नाभि चिकित्सा।

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ϒ नाभि चिकित्सा। ϒ

नाभि द्वारा समस्त प्रकार की बीमारियों का उपचार सदियों से होता आया है, यह उपचार विधि अत्यन्त सरल है। विश्व के हर काेने में, कही न कही, किसी न किसी नाम या किसी न किसी चिकित्सा पद्धति में इस उपचार का उल्लेख हमे देखने काे मिल ही जाता है। परंतु एक ताे इसका एक जगह पर एक साथ संगृह नही है, फिर यह अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियाें में इसका उल्लेख अलग-अलग नामाें से किया गया हैं। यहा पर नाभि उपचार से विभिन्न प्रकार की बीमारियों के उपचार की चर्चा की जा रही है। नाभि उपचार – हमारे देश में देसी उपचारकर्ताओं द्वारा बडे ही विश्वास से किया जाता रहा हैं। जैसे पेट से संबंधित बीमारियों में या फिर नाभि खिसक जाने पर, दस्त जैसी सिकायताें पर या अन्य प्रकार के पेट से संबंधित बीमारियों में इसका प्रयाेग किया जाता रहा है।

कभी-कभी मुख्यधारा की चिकित्सा या प्रचलित चिकित्सा पद्धतियाें के उपचार से जब राेगी परेशान हाे जाता था। तब नाभि उपचारकर्ता की शरण लेता था। नाभि के जानकार व्यक्तियाें द्वारा नाभि स्पंदन की जानकारी कर, नाभि स्पंदन काे यथास्थान पर ला कर, उसके इस राेग काे जड़ मूल से नष्ट कर देते हैं। यह ताे बात – मात्र नाभि स्पंदन परिक्षण के साथ उसे यथास्थान ला कर उपचार करने की है।

हमारे प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति मे नाडी परिक्षण से विभिन्न प्रकार की बीमारियों की जानकारी का विस्तृत विवरण किया गया है, इस प्राचीनतम चिकित्सा में नाडी की गति, नाडी का स्थान व उसकी चाल से बीमारियों की जानकारी के विवरण में नाभि-नाडी का भी विवरण हैं। परंतु नाभि जैसे छोटे से स्थान में अनेकाे प्रकार की बीमारियों काे पहचानना अत्यन्त कठिन कार्य है।

जबकि इस नाभि-नाडी परिक्षण से कई  प्रकार के ऐसे असाध्य राेग तथा ऐसे राेग जाे साधारण नाडी परिक्षण या फिर अत्यआधुनिक चिकित्सकीय परीक्षणाें से भी ज्ञात नहीं हाेते थे, उसे नाभि-नाडी परिक्षणकर्ता आसानी से पहचान कर बतला दिया करता था। इस नाभि-नाडी परिक्षण में ताे यहा तक उल्लेख है कि असाध्य बीमारियों के साथ अज्ञात बीमारियों की जानकारी के साथ परिक्षणकर्ता यह तक बतला दिया करता था की बीमारी साध्य है या असाध्य।

महिलाओं में बाॅझता का कारण या बाॅझता साध्य है या असाध्य, बाॅझता उपचार की प्राकृतिक विधियाॅ आदि सभी बतला दिया करता था। चूंकि यह परीक्षण एक तो कठिन था, साथ ही इसके जानकाराें का व्याप्त अभाव, एंवम इसके जानकार व्यक्तियों ने इसे अपने तक ही सीमित रखा, नाभि-नाडी परिक्षण जैसे विषयों पर विद्वान चिकित्सकाें ने किसी प्रकार का कार्य नही किया न ही इस विषय पर ग्रंथ आदि की रचना की गई। इन्हीं सभी  कारणाें से हमारे देश की यह अमूल्य धराेहर धीरे-धीरे लुप्त हाेती गयी। हमारे देश की इस अमूल्य धराेहर व इसकी उपयाेगिता काे बाैद्ध भिझुओं ने पहचाना एंव अपने साथ इसके मूल सिद्धान्ताें काे अपने देश चीन व जापान ले गये, एंव एक नई उपचार विधि “ची नी शाॅग चिकित्सा” के नाम से विकसित हुई एंव आज बडे-बडे मिसाज थैरापी, एक्यूपंक्चर, तथा परंपरागत प्राकृतिक चिकित्सा तथा सौंदर्य समस्याओं के निदान में `ब्यूटी क्लिनिक` आदि में इसका प्रयोग बडे ही आत्मविश्वास के साथ किया जा रहा हैं।

इसका एक कारण और भी है, इसके परिणाम अत्यन्त ही आश्यर्चजन व आशानुरूप हैं। इस सरल उपचार विधि का प्रयोग Five Star Hotels में शरीर की सर्विसिंग हेतु किया जाता है। जिस प्रकार से हम अपने वाहन आदि की सर्विसिंग इस लिये कराते है ताकि हमे मालूम हाे कि इसमें क्या खराबी है जाे भी खराबी हाेती है, उसे ठिक कर दिया जाता है, इससे वाहन पहले की अपेक्षा अच्छी तरह से कार्य करने लगता हैं। ठीक इसी प्रकार से हमारे शरीर के आंतरिक अंग नियमित कार्य करते-करते, कभी-कभी निष्क्रिय सुषुप्तावस्ता में आ जाते है इससे रस रसायनाें में परिवर्तन हाेने लगता है इससे विभिन्न प्रकार की बीमारियां होने लगती हैं। 

यदि शरीर का एक अंग कार्य नहीं करता ताे इसका परिणाम यह हाेता है, उससे संबंधित अन्य अंग भी प्रभावित हाेने लगते हैं। “ची नी शाॅग चिकित्सा” में संपूर्ण बीमारियों का कारण पेट काे माना गया है, पेट में पाये जाने वाले  आंतरिक अंगाें काे ही उपचार हेतु टारगेट किया जाता है। इसकी पहचान हेतु दाे विधियाॅ अपनाई जाती है एक नाभि परिक्षण द्वितीय पेट पर पाये जाने वाले अंगाें की पहचान कर उपचार किया जाता हैं। जापानीयाें में नाभि परिक्षण ही प्रमुख है इसमें सर्वप्रथम नाभि-नाडी व स्पंदन दाेनाे का संयुक्त परिक्षण कर उपचार किया जाता है, जापानीयाें का मानना है कि नाभि का संबंध भावनात्मक हाेता हैं। नाभि की बनावट धारियों से बीमारियों की पहचान की जाती है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

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केले के फूल खाने के फायदे।

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ϒ केले के फूल खाने के फायदे। ϒ

केले का पेड़ एक ऐसा पेड़ है। जिसके हर हिस्से को किसी न किसी काम में लाया जा सकता है। फूल, फल और तने को खा सकते हैं, पत्तियों का इस्तेमाल प्लेट की तरह कर सकते हैं और छाल का इस्तेमाल कागज बनाने के लिए किया जा सकता है। केले के दिल के तौर पर जाने, जाने वाले केले के फूल में ढेर सारा फाइबर, प्रोटीन, पोटैशियम, कैल्शियम, कॉपर, फॉस्फोरस, आयरन, मैग्नीशियम और विटामिन ई होता है। इस फूल को खाने से होते हैं कौन-कौन से फायदे…..

1. शुगर के मरीजों के लिए अच्छे होते हैं।
एक शोध में पाया गया कि डायबिटीज के मरीजों के इन्सुलिन लेवल केले के फूल खाने से घट गए, हालांकि, इस शोध को अभी क्लीनिकली प्रूव नहीं किया जा सका है।

2. ये नैचरल ऐंटी-डिप्रेसेंट हैं।
क्योंकि इन फूलों में ढेर सारा मैग्नीशियम होता है, ये आपका मूड सुधारकर स्ट्रेस को कम करने की शक्ति रखते हैं।

3. फ्री रैडिकल से लड़ने वाले ऐंटी-ऑक्सिडेंट्स से लैस।
फ्री रैडिकल स्वस्थ सेलों पर हमला कर उन्हें खराब कर देते हैं, जिससे दिल की बीमारी, कैंसर और स्किन एजिंग जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। इन फूलों में ऐंटी-ऑक्सिडेंट होते हैं जो फ्री रैडिकल्स का मुकाबला कर उन्हें बॉडी डैमेज करने से बचाते हैं।

4. ये खाने में हल्के होते हैं और पाचन संबंधी दिक्कतें दूर करते हैं।
केले के फूल खाने में बहुत हल्के होते हैं और पाचन तंत्र को आराम देते हैं। अगर पेट में दर्द हो या ऐसिडिटी के कारण सूजन हो जाए, तो इनके सेवन से दूर हो जाती है।

5. इन्फेक्शन्स से बचाते हैं।
ये फूल पैथोजेनिक बैक्टीरिया की ग्रोथ को रोकते हैं जिससे इन्फेक्शन नहीं होते।

6. माहवारी की ब्लीडिंग कंट्रोल कर PCOS को करते हैं ठीक।
आयुर्वेद के मुताबिक, एक कप केले के फूल को दही में पकाकर खाने से शरीर में प्रोजेस्ट्रोन लेवल बढ़ता है और माहवारी में ज्यादा खून नहीं बहता। माना जाता है कि केले के फूलों से पॉलिसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम (PCOS) से जूझ रही महिलाओं को मदद मिलती है।

7. खून की कमी से बचाते हैं।
अधिक आयरन होने से, केले के फूल शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाते हैं और एनीमिया को रोकते हैं।

8. स्तनपान कराने वाली माओं का दूध बढ़ाते हैं।
आयुर्वेद का सुझाव है कि स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को केले के फूल खाने चाहिए। इससे उन्हें दूध ज्यादा बनेगा।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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करी पत्ते के स्वास्थ्य लाभ।

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ϒ करी पत्ते के स्वास्थ्य लाभ। ϒ

सांभर में तड़का लगाने के लिए, पोहे का स्वाद बढ़ाने के लिए करी पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा यह कई दूसरे व्यंजनों में भी सुगंध और स्वाद के लिए इस्तेमाल किया जाता है। करी पत्ते में कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो सेहत के लिए वरदान हैं।
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इसका इस्तेमाल त्वचा और बालों के लिए भी अच्छा माना जाता है। इसके अलावा करी पत्ते के कई ऐसे फायदे भी हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। आइए, जानते हैं करी पत्ता और किस-किस तरह हमारे लिए फायदेमंद है।

  • ऐंटीऑक्सि‍डेंट, एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुणों से भरपूर करी पत्ते स्किन के लिए बहुत फायदेमंद है।
  • अगर आपका लीवर कमजोर है तो करी पत्ता आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। इसमें मौजूद विटमिन सी लीवर को सेहतमंद रखता है।
  • करी पत्ते में आयरन और फॉलिक एसिड पाया जाता है। इस वजह से यह एनीमिया के खतरे से सुरक्षित रखता है।
  • करी पत्ते के इस्तेमाल से बाल जल्दी सफेद नहीं होते हैं और डैंड्रफ की प्रॉब्लम भी दूर हो जाती है।
  • करी पत्ते के सेवन से कब्ज की समस्या में राहत मिलती है। इससे पेट से जुड़ी दूसरी दिक्कतों में भी आराम मिलता है।
  • करी पत्ता कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करने में मददगार है। यह ब्लड में गुड कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ाता है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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प्राचीन घरेलू स्वास्थ्य दोहावली।

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ϒ प्राचीन घरेलू स्वास्थ्य दोहावली। ϒ

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पानी में गुड डालिए बीत जाए जब रात।
सुबह छानकर पीजिए अच्छे हाें हालात॥ (1)

धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन(आंख) में डार(डाल)।
दुखती अँखियां ठीक हाें, पल(समय) लागे दाे-चार॥ (2)

ऊर्जा मिलती है बहुत, जब पिएं गुनगुना नीर।
कब्ज खत्म हाे पेट की, मिट जाए हर पीर(दर्द)॥ (3)

प्रातःकाल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप।
बस दाे-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप॥ (4)

ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार।
करें हाजमे का सदा – ये ताे बंटाढार॥
(5)

भोजन करें धरती पर अल्थी-पल्थी मारकर।
चबा-चबा कर खाए, वैद्य न झांके द्वार॥
(6)

प्रातःकाल फल रस लाे, दोपहर लस्सी-छाछ।
सदा रात में दूध पी, सभी राेग का नाश॥
(7)

प्रात काल, दोपहर लीजिये जब नियमित आहार।
तीस मिनट की नींद लाे, राेग न आवें द्वार॥
(8)

भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार।
डाक्टर, ओझा व वैघ का लुट जाए व्यापार॥
(9)

घूंट-घूंट पानी पियाे, रहे तनाव से दूर।
एसिडिटी या मोटापा होवें चकनाचूर॥ (10)

अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास।
पानी पीजै सदैव बैठकर, कभी न आवे पास॥
(11)

रक्तचाप बढने लगे – तब मत सोचो भाई।
सौगंध राम की खाइके, तुरंत छाेड़ दाे चाय॥
(12)

सुबह खाइये कुवंर-सा, दोपहर यथा नरेश।
भाेजन लीजै रात में, जैसे रंक सुरेश॥
(13)

♦ देर रात तक जागना, राेगाे का जंजाल।
अपच, आंख के रोग संग, तन भी रहे निढाल॥ (14)

♦ दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ।
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ॥ (15)

♦ सत्तर राेगाे काे करें-चूना हमसे दूर।
दूर करें ये बांझपन, सुस्ती अपच हुजूर॥ (16)

♦ भोजन करके जाेहिए, केवल घंटा डेढ।
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड॥ (17)

♦ अलसी, तिल, नारियल, घी, सरसों का तेल।
यही खाइए नहीं ताे, हृदय समझिए फेल॥ (18)

♦ पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान।
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान॥ (19)

♦ एल्युमीनियम के पात्र का करता है जाे उपयाेग।
आमंत्रित करता सदैव ही अड़तालीस(48) राेग॥ (20)

♦ फल या मीठा खाइके, तुरंत न पीजै नीर।
ये सब छाेटी आंत में बनते विषधर तीर॥ (21)

चोकर खाने से सदा – बढ़ती तन की शक्ति।
गेहूं माेटा पीसिये, दिल में बड़े विरक्ति॥ (22)

♦ राेज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय।
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय॥ (23)

♦ भोजन करके खाइए – सौंफ, गुड़, अजवाइन।
पत्थर भी पच जायेगा – जानै सकल जहान॥ (24)

♦ लौकी का रस पीजिए – चोकर युक्त पिसान।
तुलसी, गुड़, सेंधा नमक – हृदय राेग निदान॥ (25)

♦ चैत्र माह में नीम की पत्ती हर दिन खावे।
ज्वर, डेंगू या मलेरिया – सोलह मील भगाये॥ (26)

♦ साै वर्षों तक वह जिए – लेते नाक से सांस।
अल्पकाल ओ जिवें – जाे करें मुंह से श्वासोश्वास॥ (27)

♦ ज्यादा शीतल व गर्म पानी से कभी न करें स्नान।
घट जाता है आत्मबल, नैनन काे नुकसान॥ (28)

♦ अगर हृदय राेग से आपकाे बचना है – श्रीमान।
ताे सुरा(शराब), चाय व कोल्ड ड्रिंक का मत करिए पान॥ (29)

♦ जाे तुलसी का पत्ता करें सदैव जीवन में उपयाेग।
मिट जाते हर उम्र में – उसके तन के सारे राेग॥ (30)

प्यारे दोस्तों – ऊपर दिए गये – प्राचीन घरेलू आयुर्वेदिक चिकित्सा, अच्छे स्वास्थ्य के लिए 100% कारगर हैं। जिसका शरीर पर किसी तरह का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।

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सफेद दाग का उपचार।

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ϒ सफेद दाग का उपचार। ϒ

सफेद दाग काे Curing Vitiligo (श्वेतदाग) के नाम से भी जाना जाता हैं। जिसका मतलब है सफेद (leuco) और चर्म या त्वचा (Derma). इसकाे “Achromia” के नाम से भी जाना जाता हैं। इसका मतलब है सामान्य रंग अथवा वर्णकयुक्तता की कमी अथवा उसका अभाव, जैसे त्वचा की वर्णहीनता, अवर्णता। इस बीमारी में चमड़ी के सामान्य रंग में फर्क आ जाता है आैर वह सफेद हाे जाती हैं।

सफेद दाग एक त्वचा रोग है। हमारे भारत में कई लाेग इस राेग काे कुष्ठ(Leprosy) रोग का नाम देकर हमारे मन में इस राेग के लिए कुठां पैदा कर दी हैं। पुरे विश्व में 1.5 – 2.5% लाेग इस राेग से प्रभावित हैं। लेकिन भारत में इस राेग से 09 – 11% लाेग प्रभावित है और इसके बाद मेक्सिको में पाएं जाते हैं।

इस रोग में त्वचा पर अलग-अलग अकार के सफेद दाग देखें जा सकते हैं। ये राेग किसी काे भी हाे सकता है, जैसे बच्चाें, महिलाओं और पुरुषाें काे। यह राेग किसी भी उम्र के व्यक्ति काे हाे सकता हैं। कई बार ये राेग वंशानुगत भी हाेता हैं। सफेद दाग का राेग ठिक हाे जाता है इसलिए आपकाे धैर्य रखने की जरूरत हैं।

अगर आप सफेद दाग के राेग काे दुर करना चाहते है ताे, आपकाे कुछ घरेलू उपचार के साथ, बहुत ही जरूरी बाताें का भी ध्यान रखना हाेगा।

इस राेग काे दुर करने के लिए कुछ सहज घरेलू उपचार।

1. विषाक्त पदार्थ काे बाहर निकाले। – शरीर से विषाक्त पदार्थ काे बाहर निकालने से ना राेके, जैसे- मल, मूत्र, पसीना।

2. ये चीजे ना खायें। – इस रोग में आपको मिठाई, रबड़ी, दूध और दही को एक साथ सेवन नहीं करना चाहिएं। इससे आपकी त्वचा पर बुरा असर पड़ सकता हैं। ताे ध्यान रखें, एेसी स्थिति में एेसे खाद्य पदार्थ से बचे।

3. गरिष्ठ(भारी) भोजन ना करे। – बहुत ज्यादा गरिष्ठ(भारी) भोजन का सेवन ना करें, इससे आपकाे तकलिफ हाे सकती हैं। जैसे- उड़द की दाल, मांस, मछली आदि का सेवन ना करें।

4. इन बातों का ख्याल रखें। – भोजन में खटाई, तेज मिर्च और गुड़ का सेवन ना करें।

5. ज्यादा नमक(Salt) ना खाए। – ज्यादा नमक खाना आपके लिए हानिकारक हाे सकता हैं। इसलिए खाने में ज्यादा नमक का प्रयोग ना करें। कम से कम नमक का सेवन करें और करें अपनी इस समस्या काे दुर।

6. बथुआ(Bathua) है फायदेमंद। – रोज बथुआ की सब्ज़ी खाये। इसकाे उबाल कर इसके पानी से ही सफेद दाग काे धाेये। कच्चे बथुआ का रस(Juice) दाे कप निकाल कर आधा कप तिल के तेल(Sesame oil) में मिलाकर धीमी आँच पर पकायें। जब सिर्फ तेल रह जाये इसे उतार कर शीशे के बोतल में भर लें। इस तेल काे प्रतिदिन ३-४ बार सफेद दाग पर लगाये।

7. अखरोट(Walnuts) खाये। – अखरोट में इतनी शक्ति है कि वह आपकी सफेद पड़ चुकी त्वचा काे भी काली कर सकता हैं। ५० ग्राम अखरोट का प्रतिदिन सेवन करे और देखें इससे आपकाे कितना फायदा हाेता हैं। 

8. लहसुन का रस(Garlic juice) – लहसुन का सेवन प्रतिदिन करें। इसके रस में हरड़ घिसकर सफेद दाग पर लेप करें, इससे आपके त्वचा के सफेद दाग मिट जायेगे और आपकाे इस राेग से छुटकारा मिल जायेगा। 

9. उड़द की दाल(Urad Dal) – उड़द की दाल काे पानी में ८ घंटे तक भीगाें दे। इस भीगी हुई दाल काे पीसकर सफेद दाग पर ४ महीने तक प्रतिदिन लगाये, इससे सफेद दाग मिट जायेगा।(याद रखें – प्रतिदिन उड़द की दाल काे पानी में ८ घंटे तक भीगाें कर, पीसकर लगाये).

10. नीम का उपयोग करें(Use Neem) – नीम की पत्ती, फूल और फल आदि काे सुखाकर, पीस कर चूर्ण बना ले और इसे एक डिब्बें में भर कर रख ले। प्रतिदिन २-३ ग्राम इस चूर्ण काे पानी के साथ लें।

मात्रा चूर्ण बनाने के लिये। – 

नीम की पत्ती – १०० ग्राम, नीम के फूल – ५० ग्राम, नीम के फल – १०० ग्राम,

11. क्या खायें – अपने खाने में कम से कम सप्ताह में दो दिन काले चने की चपाती(रोटी) खायें, और क्या-क्या खाये – मूंग की दाल, बथुआ, पालक, भिंडी, ककड़ी, गोभी, गाय के दूध, मक्खन और आसानी से पच जाने वाले भोजन ही खाये। ताजा फल व रस और पानी का खूब सेवन करें।

© कमलेश कुमार ® ID – kamleshk177@gmail.com

हम दिल से आभारी हैं कमलेश कुमार जी के। आपने https://kmsraj51.com के पाठकों के लिये सरल तरीके से घर का बना आयुर्वेदिक जड़ी बूटी द्वारा सफेद दाग का उपचार हिंदी में Share करने के लिये।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

आयुर्वेदिक काढ़ा।

Kmsraj51 की कलम से…..
Kmsraj51-CYMT-JUNE-15

ϒ आयुर्वेदिक काढ़ा। ϒ

मेरे सभी प्रिय पाठक मित्रों,

सर्दियों का माैसम आ गया हैं।

अच्छा स्वास्थ्य बनाने के लिए सर्दियों का माैसम Other माैसम की अपेक्षा ज्यादा लाभप्रद हाेता है। सर्दियों के माैसम में लगभग हरेक हरी सब्जियों का खजाना प्रकृति की आेर से हम मनुष्याें काे उपहार स्वरूप मिलता हैं।

सर्दियों के माैसम में स्वास्थ्य संबंधित बीमारियां भी बहुत ज्यादा हाेती हैं। सर्दी, जुक़ाम, कफ, खांसी और बुखार(ज्वर) आम बात हैं।

क्या कारण है जाे इस माैसम में सर्दी, जुक़ाम, कफ, खांसी और बुखार(ज्वर) इतनी जल्दी-जल्दी हाे जाती हैं। इसका मुख्य कारण है रोग प्रतिरोधक क्षमता(Immunity) का ज़रूरत से ज्यादा कम हाे जाना। अर्थात जब-जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता(Immunity) कम हाे जाती है बीमारियाें के जीवाणु अटैक कर देते है और शरीर बीमार हाे जाता हैं।

अब आप सभी के मन में सबसे बड़ा प्रश्न चल रहा हाेगा की आखिरकार – रोग प्रतिरोधक क्षमता काे कैसे संतुलित रखा जाए।

आज मैं आप सभी काे “रोग प्रतिरोधक क्षमता” काे संतुलित रखने के लिए, घर का बना “आयुर्वेदिक काढ़ा” बनाने का तरीका Step by Step बताऊगां।

“आयुर्वेदिक काढ़ा” बनाने का तरीका Step by Step  

“आयुर्वेदिक काढ़ा” बनाने के लिए जिन सामग्रियों की ज़रूरत पड़ती है ओ इस तरह से हैः

काली तुलसी की पत्ती, लाैंग, काली मिर्च, इलायची, अदरक, गुड़, चायपत्ती और पानी।

एक व्यक्ति के लिए सामग्रियों की मात्राः

काली तुलसी की पत्तीः कम से कम १५ – २० पत्ते।

लाैंगः कम से कम ३ – ५ पीसी हुई ।

काली मिर्चः कम से कम ४ – ६ पीसी हुई।

इलायचीः कम से कम २ पीसी हुई छोटी इलायची।

अदरकः १५ – २० ग्राम पीसी हुई।

गुड़ः स्वादानुसार।

चायपत्तीः कम से कम १ छोटा चम्मच।

पानीः ४०० मिलीलीटर(400 ML)।

“आयुर्वेदिक काढ़ा” बनाने की विधि।

सबसे पहले गैस स्टोव पर बर्तन में पानी चढ़ायें(रखें), जब पानी उबलने लगे तब उसमें सबसे पहले पीसी हुई लाैंग, काली मिर्च, इलायची, अदरक, और स्वादानुसार गुड़ ड़ाले, इन सब के ड़ालने के २ मिनट के बाद काली तुलसी की पत्ती ड़ाले, इसके ३-४ मिनट के बाद चायपत्ती ड़ाले, इन सब सामग्रियों काे ड़ालने के बाद तब तक पकाए – जब तक पानी की मात्रा लगभग १७५ मिलीलीटर(ml) रह जायें, इसे गैस स्टोव से उतार कर चाय छन्नी से कप या गिलास में छान लें। आपका “आयुर्वेदिक काढ़ा” बनकर तैयार हैं।

अब इसे गर्म चाय या कॉफी की तरह फुक-फुक कर पी लें।

सुबह की शुरूआत आयुर्वेदिक काढ़ें के साथ करें – बीमारियां आपसे काेसाें दुर हाेगीं।

अच्छी सेहत के लिए याद रखें।

संयमित व नियमित आहार लें।

⇒ खाने के साथ सलाद जरूर लें।

⇒ मौसम के अनुसार फलों का जूस व साबुत फल खाना ना भुलें।

 रात के खाने के बाद कम से कम १०० कदम अवश्य चलें।

 दिन में खाने के बाद कम से कम २०-३० मिनट तक आराम करें।

⇒ प्रतिदिन स्नान करें।

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निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

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* चांदी की छड़ी।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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आम का पन्ना-एक पारम्परिक भारतीय पेय।

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ϒ आम का पन्ना  एक पारम्परिक भारतीय पेय। ϒ

Aam Panna

आम का पन्ना – एक पारम्परिक भारतीय पेय”

कच्चे आम का पन्ना गर्मियों में सर्वाधिक पसंद किया जाने वाला पारम्परिक भारतीय पेय है। गर्मियों में शरीर के तापमान को स्थिर रखने तथा लू से बचने में कच्चे आम का पन्ना बहुत सहायक होता है। आइए आज हम आपको इस प्राचीन तथा पारम्परिक पेय को बनाने की विधि से अवगत कराते है।

तीन से चार सामान्य आकार के कच्चे आम लेकर अच्छी तरह धो लें। इन्हें छीलकर गूदा अलग कर लें तथा गुठली अलग निकाल दें। गूदे को एक कप पानी डालकर उबाल लें। इस उबले हुए गूदे में पिसा हुआ 200 ग्राम गुड़ डालकर एक उबाल दे दें। ठंडा होने पर पुदीना की पत्ती, थोड़ा सा काला तथा थोड़ा सा सफ़ेद नमक, तथा थोड़ा सा काली मिर्च चूर्ण डालकर मिक्सी में पीस लें। अब इस गूदे को छानकर इसमें एक लीटर पानी तथा भुना हुआ जीरा चूर्ण मिलाएं। ठंडा करके परोसें।

Post Inspired by : Poojya Acharya Bal Krishan Ji Maharaj

मैं पूज्य आचार्य बाल कृष्ण जी महाराज का आभारी हूं।

http://patanjaliayurved.org/

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– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

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 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

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