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दूसरी तस्वीर।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ दूसरी तस्वीर। ♦

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सड़कों पर मजदूर और मजबूर नहीं चल रहे।
भारत माता की सच्ची तस्वीर चल रही है।
चल रहा है प्राण हिम्मत, हौसलों, जज्बों की।
खून-पसीने की मिसाल-ए-तासीर चल रही है।
सड़को पर…..

यही पाँव है भारती में धड़कन स्पंदन लाता है।
यही वो हाथ है जो जठराग्नि, क्षुधा बुझाता है।
इन्हीं के साँसों से चूल्हे, कारखाने चलते हैं।
उच्छवासों से ऊर्जस्वित तिरंगा लहराता है।
लहू, दाग-धब्बों से माँ की सूरत हुई कुरूप।
और टी०वी० पे स्वच्छ भारत की तकरीर चल रही है।
सड़कों पर…..

बदन पे नहीं वसन पेट सट गए आँत से।
घर से बेघर मालिक ही, निष्कासित जमात से।
निकल पड़े हैं पीठ पे लादे कर्ज जिंदगी का।
नंगे पैर अकेले लड़ने, जग से, हालात से।
बूंद-बूंद, दाने-दाने को हो मोहताज तिरस्कृत।
इंसानियत के गर्दन पे शमसीर चल रही है।
सड़कों पर…..

सत्ता और व्यवस्था में कोई सांठ गांठ सी हो गई है।
साधनों और संसाधनों का बंदरबांट सी हो गई है।
धृतराष्ट्र, कुंभकर्ण बन रहे क्यूँ इनके रक्षक ही।
प्रजा नरक में ठेले जा रहे मार काट सी हो गई है।
चार साल के बाद इन्हीं के पास आओगे याचक सा।
अभी तो “अच्छे दिन” की अच्छी नज़ीर चल रही है।
सड़कों पर…..

सुनते थे भारत अर्पण और तर्पण की भूमि है।
राष्ट्र के लिए स्व, सर्वस्व समर्पण की भूमि है।
पर जो दृश्य करुण, दारुण, भयावह सामने है।
शर्मनाक लगता है निर्दयी, बंजर जन की भूमि है।
“छप्पन इंची सीना वाले” घर भी देखो अपना।
“चौकीदार” के पाँव में भी जंजीर चल रही है।
सड़कों पर…..

जिसके श्रम की घुट्टी महलों में किलकारी भरती है।
जिनकी अंगुलियां छू के सरकारें बनती बिगड़ती है।
वही नराधम, भिक्षुक बन यूँ बिलख रहा है आज।
जैसे कोई बेटी गरीब बाप के घर से बिछड़ती है।
कलियुग में किंचित ये अग्निपरीक्षा ही तो है।
देव-दीन में बहस बड़ी गंभीर चल रही है।
सड़कों पर…..

खुदा के बंदे खौफ खाओ ये इंतिहा है हिकारत की।
रोटी दो, छप्पड़-छाया दो, कुछ दो मूल्य शराफत की॥

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने बहुत ही सुंदर, सरल शब्दों में “मजदूर या मजबूर” मजदूर के कठिन जीवन को दर्शाया है कविता के माध्यम से।

—•—•—•—

sk-mishra-kmsraj51.png

यह कविता “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: स्वाद बदलना होगा।
  • जरूर पढ़े: क्या-क्या देखें।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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