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पृथ्वी का आवरण संग पर्यावरण।

Kmsraj51 की कलम से…..

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    • ♦ पृथ्वी का आवरण संग पर्यावरण। ♦
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♦ पृथ्वी का आवरण संग पर्यावरण। ♦

विश्व पृथ्वी दिवस।

चलिए आज हम पुराने दौर में जाते हैं,
1970 की सुसज्जित धरा से मिलवाते हैं।
अमेरिका के सीनेटर जेराल्ड नेल्सन को जनक बताते हैं,
192 देश मिलकर आज पृथ्वी दिवस मनाते हैं।
चलिए आज हम पुराने…..।

22 अप्रैल उत्तरी गोलार्ध में बसंत आगणन का सूचक बताते हैं,
दक्षिणी गोलार्ध में शरद ऋतु का आगमन बताते हैं।
इसी तिथि से वैज्ञानिक ग्लोबल वार्मिंग पता लगाते हैं,
चलिए आज हम पुराने …..।

हरियाली से भरपूर धरा पर इंसानियत कहर बरपाती है,
अपने स्वार्थ में लिप्त पेड़ों को काट पशु-पक्षी,
जानवरों को बेघर बनातीं हैं।
बम बारूद का कहर बरपाकर धरती मां को रुलाते हैं,
चलिए आज हम पुराने…..।

धरती मां को हमने किया है जो नग्न उसे फिर से आवरण उड़ाते हैं,
आओ हम निज स्वार्थ छोड़ सब मिलकर पेड़ लगाते हैं।
जो फैलाते हैं जंगलों में दावनल उनको भी पकड़ सबक सिखाते हैं,
चलिए आज हम पुराने…..।

अंत में विजयलक्ष्मी अपनी दूसरी मां को शीश नवाती है,
एक मां जन्म देती है तो दूसरी से हम जीवन रुपी भ्रणपोषण पाते हैं।
धरती मां है स्वर्ग हमारा आओ हम सब मिलकर वृक्ष लगाते हैं,
चलिए आज हम अपना फर्ज निभाते हैं धरती मां के सौंदर्य को वापस लाते हैं।

♦ विजयलक्ष्मी जी – झज्जर, हरियाणा ♦

—————

  • “विजयलक्ष्मी जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए समझाने की कोशिश की हैं — आओं हम सब मिलकर ये संकल्प ले की प्रत्येक वर्ष एक पेड़ जरूर लगाएंगे और उसका अच्छे से देखभाल भी करेंगे तब तक जब तक की वह पेड़ अपना खुराख़ पृथ्वी से खुद न लेने लगे। पृथ्वी को हम सब मिलकर हरा भरा और स्वच्छ बनाएंगे फिर से। दुनियाभर के देशों द्वारा पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है। इसका मकसद पृथ्वी पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे मुद्दों जैसे जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग आदि के बारे में जागरूकता फैलाना और इसके लिए सकारात्मक कदमों को बढ़ावा देना है। साल 1970 से इसे हर साल इसी तारीख को मनाया जाता है।

—————

यह कविता (पृथ्वी का आवरण संग पर्यावरण।) “विजयलक्ष्मी जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विजयलक्ष्मी है। मैं राजकीय प्राथमिक कन्या विद्यालय, छारा – 2, ब्लॉक – बहादुरगढ़, जिला – झज्जर, हरियाणा में मुख्य शिक्षिका पद पर कार्यरत हूँ। मैं पढ़ाने के साथ-साथ समाज सेवा, व समय-समय पर “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ” और भ्रूण हत्या पर Parents मीटिंग लेकर उनको समझाती हूँ। स्कूल शिक्षा में सुधार करते हुए बच्चों में मानसिक मजबूती को बढ़ावा देना। कोविड – 19 महामारी में भी बच्चों को व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाना, वीडियो और वर्क शीट बनाकर भेजना, प्रश्नोत्तरी कराना, बच्चों को साप्ताहिक प्रतियोगिता कराकर सर्टिफिकेट देना। Dance Classes प्रतियोगिता का Online आयोजन कराना। स्वच्छ भारत अभियान के तहत विद्यालय स्तर पर कार्य करना। इन सभी कार्यों के लिए शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी द्वारा और कई Society द्वारा बार-बार सम्मानित किया गया।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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