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आज आजादी है हमको मिली तो।

Kmsraj51 की कलम से…..

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Aaj Azadi Hai Hamko Mili Tho | आज आजादी है हमको मिली तो।

आज आजादी है हमको मिली तो,
दिलाई शहीदों और वीर जवानों ने।
सीमा के प्रहरी जवानों की वजह से
सुरक्षित हैं हम अपने मकानों में।

है उदगार हमारे क्या उनके खातिर?
क्या भाव और कितनी कैसी यादें हैं?
एक रस्म जान मजबूरन हर साल हम,
15 अगस्त व 26 जनवरी को मनाते हैं।

इन खेतों पर है आज हक हमारा तो,
उन शहीदों का बलिदान ये हम खाते हैं।
ये खेत, खलियान थे सब जमीदारों के,
न जाने ये बातें कैसे हम भूल जाते हैं?

था फिरंगियों का कब्जा जमीं पर हमारी,
हम तो उनकी शतरंज के मोहरे प्यादे थे।
जमीन हमारी थी और था देश भी हमारा,
पर फिर भी बने वे आकर यहां शहजादे थे।

हम काश्तकार थे महज जमीनों के,
मालिक तो वे ही असल कहलाते थे।
फसल उगाते वे हमसे थे यहां खेतों में,
फिर कच्चा माल अपने देश ले जाते थे।

भला तो हो उन बहादुर शहिद वीरों का,
जो देश के लिए बलिदान अपना चढ़ाते थे।
एक धेला न लिया था पगार का उन्होंने,
खुद कमाते थे और मेहनत का ही खाते थे।

आज हमको मिली आजादी विरासत में,
हम पगार लेकर भी काम कहां करते हैं?
लाखों के वेतन भत्ते हैं हमारे फिर भी तो,
सब्सिडी और मुफ़्त का इंतजार करते हैं।

मुफ़्तखोरी की आदत से भारत को जल्दी,
हम सबको मिलकर निजात दिलाना होगा।
आर्थिक संकट में फंसते आजाद भारत को,
हमको ही तो बरबाद होने से बचाना होगा।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — जरा सोचिये जमीं भी अपनी थी देश भी अपना था फिर भी था फिरंगियों का कब्जा जमीं पर हमारी, हम तो उनकी शतरंज के मोहरे व प्यादे थे। जमीन हमारी थी और था देश भी हमारा, पर फिर भी बने वे आकर यहां शहजादे थे क्यों ? हम तो नाम मात्र के काश्तकार थे जमीनों के, मालिक तो वे ही असल कहलाते थे। फसल उगवाते वे हमसे थे यहां खेतों में और फिर कच्चा माल अपने देश ले जाते थे। गर्व करों उन बहादुर शहिद वीरों का, जो देश के लिए बलिदान अपना चढ़ाते थे। कभी भी एक धेला न लिया था पगार का उन्होंने, सदैव ही खुद कमाते थे और मेहनत का ही खाते थे। जो आज़ादी हमे विरासत में मिली है उसका सम्मान क्यों नहीं करते आज? पगार लेते है लाखों में काम ना करने के। करों संकल्प की आज से ही मुफ़्तखोरी की आदत से भारत को जल्दी, हम सबको मिलकर निजात दिलाना होगा। आर्थिक संकट में फंसते आजाद भारत को, हमको ही तो बरबाद होने से बचाना होगा।

—————

यह कविता (आज आजादी है हमको मिली तो।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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