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हम पुस्तकें पढ़ेंगे तो ही बच्चे पढ़ेंगे।

Kmsraj51 की कलम से…..

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  • Kmsraj51 की कलम से…..
    • ♦ हम पुस्तकें पढ़ेंगे तो ही बच्चे पढ़ेंगे। ♦
      • आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—
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♦ हम पुस्तकें पढ़ेंगे तो ही बच्चे पढ़ेंगे। ♦

आप सभी ने सुना होगा कि बच्चे देख कर ही सीखते हैं। जैसा हम करते हैं बच्चे भी हमारा अनुकरण करते हैं। इस आधुनिक युग में जब से फोन ने सबकी जिंदगी में कदम रखा है पुस्तकों का महत्व ही खत्म होता जा रहा है। परंतु कुछ समय पहले ऐसा नहीं था।

सबको पुस्तकों से लगाव था। घर में पुस्तक रखी रहती थी। धार्मिक पुस्तकें भी पढ़ाई की पुस्तकें भी। परंतु आजकल तो यह खत्म ही होता जा रहा है। फोन पर ही किताबें पढ़ी जाती है। इसलिए बच्चे भी आजकल जिद्दी हो गए हैं उनको भी फोन चाहिए। अगर हम घर में मात-पिता ही पुस्तक नहीं पढ़ेगें तो बच्चों से कैसे उम्मीद लगा सकते हैं कि वे पढ़ें। जरूरी नहीं है कि आप पढ़ाई कर रहे हो तभी किसी पुस्तक को पढ़े।

जब भी आपको शाम को खाली समय मिले तो जिस भी पुस्तक में आपकी रुचि है उसे लेकर आप बैठ जाइए। एक घंटा पढ़ेंगे भी तो बच्चे आपको देख कर खुद ब खुद किताब उठाकर पढ़ने लग जाएंगे। इससे एक पंथ दो काज हो जाएंगे आपको बोलना भी नहीं पड़ेगा और बच्चो के अंदर भी अच्छे संस्कार जागृत होंगे।

अगर पुस्तक नहीं पढ़ सकते तो अखबार तो पढ़ सकते हैं। एक दो घंटा अखबार लेकर बैठेंगे तो बच्चे आपको देख कर खुद ब खुद पढ़ने बैठ जाएंगे। आज के इस डिजिटल युग में सारे काम फोन से हो जाते हैं।

अच्छा भी है काम तुरंत हो जाते हैं। परंतु पुस्तक पढ़ने भी तो बहुत जरूरी है। अभी लॉकडाउन में सबको पता लग गया होगा कि पढ़ाई का महत्व स्कूल वाली पढ़ाई का ज्यादा महत्व है या फोन वाली पढ़ाई का।

अध्यापक के साथ बैठकर बच्चे किताब से पढ़ते हैं। उसका ज्यादा महत्व है। आपको देखकर उसकी भी आदत में शामिल हो जाएगा पढ़ना। आपको पता भी नहीं चलेगा कब आपने संस्कार का बीज बोया और वह कब फल बनकर तैयार हो जाएगा । “यह एक ऐसी क्रिया है जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती जाएगी।”

जरूरी नहीं है किसी विषय की ही पुस्तक पढ़ी जाए। आप कोई भी किताब पढ़ लो जो आपको अच्छी लगे। या बच्चों की पाठ्यक्रम की पुस्तक भी पढ़ सकते हैं, पाठ्यक्रम की पुस्तकें बहुत ही ज्ञानवर्धक होती हैं।

उससे दो काम एक साथ में हो जाएंगे। बच्चे को भी पढ़ा दोगे। साथ में बच्चों को पढ़कर सुना सकते हैं खेल – खेल में बच्चों का पाठ भी हो जाएगा और आपका समय पास हो जाएगा। और अपने बच्चे के साथ अच्छा समय भी बिता पाओगे।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — पुस्तकें किसी भी इंसान की सबसे अच्छी व सच्ची मित्र है, “कोई ज्ञान कभी भी बुरा नहीं होता हां इंसान बुरे हो सकते है,” इसलिए जहां से भी हो सके ज्ञान अर्जित करने में शर्माना नहीं चाहिए कभी भी। जैसा हम करते हैं बच्चे भी हमारा अनुकरण करते हैं। इस आधुनिक युग में जब से फोन आया है तब से सबकी जिंदगी में पुस्तकों का महत्व ही खत्म होता जा रहा है। जब हम पुस्तकें पढ़ेंगे तो ही तो बच्चे भी पढ़ेंगे। आज भी जितने विद्वान् लोग है या बड़े बिजनेसमैन है सभी नियमित किताब पढ़ते हैं। जीवन के हर क्षेत्र में अगर आगे बढ़ना है तो पुस्तकें पढ़ना शुरू कर दे। आपको पढ़ता देखकर बच्चे भी पढ़ने लगेंगे। आओ हमसब मिलकर ये संकल्प ले की हमसब खुद भी पुस्तकें पढ़ेंगे और बच्चों के साथ-साथ सभी को पुस्तकें पढ़ने के लिए जागरूक करेंगे।

—————

यह लेख (हम पुस्तकें पढ़ेंगे तो ही बच्चे पढ़ेंगे।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Comments

  1. Vicky Ranga says

    June 1, 2022 at 5:14 pm

    Very motivational thought

    Reply
    • kmsraj51 says

      June 1, 2022 at 5:52 pm

      तहे दिल से धन्यवाद जी!

      Reply

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