अपने आप को प्रेरित(Motivate) करें।


Kmsraj51 की कलम से…..

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अपने आप को प्रेरित(Motivate) करें।

प्यारे दोस्तों,

अपने आप को प्रेरित कर, जीवन कि हर एक समस्याें काे सरलता पूर्वक पार करें।

अपने आप पर पूर्ण विश्वास करें।

सर्व-प्रथम स्वयं पर विश्वास करना सीखें, जिस इंसान काे स्वयं(अपने आप) पर विश्वास नहीं हाेता, अगर पुरी दुनिया के लाेग भी मिलकर उसकी मदद(Help) करें, ताे भी वह जीवन में कभी सफल नहीं, हाे सकता। यह दुनिया आदि(Start) से लेकर अब तक विश्वास पर ही चल रहीं हैं। जब आपकाे अपने आप पर पूर्ण विश्वास हाेगा, ताे आपके प्रत्येक सोच-विचार, वाणी और कार्य में सकारात्मकता आ जायेगी। जिससे आप जीवन में सफलताआें काे सरलता पूर्वक प्राप्त कर सकते हैं।

खाली मन शैतान का घर।

“खाली मन शैतान का घर” हाेता हैं, यह कहावत बिल्कुल सही हैं। जब मन खाली(Free) हाेता है, तभी मन में शैतानी विचार आते हैं। अपने मन काे व्यस्त रखना सीखें।

“जब मन हाे व्यस्त सकारात्मक सोच में, हरदम सफलता हाे आपकी जेब में।”

मन काे हमेशा व्यस्त रखना चाहिये अच्छें सोच में। क्योंकि सकारात्मक सोच ही निर्णय मे कनवर्ट हाेकर शरीर की कर्मइंद्रियाें काे निर्देश देता हैं और कर्मइंद्रिया इन्ही निर्देशाे के अनुसार कर्म करती हैं। यही कर्म “अकर्म, सुकर्म और विकर्म,” के रूप में आंतरिक आत्मा में  Store हाेता हैं, जाे “संस्कार” कहलाता हैं।

अपने असली(Real) स्वरूप काे जाने।

सबसे बड़ा प्रश्न, “मैं कौन हूँ?”(Who am i?)। केवल इसी एक ही सवाल का सही जवाब(उत्तर) जानकर, काेई भी इंसान शांतिमय जीवन जिये। यह ताे हम-सब जानते है कि हमारे शरीर काे एक शक्ति चला रही है, जिसे हम सब आत्मा(Soul) कहते हैं। लेकिन कितनी देर तक हमे यह याद रहता है कि हम एक आत्मा हैं। जब देखाें तब यहि कहते फिरते है मैं फलाने पोस्ट पर हूँ, मुझे नही जानते मैं किसका लडका या लडकी हूँ, मैं काैन हूँ तुम नही जानते आदि-आदि।

हम अपने असली स्वरूप काे भुल गये है, जिस कारण हमे अपने निजी गुण और संस्कार भी याद नही हैं। यह भुल ही सभी दुःखाे का कारण हैं।आत्मा की तीन मुख्य शक्तिया हाेती हैं।

“प्रथम-मन, द्वितीय-बुद्धि और तृतीय-संस्कार।”

आत्मा के सात माैलिक गुण हाेते हैं।

1. शांति (Shanti),

2. सुख (Sukh),

3. प्रेम (Prem),

4. शक्ति (Power),

5. ज्ञान (Gyan),

6. पवित्रता (शुद्धि-Purity),

7. आनंद (आत्मिक खुशी-Anand),

मन कि शक्ति काे सही समय पर उपयोग करें।

मन में वह असिमित शक्ति भरी हैं, जिसका सही उपयोग कर, हर असंभव कार्य काे सरलता पूर्वक संभव में बदला जा सकता हैं। मन कि शक्तियाे काे सही समय पर और सही दिशा में उपयोग करना सीखें।

“जहा १० शब्दाें से काेई बात बन जाये, वहा पर १०० शब्द बाेलकर।
अपनी आंतरिक मानसिक और वाणी की ऊर्जा काे यू ही नष्ट ना करें॥”

जहा सहना हाे वहा सहे, जहा सामना करना हाे वहा सामना करें, जीवन के कर्मक्षेत्र पर। यह सृष्टि एक रंगमंच हैं, हम सभी इंसान पार्टधारी है, हम सभी अपना-अपना पार्ट बजा रहे हैं। एक का भी पार्ट ना मिले दुसरे से।

मन कि शक्तियाे काे संचित करना सीखें, और संचित मन कि शक्तियाे काे सकारात्मक तरीके से जीवन में उपयोग करें।

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आपका सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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