योगी जीवन-जीवन जीने का सार।


Kmsraj51 की कलम से…..
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ϒ योगी जीवन- जीवन जीने का सार। ϒ

योग का सीमा – जाति, धर्म या मज़हब में नहीं बंधा हाेना चाहीऐं। जाति, धर्म या मज़हब का चश्मा उतार कर सभी योग करें।

मुख्यतः योग २ प्रकार के हाेते है।
प्रथम – शारीरिक योग और,
द्वितीय – मानसिक योग,

शारीरिक योग से शरीर(तन) स्वस्थ रहता है और मानसिक योग से मन व बुद्धि स्वस्थ रहता है। आज के समय में इंसान इतना व्यस्त हाे गया है कि ना ही वह अपने शारीरिक स्वास्थ का ध्यान रख पाता है और ना ही मानसिक स्वास्थ का।

आज का इंसान सत्यता से इतना दुर चला गया है जिसकी काेई सीमा नहीं। आज का इंसान सत्यता काे इंकार कर, जिस ड़ाल पर बैठा है स्वयं उसी ड़ाल काे काट रहा हैं।

चाहीऐ स्वस्थ शरीर(तन), मन व बुद्धि – अपनाये योगी जीवन।

आज 21 जून 2015 को प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस(First International Yoga Day) पूरी दुनिया में बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।

मेरे सभी प्रिय पाठकों काे 21 जून – अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस ( International Yoga Day ) मुबारक हो।

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आप सभी का प्रिय दोस्त,

Krishna Mohan Singh(KMS)
Head Editor, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

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