• Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer
  • HOME
  • ABOUT
    • Authors Intro
  • QUOTES
  • POETRY
    • ग़ज़ल व शायरी
  • STORIES
  • निबंध व जीवनी
  • Health Tips
  • CAREER DEVELOPMENT
  • EXAM TIPS
  • योग व ध्यान
  • Privacy Policy
  • CONTACT US
  • Disclaimer

KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

Check out Namecheap’s best Promotions!

You are here: Home / Archives for लेखिका सीमा रंगा इन्द्रा जी की रचनाएँ

लेखिका सीमा रंगा इन्द्रा जी की रचनाएँ

फौजी की राखी।

Kmsraj51 की कलम से…..

Soldier’s Rakhi | फौजी की राखी।

आज रमा पहली बार अकेले पंजाब से अपने भाई को राखी बांधने जा रही है। शादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब रमा अकेली सफर कर रही है, हर बार राखी पर अपने पति अमित के साथ अपने मायके जाती थी। परंतु इस बार अमित को किसी जरूरी कार्य के लिए बाहर जाना पड़ा तो रमा को अकेले ही सफर, करना पड़ा। ट्रेन अपने तय समय 9:00 अमृतसर स्टेशन पर पहुंच गई। अमित ने रमा को बिठा दिया क्योंकि उसे भी उसी दिन निकलना था और जाते-जाते बोल दिया घर पहुंचते ही फोन कर देना रमा डरी सहमी खिड़की के बगल वाली सीट पर बैठी बस अमित को ही देखे जा रही थी और मन में ढेरों, सवाल थे?

उसके साथ में एक नन्ही सी 2 साल की अपनी बेटी स्नेहा भी थी। अमित के पास इतना वक्त नहीं था कि ट्रेन चलने का इंतजार करें। अमित बिठाते ही तुरंत निकल गया कुछ समय के पश्चात ट्रेन ने अपनी रफ्तार पकड़ी और चलते-चलते जब काफी देर हो गई तो रमा तो अमित के ख्यालों में ही खोई हुई थी। एकदम से उसका ध्यान गया कि जिस बोगी में उसकी टिकट है उसमें सिर्फ एक बूढ़ी अम्मा और रमा ही बैठी है और बाकी सारी बोगी में फौजी लोग बैठे हुए थे और सभी फौजी लोग बड़े खुश थे। एक दूसरे के साथ हंसी मजाक कर रहे थे।

रमा को डर लगने लगा उसे लगा जैसे कि वह बहुत अकेली है। अगले स्टेशन पर बूढ़ी अम्मा भी उतर गई अब तो रमा की जैसे जान ही निकल गई। हड़बड़ाहट में जोर-जोर की सांसे ले रही थी बार-बार कभी खिड़की की तरफ कभी अपनी बेटी की तरफ देख रही थी और यह भी देख रही थी कि उसे कौन-कौन देख रहा है। सामने वाले भी बीच-बीच में उसकी तरफ देख रहे थे। फिर उन सभी के बीच में से एक फौजी उठकर रमा की तरफ आया रमा का तो जैसे दिल ही बैठ गया जैसे ही वह फौजी रमा के पास आया उसने रमा के सिर पर हाथ रखा और बोला बहन तुम घबराओ मत। मैं देश का जवान हूं मेरा फर्ज सिर्फ इतना नहीं है कि मैं देश की सरहद की रखवाली करूं।

हम जवान 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहते हैं आप चिंता ना करें आप यहां पर अपने भाइयों के साथ बिल्कुल सुरक्षित हैं। आराम से बैठे और अगर आपको बेचैनी महसूस हो रही है तो आप मेरे पास फोन है अपने घर वालों से बात भी कर सकती हो। रमा ने हल्के से मुस्कुराते, हुए कहा नहीं भैया कोई बात नहीं बस दो-तीन घंटे की बात है मेरा स्टेशन आ ही जाएगा। रमा को बस थोड़ा सा अच्छा लगा और फौजी भाई ने दूसरे फौजी भाइयों को पता नहीं जाकर क्या बोला कि सभी चुप होकर अपनी-अपनी सीट पर बैठ गए और जैसे ही स्टेशन आया तो उन्होंने रमा को नीचे उतारने में उसकी मदद की और अपने फोन से फोन भी करवाया कि आप अपने भाई से बात करें और बता दे की ट्रेन पहुंचने वाली है रमा उनका धन्यवाद करती और उनकी तरफ भी देखती ही जा रही थी और मन ही मन बहुत मुस्कुरा रही थी और जाते-जाते अपने सभी फौजी भाइयों को उसने बैग में से राखी निकालकर उनके हाथ में थमाते हुए बोली लो मेरी तो आज ही राखी पहले दिन ही बन गई। सभी फौजी भाई बहुत ही भावुक हो गए और उन्होंने बताया बहन हम तो बहुत कम ही रक्षाबंधन पर छुट्टी जा पाते हैं।

अभी हम ड्यूटी के सिलसिले में ही कहीं जा रहे हैं तू हमें हाथ में क्यों थमा रही है।हमारी कलाई पर ही राखी बांध देगी तो हमें बहुत अच्छा लगेगा। रमा ने रोते-रोते सभी भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। सभी फौजी भाई बहुत खुश थे क्योंकि सभी को राखी जो मिल गई थी और उसके साथ एक प्यारी बहन भी।

ऐसे हैं मेरे देश के जवान! जय हिंद! जय भारत – जय जवान!

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — रमा को अकेले सफर करते समय डर और अनिश्चितता महसूस होने लगती है। उनकी सारी चिंताएँ और सवाल वो ही होते हैं जो एक व्यक्ति अकेले सफर करते समय महसूस करता है। अगले स्टेशन पर अम्मा भी उतर जाती है और रमा के डर और बेचैनी को महसूस करती है। बोगी में बाकी यात्री फौजी होते हैं और वे सभी खुशी-खुशी अपने दोस्तों के साथ मजाक करते हैं। एक दिन एक फौजी रमा के पास आकर उन्हें साहस देता है कि वह डरने की बजाय आराम से यात्रा करें, क्योंकि उनका फर्ज सिर्फ सीमा की रक्षा ही नहीं होता, बल्कि देश की बहनों की भी रक्षा होती है। आखिरकार, सभी फौजी भाइयों के साथ मिलकर रमा अपने भाइयों के लिए राखी बांधती है और वे सभी एक परिवार की भावना से जुड़ जाते हैं। इस कहानी से स्पष्ट होता है कि देश के जवान की सबसे बड़ी प्राथमिकता देश और सामाजिक हित है और उनकी उपस्थिति हमें सुरक्षित महसूस कराती है।

—————

यह लेख (फौजी की राखी।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख, कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. ए. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes, Shayari etc. या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं ____

Filed Under: हिन्दी साहित्य Tagged With: essay on raksha bandhan in hindi, Raksha Bandhan Essay in Hindi, Seema Ranga Indra, Soldier's Rakhi, फौजी की राखी, फौजी की राखी - सीमा रंगा इन्द्रा, रक्षाबंधन पर निबंध, लेखिका सीमा रंगा इन्द्रा जी की रचनाएँ, सीमा रंगा इन्द्रा, सीमा रंगा इन्द्रा की रचनाएँ

कंकड़ की सब्जी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कंकड़ की सब्जी। ♦

अरे! रोशनी आज मीरा को तू अपने साथ ले जाना। मैं आज देर से आऊंगी, शाम को आते वक्त अपने साथ लेकर आना परंतु मालकिन मेरे घर कैसे, जाते हुए विद्या ने बोला अरे! बस आज की ही बात है और साहब भी बाहर गए हैं। फिर दिन में मीरा अकेली कैसे रहेगी परंतु मालकिन विद्या ने बात काटते हुए कहा परंतु वरंतू कुछ नहीं तू ले जा और हां दिन में कुछ खिला देना गरम-गरम बनाकर।

अगर इधर से बनाकर लेकर जाएगी तो ठंडा हो जाएगा। जी मालकिन रोशनी ने सिर हिलाते हुए कहा, मन ही मन बहुत बेचैनी थी और बुड़बुड़ा रही थी। मैं अपने घर कैसे लेकर जाऊं मीरा को। यह पूरा दिन उस छोटे से कमरे में कैसी रहेगी? अनेक सवाल करते-करते काम कर रही थी। काम खत्म करके रोशनी अपने साथ मीरा को लेकर चल पड़ी। बाई जी मेरे तो पैर दर्द करने लगे और कितनी दूर है आपका घर, बस बेटा पास ही है।

पास-पास करते कितने दूर तो ले आए आप। मम्मी की तरह एक गाड़ी क्यों नहीं लेती? रे बेटा हम कहां से लें और मुझे तो चलानी भी नहीं आती। रोशनी ने कहा आप मम्मी से सीख लो, हां सही बोल रहे हैं आप। लो बेटा हमारा घर आ गया है। यह घर यह तो झोपड़ी है। हां बेटा हमारे पास इतने पैसे नहीं है कि बड़ा घर बना ले।

घर में मीरा के 5 बच्चे खेल रहे थे। रोशनी ने कहा आप इनके साथ खेलों, मैं काम करती हूं। जी बाई जी मीरा ने कहा। थोड़ी देर बाद रोशनी ने खाना बना दिया। सभी खाना खाने लगे। मीरा बोली बाई जी मुझे भी खाना खाना है। रोशनी अपने पति की तरफ देखते हुए बोली कुछ पैसे हैं तो मीरा के लिए बाहर से खाना ला दो ना। अरे!रोशनी तुझे तो पता है पिछले 10 दिन से मुझे कुछ काम नहीं मिला। मेरे पास तो एक रूपया भी नहीं है।

तु मैम साहब से क्यों नहीं मांग कर लाई। किस मुंह से मांगती, पहले ही एडवांस पगार लेकर खा चुके हैं। चलो ऐसा करो यही खाना दे दो मीरा को। कैसी बात करते हो मीरा तो टेबल-कुर्सी पर बैठकर 10 तरह के पकवान खाती है। यह कैसे खाएंगी, कोई नहीं अब उसे भूख लगी है तो यही दे दो। ठीक है रोशनी ने कहा। मीरा लो बेटा खाना खा लो। मीरा खाना खाने लगी जैसे ही उसने सब्जी को मुंह में डाला मीरा बोली यह कैसी सब्जी है दांत से कट ही नहीं रही।

रोशनी की बेटी ने कहा मीरा तू पानी में रोटी लगाकर खाओ और सब्जी चूस कर प्लेट में रख दो। यह सब्जी है मैंने तो आज तक नहीं खाई और बाई जी तो हमारे घर में कभी नहीं बनाती है ऐसी सब्जी। रोशनी की बेटी नंदिनी ने कहा, परंतु हम तो हर रोज यही सब्जी खाते हैं। हम रोड़ से कंकड़ उठा कर, तभी रोशनी ने डाटंते हुए कहा चुपचाप खाना खाओ। नंदनी चुपचाप खाना खाने लगी।

खाना खाकर बच्चे खेलने लगे और रोशनी अपना घर का काम करने लगी। जब तक शाम हो गई थी रोशनी मीरा को लेकर मालकिन के घर चली गई। मीरा की मां ने आते ही रोशनी से कहा जल्दी से खाना लगा दो बहुत भूख लगी है। मां आज पता है आपको मैंने चूस कर फेंकने वाली सब्जी खाई और मैं पूरा दिन बहुत खेली। मेरे पांच दोस्त बन गए। कौन सी सब्जी बनाई थी जरा मुझे भी तो बताना।

मैं-मैं क्या कर रही है बता ना। मैं हर रोज कंकड़ रोड़ से उठाकर लाते हैं और उन्हें धोकर साफ करके उसकी सब्जी बना लेते हैं। यह क्या बोल रही है रोशनी तू, विद्या ने आश्चर्य से कहा। हमारे पास पैसे नहीं है और उनका काम भी कभी-कभी लगता।

घर में 5 बच्चे हैं। पर तूने बताया क्यों नहीं कभी। पहले आप इतना कुछ दे देती हो मालकिन, खाने की तरफ देख कर आज विद्या का मन खाना खाने को नहीं किया। बिना खाए उठ गई। क्या हुआ मेम साहब, खाना अच्छा नहीं बना था क्या आज।

अरे नहीं थक गई हूं ना इसलिए बोल कर अपने कमरे के अंदर जाते हुए कुछ पैसे रोशनी के हाथ में थमा कर बोली जाते समय राशन ले जाना। मालकिन मैं तो पहले ही पगार ले चुकी। चुप रह तू और हां ये सारा खाना घर ले जाना और बच्चों को खिला देना। जी मालकिन, अब तुम जाओ रात ज्यादा हो गई है और हां कल से तेरे पति को भी साथ में लेकर आना काम पर।

जी मालकिन रोशनी अपनी मालकिन का शुक्रिया अदा करते-करते घर चली गई।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कहानी के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — दिल का साफ़ इंसान भले ही पैसे से गरीब होता है लेकिन एक अमीर दिल का मालिक होता हैं। सच्चे दिल वाला गरीब इंसान शर्म के कारण मांगता नहीं है, जल्दी कभी किसी से। वह रुखा सूखा खुद और अपने परिवार को खिला लेगा लेकिन जल्दी कभी भी किसी से मांगता नहीं। खास करके घर में काम करने वाली बाई। जो नेक दिल वाले मालिक और मालकिन होते है वह सत्य जानने के बाद उनको दिल से मदद करते है, जैसा की इस कहानी में विद्या ने रोशनी के साथ किया।

—————

यह कहानी (कंकड़ की सब्जी।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है:kmsraj51@hotmail.comपसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, सीमा रंगा इन्द्रा जी की रचनाएँ।, हिन्दी साहित्य Tagged With: Best Motivational Story in Hindi, Best Story for Kids in Hindi, Motivational Story in Hindi, Seema Ranga Indra, Short Motivational Stories in Hindi, Story in Hindi, कंकड़ की सब्जी, मोटिवेशन से भरपूर कहानियां, ये कहानियाँ, लेखिका सीमा रंगा इन्द्रा जी की रचनाएँ, विश्व की सर्वश्रेष्ठ 300 प्रेरक कहानियां, सफलता की कहानियां, सीमा रंगा इन्द्रा

पक्षियों की समझदारी।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ पक्षियों की समझदारी। ♦

अरे ! तोता, कबूतर, मैना सुना क्या तुमने आज। बड़ी चिड़िया आई मेरे घोसलें के पास मुझे गिरा कर खुद बैठ गई और बोली यह घर मेरा है। भाग जा यहां से। अच्छा बहन यह तो बहुत बुरा हुआ। हमने देखा था तूने कितनी मेहनत लगन से घोंसला बनाया था। हां इसी बात का तो रोना है पर हम छोटी चिड़िया कुछ कर भी तो नहीं सकते। उस बड़ी चिड़िया के सामने तोता, मैना, कबूतर सब ने कहा क्यों नहीं कर सकते हम मिलकर कोई तरकीब ढूंढते हैं। सभी मिलकर बड़ी चिड़िया को काली चिड़िया के घोसलें से निकालने की तरकीब सोचने लगे। फिर कबूतर को एक आईडिया आया। हम सब जैसे ही बड़ी चिड़िया तेरे घोंसले आएगी उसे देखकर बातें करेंगे कि अच्छा हुआ काली बहन जो तू इस घोसलें से निकल गई।

वरना आज तो। हां-हां क्यों नहीं मैं यह जरूर काम आएगा। कुछ समय पश्चात जैसे बड़ी चिड़िया घोंसले में आई। तोता, मैना, कबूतर चिड़िया जोर-जोर से बातें करने लगे काली चिड़िया अच्छा हुआ जो समय रहते घोसलें को छोड़ दिया। नहीं तो आज! इतना बोल कर सभी चुप हो गए। तभी बड़ी चिड़िया बोली नहीं तो क्या। कुछ नहीं बड़ी चिड़िया हम तो बस ऐसे ही। ऐसे ही क्या बोल रहे हो! खुल कर बोलो। नहीं तो तुम सब को मारकर खा जाऊंगी। हां हां हां बड़ी चिड़िया अभी बताते हैं।

हमने क्या देखा अभी कुछ समय पहले ही सांप आया था उसने घोंसले के चारो ओर देखा और देख कर बोला कोई नहीं चिड़िया अब तू घोसले में नहीं है जैसे ही आएगी उसे खा जाऊंगा। यह देखो सांप की केचूंली भी है। दिखाओ दिखाओ किधर किधर डर के मारे बड़ी चिड़िया का बुरा हाल हो रहा था। देखो हां हां ये तो सांप की केचूंली है।

सभी मन ही मन हंस रहे थे क्योंकि उन्होंने कहीं जंगल से केचूंली को लाकर रख दिया था। और वह भी टूटी-फूटी परंतु बड़ी चिड़िया ने तो डर के मारे देखा भी नहीं की कितनी पुरानी है और टूटी हुई भी है केचूंली।

देखते ही फुर से उड़ गई और सभी पक्षियों को बोली तुम भी भाग जाओ वरना सब के सब मारे जाओगे। सांप सब को खा जाएगा। सभी जोर-जोर से हंस रहे थे और बड़ी चिड़िया का मजाक बना रहे थे। परंतु सब की समझदारी से काली चिड़िया का घोंसला बच गया।

♦ सीमा रंगा इन्द्रा जी – हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कहानी के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — हसमझदारी और सूझबूझ से हर समस्या का समाधान किया जा सकता है। इसलिए जब भी जीवन में कोई समस्या आये तो घबराये नहीं, समझदारी और सूझबूझ से उस समस्या का समाधान निकाले। इस पृथ्वी पर एक भी ऐसी समस्या नहीं जिसका समाधान न हो, इसलिए धैर्य के साथ समझदारी और सूझबूझ से हर समस्या का समाधान करे। शांत मन से विचार करे आपको समाधान जरूर मिलेगा।

—————

यह कहानी (पक्षियों की समझदारी।) “श्रीमती सीमा रंगा इन्द्रा जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें व कहानी सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं, कहानी और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम सीमा रंगा इंद्रा है। मेरी शिक्षा बी एड, एम. हिंदी। व्यवसाय – लेखिका, प्रेरक वक्ता व कवयित्री। प्रकाशन – सतरंगी कविताएं, देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं व लेख, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर बाल पत्रिका, अमर उजाला, संडे रिपोर्टर, दिव्य शक्ति टाइम्स ऑफ़ डेजर्ट, कोल्डफीरर, प्रवासी संदेश, वूमेन एक्सप्रेस, इंदौर समाचार लोकांतर, वूमेन एक्सप्रेस सीमांत रक्षक युगपक्ष, रेड हैंडेड, मालवा हेराल्ड, टीम मंथन, उत्कर्ष मेल काव्य संगम पत्रिका, मातृत्व पत्रिका, कोलकाता से प्रकाशित दैनिक पत्रिका, सुभाषित पत्रिका शब्दों की आत्मा पत्रिका, अकोदिया सम्राट दिव्या पंचायत, खबर वाहिनी, समतावादी मासिक पत्रिका, सर्वण दर्पण पत्रिका, मेरी कलम पूजा पत्रिका, सुवासित पत्रिका, 249 कविता के लेखक कहानियां प्रकाशित देश के अलग-अलग समाचार पत्रों में समय-समय पर।

सम्मान पत्र -180 ऑनलाइन सम्मान पत्र, चार बार BSF से सम्मानित, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर सोसायटी से सम्मानित, नेहरू युवा केंद्र बाड़मेर से सम्मानित, शुभम संस्थान और विश्वास सेवा संस्थान द्वारा सम्मानित, प्रज्ञा क्लासेस बाड़मेर द्वारा, आकाशवाणी से लगातार काव्य पाठ, सम्मानित, बीएसएफ में वेलफेयर के कार्यों को सुचारु रुप से चलाने हेतु सम्मानित। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, प्रेसिडेंट ग्लोबल चेकर अवार्ड।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है:kmsraj51@hotmail.comपसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: सीमा रंगा इन्द्रा जी की रचनाएँ।, हिन्दी साहित्य Tagged With: Kahani in Hindi, Seema Ranga Indra, Seema Ranga Indra Article, Short Story in Hindi, short story in hindi for kids, कथा स्टोरी, कहानी इन हिंदी, पक्षियों की समझदारी, प्रेरणादायक हिंदी कहानी, मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी फॉर स्टूडेंट्स, लेखिका सीमा रंगा इन्द्रा जी की रचनाएँ, सीमा रंगा इन्द्रा जी की रचनाएँ, स्टोरी इन हिंदी फॉर चाइल्ड, हिंदी कहानी

Primary Sidebar

Recent Posts

  • तिरंगा का करें सम्मान।
  • एक सफर।
  • बाल विवाह – एक अभिशाप।
  • क्या बदलाव लायेगा नया साल।
  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।
  • आखिर क्यों।
  • समय।
  • काले बादल।
  • सुबह का संदेश।
  • चलो दिवाली मनाएं।
  • दीपों का त्योहार।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

BEST OF KMSRAJ51.COM

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।

मित्र।

Footer

Protected by Copyscape

KMSRAJ51

DMCA.com Protection Status

Disclaimer

Copyright © 2013 - 2026 KMSRAJ51.COM - All Rights Reserved. KMSRAJ51® is a registered trademark.