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निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

Kmsraj51 की कलम से…..

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    • Nirarthak Reels Ki Aari – Gumraah Hoti Nari | निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।
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Nirarthak Reels Ki Aari – Gumraah Hoti Nari
| निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

अब आने वाले समय में अधिकांश पुरुष तन्हा ही रहेंगे।
आजकल बहुत $लिखा जाता है कि अब पहले जैसी $संस्कारी लड़कियां नहीं मिलतीं। कहते सुना होगा कि अरे लड़कियां तो छोड़ो अब तो $शादीशुदा महिलाएं भी। इतने बच्चों की माँ भी। क्या कभी सोचा है ऐसी स्थिति क्यों? आजकल केवल लड़कियां ही नहीं 30, 40, 50, 50+ Age कि महिलाएं भी ऐसी रील्स बना कर पब्लिकली पोस्ट करती हैं जिनमें कोई #कंटेंट नहीं होता। 
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उनके पास कोई #कला #हुनर #दिमाग नहीं है इसलिए बस कोई एक #रोमांटिक गाना लगा लेती हैं और उस गाने के #बोल के अनुसार भाव-भंगिमाएं, #अधरों को थरथराना, उत्तेजक, नारी की गरिमा को गिराने वाले #Expression देती हैं  जैसै कि वो #हीरो उनके पास ही हो और #उन्हीं के लिए गा रहा हो। मुझे घोर आश्चर्य तो तब हुआ जब गलती से एक बार मैंने इनकी रील्स पर क्लिक किया तो देखा कि इन #meaningless #contentless #behudi 12 साल की बच्चियों से लेकर #शादीशुदा महिलाओं तक को गुमराह करने वाली इन महिलाओं की #C grade #रील्स पर #illeterate अशिक्षित से लेकर #highlyqualified शिक्षित, उच्च  शिक्षित #देहाड़ी मजदूरों से लेकर, #Doctor #इंजीनियर #advovcate aur #High profile job and status wale sb एक पंक्ति में खड़े थे क्योंकि शायद शिक्षा और मानसिकता अलग-अलग है। अन्तर मात्र गरीबी, अमीरी, स्कूल जाने और न जा पाने का है मानसिकता एक जैसी। इनके कमेंट बॉक्स में अभद्रता की सीमा पार करते हुए कमेंट्स और टपोरी टाइप कमेंट्स जिनको कोई भद्र महिला बर्दाश्त नहीं कर सकती  हजारों लाखों की संख्या में होते हैं। 
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इससे भी ज्यादा हैरानी तब होती है जब अपने आपको #सभ्य #सुसंस्कृत #प्रबुद्ध कहने वाले पुरुष इनकी निन्दा या बहिष्कार करने के स्थान पर इनको आदरपूर्वक अपने प्रोफाइल पर अपनी स्टोरी में शेयर करते हैं और देख देख कर मुग्ध होते हैं। इनकी रील्स कई हजार की संख्या में शेयर होती है और एक #अच्छी #meaningful #motivational और #समाज को सही #दिशा दिखाने वाली रील एक 👍🏽लाइक को तरसती रहती है। इसलिए अब किसी को शिकायत या अचरज नहीं होनी चाहिए कि ऐसी महिलाओं की संख्या क्यों बढ़ रही है? क्योंकि ये महिलाएं ऐसी रील्स महिलाओं को रिझाने के लिए नहीं बना रही हैं। आप ही माध्यम बन रहे हैं इनको प्रोत्साहित करने का।
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आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर लोकप्रियता की दौड़ ने अभिव्यक्ति और आकर्षण के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया है। रोमांटिक गीतों पर भाव-भंगिमा प्रस्तुत करना स्वयं में गलत नहीं, परंतु जब आत्मसम्मान की कीमत पर अपनी नारी अस्त्वमिता को तार-तार करके त्वरित लाइक्स और क्षणिक प्रसिद्धि लक्ष्य बन जाए, तब सावधान होने की आवश्यकता है। डिजिटल मंच अवसर भी हैं और परीक्षा भी। हर व्यक्ति को यह समझना होगा कि आभासी प्रशंसा वास्तविक सम्मान नहीं होती। आत्ममूल्य बाहरी स्वीकृति पर नहीं, भीतर की गरिमा पर आधारित होना चाहिए। दर्शकों को भी विवेक रखना चाहिए—जो सामग्री मन, संस्कार और दृष्टि को नीचे गिराए, उससे दूरी बनाना ही बुद्धिमत्ता है।
—————
क्षणिक चमक की चाह में, मत खोना पहचान।
डिजिटल दर्पण देख कर, मत आँको सम्मान॥
♥⇔♥
आज का डिजिटल मंच अवसर भी है और आकर्षण का जाल भी। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, पर आत्म-अभिव्यक्ति और  प्रदर्शन के बीच की महीन रेखा पहचानना भी उतना ही आवश्यक है। जब बाहरी स्वीकृति ही आत्ममूल्यांकन का आधार बन जाती है, तब व्यक्ति अनजाने में स्वयं को दूसरों की दृष्टि के हवाले कर देता है। गरिमामय जीवन का अर्थ दमन नहीं, बल्कि सजग चयन है। जो सामग्री मन को क्षणिक उत्तेजना दे पर भीतर की प्रतिष्ठा को कम करे, उससे दूरी बनाना ही विवेक है। हमें न तो कठोर निर्णय देना है, न ही आँखें मूँद लेनी हैं—बल्कि युवाओं को यह समझाना है कि सच्चा आकर्षण व्यक्तित्व, प्रतिभा और चरित्र से जन्म लेता है, न कि केवल दृश्य प्रभाव से।
⇒
संदेश स्वरूप दोहे—
क्षणिक ताली, क्षणिक चमक, क्षणभंगुर सम्मान।
चरित्र दीर्घकालिक है, वही सच्ची पहचान॥
दर्पण जग का देख कर, मत मापो निज मोल।
भीतर की जो ज्योति है, वही अमूल्य अनमोल॥
♥⇔♥
कोई भी पोस्ट शेयर करने से पहले बहुत सजग रहना चाहिए कि क्या शेयर कर रहे हैं ? किसकी रीच बढ़ा रहे हैं ? ऐसी पोस्ट देख कर जो 10-20% महिलाएं, लड़कियां, युवतियां गुमराह होने से बच गई हैं वो भी गुमराह हो जाएं ऐसी सामग्री को शेयर करना कितने बड़े बड़े दुष्प्रभाव ला रहा है यह सर्व विदित है।
—————
हमारी व्यक्तिगत फेसबुक प्रोफाइल हमारा #डिजिटल घर है ठीक वैसे ही जैसे हमारा अपना घर होता है जिसमें हम रहते हैं। हमारे दरवाजे पर अनेक लोग घंटी बजाते हैं क्या सबको अन्दर बिठाते हैं ? हमारे डिजिटल घर में किसका प्रवेश हो किसका नहीं ये विवेक अगर नहीं है तो आप एक ग़लत कार्य में तन-मन और धन से अपनी सहभागिता दे रहे हैं। अब ढूंढ़ते रहिए सच्चा प्यार और सच्चा साथ।
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सही और सच्ची महिलाएं अब ये सोचने पर विवश हैं कि – शरीफ….. सीता सावित्री बन कर क्या मिला? कद्र तो लटकों झटकों की हो रही है। अटैन्फिशन तो संस्कारहीन महिलाओं को मिल रही है। सराहा तो उन्हें जा रहा है फिर शादी करने, घर संभालने और बच्चों में अपनी जिंदगी खपाने का क्या फायदा ? जिम्मेदारियां निभाने की क्या जरूरत? इससे कहीं ज़्यादा आसान और टेंशन फ्री काम है 5 मिनट की टपोरी टाइप रील्स बनाओ और ऐश करो।
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बदलाव तभी आता है जब सोच बदलती है और अब महिलाओं की सोच पूरी तरह बदल चुकी है। #विवाह #प्रेम पति, प्रेमी इन शब्दों से उनका मोह भंग हो चुका है। मध्यम एवं अपर मध्यम वर्ग की पढ़ी लिखी युवतियां पति और शादी से ज्यादा महत्व अपने कैरियर को देती हैं। अपने लिए रोटी कपड़ा और मकान का जुगाड़ वे खुद कर लेंगी। जो जॉब या बिजनेस नहीं कर सकतीं वो C grade रील्स बना कर पैसा कमा लेंगी। ठीक इसी तरह गरीब तबके में भी प्रतिभाशाली लड़की स्वयं सक्षमता से अपने पैरों पर खड़ी होगी। जिसमें प्रतिभा नहीं है वह  घटिया C ग्रेड रील्स बना लेगी। जिनकी डिमांड है उन्हीं से तो प्रेरणा लेकर आगे का समाज बनेगा।
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  अब संस्कारी बहू, बेटी, पत्नी बस कहानियों में मिलेंगी।
दिक्कत ये है कि –
सीता सबको चाहिए पर स्वयं राम किसी को नहीं बनना।
सावित्री सबको चाहिए पर स्वयं सत्यवान किसी को नहीं बनना।

♦ वेदस्मृति ‘कृती‘ जी – पुणे, महाराष्ट्र ♦

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  • “वेदस्मृति ‘कृती‘ जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कटु सत्य लेख में समझाने की कोशिश की है — यह कटु सत्य लेख जब आत्मसम्मान की कीमत पर अपनी नारी अस्त्वमिता को तार-तार करके त्वरित लाइक्स और क्षणिक प्रसिद्धि लक्ष्य बन जाए, तब सावधान होने की आवश्यकता है। डिजिटल मंच अवसर भी हैं और परीक्षा भी। हर व्यक्ति को यह समझना होगा कि आभासी प्रशंसा वास्तविक सम्मान नहीं होती। आत्ममूल्य बाहरी स्वीकृति पर नहीं, भीतर की गरिमा पर आधारित होना चाहिए। दर्शकों को भी विवेक रखना चाहिए—जो सामग्री मन, संस्कार और दृष्टि को नीचे गिराए, उससे दूरी बनाना ही बुद्धिमत्ता है। आज का डिजिटल मंच अवसर भी है और आकर्षण का जाल भी। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, पर आत्म-अभिव्यक्ति और  प्रदर्शन के बीच की महीन रेखा पहचानना भी उतना ही आवश्यक है। जब बाहरी स्वीकृति ही आत्ममूल्यांकन का आधार बन जाती है, तब व्यक्ति अनजाने में स्वयं को दूसरों की दृष्टि के हवाले कर देता है। गरिमामय जीवन का अर्थ दमन नहीं, बल्कि सजग चयन है। जो सामग्री मन को क्षणिक उत्तेजना दे पर भीतर की प्रतिष्ठा को कम करे, उससे दूरी बनाना ही विवेक है। हमें न तो कठोर निर्णय देना है, न ही आँखें मूँद लेनी हैं—बल्कि युवाओं को यह समझाना है कि सच्चा आकर्षण व्यक्तित्व, प्रतिभा और चरित्र से जन्म लेता है, न कि केवल दृश्य प्रभाव से।

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यह कटु सत्य लेख ( निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी। ) ” वेदस्मृति ‘कृती‘ जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी मुक्तक/कवितायें/गीत/दोहे/लेख/आलेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए।

साहित्यिक नाम : वेदस्मृति ‘कृती’
शिक्षा : एम. ए. ( अँग्रेजी साहित्य )
बी.एड. ( फ़िज़िकल )
आई• आई• टी• शिक्षिका (प्राइवेट कोचिंग क्लासेज़)
लेखिका, कहानीकार, कवियित्री, समीक्षक, (सभी विधाओं में लेखन) अनुवादक, समाज सेविका।

अध्यक्ष : “सिद्धि एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह”
प्रदेश अध्यक्ष : अखिल भारतीय साहित्य सदन (महाराष्ट्र इकाई )
राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान बिहार प्रान्त की महिला प्रकोष्ठ,
श्री संस्था चैरिटेबल ट्रस्ट : प्रदेश प्रतिनिधि ( महाराष्ट्र )
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद में – सह संगठन मंत्री, मुंबई ज़िला, महाराष्ट्र
हिन्दी और अँग्रेजी दोनों विधाओं में स्वतंत्र लेखन।

अनेक प्रतिष्ठित हिन्दी/अँग्रेजी पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रचनाएँ प्रकाशित।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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