बचपन के दिन ही थे बहुत अच्छे।


Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ बचपन के दिन ही थे बहुत अच्छे। ϒ

याद आते है वाे बचपन के दिन।
जब हम छाेटे थे ताे बडे हाेने के लिये॥

बहुत उत्साहित रहते थे।
बडे हाेने की बहुत चाहत थी॥

जब बडे हुये ताे पता चला कि।
बचपन के दिन ही थे बहुत अच्छे॥

माँ का प्यार पिता का दुलार।
ना रिश्ताे का झंझट ना कल की चिंता॥

ना आज की फ़िक्र, ना ही भविष्य का डर।
ना अधूरे सपनाे का दुँख, ना अधूरे एहसास, का॥

पीछे मुड़ कर देखा ताे दूर है सब अपने।
जिंदगी ने हमें कहा से कहा पहुँचा दिया॥

ना जाने हम क्यों बडे हाे गये।
इस से ताे बचपन के दिन ही थे बहुत अच्छे॥

अब ताे है टूटे सपने अधूरे एहसास।
रिश्ते नाताे का दुँख और हर पल निभाते जायाे दुनियादारी॥

∅- विमल गांधी ∇
Vimal Gandhi-kmsraj51

विमल गांधी जी।

हम दिल से आभारी हैं विमल गांधी जी के प्रेरणादायक हिन्दी कविता साझा करने के लिए।

पढ़ेंविमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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