के ग्रहों एवं नक्षत्रों से है. इसलिए भारतीय काल गणना पंथ निरपेक्ष होने के साथ सृष्टि की रचना और राष्टर की गौरवशाली परम्पराओं को दर्शाती है. यही नहीं, ब्रह्मांड के सबसे पुरातन ग्रंथ वेदों में भी इसका वर्णन है. नवसंवत यानी संवत्सरों का वर्णन यजुर्वेद के 27वें एवं 30वें अध्याय के मंत्र क्रमांक क्रमश: 45 व 15 मिनट में विस्तार से दिया गया है. विश्व में सौर मंडल के ग्रहों एवं नक्षत्रों के चाल, उनकी निरंतर बदलती स्थिति पर भी हमारे दिन, महीने, साल और उनके सूक्ष्मतम भाग आधारित होते हैं.

अपना ही श्रेष्ठ :
विक्रम संवत के वैज्ञानिक आधार के कारण ही पश्चिमी देशों की संस्कृति के अंधानुकरण के बावजूद आज भी हम किसी भी शुभ लग्न चाहे वह बच्चे के जन्म की बात हो, नामकरण की बात हो, गृह प्रवेश या व्यापार करने की बात हो, सभी में हम पंडित के पास जाकर शुभ मुहूर्त पूछते है.

राष्ट्रीय कैलेंडर:
आजादी के बाद नवंबर, 1952 में वैज्ञानिक और औद्योगिक परिषद के द्वारा पंचाग सुधार समिति की स्थापना की गई. समिति ने 1955 में सौंपी अपनी रिपोर्ट में विक्रमी संवत को भी स्वीकार करने की सिफारिश की थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आग्रह पर ग्रेगेरियत कैलेंडर को ही सरकारी कामकाज हेतु उपयुक्त मानकर 22 मार्च, 1957 को इसे राष्टï्रीय कैलेंडर के रूप में स्वीकार किया गया.

चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व :
– चैत्र शुक्लपक्ष प्रतिपदा से एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 113 साल पहले इसी दिन को ब्रह्मा जी ने सृष्टि का सृजन किया था.
– सम्राट विक्रमादित्य ने 2071 साल पहले इसी दिन राज्य स्थापित कर विक्रम संवत की शुरुआत की.
– लंका में राक्षसों का संहार कर अयोध्या लौटे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का राज्याभिषेक इसी दिन किया गया.
– शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात नवरात्र स्थापना का पहला दिन यही है. प्रभु राम के जन्मदिन रामनवमी से पूर्व नौ दिन उत्सव मनाने का प्रथम दिन.
– शालिवाहन संवत्सर का प्रारंभ दिवस. विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु इसी दिन का चयन किया.
– समाज को अच्छे मार्ग पर ले जाने के लिए स्वामी दयानंद सरस्वती ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की.
– सिख परंपरा के द्वितीय गुरु अंगददेव का जन्म दिवस.
– सिंध प्रांत के प्रसिद्घ समाज रक्षक वरुणावतार संत झूलेलाल इसी दिन प्रकट हुए.
– युगाब्द संवत्सर का प्रथम दिन, 5116 वर्ष पूर्व युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी इसी दिन हुआ.
– इसी दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव राव बलीराम हेडगेवार का जन्मदिवस भी है.

प्राकृतिक महत्व :
– वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है, जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चहुं ओर पुष्पों की सुगंध से भरी होती है.
– फसल पकने का प्रारंभ यानी किसान की मेहनत का फल मिलने का समय भी यही होता है.
– नक्षत्र शुभ स्थिति में होते है. यानी किसी भी कार्य प्रारंभ करने के लिए शुभ मुहूर्त होता है.

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Post Inspired by :: Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj
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Bal Krishna Ji

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20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य

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दोस्तों आज https://kmsraj51.wordpress.com/ पर मैं आपके साथ कुछ special share करने जा रहा हूँ . Special इसलिए क्योंकि आज मैंने जो article Hindi में translate किया है वो एक ऐसे व्यक्ति द्वारा लिखा गया है जिन्हें मैं अपना on-line गुरु मानता हूँ . उनका नाम है Steve Pavlina. उन्होंने अपने articles से करोड़ों लोगों के जीवन में एक positive बदलाव लाया है . और आज जो article मैं आपसे share कर रहा हूँ वो उनके द्वारा लिखे गए सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले articles में से एक है . इसे बड़े धयन से पढ़िए क्योंकि यहाँ से आप जान सकते हैं अपने जीवन का उद्देश्य .

How to Discover Your Life Purpose in About 20 Minutes

लगभग 20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य

आप अपने जीवन का असली उद्देश्य कैसे पता करेंगे ? मैं आपकी job के बारे में बात नहीं कर रहा हूँ , या फिर आपकी रोज़मर्रा की जिम्मेदारियों या आपके long term goals के बारे में भी बात नहीं कर रहा हूँ . मेरा मतलब उस असली वजह से है जिसके लिए आप यहाँ हैं —वो वजह जिसके
लिए आप exist करते हैं .

या शायद आप एक नास्तिक व्यक्ति हैं जो ये सोचता है कि उसके जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है , और ज़िन्दगी का कोई मतलब नहीं है . इससे कोई फरक नहीं पड़ता . इस बात में यकीं रखना की life का कोई purpose नहीं है आपको इसे discover करने से नहीं रोकता , ठीक वैसे ही जैसे गुरुत्वाकर्षण में यकीं नहीं होना आपको घूमने-घामने से नहीं रोक सकता . यकीं ना होने से बस समय थोडा ज्यादा लगेअगा , तो अगर आप इस तरह के व्यक्ति हैं तो इस पोस्ट के Title में जो नंबर है उसे 20 से बढ़ा कर 40 कर दें (या 60 अगर आप सच -मुच जिद्दी हैं ). ज्यादा chance है कि अगर आप ये believe करते हैं कि आपकी life का कोई purpose नहीं है तो मैं जो कुछ कह रहा हूँ आप उसमे भी believe नहीं करेंगे , पर फिर भी , एक घंटा देने में क्या जाता है , क्या पता कुछ पता ही चल जाये ?

Bruce Lee के बारे में एक छोटी सी कहानी बात कर मैं इस छोटी सी exercise का stage सेट करता हूँ . एक martial artist ने Bruce से कहा कि तुम martial arts के बारे में जो कुछ भी जानते हो मुझे सिखा दो .Bruce ने पानी से भरे दो कप लिए और कहा “ पहला कप martial arts के बारे में जो भी तुम्हारा ज्ञान है उसे दर्शाता है , दूसरा कप martial srts के बारे में मेरे ज्ञान को दर्शाता है . अगर तुम अपना कप मेरे ज्ञान से भरना चाहते हो तो पहले तुम्हे अपने कप का ज्ञान कहली करना होगा .”

यदि आप अपनी ज़िन्दगी का असली मकसद जानना चाहते हैं तो पहले आपको सिखाये गए सभी व्यर्थ के मकसदों (including कि आपकी ज़िन्दगी का कोई मकसद ही नहीं है ) को अपने दिमाग से निकलना होगा .

तो आप अपने जीवन का उद्देश्य कैसे पता करेंगे ? वैसे तो यह पता करने के कई तरीके हैं , पर यहाँ मैं आपको एक बहुत ही simple तरीका बताऊंगा जो कोई भी अपना सकता है . आप इस तरीके को जितना ज्यादा accept करंगे , जितना ज्यादा इसके काम करने की अपेक्षा करेंगे यह उतनी ही तेजी से आपके लिए काम करेगा .पर यदि आप इससे ज्यादा उम्मीद ना भी करें , या इसपे कुछ doubt करें , यह सोचें कि ये तो बेवकूफी है , समय की बर्वादी है तो भी यह अप्पके लिए काम करेगा , बस ज़रुरत है कि आप इसके साथ लगे रहिये .—पर हाँ , समय कुछ अधिक लगेगा .

आपको ये करना है :

1) एक blank page ले लीजिये या फिर एक word file खोल लीजिये .

2) Top पर लिखिए , “ मेरी जीवन का असली उद्देश्य क्या है ?”

3) कोई उत्तर लिखिए (कुछ भी ) जो आपके दिमाग में आ रहा हो . पूरा sentence लिखने की ज़रुरत नहीं है . एक छोटा सा phrase काफी है .

4) Step 3 को तब तक repeat कीजिये जब तक की आप कोई ऐसा उत्तर ना लिख लें जिससे आपको रोना आ जाये . यही आपके जीवन का उद्देश्य है .

बस इतना ही . इससे कोई मतलब नहीं है की आप counselor हैं engineer हैं या कोई bodybuilder हैं .कुछ लोगों को ये exercise बिलकुल उपयुक्त लगेगी , कुछ लोगो को कोरी बकवास . Life का purpose क्या है इसको लेकर हमारे मन में जो भी हलचल है और अपनी Social conditioning की वजह से हम जो कुछ भी इस विषय में सोचते हैं उसे clear करने में आम तौर पे 15-20 मिनट लगेंगे.गलत उत्तर आपकी memory और mind से आयेंगे . लेकिन जब आपको सही उत्तर मिल जायेगा , आपको अहसास होगा कि यह उत्तर किसी बिलकुल ही अलग जगह से आ रहा है .

वो लोग जो अपनी जड़े जागरूकता के बिलकुल निचले स्तर पर जमा चुके हैं , उन्हें सभी गलत उत्तर निकालने में काफी वक़्त लगेगा , शायद एक घंटे से भी ज्यादा . लेकिन यदि आप , 100, 200 या 500 उत्तर के बाद भी लगे रहेंगे तो आपको वो उत्तर मिल जायेगा जो आपकी भावनाओं को बढ़ा देगा , जो आपको रुला देगा .यदि आपने पहले कभी ये नहीं किया है तो शायद ये आपको बहुत मूर्खतापूर्ण लगे . लगने दीजिये पर इसे करिए ज़रूर .

आप जैसे -जैसे इस प्रोसेस से गुजरेंगे , आपके कुछ उत्तर बहुत एक जैसे लगेंगे , आप चाहें तो पुराने उत्तर दुबारा भी लिख सकते हैं . आप अचानक एक नयी दिशा में सोच सकते हैं और 10-20 नए उत्तर भी लिख सकते हैं . That’s OK. आपके दिमाग में जो उत्तर आये आप वो लिख सकते हैं बशर्ते आप लिखना चालू रखिये .

इस दौरान एक समय ऐसा भी आएगा ( लगभग 50-100 answers के बाद ) जब आप quit करना चाहें , और आप खुद को उस उत्तर तक पहुचते ना देख प् रहे हों . आप को ऐसा लग सकता है कि आप किसी बहाने से उठ कर कुछ और करने लगें . ये normal है . इस अवरोध को पार कीजिये , और बस लिखते रहिये . अवरोध का अहसास कुछ देर में ख़तम हो जायेगा .

शायद आपको बीच में कुछ ऐसे उत्तर मिलें जो आपको थोडा emotional कर दें , पर वो आपको रुला ना पाएं — ऐसे answers को highlight करते हुए आगे बढिए , ताकि बाद में आप इनपर वापस आकर नए संयोग बना सकें . हर एक उत्तर आपके purpose के एक हिस्से को दर्शाता है , पर खुद में वो पूर्ण नहीं है . जब आपको ऐसे उत्तर मिलना शुरू हो जायें तो इसका मतलब है कि आप warm-up हो रहे हैं . बस आगे बढ़ते रहिये .

यह ज़रूरी है कि आप इसे अकेले बिना किसी रूकावट के करिएँ .यदि आप नास्तिक हैं तो आप इस उत्तर से शुरआत कर सकते है कि , “ मेरे जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है ,” या “ जीवन निरर्थक है ,’ और वहां से आगे बढिए , यदि आप लगे रहेंगे तो आपको उत्तर ज़रूर मिलेगा .

जब मैंने यह exercise की तो मुझे लगभग 25 मिनट लगे , और मैं अपने final answer तक 106 वें step में पहुंचा . उत्तर के कुछ parts ( जब मैं थोडा emotional हो गया ) मुझे step no. 17,39 और 53 में मिले .और सबसे ज्यादा step 100-106 में मुझे अपना answer मिला और refine होता गया .. मुझे step 55-60 के आस – पास बहुत अवरोध मह्शूश हुआ , लगा कि मैं ये छोड़ के कुछ और करूँ , लगा कि ये process fail हो जायेगा , मैंने काफी impatient और irritating feel किया . Step no. 80 के बाद मैंने 2 मिनट का break ले लिया , आँखे बंद कर के थोडा relax किया ,अपने mind को clear किया और इस बात पर focus किया कि मेरी intention जवाब पाने की है . –ये मददगार साबित हुआ क्योंकि break के बाद मुझे और भी clear answers मिलने लगे .

Here was my final answer: to live consciously and courageously, to resonate with love and compassion, to awaken the great spirits within others, and to leave this world in peace.

मेरा final answer था : जागरूकता और साहस के साथ जीवन जीना ,प्रेम और दया को अपनाना , दूसरों के अन्दर की महान आत्माओं को जगाना , और इस दुनिया को शांतिमय बनाकर छोड़ना.

जब आपको अपना उत्तर मिल जायेगा कि आप यहाँ क्यों हैं , तब आप feel करेंगे की वो आपके अंत -मन को छू रहा है . वो शब्द आपको energetic लगेंगे , और आप जब भी उन्हें पढेंगे तो आप उस energy को feel करेंगे .

उद्देश्य को जान लेना आसान है . कठिन तो यह है कि उसे हर रोज़ अपने साथ रखना और खुद पर काम करना कि एक दिन आप खुद वो उद्देश्य बन जायें .

अगर आप यह पूछना चाहते हैं कि यह process काम क्यों करता है तो आप पहले इस question को तब तक side में रख दीजिये जब तक आप इस excercise को सफलतापूर्वक complete नहीं कर लेते . और जब आप ये करलेंगे तो शायद आपके पास अपना खुद का एक जवाब होगा कि ये काम क्यों करता है . यदि आप 10 ऐसे लोगों से ( जिन्होंने इस process को successfully complete कर लिया है ) येही प्रश्न करें तो ज्यादा chance है कि आपको दस अलग -अलग उत्तर मिलेंगे , जो उनके अपने belief system के हिसाब से होगा , और हर एक में सच्चाई कि अपनी ही छवि होगी .

जाहिर है कि अगर आप final answer आने से पहले ही quit कर गए तो ये process आपके लिए काम नहीं करेगा . मेरा अनुमान है कि 80-90% लोगों को उत्तर 1 घंटे के अन्दर मिल जायेगा . अगर आप अपनी धारणाओं में बहुत ही ज्यादा उलझे हुए हैं तो शायद आपको 5 sessions लगें और कुल 3 घंटे का वक़्त लगे , पर मुझे संदेह है कि ऐसे व्यक्ति पहले ही quit कर जायेंगे ( शायद पहले 15 मिनट में ) या फिर वो इस attempt ही ना करें . लेकिन आप इस blog को पढने के प्रति आकर्षित हुए हैं ( और अभी तक इस अपने life से बन करने के बारे में नहीं सोचा है ), तो शायद ही आप इस group को belong करें .

निवेदन : यदि यह लेख आपके लिए लाभप्रद रहा हो तो कृपया कृपया comment के माध्यम से मुझे ज़रूर बताएं.

Post inspired by : http://www.achhikhabar.com/ (Lots of thanks to AKC & Mr. Gopal Mishra)
Post main source :: http://www.stevepavlina.com/blog/2011/06/living-your-life-purpose/ (Also Lots of thanks to Mr.Pavlina)

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VMware Recertification Policy

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Recertification Policy: VMware Certified Professional

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Recertification Process | FAQs | More Information

Certifications are valuable assets for any IT professional and VMware Certified Professional (VCP) certifications are widely believed to reflect exceptional competence. Your VCP certification validates your ability to successfully employ current VMware products using best practices in operational environments.

Earning a VCP certification is a great achievement. But staying up to date in the expertise gained and proven by your certification is equally vital. If your skills are not current, your certification loses value. To ensure that all VCP holders maintain their proficiency, VMware is instituting a recertification policy.

Recertification is widely recognized in the IT industry and beyond as an important element of continuing professional growth. It enhances your credibility and demonstrates a commitment to your career, your employer, and your customers.

The new policy gives you three options to recertify:

Take the current exam for your existing VCP certification solution track. For example, if you are a VCP3, you could take the current VCP5-Data Center Virtualization (VCP5-DCV) exam.
Earn a new VCP certification in a different solution track. For example, if you are a VCP-Cloud, you could recertify by earning VCP5-Desktop (VCP5-DT) certification.
Advance to the next level by earning a VMware Certified Advanced Professional (VCAP) certification. For example, if you are a VCP5-DCV you could earn VCAP5-DCA certification.
Regardless of the option you choose, recertifying will enhance your ability to provide the highest quality results, and improve your chances for earning increased compensation and career advancement.

Recertification Process

You will be notified that your certification is due to expire via the email associated with your MyLearn account. Your transcript will also show the dates your certification is valid.
To recertify, you must pass any VCP or higher-level exam within two years of earning your most recent VCP certification.
Failure to recertify by the required date will result in revocation of your certification.
If your certification is revoked, you will lose access to the VCP portal and your right to market yourself as certified for that certification, which includes the use of VMware certification logos. Also, your transcript will reflect that your certification is no longer valid.
If you would like to re-earn a certification for which you have been decertified, you must satisfy the same prerequisites as any candidate attempting to earn that certification for the first time.
FAQs

1. What is VMware announcing?
VMware is implementing a recertification policy for VCP certification. To recertify, VMware Certified Professional (VCP) holders must pass any VCP or higher-level exam within two years of earning their most recent VCP certification.

2. Why is VMware announcing this policy change?
Currently, VCP certification holders are not required to recertify their skills, which is uncommon in the IT industry, Maintaining currency in the expertise gained and proven by VMware certifications is just as important as earning the certification initially. If your skills are not current, your certification loses value. The technical and business communities expect that VMware certified professionals are current on the latest technologies and capable of implementing VMware products with the highest level of skill. To ensure that all certification holders meet these expectations, VMware is instituting a recertification policy.

3. When does the policy go into effect?
The policy is effective as of March 10, 2014.

4. Why did VMware choose two years for VCP recertification?
To make sure our certificate holders are the most up to date in their field and to keep up with the rapidly changing pace of virtualization technology, two years is an appropriate amount of time for a certified individual to refresh and re-validate their skills.

5. What are the benefits of recertifying?
In addition to proving that you are maintaining your skills with the latest technology, you also receive the same benefits as if you were a newly certified candidate, including:

Recognition of your technical knowledge and skills
Official transcripts
Access to the exclusive VCP portal & logo merchandise store
Invitation to beta exams and classes
Use of the certification logo on personal websites and business cards
Discounted admission to VMware events
Discounts from VMware Press
6. What certifications do I need to recertify by March 10, 2015?
All VCP level certifications — VCP-DCV, VCP-Cloud, VCP-Desktop — that were earned prior to March 10, 2013 must be recertified. Any VCP2, VCP3, VCP4, or VCP5 certification can be recertified during this period by simply taking a current VCP or VCAP exam. Anyone holding a VCP certification awarded prior to March 10, 2013 has until March 10, 2015 to recertify.

7. How can passing another VCP or higher-level certification recertify my existing certification?
It recognizes and rewards your continued growth into new knowledge areas.

8. My VCAP certification is more recent than my VCP certification – when will the valid through date reflect this?
We will be adding functionality to the system to reflect these situations in the coming months.

9. What happens if I allow my certification to expire?
Your certification will be revoked, and you will no longer be entitled to use the certification logo or represent yourself as VMware certified. Your certification will be shown as no longer valid on your MyLearn account. Any employer who contacts us to validate your certification will be informed it is no longer valid.

10. Can I still access the VCP portal if my certification is revoked?
No.

11. Is there a grace period after my certification is revoked where I can take the exam and be reinstated, or do I need to start over?
No. There is no grace period after your certification is revoked. To regain certified status, you will need to meet all the prerequisites for the specific certification.

12. Will you notify me when my certification is near its expiration date?
Yes. You will receive an email notice at the email address associated with your MyLearn account.

13. Is there a course requirement to recertify?
Previously, a candidate was given a limited amount of time to upgrade their existing certification, after which a course was required. Effective with the announcement of this recertification policy, a candidate can recertify anytime within their two-year recertification period, without a course requirement. However, we recommend that you do enroll in training, as hands-on experience through on demand or live (classroom or virtual) classes will provide you with the latest education to better prepare you for the exam.

14. Is the recertification exam different from the normal exam?
No.

15. Does the recertification exam cost the same?
Yes. There may be discounts and promotions available here.

16. Are there any course discounts available to help me get ready for the exam?
You can find the currently available discounts and promotions here.

17. How does this policy affect me if I received my VCP5-DCV two or more years ago?
A candidate holding any VCP level certification(s) — VCP-DCV, VCP-Cloud, VCP-Desktop — that were earned on or before March 10, 2013 must recertify by March 10, 2015.

If your certification was earned after March 10, 2013, you must recertify within two years of that date.

18. I have multiple VCP certifications. Which date do you look at to determine if I need to recertify?
The most recent certification date will be used to determine your recertification deadline. For example, if you earned VCP5-DCV on January 1, 2012 and VCP5-DT on February 10, 2014, then your recertification deadline will be based on the VCP5-DT date. In this case, the recertification deadline is February 10, 2016.

19. My VCP level certification is over two years old, but my VCAP level certification is not — do I need to recertify by March 10, 2015?
No. Your recertification date is based on the date of your most recent and highest level of certification — in this case, two years from your VCAP date.

20. My VCP is more than two years old, but I just received a VCA last month. Do I still need to recertify by March 10, 2015?
The only way to recertify your VCP is to take an exam at the same level or higher.

21. I took the course and passed the exam in 2013, but it shows I am not certified until 2014 when I completed my certification tasks. Which date is used when determining recertification?
The date you completed the tasks is the official date that will be used to determine your recertification date.

22. I noticed that the VCP4-DCV certification is no longer offered after May – why is that?
This certification is based on technology that has since been greatly expanded. Our new recertification policy ensures that all certification holders are current on the latest technologies; therefore, we have decided to end this program’s availability.

23. How long will VCP4-DT, VCP4-DCV, VCAP4-DCA, VCAP4-DCD be available?
Candidates will have until April 30, 2014 to register for any VCP or VCAP Version 4.x exam, and until May 31, 2014 to take the exam.

VCDX4-DCV candidates have until May 9, 2014 to submit an application and must defend by July 9, 2014.

24. I have multiple accounts. How do I ensure my recertification is applied to the correct account?
We encourage you to merge your accounts by contacting certification@vmware.com. If all of your certifications are under a single account, your recertification will apply to all impacted certifications. If you maintain separate accounts, you may run the risk of having multiple recertification dates.

More Information

For more information on the recertification policy, please contact certification@vmware.com.

Source :: https://mylearn.vmware.com/

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“गर्मी से बचने के घरेलु उपाय”

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गर्मी से बचने के घरेलु उपाय
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आया मौसम गर्मी ,लू का……

दोस्तों ,
मई का महीना आ गया है और सूरज अपनी प्रखर किरणों की तीव्रता से संसार के जलियांश (स्नेह )को सुखा कर वायु में रूखापन और ताप बढ़ा कर मनुष्यों के शरीर के ताप की भी वृद्धि कर रहा है!

गर्मी में होने वाले आम रोग –गर्मी में लापरवाही के कारण सरीर में निर्जलीकरण (dehydration),लू लगना, चक्कर आना ,घबराहट होना ,नकसीर आना, उलटी-दस्त, sun-burn,घमोरिया जैसी कई diseases हो जाती हैं.

इन बीमारियों के होने में प्रमुख कारण-

गर्मी के मोसम में खुले शरीर ,नंगे सर ,नंगे पाँव धुप में चलना ,
तेज गर्मी में घर से खाली पेट या प्यासा बाहर जाना,
कूलर या AC से निकल कर तुरंत धुप में जाना ,

बाहर धुप से आकर तुरंत ठंडा पानी पीना ,सीधे कूलर या AC में बेठना ,
तेज मिर्च-मसाले,बहुत गर्म खाना ,चाय ,शराब इत्यादि का सेवन ज्यादा करना ,

सूती और ढीले कपड़ो की जगह सिंथेटिक और कसे हुए कपडे पहनना
इत्यादि कारण गर्मी से होने वाले रोगों को पैदा कर सकते हैं

हम कुछ छोटी-छोटी किन्तु महत्त्वपूर्ण बातो का ध्यान रख कर ,इन सबसे बचे रह कर ,गर्मी का आनंद ले सकते हैं!

उपचार से बचाव बेहतर होता है,है ना?

तो चलिए हम कुछ वचाव के तरीके जानते हैं –

गर्मी में सूरज अपनी प्रखर किरणों से जगत के स्नेह को पीता रहता है,इसलिए गर्मी में मधुर(मीठा) ,शीतल(ठंडा) ,द्रव (liquid)तथा इस्निग्धा खान-पान हितकर होता है!

गर्मी में जब भी घर से निकले ,कुछ खा कर और पानी पी कर ही निकले ,खाली पेट नहीं !!

गर्मी में ज्यादा भारी (garistha),बासा भोजन नहीं करे,क्योंकि गर्मी में सरीर की जठराग्नि मंद रहती है ,
इसलिए वह भारी खाना पूरी तरह पचा नहीं पाती और जरुरत से ज्यादा खाने या भारी खाना खाने से उलटी-दस्त की शिकायत हो सकती है !!

गर्मी में सूती और हलके रंग के कपडे पहनने चाहिये.
चेहरा और सर रुमाल या साफी से ढक कर निकलना चाहिये.

प्याज का सेवन तथा जेब में प्याज रखना चाहिये.
बाजारू ठंडी चीजे नहीं बल्कि घर की बनी ठंडी चीजो का सेवन करना चाहिये.

ठंडा मतलब आम(केरी) का पना, खस,चन्दन गुलाब फालसा संतरा का सरबत ,ठंडाई सत्तू, दही की लस्सी,मट्ठा,गुलकंद का सेवन करना चाहिये
इनके अलावा लोकी ,ककड़ी ,खीरा, तोरे,पालक,पुदीना ,नीबू ,तरबूज आदि का सेवन अधिक करना चाहिये
शीतल पानी का सेवन ,2 से 3 लीटर रोजाना

अगर आप योग के जानकार हैं ,तो सीत्कारी ,शीतली तथा चन्द्र भेदन प्राणायाम एवं शवासन का अभ्यास कीजिये ये शारीर में शीतलता का संचार करते हैं
तो दोस्तों इन कुछ छोटी छोटी बातो का ध्यान रख कर गर्मी की गर्मी से हम स्वयं को बचा सकते हैं!

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“क्षमा – Mercy”

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दया या क्षमा – Mercy

दया सबसे बड़ा धर्म है। – महाभारत

दया दोतरफी कृपा है। इसकी कृपा दाता पर भी होती है और पात्र पर भी। -शेक्सपियर

जहां दया तहं धर्म है, जहां लोभ तहं पाप।
जहां क्रोध तहं काल है, जहां क्षमा आप॥ – कबीरदास

दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान।
तुलसी दया न छांड़िए, जब लग घट में प्राण॥ – गोस्वामी तुलसीदास

दया मनुष्य का स्वाभाविक गुण है। -प्रेमचंद

दया के छोटे-छोटे से कार्य, प्रेम के जरा-जरा से शब्द हमारी पृथ्वी को स्वर्गोपम बना देते हैं। -जूलिया कार्नी

मुझे दया के लिए भेजा है, शाप देने के लिए नहीं। – हजरत मोहम्मद

जो असहायों पर दया नहीं करता, उसे शक्तिशालियों के अत्याचार सहने पड़ते हैं। -शेख सादी

न्याय करना ईश्वर का काम है, आदमी का काम तो दया करना है। -फ्रांसिस

हम सभी ईश्वर से दया की प्रार्थना करते हैं और वही प्रार्थना हमें दया करना भी सिखाती है। -शेक्सपियर

जो सचमुच दयालु है, वही सचमुच बुद्धिमान है, और जो दूसरों से प्रेम नहीं करता उस पर ईश्वर की कृपा नहीं होती। -होम

दयालुता दयालुता को जन्म देती है। -सोफोक्लीज

दयालुता हमें ईश्वर तुल्य बनती है। -क्लाडियन

दयालु चेहरा सदैव सुंदर होता है। -बेली

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“चिंता या घबराहट”

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चिंता – Anxiety “OR” worry

अगर इन्सान सुख-दुःख की चिंता से ऊपर उठ जाए, तो आसमान की ऊंचाई भी उसके पैरों तले आ जाय। -शेख सादी

कार्य की अधिकता मनुष्य को नहीं मारती, बल्कि चिंता मारती है। -स्वेट मार्डेन

TU NA HO NIRASH KABHI MAN SE

चाह गई चिंता मिटी, मनुआ बेपरवाह।

जिनको कछू न चाहिए, सोई साहंसाह ॥

-कबीरदास

चिंता एक काली दिवार की भांति चारों ओर से घेर लेती है, जिसमें से निकलने की फिर कोई गली नहीं सूझती। -प्रेमचंद

चिंता रोग का मूल है। – प्रेमचंद

बिस्तर पर चिंताओं को ले जाना, पीठ पर गट्ठर बाँध कर सोना है। -हैली बर्टन

प्राणियों के लिए चिंता ही ज्वर है। – शंकराचार्य

चिंताएं, परेशानियां, दुःख और तकलीफें परिस्थितियों से लड़ने से नहीं दूर हो सकतीं, वे दूर होंगी अपनी अंदरूनी कमजोरी दूर करने से जिसके कारण ही वे सचमुच पैदा हुईं है। -स्वामी रामतीर्थ

चिंता करता हूँ मैं जितनी

उस अतीत की, उस सुख की,

उतनी ही अनंत में बनती

जातीं रेखाएं दुःख की। -जयशंकर प्रसाद

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