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हिमाचल की पुकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

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    • Himachal Ki Pukar | हिमाचल की पुकार।
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Himachal Ki Pukar | हिमाचल की पुकार।

आज हिमाचल रो रहा है, चहुं ओर देख कर चीख पुकार।
टूटे पर्वत, सड़कें टूटीं, बहा गई नदियां कई लोगों के घरबार।

बेघर हुए, कई अनाथ हुए, कईयों का बह गया सब परिवार।
बेजुबां पशु भी बह गए, पेड़-पौधे तो बह गए लाख – हजार।

वह बह गया! वह ढह गया! रुको! भागो! बचो! – है यही गुंजार।
बस काया का कपड़ा ही शेष रहा, लुट गया बाकी का संसार।

लोगों की मदद लोग ही कर रहे, थक गई है हिमाचल सरकार।
पक्ष – विपक्ष में घमासान मचा है, कौन करेगा इसका उपचार?

सत्ता हो गई निरुत्तर-सी, कुदरत भी न कुछ सुनने को तैयार।
मानव मस्ती में चूर है, सुधारा किसने यहां अपना व्यवहार?

पेड़ काटना, अवैध खनन और गंदगी फैलाना देवों के दरबार।
मान बैठा है सुविधा – जीवी, मानव अपना मौलिक अधिकार।

देव-स्थल हो गए पिकनिक के अड्डे, होने लगे वहां व्यभिचार।
छोटों को रही न कद्र बड़ों की, तनिक भी रहा न शिष्टाचार।

तर्कवादी मानव न मानेगा, कुदरत तो चलाएगी अपने हथियार।
आत्म – शुद्धि कुदरत को भी करनी है, तू करता रह हाहाकार।

पढ़ाई-लिखाई से बुद्धि सठियाई, स्वार्थ बढ़ा और भ्रष्टाचार।
कायदे-कानून सब कागज में रह गए, बाकी मची है मारामार।

संभल ले मूर्ख मानुष अभी भी! बहुत बुरी कुदरत की मार।
आ गई अपनी पर तो छोड़ेगी न फिर, तुझे न तेरा कारोबार।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता यह कविता हिमाचल में आई प्राकृतिक आपदा और उसके कारण हुए विनाश को दर्शाती है। भारी बारिश और बाढ़ से पर्वत टूट गए, सड़कें बह गईं, घर उजड़ गए और कई लोग बेघर-अनाथ हो गए। पशु-पक्षी और पेड़-पौधे भी प्रकृति के इस कहर का शिकार हो गए। कवि बताते है कि इस संकट की घड़ी में लोग ही एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं, जबकि सरकार और सत्ता तंत्र निष्क्रिय और राजनीति में उलझा हुआ है। आपदा के पीछे का कारण भी मनुष्य का लोभ और स्वार्थ ही है – जंगलों की अंधाधुंध कटाई, अवैध खनन, गंदगी फैलाना और धार्मिक स्थलों को पिकनिक स्पॉट बना देना। मानव ने संस्कार और शिष्टाचार भी त्याग दिए हैं। कवि चेतावनी देता है कि प्रकृति आत्मशुद्धि के लिए विनाश का मार्ग अपनाती है। यदि मनुष्य ने अब भी अपना व्यवहार और जीवनशैली नहीं बदली, तो कुदरत की मार और भी भयानक होगी।
  • 👉 कुल मिलाकर, कविता मानव को प्रकृति का सम्मान करने और समय रहते सचेत होने का संदेश देती है।

—————

यह कविता (हिमाचल की पुकार।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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