Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बाबा साहेब को नमन। ♦

बाबा साहेब को नमन जो सविंधान निर्माता कहलाये।
अप्रैल 14 को भारत रत्न भीमराव की अम्बेडकर जयंती मनाये॥
एक ऐसे समाज में कोहिनूर हीरा चमका।
जिसके तेज से फिर पूरा देश ही दमका॥
शिक्षा की एक सच्ची राह दिखाई जिसने।
सबमें मानव-धर्म की अलख जगाई उसने॥
दिव्य आकाश का जो चमकता सितारा बना।
बस ऐसा ही डॉ भीमराव शिक्षा का प्यारा बना॥
जिन्होंने अपने ह्रदय में केवल एक ही बात ठानी।
शिक्षा को सर्वोपरि मान सुप्त जन-चेतना जगानी॥
उम्रभर किताबों को ही रखा सच्चा दोस्त बनाये।
दिखा दिया दुनिया को शिक्षा में ही सर्वगुण समाये॥
शिक्षा-ज्ञान ही मानवता के सब गुण भर जाए।
भेदभाव के अवगुण का तिमिर हर ले जाये॥
धन्य थे इनके मात-पिता जो शिक्षा को माने वरदान।
सिखलाया जिन्होंने पढ़-लिख कर बनो देश की शान॥
शिक्षित बन संगठित रहकर करो संघर्ष यही उनका प्रिय ये नारा।
शिक्षा से ही देश-विदेश में पूजनीय भीमराव प्यारा॥
शिक्षा के इस आलौकिक मन्त्र से अपने दिलों को जगमगाये।
कोटिशः वन्दन से श्रद्धा-पुष्प अर्पित कर आज ये दिवस मनाये॥
♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦
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- “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भीमराव रामजी आम्बेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1956), डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे। उन्होंने दलित बौद्ध आन्दोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे। बाबासाहब आम्बेडकर जी ने शिक्षा को ही सदैव सर्वोपरि माना और शिक्षा के दम पर सब कुछ करके दिखाया।
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यह कविता (बाबा साहेब को नमन।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।
आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—
मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।
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Great poem
तहे दिल से धन्यावाद जी!