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जूठा भोजन छोड़ देते हैं थाली में

बेकदरी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Disrespect | बेकदरी।

You must not leave anything on your plate as leftovers. Leaving food on your plate is not appreciated in Indian culture.

खेलने की आदत है जिनको आंधियों से
भला वे क्यों डरने लगेंगे फिर बांदियों से ?

जाने क्यों भूल गए हैं लोग घटनाएं दौर की?
कितना महत्वपूर्ण होता है बेवक्त में कौर भी?

बेकदरी हो गई है जमाने में आज अनाज की,
रही डर और कद्र नहीं है किसी को राज की।

थालियों में जूठन छोड़ना आज शान समझते हैं,
लोकतन्त्र में खुद को राजा भी तमाम समझते हैं।

न डर है किसी को कानून का न अन्न का है सम्मान,
और तो और मौजूदा दौर में बन बैठे हैं लोग भगवान।

खुदा न करे कि दुनियां में फिर से अकाल पड़ जाए,
जूठन को छोड़ने वाले नालियों में पड़े दाने को खाए।

खुदा न करे कि सब्सिडियों के फेर में देश गुलाम हो जाए,
लोकतन्त्र का दुरुपयोग करने वालों पर चांडाल राज चलाए।

सुना है कि इतिहास हमेशा से खुद को ही दोहराता है,
सदियों के अन्तराल में यहां फिर से वही दौर आता है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला – मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता व्यक्त कर रही है कि जो इंसान बड़ी से बड़ी समस्या से नहीं घबराता है डटकर उसका सामना करता है तो भला वो छोटे – मोटे बांदियों से क्यों डरे? पूर्व में हुई घटनाओ को लोग कैसे भूल जा रहे है, जब समय ख़राब होता है तो एक कौर (निवाला) भी मिलना मुश्किल हो जाता है। आज के ज़माने में अन्न का बहुत ज्यादा बेकदरी हो गया है, आजकल लोग अन्न का कद्र करना भूल गए है, जिस अन्न को लोग भगवान् का प्रसाद स्वरुप ग्रहण करते आ रहे है सदियों से। आजकल लोग अपनी भूख से ज्यादा भोजन लेकर थालियों में जूठन छोड़ना आज शान समझते हैं, जो की मूर्खता की सबसे बड़ी निशानी है, अपने घमंड में चूर होकर लोग खुद को राजा समझने लगे है आजकल। अब न डर है किसी को कानून का न अन्न का है सम्मान, और तो और मौजूदा दौर में बन बैठे हैं लोग खुद ही भगवान। भगवान्न न करे कि दुनियां में फिर से अकाल पड़ जाए और जूठन को छोड़ने वाले नालियों में पड़े दाने को खाए। कही ऐसा ना हो की सब्सिडियों के फेर में देश गुलाम हो जाए, लोकतन्त्र का दुरुपयोग करने वालों पर चांडाल राज चलाए। हम सब ने तो सुना है कि इतिहास हमेशा से खुद को ही दोहराता है, सदियों के अन्तराल में यहां फिर से वही दौर आता है।

—————

यह कविता (बेकदरी।) “हेमराज ठाकुर जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Leaving food on your plate is not appreciated in Indian culture, short poem on disrespect in hindi, उतना ही लो थाली में जूठा न जाए नाली में, जूठा भोजन छोड़ देते हैं थाली में, थाली में खाना क्यों नहीं छोड़ना चाहिए?, दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहां अन्न को देवता माना जाता, बेकदरी, बेकदरी - हेमराज ठाकुर, भोजन शिष्टाचार, हमारे शास्त्रों के अनुसार थाली में जूठा खाना छोड़ना क्यों मना है?, हेमराज ठाकुर, हेमराज ठाकुर जी की कविताएं

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