हिंदी दिवस की शुभकामनाएं।


Kmsraj51 की कलम से…..

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ϒ हिंदी के सिंहासन पर। ϒ

मेरे प्यारे दोस्तों प्यारे पाठकों आप सभी काे हिंदी दिवस की शुभकामनाएं।

हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है।

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की राजभाषा होगी।

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हिन्दी दूर है हिन्दूस्तान से, नाम के लिये है राष्ट्र भाषा।
शायद हम भूल गये हैं, राष्ट्र भाषा की परिभाषा।

अरब में सुनाई देती है अरबी, बोलते हैं जापान में जापानी।
चाइना में चाइनीज़, इरान में इरानी, नहीं बोलते हैं हिन्दी हिन्दूस्तानी।

जहाँ हिन्दी बोली जाती है, वो बहुत कम ही स्थान है।
हिन्दी के सिंहासन पर, अंग्रेजी विराजमान है।

दूध पीते बच्चों को, अंग्रेजी यहां सिखाते हैं।
हिन्दी सीख कर क्या बनेगा, बच्चों को समझाते हैं।

भारतीयों के मुख पर तो, अंग्रेजी ही छाई है।
हिन्दी के शब्दों की तो बस केवल परछाई है।

हिन्दी का निज देश में, हो रहा अपमान है।
हिन्दी के सिंहासन पर, अन्ग्रेजी विराजमान है।

हमारी जननी आज घर से, बहुत दूर हो गयी है।
वेदनायें है दिल में उसके, उदास बैठी रो रही है।

उम्मीद है उसे बहुत जल्द, भारतेंदू कोई आयेगा।
उसे अपने घर ले जाकर, खोया सम्मान दिलायेगा।

शुक्ल प्रशाद और गुप्त, पुकारती कई नाम है।
हिन्दी के सिंहासन पर, अंग्रेजी विराजमान है।

पुरा हुआ मैकाले का स्वप्न, बहुत ही आसानी से।
लगता है भारतीय अंग्रेज रूचि विचार और वाणी से।

नहीं जानेंगे अगर हम अपनी भाषा, अपना इतिहास क्या जानेंगे।
अपनी संस्कृति सभ्यता, को कैसे हम मानेंगे।

प्रेमचन्द को हम भूल गये, शैक्सपियर का ध्यान है।
हिन्दी के सिंहासन पर, अंग्रेजी विराजमान है।

हिन्दी हमारी जननी है, इस के महत्व को जानो।
छिपा है इस में अलौकिक ज्ञान, उस ज्ञान को पहचानो।

सूर तुलसी ने इसे संवारा मीरा ने किया शृंगार।
देवों की भाषा है ये, अलौकिक है इस का संसार।

अनन्त है इस का सागर, इस में लिखे वेद पुराण है।
हिन्दी के सिंहासन पर, अंग्रेजी विराजमान है।

राष्ट्र की प्रगति के लिये, हिन्दी को अपनाना होगा।
हिन्दी देश की बिन्दी है, सब को ये समझाना होगा।

वो दिन न जाने कब आयेगा, जब हिन्दी होगी हर मुख पर।
हिन्दी सब की भाषा होगी, रहेंगे सब मिल-झुलकर।

वो दिन अब आने वाला है, ये मेरा ऐलान है।
हिन्दी के सिंहासन पर, अंग्रेजी विराजमान है।

© कुलदीप ठाकुर ~ रोहरू, हिमाचल प्रदेश ®

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Kuldeep Thakur

कृपा करना मां हाटेशवरी रक्षा करना सदा मेरी। मेरा ये नशवर जीवन, महकाए सदा औरों का उपवन, हृदय में रहे सदा देश प्रेम, करूं सदा मैं काम नेक, फूल हूं या शूल हूं मैं, मैं खुद भी नहीं जानता। मेरा देश हिंदूस्तान है जो सभ्यता सब से महान है, दिखाती है गीता पथ, ये मिला मुझे वर्दान है। मुझे वेदों का उपहार मिला है, मां हाटेशवरी से प्यार मिला है, मेरे आदर्श श्री राम हैं, कंठ में शिव नाम है, विवेका नंद का धर्म है मेरायही मेरी पहचान है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51