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मधुमास सा।

Kmsraj51 की कलम से…..

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Madhumas Sa | मधुमास सा।

Having created Radha in the heart, Krishna yearns in the firm universe. The burning night and the longing for the day, speaking while uttering Radhey-Radhey. kmsraj51

प्रेम अमृत रस पान करके,
इश्क चले अब धारण करने।
शीर्षक याद लिख कर गीत,
व्रत एकाकी का पारण करने।

अलंकार से सुसज्जित कर,
स्वयं को स्वयं में लज्जित कर।
इच्छाओं की गांठ बाँधकर चले,
भाव करुण का कारण धरने।

सुनकर धड़कनों की आवाज,
तुम्हारे प्रेम का सुनाती आगाज।
तुम कहीं वही तो नहीं हो प्रेमी,
जो आये हो मुझे तारण करने।

राधा बनाकर ह्दय-पटल में,
कृष्ण तड़पे ब्रह्मांड अटल में।
निशा की दहक दिवस की तरस,
बोलते राधे-राधे उच्चारण करने।

मन करता है श्वास को लिख दूँ,
उभरते हर भाव-प्यास लिख दूँ।
आह निकली नयनों से जब-तब,
आते गम, तन्हाई, मारण करने।

प्रार्थना करती प्राणेश्वर हरीश,
जन्मों का साथी मिला मरीच।
मधुमास सा सौन्दर्य खिला ये,
प्रतिभा का दुख जारण करने।

♦ प्रतिभा पाण्डेय ‘प्रति‘ जी – चेन्नई ♦

—————

  • “प्रतिभा पाण्डेय ‘प्रति‘ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में समझाने की कोशिश की है — इस कविता का सारांश: कविता प्रेम, भक्ति और आत्मसमर्पण के भावों से ओत-प्रोत है। इसमें प्रेम को अमृत के समान दिव्य और शुद्ध बताया गया है, जो आत्मा को जागृत करता है। कवयित्री ने प्रेम को राधा-कृष्ण के अद्वितीय प्रेम से जोड़ा है, जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड में व्याप्त है। कविता में इच्छाओं पर नियंत्रण और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश है। यह दर्शाती है कि प्रेम में समर्पण और त्याग से आध्यात्मिक शांति मिलती है। कवयित्री अपने प्रेम की गहराई और उसके प्रभाव को व्यक्त करते हुए यह कहती है कि प्रेमी की उपस्थिति उसकी पीड़ा और तन्हाई को हर लेगी। अंततः कविता में ईश्वर से प्रार्थना की गई है कि जीवन में सच्चे साथी का साथ मिले, जो सुख-दुख में साथ खड़ा रहे और हर कठिनाई को पार करने में सहायक हो।

—————

Pratibha Pandey - A Author of kmsraj51.comयह कविता (मधुमास सा।) ” प्रतिभा पाण्डेय ‘प्रति‘ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/घनाक्षरी /कवितायें/गीत/दोहे/लेख/आलेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

—————

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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