संयम की महिमा।


Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ संयम की महिमा। ϒ

शरीर से व मन, वचन और कर्म से पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करें।

– Kmsraj51

संयमी पुरुष की स्मरणशक्ति, मेधा, आयु, आरोग्यता, पुष्टि, इन्द्रियों की शक्ति, शुक्र, कीर्ति और शक्ति सभी बढ़ी हुई रहती है तथा उसको बुढ़ापा देर से आता है।

– अष्टांगहृदय सूत्रः 7.71

अति यौन क्रिया से मनुष्य को सदा बचना चाहिए वरना शूल, खांसी, बुखार, श्वासरोग, दुबलापन, पीलिया, क्षय, आक्षेपक (ऐंठन) आदि व्याधियाँ ऐसे व्यक्ति को दबोच लेती है।

– चरक संहिताः 24.11

धर्म के अनुकूल, यश देने वाला, आयुवर्धक, दोनों लोकों में रसायन की तरह हितकारी और सर्वथा निर्मल ऐसे ब्रह्मचर्य का तो हम सदैव अनुमोदन करते हैं।

– अष्टांगहृदयसूत्र उत्तरः 40.4

“संग, दर्शन और श्रवण का प्रभाव अवश्य पड़ता हैष सावधान !”

“काम-वासना को पूरी तरह से वशीभूत करने की कोशिश करो। ऐसा करने में यदि कोई सफल हो सके तो उसके भीतर मेधा नाम की एक नई सूक्ष्म नाड़ी जागृत होती है। वह अधोगामी शक्ति को ऊर्ध्वगामी बनाती है। इस मेधा नाड़ी के खुलने के बाद सर्वोच्च परमात्मज्ञान प्राप्त होता है।”

– श्री रामकृष्ण परमहंस

जिसके मन से कामिनी-कांचन की आसक्ति मिट गई वह तो जिस क्षेत्र में सफल होना चाहे, हो सकता है। और तो क्या ? वह परब्रह्म परमात्मा को भी पा लेता है।

– अज्ञात

ब्रह्मचर्य वास्तव में एक बहुमूल्य रत्न है। यह एक सर्वाधिक प्रभावशाली औषध है, वास्तव में अमृत है जो रोग, जरा तथा मृत्यु को विनष्ट करता है। शांति, तेज, स्मृति, ज्ञान, स्वास्थ्य तथा आत्म-साक्षात्कार की प्राप्ति के लिए व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए जो परम धर्म है। ब्रह्मचर्य सर्वोत्तम ज्ञान है, सर्वश्रेष्ठ बल है। वह आत्मा वास्तव में ब्रह्मचर्यस्वरूप है और यह ब्रह्मचर्य में ही निवास करती है। मैं प्रथम ब्रह्मचर्य को नमस्कार करके ही असाध्य रोगों का उपचार करता हूँ। ब्रह्मचर्य सभी अशुभ लक्षणों को मिटा सकता है।

– धन्वंतरि

ध्यान के लिए ब्रह्मचर्य-व्रत आवश्यक है। ब्रह्मचारिव्रते स्थितः।

– गीताः 6.14

अच्छी बातें कहना वाणी का ब्रह्मचर्य है। अच्छी बातें सुनना कानों का ब्रह्मचर्य है। अच्छी चीजें देखना आँखों को ब्रह्मचर्य है।

– श्री उड़िया बाबा

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

-KMSRAJ51