संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सफलता।

Kmsraj51 की कलम से…..

Kmsraj51-CYMT-Oct-14-1

संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सफलता।

संदेह करोगे तो नहीं मिलेगी सक्सेस शेक्सपियर ने लिखा था, “हमारे संदेह गद्दार हैं। हम जो सफलता प्राप्त कर सकते हैं, वह नहीं कर पाते, क्यूंकि संदेह में पड़कर प्रयत्न ही नहीं करते।” इंसान का स्वाभाव ही ऐसा होता है कि कोई काम शुरू करता है और थोडा सा भी संदेह होने पर काम को रोक देता है और उत्साह पर पानी फिर जाता है। संदेह कि बजाय इंसान को विश्वास को ज्यादा तरजीह देनी चाहिए।
जीवन में आगे बढ़ने के लिए इंसान प्रयत्न करता है और इस प्रयत्न पर संदेह के कारण पानी फिर जाता है। संदेह व्यक्ति के उत्साह को कम कर देता है। संदेह के कारण इंसान सही समय का इंतजार करता रह जाता है। उसे लगता है कि उचित अवसर आने पर काम करूंगा। जो लोग अपनी योग्यता पर शक करते हैं, वे हमेशा दुविधा में रहते हैं कि काम को शुरू भी किया जाए या नहीं। वे हमेशा काम को टालते रहते हैं। उन्हें हमेशा यही महसूस होता है कि अभी सही समय नहीं आया है। वे अपनी दिशा तय नहीं कर पाते और इधर-उधर भटकते रहते हैं। संदेह से पीछा छुड़ाने के लिए मन में विश्वास पैदा करना होगा कि जो काम शुरू किया है, उसमें सफलता जरूर मिलेगी।

“अगर सच्चे-मन से जीवन में कुछ करने की ठान लाे, ताे सफलता आपकाे जरुर मिलेगी।”-Kmsraj51

अगर व्यक्ति अपने मन में विश्वास रखे कि वह एक बड़े पुरस्कार के लिए काम कर रहा है और जीत उसी की होगी, तो सफलता निश्चित है। विश्वास एक टॉनिक है, जो इंसान की सारी शक्तियों को सक्रिय कर देता है। संदेह होने पर इंसान कोशिश करना बंद कर देता है और विश्वास के कारण वह मुश्किलों में भी आगे बढ़ता रहता है। अब यह आप पर है कि आप किसे चुनते हैं। मन में बैठे संदेहों को दूर करने के लिए सफलता की मनोकामना भी जरूरी है। जब तक आप खुद संदेह को मौका नहीं देते, तब तक वह आप पर हावी नहीं हो सकता। एक कहावत है, “निश्चय कर लो कि तुम सही हो और फिर आगे बढ़ते जाओ, पर सारा दिन निश्चय करने में व्यतीत मत कर दो।”

मेरा यही मानना है कि, किसी चीज या परिस्थिति पर शक करने की बजाय आपको तुरंत फैसले लेने होंगे, तभी तेजी से तरक्की कर पाएंगे। आपको अपने मन को समझना होगा और तय करना होगा कि आपको कहां जाना है। संदेह के कारण आप बैठे रहेंगे और दुनिया आगे बढ़ती जाएगी। अपने मन में छुपे डरों को दूर करके विश्वास की ताकत को समझिए। ज्यादातर लोग संदेह इसलिए करते हैं, क्योंकि उनके मन में नकारात्मकता होती है।

उन्हें लगता है कि वे सफलता के काबिल नहीं है। अगर उन्हें थोड़ी सी विफलता मिलती है तो वे हार मान लेते हैं। इसकी बजाय विफलता मिलने पर ज्यादा ताकत के साथ आगे बढ़ना चाहिए। संदेह को दूर भगाएं। मन में विश्वास जगाएं कि आप आगे बढ़ सकते हैं, आप काबिल हैं और आप भी सफल हो सकते हैं।

– In English –

Will not doubt would success Shakespeare wrote, “our suspicions are a traitor. We can achieve success, which he cannot do because not only suspected padkar endeavours.”There is no such human according to work and a little bit too doubt stops the work and enthusiasm are defeated on. Doubt that instead should be more inclined to trust. Striving to move forward in human life and endeavour goes awry due to doubts. Reduces the enthusiasm of individual suspicion. Due to the suspicion is the right person waits of time. It will work on that reasonable opportunity. Those who doubt their abilities, they always live in a dilemma whether to even start that work. They always keep to avoid work. They always feel that there is just the right time. They may not be able to determine your direction and around languish. Rigid suspiciously must instill confidence in mind for what is success will of course began to work. If the person believes in his mind that he is working for a big prize and win would be the same, then success is sure. Faith is a tonic, which gives all powers of the active person. Doubt stops the person try and believe in odds because he moves forward. Now it’s up to you to whom you choose. To overcome the doubts in the minds of her desire is also required. As long as you do not suspect himself, he could not prevail upon you. Get a saying, “surely you’re right and then moving on to decide to go, don’t spend all day on the two.” I only believe that, instead of doubting a thing or situation you will immediately the fast decisions may be able to elevate. You have to understand his mind and decide whether you where to go. Doubt you will be seated and the world will grow further. By removing hidden in your mind and persisted in faith know the power of. Most people suspect so, because his mind is negativity. They think they don’t deserve the success. If they lose the slightest failure if they assume. Instead when a failure should move forward with more force. The suspicion bhagaen. Jagaen believe in mind that you can proceed, you deserve it and you too can be successful. 

Priyank Dubey

Roorkee-Uttarakhand

We are grateful to Priyank Dubey Ji for sharing this inspirational Hindi story with KMSRAJ51 readers.

Note::-

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सफलता कठोर मेहनत और खुद पर भरोसा करने से मिलती है।

यह गिफ्ट में या धनी परिवार में पैदा होने से नहीं मिलती है।

-Kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

http://wp.me/p3gkW6-1dk

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

http://wp.me/p3gkW6-mn

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

http://wp.me/p3gkW6-1dD

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

http://wp.me/p3gkW6-Ig

* चांदी की छड़ी।

http://wp.me/p3gkW6-1ep

 

 

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क्या बनेंगे ये ?

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Kya Banenge Ye क्या बनेंगे ये

क्या बनेंगे ये ?

यूनिवर्सिटी के एक प्रोफ़ेसर ने अपने विद्यार्थियों को एक एसाइनमेंट दिया।  विषय था मुंबई की धारावी झोपड़पट्टी में रहते 10 से 13 साल की उम्र के लड़कों के बारे में अध्यन करना और उनके घर की तथा सामाजिक परिस्थितियों की समीक्षा करके भविष्य में वे क्या बनेंगे, इसका अनुमान निकालना।

कॉलेज विद्यार्थी काम में लग गए।  झोपड़पट्टी के 200 बच्चो के घर की पृष्ठभूमिका, मा-बाप की परिस्थिति, वहाँ के लोगों की जीवनशैली और शैक्षणिक स्तर, शराब तथा नशीले पदार्थो के सेवन , ऐसे कई सारे पॉइंट्स पर विचार किया गया ।  तदुपरांत हर एक  लडके के विचार भी गंभीरतापूर्वक सुने तथा ‘नोट’ किये गए।

करीब करीब 1 साल लगा एसाइनमेंट पूरा होने में।  इसका निष्कर्ष ये  निकला कि उन लड़कों में से 95% बच्चे गुनाह के रास्ते पर चले जायेंगे और 90% बच्चे बड़े होकर किसी न किसी कारण से जेल जायेंगे।  केवल 5% बच्चे ही अच्छा जीवन जी पाएंगे।

बस, उस समय यह एसाइनमेंट तो पूरा हो गया , और बाद में यह बात का विस्मरण हो गया। 25 साल के बाद एक दुसरे प्रोफ़ेसर की नज़र इस अध्यन पर पड़ी , उसने अनुमान कितना सही निकला यह जानने के लिए 3-3 विद्यार्थियो की 5 टीम बनाई और उन्हें धारावी भेज दिया ।  200 में से कुछ का तो देहांत हो चुका था तो कुछ  दूसरी जगह चले गए थे।  फिर भी 180 लोगों से मिलना हुवा।  कॉलेज विद्यार्थियो ने जब 180 लोगों की जिंदगी की सही-सही जानकारी प्राप्त की तब वे आश्चर्यचकित हो गए।   पहले की गयी स्टडी के  विपरीत ही परिणाम दिखे।

उन में से केवल 4-5 ही सामान्य मारामारी में थोड़े समय के लिए जेल गए थे ! और बाकी सभी इज़्ज़त के साथ एक सामान्य ज़िन्दगी जी रहे थे। कुछ तो आर्थिक दृष्टि से बहुत अच्छी स्थिति में थे।

अध्यन कर रहे विद्यार्थियो तथा उनके प्रोफ़ेसर साहब को बहुत अचरज हुआ कि जहाँ का माहौल गुनाह की और ले जाने के लिए उपयुक्त था वहां लोग महेनत तथा ईमानदारी की जिंदगी पसंद करे, ऐसा कैसे संभव हुवा ?

सोच-विचार कर के विद्यार्थी पुनः उन 180 लोगों से मिले और उनसे ही ये जानें की कोशिश की।  तब उन लोगों में से हर एक ने कहा कि “शायद हम भी ग़लत रास्ते पर चले जाते, परन्तु हमारी एक टीचर के कारण हम सही रास्ते पर जीने लगे।  यदि बचपन में उन्होंने हमें सही-गलत का ज्ञान नहीं दिया होता तो शायद आज हम भी अपराध में लिप्त होते…. !”

विद्यार्थियो ने उस टीचर से मिलना तय किया।  वे स्कूल गए तो मालूम हुवा कि वे  तो सेवानिवृत हो चुकी हैं ।  फिर तलाश करते-करते वे उनके घर पहुंचे ।  उनसे सब बातें बताई और फिर पूछा कि “आपने उन लड़कों पर ऐसा कौन सा चमत्कार किया कि वे एक सभ्य नागरिक बन गए ?”

शिक्षिकाबहन ने सरलता और स्वाभाविक रीति से कहा : “चमत्कार ? अरे ! मुझे कोई चमत्कार-वमत्कार तो आता नहीं।  मैंने तो मेरे विद्यार्थियो को मेरी संतानों जैसा ही प्रेम किया।  बस ! इतना ही !” और वह ठहाका देकर जोर से हँस पड़ी।

मित्रों , प्रेम व स्नेह से पशु भी वश हो जाते है।  मधुर संगीत सुनाने से गौ भी अधिक दूध देने लगती है।  मधुर वाणी-व्यवहार से पराये भी अपने हो जाते है।  जो भी काम हम करे थोड़ा स्नेह-प्रेम और मधुरता की मात्रा उसमे मिला के करने लगे तो हमारी दुनिया जरुर सुन्दर होगी।  आपका दिन मंगलमय हो, ऐसी शुभभावना।  

Note:- Post inspired by- http://www.achhikhabar.com/

We are grateful to My dear Friend Mr. Gopal Mishra & AKC for sharing this very inspirational incident with Kmsraj51 readers. 

Note::-

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“तू ना हो निराश कभी मन से”

प्रश्न :- दोस्त क्या है?\मित्र क्या है?

उत्तर :- “एक आत्मा जाे दाे शरीराें में निवास करती है”

सफलता कठोर मेहनत और खुद पर भरोसा करने से मिलती है।”

 

 

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Meditation For Personality Transformation

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Kmsraj51-CYMT08

Meditation For Personality Transformation

At the heart of every human being or soul there is a spiritual energy, pure, of peace, love, truth and happiness without dependence. Being aware and experiencing this energy provides you with the inner strength necessary for change. Meditation is the method of access in order to allow that energy to come to the surface of your consciousness and in your mind in order to color your thoughts and feelings. In a way very similar to that of a volcano whose melted lava, hot, flows from the centre of the Earth to the surface, we, on meditating, can create volcanoes of power (which emerge in our conscious minds) required for personality transformation.

You can do an exercise, a meditation whereby you choose a habit or sanskar that you don’t want, and you will replace it with a characteristic that you would like to incorporate, like a thread, into the cloth of your personality. For example, replace impatience with patience.

Decide on a habit that you want to change e.g. impatience. We will focus this meditation on changing impatience. You can apply it to other habits also:

I relax and prepare to look inwards…
I am aware of the unwanted habit of becoming impatient…
As I sit in meditation, I relax my body.
I become the observer of my own thoughts and feelings…
Realizing my true identity as soul – a subtle point of light situated at the center of my forehead, just above my eyebrows, I remember my real nature is one of calmness, peace and power…
I focus on the power of peace, inviting it in and welcoming it into my thoughts and feelings from deep within…. enjoying the calm contentment which it brings…
On the screen of my mind, I begin to visualize patience…
I see myself in a situation where I normally become impatient…
I now see myself as being completely full with the virtue of patience…
I shape my feelings around the idea and image of patience…. unhurried and relaxed… calm and watchful…
If necessary, I can wait… forever…. with patience
I am free of the desire for certain outcomes…
I see how I respond with patience…
I see the effect of my patience in others within the situation…
I now know how I will speak with patience, walk with patience and act patiently in the real life situations…
I maintain this peace, which generates serenity and patience in me…

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

Note::-

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हिंदी-English-मुरली!!

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Kmsraj51-CYMT09

हिंदी मुरली (23-Sep-2014)

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – यह वन्डरफुल सतसंग है जहाँ तुम्हें जीते जी मरना सिखलाया जाता है, जीते जी मरने वाले ही हंस बनते हैं”

प्रश्न:- तुम बच्चों को अभी कौन-सी एक फिकरात है?
उत्तर:- हमें विनाश के पहले सम्पन्न बनना है। जो बच्चे ज्ञान और योग में मजबूत होते जाते हैं, उन्हें मनुष्य को देवता बनाने की हॉबी (आदत) होती जाती है। वह सर्विस के बिना रह नहीं सकते हैं। जिन्न की तरह भागते रहेंगे। सर्विस के साथ-साथ स्वयं को भी सम्पन्न बनाने की चिंता होगी।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) लास्ट सो फर्स्ट जाने के लिए महावीर बन पुरूषार्थ करना है। माया के तूफानों में हिलना नहीं है। बाप समान रहमदिल बन मनुष्यों के बुद्धि का ताला खोलने की सेवा करनी है।
2) ज्ञान सागर में रोज़ ज्ञान स्नान कर परीज़ादा बनना है। एक दिन भी पढ़ाई मिस नहीं करनी है। भगवान के हम स्टूडेन्ट हैं-इस नशे में रहना है।

वरदान:- निश्चय और नशे के आधार से हर परिस्थिति पर विजय प्राप्त करने वाले सिद्धि स्वरूप भव
योग द्वारा अब ऐसी सिद्धि प्राप्त करो जो अप्राप्ति भी प्राप्ति का अनुभव कराये। निश्चय और नशा हर परिस्थिति में विजयी बना देता है। आगे चलकर ऐसे पेपर भी आयेंगे जो सूखी रोटी भी खानी पड़ेगी। लेकिन निश्चय, नशा और योग के सिद्धि की शक्ति सूखी रोटी को भी नर्म बना देगी। परेशान नहीं करेगी। आप सिद्धि स्वरूप की शान में रहो तो कोई भी परेशान नहीं कर सकता। कोई भी साधन हैं तो आराम से यूज करो लेकिन समय पर धोखा न दें – यह चेक करो।

स्लोगन:- निमित्त बन यथार्थ पार्ट बजाओ तो सर्व के सहयोग की मदद मिलती रहेगी।

English Murli (23-Sep-2014)

Essence: Sweet children, this is a wonderful spiritual gathering (satsung) where you are taught to die alive. Only those who die alive become swans.

Question: What one concern do you children have now?
Answer: That you have to become complete before destruction takes place. The children who become strong in knowledge and yoga develop the hobby of changing human beings into deities. They cannot stay without doing service. They continue to run around like genies. Together with doing service, they also have the concern to make themselves complete.

Essence for dharna:
1. In order to become first from being last make effort like a mahavir. Do not fluctuate in the storms of Maya. Become merciful like the Father and do the service of opening the locks on the intellects of human beings.
2. Bathe daily in the ocean of knowledge and become angels. Do not miss this study for a single day. Maintain the intoxication that you are God’s students.

Blessing: May you be an embodiment of success who gains victory over every adverse situation on the basis of faith and intoxication.
Through yoga, now attain such success that any lack of attainment also gives you the experience of attainment. Faith and intoxication make you victorious over every situation. As you progress further, you will have such test papers that you might have to eat dry chappatis, but faith, intoxication and the power of success in yoga will make even dry chappatis soft; you will not be distressed. Maintain the honour of being an embodiment of success and no one will be able to distress you. If you have any facilities, then use them comfortably, but check that you are not deceived at that time.

Slogan: Be an instrument and play your part accurately and you will continue to receive co-operation from everyone.

आध्यात्मिक सेवा में ब्रह्मकुमारी,

In Spiritual Service Brahmakumari,

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Realizing Our Natural Nature Of Peace

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Angel-kmsraj51

Angel-परी

If we look at nature, we will notice that everything in nature – plants, flowers, etc. do everything they do peacefully – they grow, flourish, decompose and die in peace. We get an obvious impression from them that peace is their natural nature. Even the five elements – earth, wind, water, fire and sky are mostly peaceful by nature. It’s only when we try and exercise control over them and interfere with their balance that they lose their peace. Most of us, irrespective of our age, even in these stressful and hurry filled times, act peacefully and express our peaceful nature in relationships by means of peaceful thoughts, words and actions, unless something is wrong in the relationship. We instinctively like peaceful relationships. If something is wrong in a relationship and it lacks peace even to a small extent, we do not feel good or comfortable about it. All this proves to us that we, like nature, are essentially peaceful by nature. That is our basic personality.

Most of us have, at some time in our lives and even more frequently in the case of many of us, experienced and expressed our peaceful nature. It’s so natural, we are not even consciously aware of it. What we are more aware of is when we are distanced from the natural i.e. we are unnatural – worried, scared, irritated etc. But these unnatural phases always pass and we finally return to our peaceful self. There are some people who are permanently grumpy and tight with someone or the other, because of something or the other. On some days we also feel as if we are continuously living on the edge and continuously succumbing to frustration and anger. But even then, away from everyone’s eyes; everyone, the compulsive angerholic (one who cannot live without anger) and you also, will, at some stage, look inwards, relax and have an inner personal spiritual retreat in which they will find relief by experiencing their true nature of peace.

– Message –

Success is achieved through accurate efforts.Expression: The one who puts in accurate efforts for the success of every task, naturally tries to do the best. Because of his own contribution, others too help him and contribute whatever they can to achieve what he sets out to do. So there is success in everything.Experience: When I do the right thing, I will be able to experience constant self-progress. I will then never have the slightest feeling of failing, but will always experience success as a right, even if the result is not what I have expected. I experience positive feelings because of having put in the right effort.

Mera Baba

मेरा बाबा

In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

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आप कुछ भी कर सकते हैं, स्वयं पर विश्वास करना सीखें।

You can also learn to trust themselves.

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

 

जाे आपका आैर आपके समय के वैल्यू काे ना समझे।

उसके लिए कभी भी कार्य (Work) ना कराे॥

~KMSRAJ51

 

 

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हिंदी और अंग्रेजी में मुरली

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हिंदी मुरली (19-Sep-2014)

मुरली सार:- “मीठे बच्चे – तुम सर्व आत्माओं को कर्मबन्धन से सैलवेज़ करने वाले सैलवेशन आर्मी हो, तुम्हें कर्मबन्धन में नहीं फँसना है”

प्रश्न:- कौन-सी प्रैक्टिस करते रहो तो आत्मा बहुत-बहुत शक्तिशाली बन जायेगी?
उत्तर:- जब भी समय मिले तो शरीर से डिटैच होने की प्रैक्टिस करो। डिटैच होने से आत्मा में शक्ति वापिस आयेगी, उसमें बल भरेगा। तुम अण्डर-ग्राउण्ड मिलेट्री हो, तुम्हें डायरेक्शन मिलता है – अटेन्शन प्लीज़ अर्थात् एक बाप की याद में रहो, अशरीरी हो जाओ।

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) लाइट हाउस बन सबको शान्तिधाम, सुखधाम का रास्ता बताना है। सबकी नईया को दु:खधाम से निकालने की सेवा करनी है। अपना भी कल्याण करना है।
2) अपने शान्त स्वरूप स्थिति में स्थित हो शरीर से डिटैच होने का अभ्यास करना है, याद में आंखे खोलकर बैठना है, बुद्धि से रचता और रचना का सिमरण करना है।

वरदान:- कोई भी बात कल्याण की भावना से देखने और सुनने वाले परदर्शन मुक्त भव
जितना संगठन बड़ा होता जाता है, बातें भी उतनी बड़ी होंगी। लेकिन अपनी सेफ्टी तब है जब देखते हुए न देखें, सुनते हुए न सुनें। अपने स्वचिंतन में रहें। स्वचिंतन करने वाली आत्मा परदर्शन से मुक्त हो जाती है। अगर किसी कारण से सुनना पड़ता है, अपने आपको जिम्मेवार समझते हो तो पहले अपनी ब्रेक को पावरफुल बनाओ। देखा-सुना, जहाँ तक हो सका कल्याण किया और फुल स्टॉप।

स्लोगन:- अपने सन्तुष्ट, खुशनुम: जीवन से हर कदम में सेवा करने वाले ही सच्चे सेवाधारी हैं।

English Murli (19-Sep-2014)

Essence: Sweet children, you are the Salvation Army who will salvage all souls from their karmic bondages. You must not become trapped in karmic bondages.

Question: What should you continue to practise so that the soul becomes very powerful?
Answer: Whenever you have time, practise becoming detached from the body. By becoming detached, the soul will regain power and become filled with strength. You are the underground military and are given the direction, “Attention please!”, that is, “Stay in remembrance of the one Father and become bodiless.”

Essence for dharna:
1. Become a lighthouse and show everyone the way to the land of peace and the land of happiness. Do the service of removing everyone’s boat from the land of sorrow. Also benefit yourself.
2. Remain stable in your peaceful form and practise becoming detached from your body. Sit in remembrance with your eyes open. Remember the Creator and creation with your intellect.

Blessing: May you be free from looking at others, and have feelings of benevolence when seeing or hearing about any situation.
The bigger the gathering, the bigger the situations will be. However, your safety lies in looking but not seeing and hearing but not listening. Maintain pure and positive thoughts for the self. Souls who maintain pure and positive thoughts for the self remain free from looking at others. If due to any reason you have to listen to anything and you consider yourself to be responsible, then, first of all, make your brake powerful. You saw, you heard and brought as much as benefit possible and put a full stop.

Slogan: Those who do service at every step through their contented and happy lives are true servers.

आध्यात्मिक सेवा में ब्रह्मकुमारी,

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In-English…..

Purity is the foundation of true peace & happiness,

It is your most valuable Property in your life,

Preserve it at any cast. !!

 

In-Hindi…..

पवित्रता सच शांति और खुशी का आधार है.

यह आपके जीवन में सबसे मूल्यवान संपत्ति है.

यह किसी भी कलाकार की रक्षा करता है!!

~KMSRAJ51

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आप कुछ भी कर सकते हैं, स्वयं पर विश्वास करना सीखें।

You can also learn to trust themselves.

-कृष्ण मोहन सिंह ५१

 

 

 

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प्रभु जरुर खुश होंगे।

Kmsraj51 की कलम से…..

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एक बार एक अजनबी किसी के घर गया। वह अंदर गया और मेहमान कक्ष मे बैठ गया। वह खाली हाथ आया था तो उसने सोचा कि कुछ उपहार देना अच्छा रहेगा। तो उसने वहा टंगी एक पेन्टिंग उतारी और जब घर का मालिक आया,उसने पेन्टिंग देते हुए कहा, यह मै आपके लिए लाया हुँ। घर का मालिक, जिसे पता था कि यह मेरी चीज मुझे ही भेंट दे रहा है, सन्न रह गया। अब आप ही बताएं कि क्या वह भेंट पा कर, जो कि पहले से ही उसका है, उस आदमी को खुश होना चाहिए ? मेरे ख्याल से नहीं। लेकिन यही चीज हम भगवान के साथ भी करते है। हम उन्हें फूल, फल और हर चीज जो उनकी ही बनाई है, उन्हे भेंट करते हैं और सोचते हैं कि ईश्वर खुश हो जाएगें। हम यह नहीं समझते कि उनको इन सब चीजो कि जरुरत नही। अगर आप सच मे उन्हे कुछ देना चाहते हैं तो अपना प्यार दीजिए उन्हे अपने हर एक श्वास मे याद करके और विश्वास मानिए प्रभु जरुर खुश होंगे ।

English-

Once an alien has the inside someone’s House and guests sat in the room came up empty handed so she thought that would be nice to give some gifts so he find the owner of the House and launched a tangi came when painting, he said, were painting it I brought for you at work. the master of the House, which knew it is only offering me my stuffTell you now, shocking live. whether it can find, which is already offering his, that man should be happy? My guess is no, but the same thing we do with God we have them flowers, fruits and everything that has made his own, called them and think that God will be happy we don’t understand that they don’t need all these things with that. If you really want to give them something in your love remember every single breathing them in your hand and believe will be happy the Lord manie notice.

Note::-

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Coming soon book (जल्द ही आ रहा किताब)…..

“तू ना हो निराश कभी मन से”

 

जीवन मंदिर सा पावन हाे, बाताें में सुंदर सावन हाे।

स्वाथ॔ ना भटके पास ज़रा भी, हर दिन मानो वृंदावन हाे॥

-KMSRAJ51 

 

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