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बाप बेटी के रिश्ते।

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    • ♦ बाप बेटी के रिश्ते। ♦
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♦ बाप बेटी के रिश्ते। ♦

वह नन्ही सी कली जब, खिल आंगन में आई।
सारे घर की शोभा तब, थी उसीने ही बढ़ाई।
निज पेट काट – काटकर, तब पिता ने पढ़ाई।
ज्यों जवान हुई थी, त्यों ही कर दी थी सगाई।
भावना प्रेम की दोनों ने, अंदर ही अन्दर छुपाई।
‘शादी हुई तो सह न पाया’ बाप बेटी की विदाई।

पत्नी बोली बस करो जी, यह भी कैसी है रुलाई ?
छुपा लो चीखें ज्यूँ , अर्थी पे जवां बेटे की छुपाई।
बाप बेटी के रिश्ते को पगली, तू क्या समझ पाई ?
आज बेटी नहीं जी मैंने, अपनी रूह ही है बेहाई।
न जाने फूल सी पली को, कैसे रखेगा जंवाई ?
चिंता बाप की है पगली, तेरी समझ में न आई।

फूट – फूट कर बिटिया रोए, मां – बाप और भाई।
टाली भी न जाए जी रीत, न ही जाए यह निभाई।
पिता तो यूं रोता है जैसे, लुट गई हो उसकी कमाई।
गम, मौत बेटे की झेल लिया, झेल सका न विदाई।
जब डोली उठी तो पिता को, यादें बहुत सारी आई।
भला बेटी के जाने की, कर पाएगा कौन कहाँ भरपाई ?

ससुराल में गम सब सहे पर, पिता को गाली न सह पाई।
स्वाभिमान जो है पिता उसका, चाहे हो जाए फिर लड़ाई।
दिक हुई तो लाडली, लौट, पुनः बाबुल के घर को आई।
लाड प्यार से समझा बुझा के, बाबुल ने वापिस भिजवाई।
मौत पे पिता की जिसने, दुख में छाती कूट कूट कर बजाई।
मां – बाप तक ही तो था ये मायका, हो गई हूँ अब मैं पराई।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — इस संसार में पिता और पुत्री का रिश्ता बहुत ही पवित्र और स्नेह भरा होता है। जहा माँ उसके स्वास्थ्य और तंदुस्र्स्ती का ध्यान रखती है, वही पिता उसके भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए अनवरत कार्य करता रहता है। एक माँ तो अपने पुत्री से अपना प्यार व स्नेह दिखाती रहती है, लेकिन एक पिता अपनी बेटी के प्रति अपना अति स्नेह व प्यार को कभी बताता या जताता नही है। अपनी बेटी की सुख सुविधाओं के लिए हर संभव कोशिश करता रहता है। जब बिटिया बड़ी होती है, उसका विवाह कर पिता को अपने आप से बिटिया का दूर चले जाना बहुत ही दुखमय होता है। पर क्या करें दुनिया की जो रीत है उसे भी तो निभाना है। ससुराल में वह गम सब सहे पर, पिता को गाली न सह पाई कभी। स्वाभिमान जो है पिता उसका, चाहे हो जाए फिर लड़ाई। दिक हुई तो लाडली, लौट, पुनः बाबुल के घर को आई। लाड प्यार से समझा बुझा के, बाबुल ने वापिस भिजवाई।

—————

यह कविता (बाप बेटी के रिश्ते।) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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