दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।


Kmsraj51 की कलम से…..

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दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें।

अक्सर कई छात्र मेल के द्वारा या फोन के माध्यम से हमसे पूछते हैं कि हम प्रवेश परिक्षाओं में कैसे सफलता पायें या किस तरह तैयारी करें कि हमें कामयाबी मिले?  सच तो ये है कि, कामयाबी की चाह लिये हम सब अपने-अपने क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं। परन्तु अपने कार्य सम्पादन के दौरान अक्सर एक दुविधा में भी रहते हैं कि हमारे द्वारा किया गया कार्य सफल होगा या नही, ये हम कर पायेंगे या नही  इत्यादि इत्यादी. मित्रों, इस तरह की आशंकायें हमारी ऊर्जा को छींण करने का प्रयास करती हैं और स्वंय के विश्वास पर एक प्रश्न चिन्ह लगा देती हैं।  यही दुविधा सफलता की सबसे बङी बाधा है। किसी भी कार्य को करने से पहले उसके सभी पहलुओं पर विचार करना कार्य की रणनीति होती है परंतु जब नकारात्मक पहलु योजना पर हावी होता है तो यही संशय सफलता की सबसे बङी अङचन होती है। जिसके कारण हम एक कदम भी आगे नही रख पाते। जबकि जिवन का सबसे बङा सच है कि हमेशा परिस्थिति एक जैसी नही रहती, लक्ष्य की सफलता में कई रोङे आते हैं। जो इन रुकावटों को आत्मविश्वास के साथ पार करता है वो लक्ष्य हासिल करने में सफल होता है। लेकिन दूसरी ओर जो दुविधा के जंजाल में फंस जाता है, वो कभी भी आशाजनक सफलता नही अर्जित कर पाता है। ज्यादातर लोग ज्ञान और प्रतिभा की कमी से नही हारते बल्की इसलिये हार जाते हैं कि दुविधा में पङकर जीत से पहले ही मैदान छोङ देते हैं।

दुविधा तो एक द्वंद की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति निर्णय नही ले पाता और न ही स्वतंत्र ढंग से सोच पाता है। इतिहास गवाह है कि प्रत्येक सफल व्यक्तियों के रास्ते में अनेक मुश्किलें आईं किन्तु उन्होने उसे एक स्वाभाविक प्रक्रिया समझा और आगे के कार्य हेतु कोशिश करते रहे। कई बार हम लोग किसी कार्य को करने से पहले इतना ज्यादा सोचते हैं कि समय पर काम नही हो पाता या हम अवसर को दुविधा के भंवर में कहीं खो देते हैं। यदि हम विद्यार्थी की बात करें तो कई बार ऐसा होता है कि कुछ छात्र विषय को लेकर इतने ज्यादा संशय में रहते हैं कि वो फार्म भरने में लेट हो जाते हैं या आशंकाओं के चक्कर में गलत विषय का चयन कर लेते हैं। जबकि सच तो ये है कि सभी विषय में मेहनत करनी होती है तभी अच्छे अंक मिलते हैं। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यदि एक बुद्धिमान व्यक्ति भी लंबे समय तक दुविधाग्रस्त रहता है तो उसका भी मानसिक क्षरण हो जाता है। जिसके कारण सक्षम व्यक्ति भी उन्नति नही कर पाता। दुविधा सफलता की राह में सबसे बङी अङचन है। अत्यधिक संशय आत्मविश्वास को भी कमजोर बना देता है। यदि हम एक परशेंट असफल भी होते हैं, तो भी हमारे अनुभव में इजाफा ही होता है और अनुभव से आत्मविश्वास बढता है। मन में ये विश्वास रखना भी जरूरी है कि सब कुछ संभव है।

स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि,  संभव की सीमा जानने का सबसे अच्छा तरीका है, असंभव से भी आगे निकल जाना।

जो लोग सफलता की इबारत लिखे हैं उन्हे भी दुविधाओं के कोहरे से गुजरना पढा है परन्तु ऐसे में उन लोगों ने परिस्थिति को इस तरह ढाला कि वे अपनी योजनाएं  स्वयं निर्धारित कर सके। सफलता के लिये ये भी आवश्यक है कि हम हर परिस्थिति में स्वंय को तैयार रखें। किसी भी सफलता के लिये ये जरूरी है कि हम निर्णय लेने की भूमिका में आगे बढें; क्योंकि एक कदम भी आगे बढाने के लिये निर्णय तो लेना ही पङता है, तद्पश्चात जिंदगी हमें धीरे-धीरे खुद ही निर्णय लेना सीखा देती है। अतः सबसे पहले हम दुविधापूर्ण मनः स्थिति के शिकार न होते हुए स्वंय को संतुलित रखते हुए दुविधा रूपी अंधकार को आत्मविश्वास से आलोकित करें, जिससे आशंकाओं और दुविधाओं का तिमिर नष्ट हो तथा सफलता की और हमसब का कदम अग्रसर हो।

डॉ.ए.पी.जे. कलाम के अनुसार,  Confidence & hard work is the best medicine to kill the disease called failure. It will make you a successful person. 

Post inspired by Mrs. अनिता शर्मा जी

Educational & Inspirational VIdeos (9.8 lacs+ Views):  YouTube videos Link

(http://www.youtube.com/channel/UCRh-7JPESNZWesMRfjvegcA?feature=watch)

Blog:  http://roshansavera.blogspot.in/

E-mail ID:  voiceforblind@gmail.com

अनीता जी नेत्रहीन विद्यार्थियों के सेवार्थ काम करती हैं।

एक अपील

आज कई दृष्टीबाधित बच्चे अपने हौसले से एवं ज्ञान के बल पर अपने भविष्य को सुनहरा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। कई दृष्टीबाधित बच्चे तो शिक्षा के माधय्म से अध्यापक पद पर कार्यरत हैं। उनके आत्मनिर्भर बनने में शिक्षा का एवं आज की आधुनिक तकनिक का विशेष योगदान है। आपका साथ एवं नेत्रदान का संकल्प कई दृष्टीबाधित बच्चों के जीवन को रौशन कर सकता है। मेरा प्रयास शिक्षा के माध्यम से दृष्टीबाधित बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इस प्रयोजन हेतु, ईश कृपा से एवं परिवार के सहयोग से कुछ कार्य करने की कोशिश कर रहे हैं जिसको YouTube पर “audio for blind by Anita Sharma” लिख कर देखा जा सकता है।

I am grateful to Anita Ji for sharing this wonderful article with KMSRAJ51 Readers.

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51

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“अगर जीवन में सफल हाेना हैं, ताे कभी भी काेई भी कार्य करें ताे पुरें मन से करे।

जीवन में सफलता आपकाे देर से ही सही लेकिन सफलता आपकाे जरुर मिलेगी॥”

 ~KMSRAJ51

“अगर जीवन में सफल हाेना हैं. ताे जहाँ १० शब्दाें से काेई बात बन जाये वहा पर,

१०० शब्द बाेलकर अपनी मानसिक और वाणी की ऊर्जा को नष्ट नहीं करना चाहिए॥”

 ~KMSRAJ51

 

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* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

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* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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