किसी भी इंसान को बर्बाद कर सकते हैं ये तीन काम।


Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

श्री राम चरित मानस-KMSRAJ51

श्री राम चरित मानस।

सभी लोगों में अलग-अलग गुण-दोष होते हैं। गुण व्यक्ति को सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं, जबकि दोष (बुराइयां या गलत काम) व्यक्ति को दुख और परेशानियों का सामना करवाते हैं। श्रीरामचरित मानस में तीन ऐसे काम बताए गए हैं जो किसी भी पुरुष को बर्बाद कर सकते हैं। यहां जानिए ये तीन काम कौन-कौन से हैं और किस प्रकार पनपते हैं… इनसे किस प्रकार बचा जा सकता है…

श्रीरामचरित मानस के अयोध्या काण्ड में श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि-

तात तीनि अति प्रबल खल काम क्रोध अरु लोभ।
मुनि बिग्यान धाम मन करहिं निमिष महुँ छोभ।।
इस दोहे में श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि काम, क्रोध और लोभ- ये तीन किसी भी इंसान के लिए प्रबल शत्रु हैं। ये ही सबसे बड़ी बुराइयां हैं जो श्रेष्ठ और ज्ञान-विज्ञान के जानकार मुनियों को भी पलभर में ही बर्बाद कर सकती हैं। श्रीराम कहते हैं कि किसी भी श्रेष्ठ पुरुष के मन में काम भावना स्त्रियों को देखते ही पनप सकती है। कामदेव को सिर्फ स्त्रियों का ही बल प्राप्त है।
जानिए कैसे पनपती हैं ये तीन बुराइयां
श्रीराम लक्षण से कहते हैं कि-
लोभ कें इच्छा दंभ बल काम कें केवल नारि।
क्रोध कें परुष बचन बल मुनिबर कहहिं बिचारि।।
इस दोहे में श्रीराम ने बताया है कि लोभ यानी लालच, इच्छाओं और घमंड के कारण पनपता है। किसी भी पुरुष के मन में जब तक असीमित इच्छाएं रहती हैं, जब तक अलग-अलग सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए मन सोचता रहता है, तब तक लोभ से मुक्ति नहीं मिल सकती है। अपनी धन-संपत्ति के कारण ही व्यक्ति के मन में घमंड समा जाता है। इसी घमंड को बनाए रखने के लिए पुरुष लोभ वश और अधिक धन प्राप्त करने के लिए प्रयास करते रहता है। लोभ वश होकर व्यक्ति सही और गलत काम का भेद भी भूल जाता है। अत: इस बुराई से कोई भी पुरुष बर्बाद हो जाता है।
काम को है केवल स्त्री का बल
श्रीराम लक्ष्मण से कहते हैं कि काम वासना भी बहुत बड़ी बुराई है। इस बुराई में फंसकर बड़े-बड़े ज्ञानी-विद्वान भी नष्ट हो गए हैं। कामदेव के लिए सिर्फ स्त्री ही सबसे शक्तिशाली शस्त्र है। इसी शस्त्र से कामदेव ने कई बार ऋषि-मुनियों की तपस्या को भी खंडित किया है। इससे बुराई से बचने का सिर्फ एक ही उपाय है और वह है भगवान की भक्ति में मन लगाना। जो लोग भगवान की भक्ति में मन लगा लेते हैं, वे काम वासना पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।
आज के समय में इस बुराई के कारण काफी लोग परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कई लोगों का जीवन बर्बाद हो चुका है। अत: किसी भी पुरुष के लिए काम भावना पर नियंत्रण रखना ही सबसे श्रेष्ठ और कल्याणकारी उपाय है।
क्रोध को कठोर वाणी का बल प्राप्त है
क्रोध को इंसान का सबसे बड़ा शत्रु माना जाता है। क्रोध के आवेश में व्यक्ति अपनी वाणी पर नियंत्रण नहीं रख पाता है और कठोर शब्दों का प्रयोग कर बैठता है। इन शब्दों से सामने वाले व्यक्ति के मन को ठेस भी पहुंचती हैं और जब क्रोध शांत होता है तो व्यक्ति स्वयं भी पछताता है। अत: क्रोध को नियंत्रित करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है वाणी से सीधे मन पर चोट लगती है और इसी कारण आपसी रिश्तों में भी तनाव उत्पन्न हो जाता है। मित्र, शत्रु बन जाते हैं।
इन बुराइयों के संबंध में शंकर जी पार्वती जी से कहते हैं कि-
क्रोध मनोज लोभ मद माया। छूटहिं सकल राम की दाया।।
सो नर इंद्रजाल नहिं भूला। जा पर होइ सो नट अनुकूला।।
शंकर जी कहते हैं कि क्रोध, काम, लोभ, मद और माया- ये सभी दोष श्रीरामजी की कृपा से दूर हो सकते हैं। श्रीराम जिन लोगों पर प्रसन्न हो जाते हैं, वे इंद्रजाल यानी माया से प्रभावित नहीं होते हैं। अत: इन बुराइयों से बचने के लिए व्यक्ति को श्रीरामजी की भक्ति में ही मन लगाए रखना चाहिए। श्रीराम की भक्ति भी सभी सुखों को देने वाली है और कल्याण करने वाली है।

लेख- श्री राम चरित मानस से

Please Share your comment`s.

आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

———– @ Best of Luck @ ———–

Note::-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational StoryPoetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है: kmsraj51@hotmail.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

CYMT-100-10 WORDS KMS

सदा खुश रहना और खुशी बांटना-यही सबसे बड़ा शान है।

~KMSRAJ51

 

_______Copyright © 2015 kmsraj51.com All Rights Reserved.________