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Mata Ke Nau Roop | माता के नौ रूप।

नौ रातों की साधना, नौ दिन आठों याम।
नौ रंगों में हैं सजे, नौ दिन माँ के नाम।।
माँ शैलपुत्री
धारण करतीं श्वेत जो, सती पूर्व का नाम।
प्रथम दिवस माँ शैलजा, शैल शिखर है धाम।।
मां ब्रह्मचारिणी
कठिन तपों की स्वामिनी,
ब्रह्मचर्य सुखधाम।
पूजन हो दूजे दिवस, ब्रह्मचारिणी नाम।।
माँ चंद्रघंटा
दो रूपों में पूजते, चंद्रघंटा स्वरूप।
योद्धा भी अरु शांति भी, दोनों रूप अनूप।।
माँ कूष्माण्डा
चौथी देवी का सदा, सूर्यमंडल निवास।
माँ कूष्माण्डा नाम है, हरती सबके त्रास।।
माँ स्कंदमाता
सुत को आँचल में लिए, आती पंचम रात।
रूप स्कंदमात धर, हरती विपदा घात।।
माँ कात्यायनी
षष्ठम देवी हैं यही, कात्यायनी स्वरूप।
वाहन इनका केसरी, अद्भुत रूप अनूप।।
माँ कालरात्रि
कालरात्रि बन कर करें, रक्तबीज उद्धार।
देवी सप्तम श्यामला, करें दुष्ट पर वार।।
माँ महागौरी
आए तिथि जब अष्टमी, दिखे कुंजिका द्वार।
रूप महागौरी लिए, आती सिंह सवार।।
माँ सिद्धिदात्री
इच्छा पूरन के लिए, सिद्धिदात्री प्रख्यात।
नौवीं देवी हैं यही, आतीं नौवीं रात।
♦ नंदिता माजी शर्मा – मुंबई, महाराष्ट्र ♦
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- “नंदिता माजी शर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस दोहा छन्द में समझाने की कोशिश की है — नवरात्रि की नौ रातों की महत्ता और उनमें पूजित नौ रूपों की देवी माँ दुर्गा का वर्णन करती है। हर दिन अलग-अलग रूप में माँ का आह्वान होता है –
- पहले दिन शैलपुत्री पर्वत पुत्री के रूप में पूजी जाती हैं।
- दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तपस्विनी और ब्रह्मचर्य की प्रतीक मानी जाती हैं।
- तीसरे दिन चंद्रघंटा, जिनमें शांति और युद्ध दोनों का अनूठा रूप है।
- चौथे दिन कूष्माण्डा, सूर्य मण्डल में निवास करने वाली और दुख-त्रास हरने वाली देवी हैं।
- पाँचवें दिन स्कंदमाता, अपने पुत्र स्कंद को गोद में लिए करुणा स्वरूप पूजी जाती हैं।
- छठे दिन कात्यायनी, सिंहवाहिनी और अद्भुत शक्ति की प्रतीक हैं।
- सातवें दिन कालरात्रि, दुष्टों का संहार कर भक्तों की रक्षा करती हैं।
- आठवें दिन महागौरी, श्वेतवर्णा, कुंजिका द्वार की अधिष्ठात्री और पवित्रता की प्रतीक हैं।
- नवें दिन सिद्धिदात्री, सभी इच्छाएँ पूर्ण करने वाली और सिद्धियाँ प्रदान करने वाली देवी पूजी जाती हैं।
👉 संक्षेप में, यह रचना नवरात्रि के नौ दिनों की साधना और माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की महिमा का वर्णन करती है, जिससे भक्तों को शक्ति, शांति, सिद्धि और कल्याण की प्राप्ति होती है।
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यह दोहा छन्द (माता के नौ रूप।) “नंदिता माजी शर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/कवितायें/गीत/दोहे/लेख/आलेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।
नाम – नंदिता माजी शर्मा
साहित्यिक नाम : नंदिता “आनंदिता”
लेखिका/डिजीटल अलंकरणकर्ता/कवियत्री/समाज सेविका
संस्थापक/अध्यक्ष — कर्मा फाऊंडेशन
राष्ट्रीय सह-अध्यक्ष — साहित्य संगम संस्थान (पंजीकृत साहित्यिक संस्था)
अलंकरण प्रमुख — साहित्योदय(पंजीकृत साहित्यिक संस्था)
अलंकरण अधिकारी — अंतरराष्ट्रीय शब्द सृजन
प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष — साहित्य संगम संस्थान, (महाराष्ट्र इकाई)
जिला प्रभारी — एन.जी.टी.ओ
मीडिया प्रभारी — महाराष्ट्र शब्दाक्षर
मुख्य संपादक — दोहा संगम ( मासिक ई पत्रिका )
प्रधान संपादक — वंदिता ( मासिक ई पत्रिका )
मुख्य संपादक — महाराष्ट्र मल्हार ( मासिक ई पत्रिका )
प्रधान संपादक — आह्लाद मासिक ई-पत्रिका
प्रधान संपादक — अविचल प्रभा मासिक ई-पत्रिका
कई विधाओं में लेखन।
अनेक ई-पत्रिकाओं का सफल संपादन।
विभिन्न साहित्यिक मंचो और गोष्ठियों से ‘श्रेष्ठ रचनाकार’ ‘सर्वश्रेष्ठ रचनाकार’ इत्यादि अनेक सम्मान प्राप्त।
हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में स्वतंत्र लेखन।
०६ साझा – संग्रह ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज।
अनावृत संचालन हेतु लन्दन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज।
०१ साझा – संग्रह इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज।
०१ दिव्याक्षर ब्रेल साझा – संग्रह वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज।
हिंदी अकादमी, मुंबई द्वारा साहित्य भूषण सम्मान २०२३ से सम्मानित।
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