ऐ मन तूँ क्यों उदास रे।


Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ऐ मन तूँ क्यों उदास रे 

ऐ मन तूँ क्यों उदास रे,
क्यों तूँ सुनें सब के मन की।

क्यों तूँ करे सब के मन की ,
कभी तूँ सुन अपने मन की।

और कर अपने मन की ,
सुनेगा अगर तूँ सबकी।

अलग-अलग दिशा मे जायेगा,
कभी भी तूँ खुश ना रह पायेगा।

किसी काे पड़ी नही है तेरी,
फिर क्यों तूँ परेशान हर घड़ी।

कभी ताे साेच ले कर ले अपने मन की,
तुझे जाे लगते है सब अपने, से।

असल मे काेई नही है अपना जाे,
जाे साेचे तेरी खुशी की ,तेरे मन की।

कभी ताे तूँ कर अपने मन की।

♣- विमल गांधी 
Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने लिए।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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