बस यही बताना था


Kmsraj51 की कलम से…..

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बस यही बताना था(अनुराधा त्रिवेदी सिंह)

आज अपने बेटे को झूठ भी सिखाना है

चाँद जैसे माथे पर

असत का काला टीका, कैसे भी सजाना है

आज मुझे बेटे को झूठ भी सिखाना है ।

आज तक बताया था कुछ गलत नहीं करना

चाहे जो भी हो जाये सच से तुम नहीं डरना

सत की राह पर चलते दण्ड के भागी बनना

पर कभी तुम्हें न सिर ग्लानि से झुकाना है ।

आज मैं बताऊँगी कि कभी-कभी दुनिया

सच से रूठ जाती है, मान झूठ जाती है

आज मैं बताऊँगी कैसे कुछ सगे रिश्ते

सच से टूट जाते हैं,फिर नहीं जुड़ पाते हैं।

और ये कि जीवन में सब सही नहीं होता

एक रंग सिलेटी भी कैनवास पे होता है

हर कहीं सफ़ेदी या स्याह रंग नहीं होता।

आज वो ये जानेगा, नज़रें फेर लेने में,

भी बड़ी दिलेरी है, सबने नज़रें फेरीं हैं।

आम आदमी हैं हम, हर कथा के नायक हैं

पर हरेक मौक़े पर मूक ही रहे हैं हम

ये नहीं कि कायर थे, वक़्त का तक़ाज़ा था ।

साथ ही बताऊँगी, जब भी तुम बड़े होगे

सच का साथ ही देना

बस यही बताना था इस अनोखी दुनिया में

सबके सच अलहदा हैं, सबकी कसौटी अपनी ।

आज साँझ की बेला शीशे जैसी आँखों में

एक बाल रखना है

आज साँझ की बेला नन्ही भोली आँखों से

एक सच परखना है ।

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