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वसंत ऋतु पर छोटी कविता

बसंत बहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ बसंत बहार। ♦

आयी देखो बसंत बहार,
खिली खिली सुहानी धूप।
सबका ह्रदय खिल खिल जाए,
सूरज किरणें पड़ती है धरा पर।

पीली फसलों को लहराए,
चारों और बसंत इठलाये।
प्रकृति भी अनेक रंग दिखाये,
आयी बसंत बहार मस्तानी।

पेड़ पर भी नये पत्तो का हुआ सर्जन,
भवरे भी फूलों पर मंडराए।
कोयल भी मीठी तान सुनाए,
बसंत अपने रंग रूप दिखाये।

सब तरफ हरियाली छाए।
नदियां, झरना कल कल बहता जाए।

शीत भी जैसे कम हो जाए,
पीला पीला रंग ओढे प्रकृति।
खेतों में छाए पीली सरसों।
देखकर सब मंत्र मुग्ध हुए।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

—————

  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — वसंत ऋतु में प्रकृति की सुंदरता देखते ही बनती है। क्या फूल, क्या भवरो का फूलों पर मंडराना, क्या पतझड़ के बाद नए पत्तो का आना, पक्षियों का यूँ मस्त चहचहाना चारों ओर खुशिया ही खुशिया। आयी देखो बसंत बहार, खिली खिली सुहानी धूप। इस वसंत ऋतु में प्रकृति के साथ साथ सबका ह्रदय खिल खिल जाए, सूरज किरणें पड़ती है धरा पर। कोयल भी अपनी मीठी तान सुनाए, बसंत अपने रंग रूप दिखाये। सब तरफ हरियाली छा जाये। नदियां, झरना भी कल कल बहता जाए।

—————

यह कविता (बसंत बहार।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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