Absorbing Spiritual Light – Part 3

kmsraj51 की कलम से…..

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Soul Sustenance 30-04-2014
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Absorbing Spiritual Light – Part 3 

Continuing from yesterday’s message, we should not keep the vices bottled up inside us like prisoners. Prisoners are always plotting to escape. If we change them into our friends they can help us. For example, the energy required to be stubborn is almost the same as that required to be determined except that one is positive and the other negative. The soul learns to transfer such energy. Anger becomes tolerance. Greed can be transformed into contentment. Arrogance, or the respect for false identity, can become self-respect. Attachment can be changed into pure love. 

The more I inculcate the Supreme Soul or God’s virtues, the closer I feel to Him, but if I allow inner disturbances due to any vice, my high stage is grounded. All the power stored up until that moment will leak away. I must recognize that I really do not like being body-conscious. As I wish for higher experiences I choose to live the life of a meditator with purity in thought, word and action. Obstructions come within and without, but through my connection with God I am drawing so much power so as to remain unaffected. This needs soul-consciousness. So in discarding the rubbish of the vices I have gathered over many births, I become my original form and maintain it through my closeness or companionship with God. 

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Message for the day 30-04-2014
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True detachment gives a chance for others to grow. 

Expression: Where there is detachment there is the ability to let go. There is also an equal amount of love, but along with it is the ability to give others an opportunity to be themselves. One’s own attitude or expectations don’t colour the perception and others get a chance to express themselves easily and naturally. 

Experience: When I am detached, I am also loving. I am able to watch with inner happiness all that life brings into each one’s lives. Neither do I take over other peoples’ lives and feel disappointed when things go wrong, nor do I leave them to their fate. I am able to see their inner capabilities and get each one to become self-reliant. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए –

(100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51 

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जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

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अासान घरेलु उपाय – बालों काे गिरने से बचाने के लिए

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अासान घरेलु उपाय – बालों काे गिरने से बचाने के लिए

 

बालों का झडऩा ऐसी समस्या है, जो किसी को भी तनाव में डाल सकती है। आज हर दूसरे व्यक्ति को बालों की समस्या से जूझना पड़ता है। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो नीचे दिए आयुर्वेदिक फंडे एक बार जरूर अपनाएं।


0 ताकि बाल बनें चमकदार

 

0 हमारे बाल बहुत ही नाजुक होते हैं। धूल, धूप, प्रदूषण, स्ट्रांग केमिकल युक्त शैंपू आदि से ये रूखे, बेजान व दो मुँहे हो जाते हैं तथा कमजोर होकर झड़ने लगते हैं।

0 बालों को झड़ने से रोकने तथा स्वस्थ रखने हेतु इनकी विशेष देखभाल करनी होती है। आइए हम आपको बताते हैं कुछ ऐसे टिप्स, जिससे आपके बाल चमकदार, स्वस्थ व मजबूत बनेंगे.

0 बालों को न तो ज्यादा तेज गरम पानी से धोने चाहिए और न ही बालों को रगड़कर पोंछना चाहिए। बालों को सुखाने के लिए खुरदरा नहीं बल्कि नरम तौलिया इस्तेमाल में लाना चाहिए। सिर पर तौलिये को लपेट कर थपथपा कर सिर का पानी सुखाना चाहिए।

0 बाल सँवारने में हमेशा चौड़े दाँत वाले ब्रश या कंघी का इस्तेमाल करें। गीले बालों में भूल से भी कंघी न करें। बालों की छोटी-छोटी लटें लेकर उन्हें आराम से सुलझाना चाहिए।

0 बालों को खूबसूरत और चमकदार बनाने के लिए खाने में वसा और प्रोटीन की मात्रा बढ़ाएँ। ताजे फल और सब्जियों से उचित प्रोटीन और वसा प्राप्त की जा सकती है।

0 नारियल के तेल में कपूर मिलाएं और यह तेल अच्छी तरह बालों में तथा सिर पर लगाएं। कुछ ही दिनों डेंड्रफ की समस्या से राहत मिलेगी।

0 सामान्यत: सभी के यहां शहद आसानी से मिल जाता है। शहद के औषधीय गुण सभी जानते हैं। शहद की तासीर ठंडी होती है और यह कई बीमारियों को दूर करने में सक्षम है। शहद से बालों का झडऩा भी रोका जा सकता है।

0 बाल झड़ते हैं तो गरम जैतून के तेल में एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर का पेस्ट बनाएं। नहाने से पहले इस पेस्ट को सिर पर लगा लें। 15 मिनट बाद बाल गरम पानी से सिर को धोएं। ऐसा करने पर कुछ ही दिनों बालों के झडऩे की समस्या दूर हो जाएगी।

 

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Picture Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

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वजन बढ़ाने के 10 आसान तरीके।

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ϒ वजन बढ़ाने के 10 आसान तरीके(पुरुषों के लिए ) ϒ

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वजन बढ़ाने के लिए धीरे-धीरे प्रयास करें, जंक फूड और फास्‍ट फूड न खायें।
रोज एक कटोरी बीन्स खायें, इसमें पौष्टिकता के साथ 300 कैलोरी होती है॥

खरबूजा और तरजबू जैसे मौसमी फल खाने से वजन तेजी से बढ़ा सकते हैं।
बादाम, खजूर और अंजीर के साथ गरम दूध पीने से वजन तेजी से बढ़ता है॥

वजन बढ़ाना और सही प्रकार से वजन बढ़ाना, दोनों बिलकुल अ‍लग बाते हैं। अगर आपका वजन कम है और आप उसे सही प्रकार से बढ़ाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको कुछ कारगर उपायों को आजमाना होगा। अधिकतर लोग वजन कम करने की चुनौती से जूझते हैं। लेकिन, कई लोग ऐसे भी होते हैं, जिनकी समस्‍या इससे ठीक विपरीत होती है।

इन लोगों का वजन जरूरी मापदंडों से अनुसार कम होता है और इनकी जरूरत होती है वजन बढ़ाना। लेकिन, यह काम इतना आसान नहीं होता। सही प्रकार से वजन बढ़ाना एक मुश्किल काम है और इसके लिए भी सही मेहनत की जरूरत होती है। आप कुछ सप्‍लीमेंट्स की मदद से वजन बढ़ा तो सकते हैं, लेकिन इसका लाभ कम और नुकसान अधिक होते हैं। इसलिए जरूरी है कि वजन बढ़ाने के लिए स्‍वस्‍थ तरीके अपनाए जाएं।

वजन बढ़ाने के आसान टिप्‍स।

हर वक्‍त खाते रहना जरूरी नहीं।

डायट चार्ट वजन बढ़ाने के लिए भी बेहद जरूरी होता है। अपनी दिनचर्या में संतुलित व स्वास्थ्‍यवर्द्धक आहार के साथ वर्कआउट को भी शामिल करें। कुछ ही दिनों में आपको फर्क नजर आना शुरू हो जाएगा।

प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट।

वजन बढ़ाने के लिए प्रोटीन का सेवन जरूरी है इसलिए अपने आहार में चिकन, मछली, अंडा, दूध, बादाम व मूंगफली आदि को शामिल करें। इसके अलावा कार्बोहाइड्रेट भी वजन बढ़ाने में मददगार होता है जैसे पास्ता, ब्राउन राइस, ओटमील आदि। इन सबके साथ फलों व सब्जियों का सेवन भी जरूर करें।

केला है फायदेमंद।

वजन बढ़ाने का सबसे प्रभावी और आसान तरीका है केले का सेवन। दिन में कम से कम तीन केले खाएं। दूध या दही के साथ केला और भी फायदेमंद है। रोज सुबह नाश्ते के साथ बनाना-मिल्कशेक जरूर लें। महीने भर में परिणाम आपके सामने होंगे।

दूध में शहद।

शहद वजन संतुलित करता है। अगर आपका वजन अधिक हो, तो शहद उसे कम करने में मदद करता है और अगर वजन कम हो तो उसे बढ़ाने का काम करता है। रोज सोने से पहले या नाश्ते में दूध के शहद का सेवन आपका वजन बढ़ा सकता है। इससे आपकी पाचन शक्ति भी अच्‍छी रहती है।

डॉक्टर से संपर्क करें।

अधूरा भोजन, भोजन के समय में ज्यादा अंतराल, कम भोजन का सेवन करना और उससे ज्‍यादा मेहनत करना, वजन कम होने के कारणों में से एक है। इसके अलावा अन्य कारण है लंबी बीमारी जिनमें टीबी, कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और एनोरेक्सिया नर्वोसा जैसी बीमारियों के कारण हो सकता है। तो ऐसे में आपको डॉक्टर से संपर्क करें और उचित सलाह लें।

बीन्स भी फायदेमंद।

अगर आप शाकाहारी हैं तो आपके लिए बीन्स से अच्छा कोई विकल्प नहीं है। बीन्स के एक कटोरी में 300 कैलोरी होती है यहां सिर्फ वजन बढ़ने में ही मदत नहीं करता बल्कि पौष्टिक भी होता है।

खरबूजा है फायदेमंद।

जिन लोगों का वजन कम होता है डॉक्टर उन्हें खरबूजा खाने की सलाह देते हैं। हालांकि यह मौसमी फल है लेकिन इसे खाने से भी वजन तेजी से बढ़ता है। साथ ही यह आपको डीहाइड्रेशन से भी बचाता है।

मेवे के साथ दूध।

वजन बढ़ाने के लिए सुबह-सुबह ‌सूखे मेवे को दूध में पीसकर या कूटकर उबाल लें और इसे पिएं। खासतौर पर बादाम, खजूर और अंजीर के साथ गर्म दूध पीने से भी वजन तेजी से बढ़ता है। किशमिश खाने से वजन तेजी से बढ़ता है। नियमित रुप से अपनी डायट में 30 ग्राम किशमिश को शामिल करें। रोज इसके सेवन से महीने भर में आप अपने वजन में फर्क महसूस करेंगे।

पीनट बटर।

पीनट बटरमें मोनोअनसेचुरेटेड फैट की अच्छी मात्रा पाई जाती है। ये न सिर्फ वजन बढाने में मदद करता है बल्कि टोस्ट और बिस्कुट के साथ खाए तो बहुत स्वादिष्ट भी लगता है।

व्यायाम भी जरूरी।

वजन बढ़ाने के लिए व्यायाम भी उतना ही जरूरी है जितना कि आहार। इसके लिए आप पुल अप्स, स्वाट्स, डेडलिफट्स आदि व्यायाम कर सकते हैं। इन व्यायामों के मदद से हार्मोन्स की गतिविधि बढ़ती है और आपको भूख लगती है।

~हरि कृष्णमूर्ति जी

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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Absorbing Spiritual Light

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Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

 

Absorbing Spiritual Light – Part 1 

Just as darkness is the absence of light, negativity which manifests as vices and weaknesses inside us is merely the absence of spiritual light. Through the influence of negativity, the sense organs waste away the light. The question of vice, or sin, has been of a lot of importance in religion. No matter how much political or religious control has been imposed, nothing has been able to block the internal wasting away of the “light” of the soul. Light has a source but darkness does not. Darkness is not created by any source but is rather the absence of a source. In the same way, the negative forces do not emerge from the real nature of the self, but are simply symptoms of a lack of spiritual power or light. As spiritual power declines, symptoms of negativity such as anger, greed, ego, attachment, hatred, jealousy and related vices appear. On the other hand, as the soul’s power and spiritual light increases through a union (meditation) with the Supreme, the vices automatically disappear. In fact problems are not fundamentally caused by a particular vice, it is a question of the extent of one’s power. If I am weak, the sanskars mostly related to vices dominate my experience. If I am strong they do not have a chance to affect me. 

The negative forces have often been personified as Ravana, Maya or Satan but in fact there is no such entity.Maya describes a level of consciousness. There is no outside being whom we can blame. The vices are symptoms of individual ignorance and loss of power, which appeared only when our original creative powers subsided as we came into the process of birth and rebirth. When the soul’s power fell below the level necessary to control matter and the senses; then the vices emerged inside the soul. The soul was more and more propelled by them through many births, until today when they appear to be a basic part of our real nature. 


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Message for the day
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To look closely at one’s own behaviour is to bring about a positive change. 

Expression: While it is easy to talk about what other people should do to change themselves and their behaviour, it is also important to see what one can do to bring about a change in oneself. When there is the ability to look in this way, effort is put in continuously to change old unwanted patterns of behaviour and replace with more desirable ones. 

Experience: When I am able to take a closer look at myself, I am able to see which trait in my personality is getting in the way of my progress. This knowledge helps me accept myself with my shortcomings and yet have the courage to bring about a change easily. So I have the satisfaction of working on myself. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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Absorbing Spiritual Light – Part 2 

How many times do we hear, * Oh, he is always in a bad mood…, * It is my nature to be irritable…, * He will never change… This shows the extent to which the soul’s own light has faded and been replaced by the dark curtain of negativity. Therefore it is better that we do not try to deal with each vice and defect individually. As the soul fills itself with the power of spirituality, its overall condition automatically improves. 

Another significant point is that there is a deep-rooted awareness within the soul of God and Hissanskars, however much it may be covered by dirt and weakness. This is because each soul is the child of God and being his children we inherit his sanskars. These sanskars are present in us when we start playing our part in the physical world, but gradually they fade away as we take more and more births. As these sanskarsare brought to the surface of the consciousness, automatically our thoughts and behavior patterns change. 

In modern psychology it is stated that we must express all our negative emotions and note suppress them. But the fact is that letting it out leads the soul further into slavery to that emotion. Remembering that thoughts, decisions and actions are formed on the basis of sanskars, which are deepened by repetition, the soul can only cause harm by expressing any defect or vice. On the other hand, the psychological effect of suppressing negative emotions can be quite drastic. Suppression can lead to severe personality problems, even madness or insanity. The right path is that we emerge our positive sanskars with the help of meditation and other self-development techniques and the negative ones automatically vanish away. 

(To be continued tomorrow …) 

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Message for the day 29-04-2014
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Patience brings easy solutions. 

Expression: What one cannot achieve with pressure can be very easily achieved with patience. Patience brings a state of calm inside which helps in finding the answers that already lie within. It gives courage to work on the problem in a cool and relaxed way till the solution is found. It brings creativity even to mundane things. 

Experience: When I am able remain patient even in the most challenging situations, I am able to remain calm. I don’t let go of my inner peace but am able to be aware of my own inner resources. I am able to retain my inner strength which gives me courage to find the solution for every problem. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

 

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आसान आयुर्वेदिक घरेलू उपचार !!

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0 दिमाग तेज बनाने के लिए रोजाना सुबह सैर करें। हरी घास पर चलने से दिमाग के साथ-साथ ब्लड प्रेशर भी ठीक बना रहता है।

0 दांत मजबूत बनाने के लिए नीम की दातून का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे दांत में कीड़ा नहीं लगता और आपके दांत मजबूत भी बनते हैं।

0 सर्दियों में अपनी डाइट में ड्राई फ्रूट्स को भी शामिल करें। ये पौष्टिक तो हैं ही, त्वचा के लिए भी लाभदायक हैं।

0 फ्रिज की ठंडी चीजें सीधे खाने से बचें। इसे हल्का सा गर्म करके खायेंगे, तो पाचन तंत्र ठीक रहेगा।

0 गर्दन में दर्द न हो, इसके लिए सोने का सही तरीका अपनाएं। तकिए का इस्तेमाल कम करें। फिर भी दर्द है तो एक्सरसाइज या योग करें। तब भी आराम न मिले तो डाक्टर से सलाह लें।

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0 गर्म मसाला चूर्ण को नींबू के रस में भिगो दें। भोजन के बाद इसे आधा चम्मच लें। यह पाचन के लिए बेहतरीन दवाई का काम करता है।

0 ज्यादा लिपिस्टिक लगाने से कभी-कभी होठों का रंग काला पड़ने लगता है। हो सके तो इसे लगाने से परहेज करें। लगानी भी पड़े तो, बाद में उसे साफ करके होंठों पर नींबू का रस लगायें। इससे आपके होंठ काले नहीं पडेंगे।

0 अगर आपको पिंपल की समस्या है, तो साबून का प्रयोग न करें। साबुन आपके चेहरे से आयल को सोख लेता है जिससे आपकी समस्या कम होने की जगह बढ़ सकती है। चेहरे पर नीम का फेस पैक लगाएं।

0 अगर आपकी आंखों के नीचे काले घेरे या झुर्रियां पड़ गयी हैं, तो दूध की मलाई से उस जगह की रोजाना मालिश करें।

0 त्वचा को मुलायम बनाने के लिए शहद में नींबू का रस मिलाकर पांच मिनट मालिश करें।

0 तनाव न हो, इसके लिए सकारात्मक सोच अपनाएं। अधिक तनाव से केवल आपके दिमाग पर असर पड़ता है बल्कि ब्यूटी पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। जैसे बालों का गिरना, आंखों के नीचे काले घेरे होना और चेहरे की चमक घीरे-धीरे गायब होने लगेगी।

0 बाल सफेद न हों, इसके लिए विटामिन-ई युक्त तेल का प्रयोग करें। इससे आपके बाल असमय सफेद नहीं होंगे साथ ही गिरना बन्द हो जायेंगे। खाने में भी इस तेल का इस्तेमाल फायदेमंद होता है।

 

Post inspired by-Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj

Bal Krishna Ji-2 Bal Krishna Ji

I am grateful to “पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज”

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मनुष्य जीवन का लक्ष्य क्या है?

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मनुष्य जीवन का लक्ष्य क्या है?

मनुष्य जीवन का लक्ष्य  क्या है  ?मनुष्य का वर्तमान जीवन बड़ा अनमोल है क्योंकि अब संगमयुग में ही वह सर्वोत्तम पुरुषार्थ करके जन्म-जन्मान्तर के लिए सर्वोत्तम प्रारब्ध बना सकता है और अतुल हीरो-तुल्य कमाई कर सकता है I वह इसी जन्म में सृष्टि का मालिक अथवा जगतजीत बनने का पुरुषार्थ कर सकता है I परन्तु आज मनुष्य को जीवन का लक्ष्य मालूम न होने के कारण वह सर्वोत्तम पुरुषार्थ करने की बजाय इसे विषय-विकारो में गँवा रहा है I अथवा अल्पकाल की प्राप्ति में लगा रहा है I आज वह लौकिक शिक्षा द्वारा वकील, डाक्टर,इंजिनीयर बनने का पुरुषार्थ कर रहा है और कोई तो राजनीति में भाग लेकर देश का नेता, मंत्री अथवा प्रधानमंत्री बनने के प्रयत्न में लगा हुआ है अन्य कोई इन सभी का सन्यास करके, “सन्यासी” बनकर रहना चाहता है I परन्तु सभी जानते है की म्रत्यु-लोक  में तो राजा-रानी, नेता वकील, इंजीनियर, डाक्टर, सन्यासी इत्यादि कोई भी पूर्ण सुखी नहीं है I सभी को तन का रोग, मन की अशांति, धन की कमी, जानता की चिंता या प्रकृति के द्वारा कोई पीड़ा, कुछ न कुछ तो दुःख लगा ही हुआ है I अत: इनकी प्राप्ति से मनुष्य जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होती क्योंकि मनुष्य तो सम्पूर्ण – पवित्रता, सदा सुख और स्थाई शांति चाहता है Iचित्र में अंकित किया गया है कि मनुष्य जीवन का लक्ष्य जीवन-मुक्ति की प्राप्ति अठेया वैकुण्ठ में सम्पूर्ण सुख-शांति-संपन्न श्री नारायण या श्री लक्ष्मी पद की प्राप्ति ही है I क्योंकि वैकुण्ठ के देवता तो अमर मने गए है, उनकी अकाल म्रत्यु नही होती; उनकी काया सदा निरोगी रहती है I और उनके खजाने में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होती इसीलिए तो मनुष्य स्वर्ग अथवा वैकुण्ठ को याद करते है और जब उनका कोई प्रिय सम्बन्धी शरीर छोड़ता है तो वह कहते है कि -” वह स्वर्ग सिधार गया है ” Iइस पद की प्राप्ति स्वयं परमात्मा ही ईश्वरीय विद्या द्वारा कराते हैइस लक्ष्य की प्राप्ति कोई मनुष्य अर्थात कोई साधू-सन्यासी, गुरु या जगतगुरु नहीं करा सकता बल्कि यह दो ताजो वाला देव-पद अथवा राजा-रानी पद तो ज्ञान के सागर परमपिता परमात्मा शिव ही से प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा ईश्वरीय ज्ञान तथा सहज राजयोग के अभ्यास से प्राप्त होता है Iअत: जबकि परमपिता परमात्मा शिव ने इस सर्वोत्तम ईश्वरीय विद्या की शिक्षा देने के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व-विद्यालय की स्थापना की है I तो सभी नर-नारियो को चाहिए की अपने घर-गृहस्थ में रहते हुए, अपना कार्य धंधा करते हुए, प्रतिदिन एक-दो- घंटे निकलकर अपने भावी जन्म-जन्मान्तर के कल्याण के लिए इस सर्वोत्तम तथा सहज शिक्षा को प्राप्त करे I

इस विद्या की प्राप्ति के लिए कुछ भी खर्च करने की आवश्यकता नही है, इसीलिए इसे तो निर्धन व्यक्ति भी प्राप्त कर अपना सौभाग्य  बना सकते है I इस विद्या को तो कन्याओ, मतों, वृद्ध-पुरुषो, छोटे बच्चो और अन्य सभी को प्राप्त करने का अधिकार है क्योंकि आत्मा की दृष्टी से तो सभी परमपिता परमात्मा की संतान है I
अभी नहीं तो कभी नहींवर्तमान जन्म सभी का अंतिम जन्म है I इसलिय अब यह पुरुषार्थ न किया तो फिर यह कभी न हो सकेगा क्योंकि स्वयं ज्ञान सागर परमात्मा द्वारा दिया हुआ यह मूल गीता – ज्ञान कल्प में एक ही बार इस कल्याणकारी संगम युग में ही प्राप्त हो सकता है I

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Bringing The Consciousness Back In Shape

kmsraj51 की कलम से…..

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Brahma Kumaris –

Soul Sustenance and Message for the day

 

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Soul Sustenance 27-04-2014
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Bringing The Consciousness Back In Shape 

If we try and find the root causes of all forms of stress, we would find that both lazy and wrong thinking lie behind various stressful emotions. No one right from our childhood to when we are grown-ups puts this into our heads that we are each responsible for our own thoughts and feelings. Instead we are taught that others are responsible for what we think and feel. No one teaches us how to think. We are taught what to think in terms of knowledge of the world, but not how to shape our own thoughts and feelings. 

In spirituality the self gets the required training to create positive and powerful thoughts, thoughts: 

1. which are connected to true spiritual knowledge of the self, 
2. which are beneficial to your own spiritual well-being, 
3. that inject positive energy in the form of happiness, love and enthusiasm to those around you, 
4. which are absolutely necessary in the context in which you find yourself, 
5. which use all your subtle energies in an economical way, 
6. which ensure that the result of any response you may create does not result in stress. 

When no one teaches us that any mental or emotional discomfort comes from within our own consciousness, we also do not ever realize that any negative state of being is unnatural and a sign that our consciousness is out of shape. The above thought training helps us to return our consciousness to its true, natural and original shape. 

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Message for the day 27-04-2014
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To use one value with commitment is to guarantee the use of all values. 

Expression: Values are related to each other as if they were members of a great family. For the one who is committed to one value is the one who is able to emerge the other connected values. Such a person is able to add quality to everything he does and speaks. 

Experience: When I am able to recognise my own special value and use it with commitment in my daily life, I am able to experience success in all I do. This is because I have the satisfaction of giving my best and of having added quality to everything I do. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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Picture Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

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100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए –

(100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

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