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बारिश और किसान।

Kmsraj51 की कलम से…..

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    • Rain and Farmer | बारिश और किसान।
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Rain and Farmer | बारिश और किसान।

बारिश और किसान का बहुत गहरा संबंध है। बारिश के बिना किसान की फसल तैयार नहीं होती है, किसान मिट्टी से सोना उत्पन्न करने की तपस्या करता रहता है। तपती धूप कड़ाके की ठंड और मूसलाधार बारिश में भी अपने खेती और अपनी फसल को सुरक्षित रखता है, भारत की आत्मा किसान है।

जो गांव में निवास करती है, किसान हमें खाद्य पदार्थ देने के अलावा भारतीय संस्कृति और सभ्यता को भी सहेज रखे हुए हैं, देशभर को अन्न, फल, साग – सब्जी किसान ही देता है। बारिश और किसान एक दूसरे के पूरक है जब बारिश होगी तभी खेत की मिट्टी गीली होगी और उसमें बीच डाले जाएंगे फिर फसल तैयार होती है।

किसान खेती करके अपना, परिवार का पेट पालता है अगर बारिश नहीं होती तो, यह किसान लिए चिंताजनक विषय बन जाता है। पर्यावरण की रक्षा करने के लिए भी बारिश का होना बहुत आवश्यक है। आजकल बहुत ज्यादा प्रदूषण के कारण जल चक्र सटीक रूप से निष्क्रिय नहीं हो पाता है जिसकी वजह से समय पर बारिश नहीं हो पाती है। बारिश कभी-कभी उचित जगह पर ना होकर अलग – अलग हो जाती है, फिर कभी – कभी अत्यधिक बारिश भी फसल को नष्ट कर देती है।

ऐसे में किसान अपनी फसल की बर्बादी को देख कर बहुत दुखी होता है, भारत देश में बहुत केमिकल कारखाने हैं। जिससे निकलते हुए धूल प्रदूषण और वायु प्रदूषण से जो पानी नदी में बह रहा है वह भी प्रदूषित होता है, जिसकी वजह से फसल सही से नहीं हो पाती है। जल चक्र में जल दूषित होकर रहेगा तो दूषित वर्षा भी होती है, इसी कारण किसानों पर इसका भारी प्रभाव पड़ता है। गरीब किसान अपने जीवन की सारी जमा पूंजी अपनी खेती पर लगाकर ही फसल से अपनी आमदनी करते हैं, जिससे वह अपने परिवार का पेट पालता है।

पर बारिश नहीं होती है तो किसान उदास हो जाता है, उसकी दिनचर्या रोजाना एक जैसी ही होती है। खेती की रक्षा करने के लिए वह अपने खेत पर ही ज्यादा समय रहा करता है, और अपनी खेती को अपनी मेहनत से सींचता है, वह दिन भर कठोर परिश्रम करने के बाद भी नहीं अपने घर को लौट पाता है।

जहां नदी का पानी स्वच्छ होगा, वहाँ की जलवायु भी शुद्ध होगी और शुद्ध जल से शुद्ध वर्षा भी होगी। जिससे फसल अच्छी तैयार होगी, फसल अच्छे दाम में भी बिकेगी, जिससे किसान को बहुत अधिक लाभ मिलता है, वह अपने परिवार के लिए धन एकत्रित करता है, किसान हमारे अन्नदाता है।

अगर किसान खेती न करें तो, हम लोगों अन्न कहाँ से मिलेगा? पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए हम सबको आगे कदम बढ़ाने होंगे, अगर हम वाहन आदि का प्रयोग कम कर दे, तो पर्यावरण शुद्ध होने में थोड़ी मदद मिल सकती है। कल कारखानों के अपेक्षा लघु – कुटीर उद्योग स्थापित करें तो कुछ हद तक वातावरण शुद्ध हो सकता है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — “किसान ही वह इंसान है, जो सूरज की तेज गर्मी, बारिश या तेज ठण्ड की परवाह किये बिना ही वह अपने खेतों पर फसलों को अपनी मेहनत से उगाने का काम करते हैं। अपने परिश्रम से वह कई किस्म के अन्न, फल, सब्जियों इत्यादि को खेतों में उगाता हैं, और एक उचित मूल्य पर इसे बाजारों में बेचते हैं।” बारिश और किसान का बहुत गहरा संबंध है। बारिश के बिना किसान की फसल तैयार नहीं होती है, किसान मिट्टी से सोना उत्पन्न करने की तपस्या करता रहता है। तपती धूप कड़ाके की ठंड और मूसलाधार बारिश में भी अपने खेती और अपनी फसल को सुरक्षित रखता है, भारत की आत्मा किसान है। जो गांव में निवास करती है, किसान हमें खाद्य पदार्थ देने के अलावा भारतीय संस्कृति और सभ्यता को भी सहेज रखे हुए हैं, देशभर को अन्न, फल, साग – सब्जी किसान ही देता है। जहां नदी का पानी स्वच्छ होगा, वहाँ की जलवायु भी शुद्ध होगी और शुद्ध जल से शुद्ध वर्षा भी होगी। जिससे फसल अच्छी तैयार होगी। अगर किसान खेती न करें तो, हम लोगों अन्न कहाँ से मिलेगा? पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए हम सबको आगे कदम बढ़ाने होंगे, अगर हम वाहन आदि का प्रयोग कम कर दे, तो पर्यावरण शुद्ध होने में थोड़ी मदद मिल सकती है। कल कारखानों के अपेक्षा लघु – कुटीर उद्योग स्थापित करें तो कुछ हद तक वातावरण शुद्ध हो सकता है।

—————

यह लेख (बारिश और किसान।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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