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पाहन से मुलाकात।

Kmsraj51 की कलम से…..

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    • ♦ पाहन से मुलाकात। ♦
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♦ पाहन से मुलाकात। ♦

एक दिन एक पाहन से
हुई थी मुलाक़ात।
उसने कहीं उस दिन,
मुझसे अपने मन की बात।
पूछा उसने मुझसे…
कुछ नाराज़गी से —

“क्यों करते हो तुलना हमारी
तुम कठोर हृदय मनुज से ?”

ये अपमान है हमारा
मेरी समझ से,
क्योंकि —
हम तो संगीत के राग
से ही पिघल जाते हैं।
कोई तराश दे तो,
मूर्ति में ढल जाते हैं।

हम दिखते हैं कठोर,
किन्तु मन में नहीं चोर।
दुर्ग और भवनों में,
आलीशान इमारतों में,
मेरे पारिवारिक सदस्य
जड़ें है कई गुम्बदों में।

सुनी हैं मैंने सच्ची दास्तानें,
मनुष्य की कुटिलता की।
दौलत, सत्ता के लोभ,
अपनों के कत्ल और क्रूरता की।

पाषाण नहीं करते ऐसा,
फिर हम पर ये आरोप कैसा ?

तुम्हारे ह्रदय जितने कठोर नहीं हैं हम।
घाती, कपटी, कुटिल चोर नहीं हैं हम।
देखो, सुनो जाकर अपने टी वी पर,
कैसे मनुज की वजह से मनुज मर रहा है।
मेरा ह्रदय तोसे कहते हुए भी पिघल रहा है।

और भी बहुत कुछ कहा उसने,
एक पत्थर ने सामने मेरे …
कटु सच का पुलिन्दा रख दिया।
और किस कदर मनुष्य होने पर
मुझे शर्मिंदा कर दिया।

♦ वेदस्मृति ‘कृती’ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

—————

  • “वेदस्मृति ‘कृती’ जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों में समझाने की कोशिश की हैं — पत्थर का उदाहरण देकर बताया है की आजकल के पत्थर दिल मनुष्य से तो लाख गुना अच्छा पत्थर है। सुनी हैं मैंने सच्ची दास्तानें मनुष्य की कुटिलता की। दौलत, सत्ता के लोभ, अपनों के कत्ल और क्रूरता की। पाषाण नहीं करते ऐसा, फिर हम पर ये आरोप कैसा ?

—————

यह कविता(पाहन से मुलाकात।) ” वेदस्मृति ‘कृती’ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई आई टी . शिक्षिका ( प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, ( सभी विधाओं में लेखन ) अनुवादक. समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन ( महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

—————

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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Comments

  1. वेदस्मृति ‘कृती’ says

    August 24, 2021 at 12:53 pm

    पाहन कविता को प्रकाशित करने के लिये आ. कृष्ण मोहन जी का हार्दिक आभार।

    Reply

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