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पुनः सनातन लाना होगा।

Kmsraj51 की कलम से…..

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    • Punah Sanatan Lana Hoga | पुनः सनातन लाना होगा।
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Punah Sanatan Lana Hoga | पुनः सनातन लाना होगा।

आओ मिलकर बीजते हैं बीज,
इस धरती पर सनातन का।
भटकी हुई नव पीढ़ी को फिर से,
पढ़ाते हैं पाठ पुरातन का।

जहां थी मान मर्यादाएं घनी,
अभाव में भी संतोषी आत्म था।
इस मानव समाज के बच्चे-बच्चे में,
कूट – कूट के अध्यात्म था।

सम दृष्टि थी हर मानव की,
दिखता हर घट में परमात्म था।
तन – बदन में शालीन वस्त्र थे,
सामाजिक नियम पुरातन था।

न जाति थी, न धर्म थे कोई,
न ही नर-नारी में कोई लड़ाई थी।
पूरी धरती शान्ति से,
वसुधैव कुटुंबकम के भाव में समाई थी।

दुरात्म भाव ने आ के धरा पर,
मानव से मानव लड़ाया था।
सुख – शान्ति, चैन और भाईचारा,
हम सबसे दूर भगाया था।

दुरात्म भाव को दूर भगाओ,
पाठ यह सबको पढ़ाना होगा।
अंध आधुनिकता को कर के पीछे,
पुनः सनातन लाना होगा।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भटकी हुई नव पीढ़ी को फिर से पढ़ाते हैं पाठ पुरातन सनातन संस्कृति का जिससे सभी मानव जन्म को सार्थक बना सके। सनातन में न जाति थी, न धर्म थे कोई, न ही नर-नारी में कोई लड़ाई थी। पूरी धरती शान्ति से वसुधैव कुटुंबकम के भाव में समाई थी। पुनः सनातन लाना होगा। इस मानव समाज के बच्चे-बच्चे में कूट – कूट के अध्यात्म था। सनातन की उत्पति – सनातन किसी एक लेखक या दार्शनिक या किसी ऋषि के विचारों की बस उपज नहीं है, यह तो अनादि काल से प्रवाहमान और विकासमान रहा। विश्व के सभी धर्मों से सबसे पुराना सनातन धर्म है। मान्यता है कि वैदिक धर्म जिसमें परमात्मा को साकार और निराकार दोनों रुपों में पूजा जाता है । ये वेदों पर आधारित धर्म है।

—————

यह कविता (पुनः सनातन लाना होगा।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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