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पायल में समन्वय – मंत्र।

Kmsraj51 की कलम से…..

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    • ♦ पायल में समन्वय – मंत्र। ♦
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♦ पायल में समन्वय – मंत्र। ♦

पायल की रुनझुन में, युग – मर्यादा,
के लिए मां सीता की स्वीकार्यता है।

पायल की छम – छम में, कृष्ण-भक्ति,
भाव यज्ञ की राधा-नाम चरितार्थता है।

पायल के गतिमान संगीत में, नारी,
की सेवा निष्ठा, स्नेह की साधना है।

पायल की झंकार में, सहजीवन संग,
भोग वैराग्य मध्य अनासक्ति अर्चना है।

पायल झूमते जेवर – पिटक में, धारक,
नारी मानस शोध करें, नव तकनीक।

क्षेम, नेह, मैत्री हेतु, कुटुंब बंधे हैं,
पायल में, नारी के सब रूप सजे हैं।

प्रणम्य हैं, पायल-स्पर्शित नारी चरण,
अर्पित सुमन उन्हें, करें वे नवनिर्माण।

♦ प्रो• मीरा भारती जी – पुणे, महाराष्ट्र  ♦

—————

  • “प्रो• मीरा भारती जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से बताने की कोशिश की है — पायल का उदाहरण देकर नारी के आंतरिक गुणों का वर्णन किया है। पायल की छम-छम में भक्ति, प्रेम, स्नेह की साधना, सेवा निष्ठा का समन्वय है। पायल की झंकार में, सहजीवन संग, भोग वैराग्य मध्य अनासक्ति अर्चना है। पायल झूमते जेवर – पिटक में, धारक, नारी का मन शोध करें, व नव तकनीक और ऊर्जा से सब सरल करें। जैसे पायल में सभी घुंघरू बांधे है एक साथ उसी तरह क्षेम, नेह, मैत्री हेतु, कुटुंब बंधे हैं, पायल में, नारी के सब रूप सजे हैं पायल में। प्रणम्य हैं, पायल-स्पर्शित नारी चरण, जिनके गर्भ में नजीवन पलता, तहे दिल से अर्पित सुमन उन्हें, करें वे नवनिर्माण।

—————

यह कविता (पायल में समन्वय – मंत्र।) “प्रो• मीरा भारती जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं से नई पीढ़ी को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम मीरा भारती (मीरा मिश्रा/भारती) है। मैंने BRABU Muzaffarpur, Bihar, R.S College में प्राध्यापिका के रूप में 1979 से 2020 तक सक्रिय चिंतन और मनन, अध्यापन कार्य किया, आनलाइन शिक्षण कार्यक्रम से वर्तमान में भी जुड़ी हूं, मेरे द्वारा प्रशिक्षित बच्चे लेखनी का सुंदर उपयोग किया करते हैं। मैंने लगभग 130 कविताएं लिखी है, जिसमें अधिक प्रकाशित हैं, कई आलेख भी, लिखे हैं। दृढ़ संकल्प है, कि लेखन और अध्यापन से, अध्ययन के सामूहिक विस्तारण से समाज कल्याण – कार्य के कर्तृत्व बोध में वृद्धि हो सकती है। अधिक सकारात्मक परिणाम आ सकते हैं।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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