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“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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अखंड।

Kmsraj51 की कलम से…..

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Akhand | अखंड।

In this poem, a prayer has been made for the continuity of knowledge, meditation and spiritual consciousness by making the lamp a symbol.

हे दीप मुझे तुम निरंतरता दो
खंड-अखंड का वरदान हो
चक्षु मेरे निहारे अनायास ही
अंतस् की ही तुम पहचान हो॥

पात्र में संगृहित कर आशाओं को
वर्तिका की वर्णिका में आग हो
दीपशिखा की दीपिका में
प्रचंड प्रबल प्रत्युष भाग हो॥

साधक की साधना की अविरति में
स्थिर-चित्त की अनुराग हो
अजना में जलती धधक की तुम
अनहद अनमिट त्रिषा-तश्नग हो॥

पुनरावृत्ति मंत्रों की मालाओं में
करों की मध्यमा अनाहत की रुचा हो
विश्व-बंधत्व की पिपासाओं में
हे जोत तुम मेरी निष्ठा की ऋचा हो॥

पीतशिखे पीताम्बरे रक्त-वाहिनी में
विधु स्तुति बन रची-बसी हो
ब्रह्मास्त्र हो पिंड-गात में योगिनी बन
उर उक्थ में जीवन-शक्ति की त्रिषा हो॥

मैं प्यासा भटक रहा निवड़ तन लिये
बियावान बन में सुर-समरथ बन आओ
कण-कण में मेरे हे बगलामुखी माते
ऋद्धि-सिद्धि स्तुति की श्रीफली हो॥

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता में दीपक को प्रतीक बनाकर ज्ञान, साधना, और आध्यात्मिक चेतना की निरंतरता की प्रार्थना की गई है। कवि दीपक से खंड-अखंड (संपूर्णता और अनंतता) का वरदान मांगते हैं, जिससे उनका अंतर्मन प्रकाशित हो सके। दीपक की लौ को आशाओं और ऊर्जा का स्रोत माना गया है, जो साधना, ध्यान, और आत्मज्ञान में सहायक होती है। यह लौ सिर्फ बाहरी रोशनी नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति और आध्यात्मिकता का प्रतीक भी है। कवि इसे विश्व-बंधुत्व, निष्ठा और शक्ति का प्रतीक मानते हुए इसे जीवन की प्यास बुझाने वाली ज्योति के रूप में देखते हैं। वे इसे ब्रह्मास्त्र, योगिनी और जीवन-शक्ति का रूप मानते हैं, जो व्यक्ति को दिशा और संबल प्रदान करता है। अंत में, कवि स्वयं को एक प्यासे यात्री के रूप में चित्रित करते हैं, जो ज्ञान और आध्यात्मिकता की तलाश में है। वे माँ बगलामुखी से प्रार्थना करते हैं कि वे उन्हें शक्ति और सिद्धि का आशीर्वाद दें, जिससे उनका जीवन सार्थक और आलोकित हो सके।

—————

यह कविता (अखंड।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

—————

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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