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खुद की कदर।

Kmsraj51 की कलम से…..

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♦ खुद की कदर। ♦

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सबके दिलों पे असर करने लगा हूँ।
कुछ के तो मन में घर करने लगा हूँ।
ये कोई मौसम का जादू नहीं है दोस्त।
आजकल खुद की कदर करने लगा हूँ।

तितलियों के पीछे क्यूँ भागना, भगाना।
बेहतर है अपना ही छोटा बाग लगाना।
तितली आए या न आए, खुशबू आएगी ही।
थोड़ा कम में ही गुजर बसर करने लगा हूँ।
आजकल…..

महफिल में अब हम दिखाई नहीं देते।
बदकिस्मती की कभी दुहाई नहीं देते।
शौक और जरूरत के बीच का रास्ता,
बनाकर, अकेला ही सफर करने लगा हूँ।
आजकल…..

चाक पे मिट्टी से कुछ गढ़ा नहीं था।
ककहरे से ऊपर कभी चढ़ा नहीं था।
दूसरों की लिखावट ही पढ़ते रहे थे।
अब मन को थोड़ा साक्षर करने लगा हूँ।
आजकल…..

वो मेरे पास खुद ही चल के आने लगा।
देश, भेष बदल के, संभल के आने लगा।
सच्ची इबादत कभी बेकार नहीं जाती।
अपने पे यकीन, सबर करने लगा हूँ।
आजकल खुद की कदर करने लगा हूँ।

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, कविता के माध्यम से बहुत ही सुंदर वर्णन किया है कि खुद की कद्र करना मतलब स्वयं को अंदर से सकारात्मक रखना हैं। अपने जीवन में अगर वाकई में आप आगे बढ़ना चाहते हैं तो खुद की क़द्र करना सीखें।

—•—•—•—

sk-mishra-kmsraj51.png

यह कविता “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: स्वाद बदलना होगा।
  • जरूर पढ़े: क्या-क्या देखें।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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