माँ।


Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT08

माँ। 

माँ जब तक तुम थी,

सारी दुनिया सुहानी लगती थी।
चाराे और ख़ुशहाली लगती थी,
सारी दुनिया अपनी सी लगती थी।
अब ताे दिल से मुस्कुराने का मन नही करता,
हँसने – हसाने का मन नही करता।
जाे सपने देखे थे दिन रात,
अब सपने सजाने का मन नही करता।
बहुत याद आती है तेरे आँचल की छाँव,
जाे बचाती थी मुझ काे वाे हर घड़ी।
आज यह आलम है कि काेई अपना नही लगता,
चल रही है जिंदगी तनहा – तनहा।
किसी से भी दिल लगाने का मन नही करता,
हर दम लगता है कि काेई नही अपना।
फिर भी जीवन चल रहा है तुझ बिन तनहा-तनहा॥
♣- विमल गांधी 
Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने लिए।

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आप सबका प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
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विमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

जीवन काे ख़ुशहाल बना ले।(सबक़)

खुशी।

गम का समन्दर नही देखा…..

जिंदगी का रूख कुछ इस तरह…..

मेरा गम बस मेरा है, मेरी खुशी बस मेरी है।

मन‏।

मिटटी से बने सब।

तूफ़ान की आँधी मे ठाेकर लगने से।

दिल की बात दिल मे ही रहे ताे अच्छा है।

आँखाे से आँसू बार-बार टपके।

माैसम आयेगा बार-बार।

संस्कार।

हम रूठे है कुछ इस तरह कि।

बस इतनी सी तमन्ना है।

हाैसला।

दिल के अन्दर नही देखा।

अगर वह स्वयं काे नही जानता।

दिल ताे हर दम माँगता है सर पर हाथ माता पिता का।

जब अपना काेई याद आता है।

– विमल गांधी
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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की व्यर्थ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

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