हर चीज की सीमा निर्धारित होनी चाहिए।


Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

हर चीज की सीमा निर्धारित होनी चाहिए।

हर चीज की सीमा निर्धारित होनी चाहिए। जैसे रोजाना के जीवन में खाने-पीने काम करने, दौड़ भाग करने, खेलने-कूदने, मनोरंजन आदि सबकी सीमा निर्धारित हो, तो समय का सही नियोजन और उपयोग होगा। समय ही जीवन है। एक-एक क्षण मिलकर जीवन बनता है। जीवन थोक नहीं है, चिल्हरों से बनता है जैसे एक-एक पैसे से रुपया फिर रुपये से सौ, हजार, लाख, करोड़ बनते हैं तो सब इकाई से शुरू होता है इसी तरह जीवन है एक-एक सोच मतलब रखती है।

सोच का संग्रह ही लेखन है, उद्बोधन है, कार्य है चाहे जिस क्षेत्र में हो सब एक सोच से प्रारंभ होता है। अब इसमें आता है, सही दिशा में सही सोच जिसे सकारात्मक सोच कहते हैं। गलत दिशा में सोचा गया तो उसे नकारात्मक सोच कहते हैं। पर हम समय प्रबंधन, व्यवसाय या नौकरी प्रबंधन, स्वास्थ्य प्रबंधन और अन्य कई प्रबंधन जो जीवन में होते हैं या हम करते हैं, वे सब सोच से प्रारंभ होते हैं। हमें सोच की सीमा तय करना आना चाहिए। कोई सदस्य घर का बीमार है, हमें सोचना है उसके इलाज के बारे में, डॉक्टर दवा के बारे में उसे सांत्वना देता है कि कोई बात नहीं, जल्दी ठीक हो जाओगे यदि हम सोचते ही रहे कुछ नहीं किया तो सोच चिंता में बदल जायेगा एक चिन्ता घुसी मन में तो वह अपने पूरे रिश्तेदारों को बुला लेती है भय, मोह, आसक्ति, हड़बड़ी आदि।

मैंने एक डॉक्टर को अपनी विवाहिता पुत्री के डिलवरी पेन दर्द के समय इतना चिंतित भयभीत और हड़बड़ी करते देखा कि मुझे आश्चर्य हुआ कि ये कैसे डॉक्टर हैं जो घर के एक सदस्य के प्रसूति दर्द से इतने परेशान हो गये तो मरीज या उसके सदस्यों का क्या हाल हुआ होगा। मैं मानता हूं कि डॉक्टर भी आखिर इंसान होता है पर उसे इतनी जल्दी घबराना नहीं चाहिए। वह अपने मरीजों को कैसे दिलासा देगा। हर चीज की सीमा तय होनी चाहिए। सीमा से बाहर उसका प्रभाव ऋणात्मक हो सकता है। ऋणात्मकता बहुत नुकसान दायक है, आपके पूरे वजूद को हिला देती है। हम पर हमारा मन ही शासन करता है उसे सुधार लें सकारात्मकता से भर लें तो सब ठीक हो जायेगा।

श्रीमत-भागवत गीता अनुसार-

चिन्ता मत करें चिन्तन करें और व्यथा को स्थान न दें व्यवस्था करें।

छोटे-छोटे से शब्द हैं पर जीवन को नया मतलब देते हैं। यही तो है जीवन प्रबंधन जिस पर महान चिन्तक विजय शंकरजी मेहता हमेशा बोलते लिखते रहते हैं। उनकी किताबें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। सब कुछ उपलब्ध है दुनिया में अच्छे विचार, अच्छी किताबें, अच्छे लोग, अच्छे कैसेट, रेडियो, टी.व्ही. के कुछ चैनल आस्था और संस्कार अच्छी चीजें परोस रहे हैं। आपको शांत रहकर पढ़ना-सुनना, सोचना करना, चलना है तो ही आप मंजिल पर पहुंचेंगे। बस कोशिश करिये। सोचिये और सोच की सीमा तय करिये। अच्छी सोच बढ़ाइए, घटिया सोच को घटा कर शून्य कर दीजिए, बस यही मेरा संदेश है।

In English

Everything should be set limit.

Everything must be kisimanirdharit. Such as daily life to race to work, food, play-jump, entertainments etc all the time limit sahiniyojnaauraupyoghoga. Samyahi life. A-together life is a moment. Life is not, wholesale chilharon is made from a money like rupee then bucks hundred, thousand, million, million are made then all unit begins with a similar life thinking holds meaning.
Thinking is only a collection of writings, is whether the served area, exhortations seemed all starts with a thought. Now it comes in the right direction are correct thinking jiseskaratmak sochkahte. Are the usenkaratmak sochkahte been thought in the wrong direction. We at time management, business or job management, health management and other management who are in life or we do they start sabsochse. We must come to frame of thinking. No member of the House is sick we have to think about her treatment, doctors give him consolation about the drug that’ll be no problem, quick fix if we think there are only a few will turn into concern didn’t think exactness in mind so he takes his entire relatives calling haibhay, infatuation, attachment, hadbadiadi.
I married a daughter of dilvari your pen do so fearful and worried about the pain of time rush saw that surprised me was how doctor who is a member of the House have become so upset the patient obstetrics pain or what its members have occurred. I recognize that even doctors finally is on the person so quickly should not go haywire. How will the console my patients. Everything should be fixed limits. Out of bounds is the effect may be negative. Rinatmakta is your whole existence to dayak much damage is nodding. We rule our mind itself is so filled with bike repair positivity will be all right.

According to Shrimat-Bhagwat Gita-

“Do not worry, do not put in place to meditate and soreness.”

Small little words mean to give new life. That is the great life management thinkers speak vijyashankarji Mehta always keep writing. His books have also been published. Everything is available in the world, good ideas, good books, good people, good cassette, radio, TV … Whee. Some are serving faith & values channel, good stuff. Do you think staying calm walk, listen to read-only if you will on the floor. Just try some.Imagine some of the thinking and frame. Boost good thinking, let the poor thinking minus zero, that is my message.

Priyank Dubey

Roorkee-Uttarakhand

We are grateful to Priyank Dubey Ji for sharing this inspirational Hindi story with KMSRAJ51 readers.

Note::-

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सफलता कठोर मेहनत और खुद पर भरोसा करने से मिलती है।

यह गिफ्ट में या धनी परिवार में पैदा होने से नहीं मिलती है।

-Kmsraj51

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