प्यार ही सर्वोपरि है।


Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ प्यार ही सर्वोपरि है। ϒ

Love is paramount-kmsraj51

 

प्यार ही सर्वोपरि है – एक बार गोपाल बहुत परेशान था। उसके घर में शांति नहीं थी। सभी एक दूसरे से लड़ते झगड़ते रहते थे। एक दूसरे को  दोषी ठहराते थे और अंत में भगवान् पर भी दोषारोपण करते -“कि भगवान् तूने हमे क्यों जन्म दिया ? या फिर तुम सबकुछ देखते रहते हो और आनंद उठाते हो।”

एक दिन गोपाल ने कहा – “आज शाम को छः  बजे  सभी घर के आँगन में जमा होंगे, लड़ाई झगड़ा करते हुए तो हमने काफी समय बिताया है पर आज हम कहीं घूमने जाएंगे।”

घूमने की बात सुनकर सभी राजी हो गए। शाम के छः बजे तो सभी आँगन में इकट्ठे हो गए। सभी जानने के लिए उत्सुक थे कि आखिर घूमने कहाँ चलेंगे?

गोपाल ने कहा – “मैंने गाडी बुलाई है, उसी में बैठ कर चलेंगे।” तभी दो तीन रिक्शा आ गयी। फिर से झगड़ा शुरू हो गया। खैर समझाने पर वो सब रिक्शा में बैठ गए। लेकिन रिक्शा में बैठते ही मुंह सुकोड़ने लगे और भगवान् को ताने देना शुरू -“हे भगवान् ! कहाँ फंसा दिया? कहाँ घूमने जाएंगे ? “मंदिर घूमने आये हैं क्या हम ?

“हाँ क्यों नहीं ? अभी सभी तो भगवान् को याद  कर रहे थे। चलो इन्ही से पूछ लेते हैं—- ” – गोपाल ने कहा।

मुंह बनाकर सभी मंदिर में गए – गोपाल ने कहा “देखो – हम सब भगवान् से बहुत कुछ मांगते हैं, अपना दुःख दर्द इन्हें बताते हैं। कभी कभी गुस्से में इन्हें बहुत कुछ कह भी देते हैं पर कभी सोचा है कि ये तो भगवान् हैं परंतु वो जीव भी जो इनके संपर्क में है कितनी सादगी, प्रेम, सहनशीलता और शान्ति के साथ रहते हैं जो आवश्यक रूप से एक दूसरे के शत्रु होते हैं, यहाँ उनमें भी मित्रता है फिर तुम लोग तो भाई बहिन हो।”

बच्चों  की समझ में कुछ न आया तब गोपाल ने कहा -“शिवजी का वाहन – नंदी बैल, माता जी का वाहन – शेर, अर्थात – शेर बैल का शत्रु  होता है। शिवजी के गले का अलंकार / गहना -सांप, कार्तिकेय का वाहन – मोर, अर्थात मोर सांप का शत्रु होता है लेकिन कभी सुना है इन्हें आपस में झगड़ते हुए ?”

बच्चों ने कहा – “नहीं ये सब एक दूसरे के शत्रु नहीं बल्कि ये तो भगवान् का परिवार है।”

सीख:- गोपाल ने कहा – “ठीक कहा तुमने कि ये भगवान् का परिवार है पर हम भी तो उन्ही की संतान हैं और फिर तुम सब भी तो भाई बहन हो शत्रु नहीं। जब प्रकृति अनुरूप शत्रुता होने के बाद भी कुछ प्राणी प्रेम करना नहीं भूलते तो फिर मित्रता भाव प्रकृति होने पर हम एक दूसरे के शत्रु क्यों बन जाते हैं?”

सभी को गोपाल की बात अच्छी लगी, सभी ने मिलकर कहा – “प्यार ही सर्वोपरि है।” तभी से वो सभी लोग घर में शांतिपूर्वक और प्रेम से रहने लगे।

©- नंदिता शर्मा जी। (नोएडा, उत्तर प्रदेश)®

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नंदिता शर्मा जी।

हम दिल से आभारी हैं नंदिता शर्मा जी के “प्रेरणादायक कहानी – प्यार ही सर्वोपरि है।” हिन्दी में साझा करने के लिए।

नंदिता शर्मा जी के लिए मेरे विचार: 

“नंदिता शर्मा जी” ने Love is paramount (“ प्यार ही सर्वोपरि है। “) का कितना सुंदर-रमणीय वर्णन कहानी के माध्यम से किया हैं। जिसके हर एक शब्दों में सकारात्मक ऊर्जा रूपी अलाैकिक सार भरा हैं। जाे हर एक शब्द पर विचार सागर-मंथन कर हृदयसात करने योग्य हैं। सरल शब्दाे में हाेते हुँये भी हृदयसात करने योग्य हैं। जाे भी इंसान इन कहानियों काे गहराई(हर शब्दाे का सार) से समझकर आत्मसात करें, उसका जीवन धन्य हाे जायें।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51