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वासनाओं की आजादी।

Kmsraj51 की कलम से…..

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    • Freedom Of Lust | वासनाओं की आजादी।
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Freedom Of Lust | वासनाओं की आजादी।

आशाओं के सब भंवर टूट गए,
तट विहीन हो रही मोह नदियां।
तृष्णाओं के जाले फैंक फैंक कर,
पकड़ रहे हैं विकारों की मछियां।

झुरमुट बन मद झाड़ है उपज रहे,
दब रही है जिनमें ज्ञान की फसलें।
प्रेम की खाद अब मिलती कहां है?
वासना रसायन में उलझे सब मसले।

फरिश्ते तो हो गए हैं दूर की कौड़ी,
रिश्ते ही नित निरन्तर जर्जरा रहे हैं।
प्रेमी प्रेमिका के तो भला क्या कहने?
भाई – बहन मदहोशी में सठिया रहे हैं।

छल छदम तो होते सदियों से आए हैं,
बेशर्मी तो इस युग में देखो आई नई है।
न बच्चों में तहजीब पहनावे बरतावे की,
न अभिभावकों में आज वह शेष रही है।

फिर कहते हैं क्यों टिकते नहीं रिश्ते?
यह प्रश्न तो शायद आज बेईमानी है।
शादी से पहले ही संबंधों को बनाना,
वासनाओं को प्रेम समझना नादानी है।

हम मानव हैं, समझते क्यों नहीं?
क्यों पशु की नकल सब करते हैं?
वासनाओं की आजादी, अमर्यादी,
निज पद में कुठाराघात क्यों करते हैं।

विकारों को समझना स्वर्ग से बढ़ कर,
वासनाएं ही क्यों पीयूष सी लगती है?
इनकी प्यास कहां बुझती है किसी की?
ये तो युगों युगों से यूं ही बस भभकी है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — आजकल समाज में आधुनिकता के नाम पर इंसान कितना गिर गया है वासनाओं के गर्त में? जिस्म की भूख में सब मर्यादाओं को भूल गया है आज का दानवी मानव क्यों? शादी से पहले ही संबंधों को बनाना और वासनाओं को ही प्रेम समझना नादानी है। हम मानव हैं, समझते क्यों नहीं? क्यों पशु की नकल सब करते हैं? वासनाओं की आजादी, अमर्यादी, निज पद में कुठाराघात क्यों करते हैं सभी? प्रेमी प्रेमिका के तो भला क्या कहने? भाई – बहन मदहोशी में सठिया रहे हैं आजकल। बेशर्मी तो इस युग में देखो आई नई है, न बच्चों में तहजीब पहनावे बरतावे की और न अभिभावकों में आज वह शेष रही है लाज – शर्म। वासनाओं के कारण मनुष्य का व्यक्तित्व सडऩे लगता है और काम वासना में बुरे से बुरा कर्म कर रहा है आज का जानवर से भी गया गुजरा मानव। विषयासक्ति की दुर्गंध हमारे व्यक्तित्व को इस तरह ढांप लेती है कि हम दानव बन जाते है। वासना पूरी तरह से यौन आकर्षण पर आधारित है, जबकि प्रेम भावनात्मक इच्छा पर।

—————

यह कविता (वासनाओं की आजादी।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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