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भारतीय सैनिकों की बहादुरी पर कविता

जनक शहीदों के…

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ जनक शहीदों के… ♦

समन्दर बनकर आंसू बहते, हमने उन माँओं के देखे हैं।
शहीद हो कर सरहदों से जब, लौटते बलिदानी बेटे हैं।

पत्थर दिल बापों को हमने, पीटते छाती अपनी देखा है।
जब तिरंगे में लिपट लौटता, शहिद हो उनका बेटा है।

विधवा बहू की मांग को सूनी, देख के दोनो जब रोते हैं।
मृत प्राय से पड़ जाते हैं दोनो, सुध – बुद्ध अपनी खोते हैं।

जाना था जब हमको पहले, क्यों लल्ला को भिजवा दिया?
उल्टी गंगा बहाकर रब्बा, यह तुमने आखिर क्या किया?

नेह के आंसू सावन से झरते, बरसात को भी शर्मिंदा किया।
रुग्ण – रूष्ट इस मीच निगोडी ने, मुर्दों को कब जिंदा किया?

बूढ़ी आंखे बस रोती रही, बेटा धूं – धूं कर तब जलता गया।
मां सिसकियां भरती रह गई, बाप दोनों हाथ ही मलता गया।

अंतिम सत्य है मौत जीवन का, यह सबको इक दिन आनी है।
बेटा क्यों गया हमसे पहले? बूढ़ी आंखों में इसलिए पानी है।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

ज़रूर पढ़ें — शिक्षक की महानता।

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — जब जवान सैनिक बेटा शहीद होकर घर आता है उस समय उसके माता – पिता की क्या मनोस्थिति होती है। उनके कलेजे का टुकड़ा उनसे पहले इस दुनिया से विदा होता है यही गम सबसे बड़ा होता है उनके लिए, मृत्यु एक अटल सत्य है इस जीवन का लेकिन समय से पहले दर्द दे जाता है। विधवा बहू की मांग को सूनी, देख के दोनो जब रोते हैं, मृत प्राय से पड़ जाते हैं दोनो, सुध – बुद्ध अपनी खोते हैं।

—————

यह कविता (जनक शहीदों के…) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

 

 

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सरहदी बाशिंदे।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सरहदी बाशिंदे। ♦

मांएं रोती खून के आंसू,
बाप बेचारे बिलखाते हैं।
जब नन्हे – नन्हे बच्चे उनके,
मस्तक पर गोली खाते हैं।

घरों के उड़ते तब परखच्चे से उनके,
जब पाकिस्तानी बेवजह गोली चलाते हैं।
त्राहि-त्राहि कर छोड़ते आंगन द्वार सब,
यहां कई सैनिक भी शहीद हो जाते हैं।

सरहदी बाशिंदों की देखी वो पीड़ा मैंने,
टी वी चैनल हमें जो भी जैसा दिखाते हैं।
मौत तो आएगी जब आएगी तब ओ प्रभु!
वे इस पीड़ा में क्षण – क्षण मरते जाते हैं।

दो मुल्कों की आपसी तनातनी में,
ये दिन – रात अपना सुख चैन गवाते हैं।
कभी तवे की रहती तवे पर धरी की धरी,
चूल्हे में डाली चूल्हे में ही छोड़ जाते हैं।

बस सीज फायर का उल्लंघन करते ही उनके,
ये दौड़ – भाग कर मुश्किल से जान बचाते हैं।
इनकी तमाम उम्र का सिलसिला बस यही है,
ये दहशत में जीते हैं और दहशत में मर जाते हैं।

दोनों मुल्कों में हालात बराबर यही है,
क्योंकि हम भी जबावी गोली चलाते हैं।
गोली तो गोली ही होती है बेरहम, निर्दय,
लग जाती है, जो उसके सामने आते हैं।

वह देखो बरसी फिर से है गोली,
मोर्टार, गजब जोर के धमाके हैं।
वे सरहदी बाशिंदे दौडे – भागे,
वे जवान ही शहीद हो जाते हैं।

तिरंगे की लेकर ओट ये बांकुरे,
देश पर कुर्बानी अपनी चढ़ाते हैं।
दे कर आंसू तब हमारी आंखों में,
वे हममें राष्ट्रप्रेम पुनः जगाते हैं।

भूली तब उन्होंने जावानी भी अपनी,
सब भूला दिये रिश्ते और नाते हैं।
सरहदी सीमाओं की रक्षा करते करते,
उनको बस अपने फर्ज ही याद आते हैं।

धन्य – धन्य ओ जननी! कोख है तेरी,
जिसने ऐसे अद्भुत अदम्य वीर जनाए हैं।
उन्होंने दागी गोली कि आतंक फैलाएं,
इन्होंने छाती पर ही वार सब खाए हैं।

बच्चों को छोड़ते रोते बिलखते,
देशभक्ति की कसम जो खाई है।
मां – बाप रुलाए खून के आंसू,
सधवाएं विधवाएं क्षण में बनाई हैं।

♦ हेमराज ठाकुर जी – जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “हेमराज ठाकुर जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – सरहद पर बसने वाले “सरहदी बाशिंदे” पर जब-जब सीज फायर का उल्लंघन करते ही उनके, ये (देश के वीर जवान) दौड़ – भागकर मुश्किल से जान बचाते हैं। दो मुल्कों की आपसी तनातनी में ये दिन-रात अपना सुख चैन गवाते हैं। वह देखो बरसी फिर से है गोली, मोर्टार, गजब जोर के धमाके हैं। वे सरहदी बाशिंदे दौडे – भागे, वे जवान ही शहीद हो जाते हैं। तिरंगे की लेकर ओट ये बांकुरे, देश पर कुर्बानी अपनी चढ़ाते हैं। देकर आंसू तब हमारी आंखों में, वे हममें राष्ट्रप्रेम पुनः जगाते हैं।

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यह कविता (सरहदी बाशिंदे। ) “हेमराज ठाकुर जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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पुकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ पुकार। ♦

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढो।

समर सुनसान पड़ा है।
लूटते देख मां की लाज।
निज जंगी बेड़ा पास पड़ा।
बलिदान, बलिदान खड़ा है।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

कुर्बानी की जंग है लड़नी।
दुश्मन त ललकार रहा है।
फौलादी जंगी बेटा को,
तुम भी तो तैयार करो।

दुश्मन सीमा पर तैनात खड़ा है।
सीमा पर तैनात वह अड़ा है।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

खड़ा शहीदी जत्था भी,
तुझको आज पुकार रहा है।
सुनसान समर निहार रहा।
बलवीर पुंज बनकर उभरों री।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

त्याग तपस्या बलिदान का,
यही रहा है केंद्र बिंदु।
मंगल आज पुकार रहा है।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

चारों तरफ बिछी देख,
लाशों की जब ढेर।
झुकने देना कभी नहीं,
भारत मां का शीश।

होगा तो ढूंढो, पढ़ो बहादुर बढ़ो।
चढ़ो बहादुर बढ़ो, चलो वीर बढ़ो।

तपोभूमि हर ग्राम हमारे,
कवि की वाणी गाती है।
लोरी गाती शाम को,
माता गाय हमारी प्यारी है।

कहां सिंह बन गए खिलौने,
वाली रानी बलिदान खड़ा है।
पढ़ो बहादुर पढ़ो,
लड़ो बहादुर लड़ो।

उठो बहादुर उठो।
बढ़ो बहादुर बढ़ो।

♦ सुखमंगल सिंह जी – अवध निवासी ♦

—————

  • “सुखमंगल सिंह जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से बखूबी समझाने की कोशिश की है – सैनिकों का उमंग – उत्साह बढ़ाते हुए कवि कहते है, चाहे कुछ भी हो जाये कभी भी झुकने ना देना भारत माँ का शीश। त्याग तपस्या बलिदान का, यही रहा है केंद्र बिंदु। उठो बहादुर उठो। बढ़ो बहादुर बढ़ो।

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यह कविता (पुकार।) “सुखमंगल सिंह जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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तेरी जय जयकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

♦ तेरी जय जयकार। ♦

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उनके जश्न में भी तेरा जलवा बरकरार है।
सच को तुमपे नाज है, फख्र तुमपे यार है।
चुनौती स्वीकार कर लड़ना अड़ना जरुरी है।
तुम बहादुरी से लड़े, तेरी जय जयकार है॥

क्या हुआ गर खेल में पराजय लगी हाथ।
परछाई है संग छोड़ गये सारे अपने साथ।
इमानदारों के लिए हमेशा दुश्वारियाँ हजार है।
तुम बहादुरी…..

मैनें देखा है राहों में तेरा सूर्य सा अभिनंदन।
जनसैलाब की आँखों में हर्षातिरेक वाला क्रन्दन।
दिल जीतना देश जीतने से बेहतर व्यापार है।
तुम बहादुरी…..

अना को नहीं गिरवी रखा अनीति के लिए।
पथभ्रष्ट हुए नहीं कभी स्वार्थ कुरीति के लिए।
कर्तव्यच्युत नहीं कर सके, रकीबों धिक्कार है।
तुम बहादुरी…..

जीतनेवाले अपनी इस जीत पे पछतायेंगे।
आइने से खुद नजर मिलाके हार जायेंगे।
शर्म से गर्दन झुकी है शीशा भी शर्मसार है।
तुम बहादुरी…..

♦ शैलेश कुमार मिश्र (शैल) – मधुबनी, बिहार ♦

  • “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाया है, कैसी भी परिस्थिति हो अपने उमंग – उत्साह को कम न होने दो।

—•—•—•—

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यह कविता “शैलेश कुमार मिश्र (शैल) जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपने सच्चे मन से देश की सेवा के साथ-साथ एक कवि हृदय को भी बनाये रखा। आपने अपने कवि हृदय को दबाया नहीं। यही तो खासियत है हमारे देश के वीर जवानों की। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

About Yourself – आपके ही शब्दों में —

  • नाम: शैलेश कुमार मिश्र (शैल)
  • शिक्षा: स्नातकोत्तर (PG Diploma)
  • व्यवसाय: केन्द्रीय पुलिस बल में 2001 से राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्यरत।
  • रुचि: साहित्य-पठन एवं लेखन, खेलकूद, वाद-विवाद, पर्यटन, मंच संचालन इत्यादि।
  • पूर्व प्रकाशन: कविता संग्रह – 4, विभागीय पुस्तक – 2
  • अनुभव: 5 साल प्रशिक्षण का अनुभव, संयुक्त राष्ट्रसंघ में अफ्रीका में शांति सेना का 1 साल का अनुभव।
  • पता: आप ग्राम-चिकना, मधुबनी, बिहार से है।

आपकी लेखनी यूँ ही चलती रहे, जनमानस के कल्याण के लिए। उस अनंत शक्ति की कृपा आप पर बनी रहे। इन्ही शुभकामनाओं के साथ इस लेख को विराम देता हूँ। तहे दिल से KMSRAJ51.COM — के ऑथर फैमिली में आपका स्वागत है। आपका अनुज – कृष्ण मोहन सिंह।

  • जरूर पढ़े: चली जाती है।
  • जरूर पढ़े: अच्छा लगता है।

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