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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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You are here: Home / Archives for विवेक कुमार जी की कविताएं

विवेक कुमार जी की कविताएं

ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

Kmsraj51 की कलम से…..

Gyan Ki Jyot Jaga De Maa | ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

Mother Hansvahini is requested to fill his empty dictionary and remove the darkness of ignorance.

हे मां शारदे,
वीणावादिनी मां,
ज्ञान की देवी,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां,
मैं हूं तुच्छ अज्ञानी,
मुझे ज्ञान का मार्ग दिखा दे मां।

हे मां हंसवाहिनी,
अंधकार निवारणी,
मेरा शब्दकोश है खाली,
भर दे तू इसे बजाकर ताली,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां बागेश्वरी,
तू बजाती सुरों की बांसुरी,
मेरे कलम की लेखनी को दे धार,
लेखनी आपसे, आप सबके द्वार,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां भारती,
ज्ञान सबमें तू ही भरती,
तमस दूर हो हृदय हमारे,
आशा और विश्वास तुम्हारे,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां ज्ञानदा,
आंखों पर पड़े न मेरे परदा,
मां मेरी कविता में तू,
भर दे वीणा की झंकार,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।

हे मां वाग्देवी,
मुझे दे सद्बुद्धि,
भेंट करूं तुझे कलम पुष्प से,
गूंथे हुए सब हार,
मुझ तुच्छ अज्ञानी को,
मां ज्ञान की ज्योत जगा देना।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता मां सरस्वती की वंदना करते हुए ज्ञान और बुद्धि की प्रार्थना करती है। कवि मां शारदा से निवेदन करता है कि वह अपनी वीणा के मधुर स्वर से उसे ज्ञान का प्रकाश प्रदान करें, क्योंकि वह अज्ञानी और तुच्छ है। मां हंसवाहिनी से आग्रह किया गया है कि वह उसके खाली शब्दकोश को भर दें और अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करें। मां बागेश्वरी से कवि अपनी लेखनी को धार देने की प्रार्थना करता है ताकि वह सभी तक ज्ञान का प्रकाश पहुंचा सके। मां भारती से अनुरोध किया गया है कि वह सभी के हृदय से अज्ञान का तमस (अंधकार) दूर करें और आशा तथा विश्वास का संचार करें। मां ज्ञानदा से कवि यह विनती करता है कि उसकी आंखों पर अज्ञान का कोई पर्दा न पड़े और उसकी कविता में वीणा की झंकार भर जाए। अंत में, मां वाग्देवी से वह सद्बुद्धि की कामना करता है और अपनी कविता को एक पुष्पहार के रूप में अर्पित करने की इच्छा व्यक्त करता है। संपूर्ण कविता ज्ञान प्राप्ति की प्रार्थना और मां सरस्वती की स्तुति में समर्पित है।

—————

यह कविता (ज्ञान की ज्योत जगा दे मां।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बज गया जीत का डंका।

Kmsraj51 की कलम से…..

Baj Gaya Jeet Ka Danka | बज गया जीत का डंका।

In that period a savior emerged from Madwan, the drowning man found a straw and the boat crossed the sea. The trumpet of victory was sounded.

बज गया, आज जीत का डंका,
जलने वाली है, भ्रष्टाचार की लंका।
फिर हुआ कलयुग में कृष्णावतार,
बंशी की धुन से तिरहुत का हुआ नैया पार।
शिक्षकों की बात अब सड़क से सदन तक,
पहुंचाने आए सूबे के कर्णधार रखकर सबकुछ ताक।

जीत नहीं स्वाभिमान की जंग छिड़ी है,
जुल्म ढाने वालों की होनी किरकिरी है।
कहा जाता शिक्षक समाज का दर्पण होता,
मगर यहां उसे ही है सताया जाता।
याद कीजिए वो दिन जब हम शिक्षामित्र हुआ करते थे,
वेतन के लिए मुखिया जी की जी हुजूरी किया करते थे।

उस दौर में उदय हुआ मड़वन से एक तारणहार,
डूबते को मिला तिनके का साथ हुआ बेड़ा पार।
शिक्षामित्र से नियोजित बने लिए हाथ में हाथ,
संघर्ष का कारवां आगे बढ़ा।
जुझारू अग्रदर्शी बंशी की बजी धुन,
मिला चाइनीज वेतनमान ताना बाना बुन।

जिसके बारे में सोचा न था उसे दिलाया,
शिक्षकों को वेतनमान का स्वाद चखाया।
पूर्ण वेतनमान की चली लंबी लड़ाई के थे सूत्रधार,
मोगैंबो के खौफ से सब थे सन्न लगाई दहाड़ पाया पार।
विखंडित शिक्षक समाज को लाया एक मंच,
शिक्षकों की एकता पर जिसने कसा तंज,
बंशीधर का पड़ा उसपर तगड़ा पंच।

ये मात्र जीत नहीं आगाज है,
अभी तो शुरुआत है अंजाम का इंतजार है।
ये जीत नहीं मिशाल है आलाधिकारियों के लिए काल है,
बज गया आज जीत का डंका,
जलने वाली है भ्रष्टाचार की लंका।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है —कविता में शिक्षक समाज के संघर्ष और उनकी जीत का वर्णन किया गया है। भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ लड़ाई को रावण की लंका के जलने से तुलना की गई है। शिक्षक समुदाय को जागरूक और संगठित करने में एक नेता, जिसे “मड़वन से तारणहार” कहा गया है, की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई है। इस संघर्ष में शिक्षकों को उनकी मेहनत का उचित वेतनमान और सम्मान दिलाने की दिशा में कई सफलताएं हासिल की गईं। कविता शिक्षक समुदाय की एकता, उनकी संघर्षशीलता और उनके अधिकारों की प्राप्ति की कहानी बयां करती है। यह जीत सिर्फ एक शुरुआत है, और इसे अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बताया गया है। कविता अंततः यह संदेश देती है कि शिक्षक समाज जब संगठित होकर प्रयास करता है, तो वह बदलाव और जीत का परचम लहरा सकता है।

—————

यह कविता (बज गया जीत का डंका।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

Kmsraj51 की कलम से…..

Tamas Mitaye Chalo Deep Jalaye | तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

spread fragrance all around, gather courage and fight back, sharpen all skills, drive away fear from the mind, remove darkness, let's light a lamp.

आओ चलो चले दीप जलाएं,
काले अंधियारे को दूर भगाएं,
संग चले और घुलमिल जाएं,
मन के मैल को आज मिटाएं,
नकारात्मकता को परे हटाएं ,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

अज्ञानता से ज्ञान की ओर,
खुशबू फैलाएं चहुंओर,
कर साहस और प्रतिकार,
तेज करे सब कौशल धार,
डर को मन से दूर भगाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

बुराई से लड़े अच्छाई पर चले,
असत्य से हटे सत्य संग पले,
ईर्ष्या द्वेष घृणा सब भुलाए,
भाईचारा का पाठ पढ़ाएं,
हर तरफ खुशियां महकाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

भक्त प्रहलाद की पावन पुकार,
सुनकर आएं विष्णु नरसिंह अवतार,
होलिका, हिरण्यकश्यप का हुआ सर्वनाश,
पाप का हुआ नाश पुण्य बना खास,
जीवन में इस सबक को अपनाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

हर घर सब मिलकर दीप जलाएं,
दरिद्रता भगाएं लक्ष्मी जी बुलाएं,
अज्ञानता जाए सरस्वती जी आएं,
मन में अपने लिए एक दीप जलाएं,
बच्चे बड़े इको फ्रेंडली दिवाली मनाएं,
तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कविता में दीप जलाने के माध्यम से जीवन में सकारात्मकता, प्रेम, ज्ञान और अच्छाई का संदेश दिया गया है। यह अंधकार (अज्ञानता, बुराई, नकारात्मकता) को दूर करने और ज्ञान, साहस, सत्य, और भाईचारे की ओर बढ़ने की प्रेरणा देती है। कविता में पौराणिक कथाओं का भी संदर्भ है, जैसे प्रहलाद और नरसिंह अवतार की कथा, जो अच्छाई की जीत और बुराई के नाश का प्रतीक है। यह सबक देती है कि हर किसी को अपने जीवन में अच्छाई को अपनाना चाहिए और मन में सकारात्मक दीप जलाना चाहिए। अंत में, पर्यावरण का ध्यान रखते हुए, इको-फ्रेंडली दिवाली मनाने का संदेश भी दिया गया है।

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यह कविता (तमस मिटाएं चलो दीप जलाएं।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मेरा चांद मुझे आया है नजर।

Kmsraj51 की कलम से…..

Mera Chand Mujhe Aaya Hai Nazar | मेरा चांद मुझे आया है नजर।

she starts her fast by staying without water, she pleads to Karva Mata, may my beloved live a thousand or two thousand years, don't make me wait anymore, just show me your face. I have seen my moon.

कब आओगे,
कर रही इंतजार,
नैना हो रही लाचार,
सज संवर कर बैठी तैयार,
सजाकर माथे पर बिंदिया,
साथ में गले का हार,
रचा रखी हाथों में मेहंदी,
बस कर रही एक पुकार,
कब आओगे?

जिसका है इंतजार,
हर सुहागिन जिसकी करती आस,
दिल में बसा राखी विश्वास,
निर्जला रह, करती व्रत की शुरुआत,
करवा माता से लगाती गुहार,
पिया की उम्र हो हजार दो हजार,
अब न तरसाओ,
जरा दर्श तो दिखलाओ।

तेरे दीदार में मन हो रहा अधीर,
अब तो आ जाओ,
नयनों की प्यास बुझाओ,
पूरी कर दो मेरी आस,
आ जाओ मेरे पास।

क्यों रूठकर बैठे हो,
कहां छुपकर बैठे हो,
आ जाओ भी एक बार,
पुकार सुन,
शायद चांद को आई रहम,
जिस चांद का कर रही थी इंतजार,
वो चांद मुझे आया है नजर।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता एक सुहागन के इंतजार और प्रेम की गहराई को दर्शाती है। कविता में वह अपने पति के आगमन की प्रतीक्षा कर रही है, सज-धजकर तैयार बैठी है, माथे पर बिंदी और हाथों में मेहंदी रचाई है। उसका मन व्याकुल है, और वह लगातार अपने पति के लौटने की पुकार कर रही है। करवा चौथ के व्रत में वह निर्जला रहकर, करवा माता से अपने पति की लंबी उम्र की कामना कर रही है।वह पति से रूठने या छुपने का कारण पूछती है, और उसे अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पुकारती है। अंत में, उसे प्रतीक्षा में राहत मिलती है जब वह चांद को देखती है, जिसका उसे लंबे समय से इंतजार था।

—————

यह कविता (मेरा चांद मुझे आया है नजर।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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गांधीगिरी अपनाओ।

Kmsraj51 की कलम से…..

Gandhigiri Apanao | गांधीगिरी अपनाओ।

A graphic representation featuring the word "Gandhi" repeated multiple times, highlighting its cultural and historical importance.

अहिंसा
की हो बात,
स्वतंत्रता
की मिले सौगात,
सादगी
जिसकी पहचान,
सत्य
जिसका कमान,
बापू
तुम हो महान।

सत्याग्रह
जिसकी शक्ति,
गांधी
थे वो व्यक्ति,
निडरता
जिससे मिला न्याय,
ब्रह्मचर्य
तालु पर नियंत्रण पाए,
बापू
इसीलिए महान कहलाए।

धोती
जिसकी पहचान,
लाठी
शास्त्र समान,
कर्मठता
ब्रह्म का वरदान,
सरलता
जीवन को बनाए आसान,
बापू
तुम्हीं हो राष्ट्र का सम्मान।

आज का दौड़
भ्रष्टाचार,
मन का गौर
गलत विचार,
सत्य का नाश
बना लाश,
माहौल का विनाश
बन गया दास,
फिर कैसे होगा विकास?

आ जाओ
फिर एक बार,
बदलेगी
दिशाएं चार,
सत्य
पसारेगा पैर,
हिंसा
की अब तो खैर,
बापू
आ जाओ करने सैर।

सोच
मन की बदलो,
बोल
मीठे ही बोलो,
सद्भावना
दिल से जोड़ो,
अहिंसा
का दामन न छोड़ो,
गांधीगिरी
से अब नाता जोड़ो।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता का सारांश है कि महात्मा गांधी (बापू) को महानता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। अहिंसा, सत्य, और सादगी उनके जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांत थे। सत्याग्रह और ब्रह्मचर्य से उन्होंने निडरता और आत्म-नियंत्रण का प्रदर्शन किया, और इसी कारण उन्हें महान माना गया। उनकी पहचान धोती, लाठी और सरल जीवन शैली से होती थी, जो उन्हें राष्ट्र का सम्मानित व्यक्ति बनाती है। कवि आज के भ्रष्ट और हिंसक माहौल की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि गांधी जी के विचार और सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। वे आह्वान करते हैं कि हम गांधीगिरी (गांधी के विचारों) से जुड़ें, मन को शुद्ध करें, और अहिंसा, सत्य, और सद्भावना का पालन करें ताकि समाज में बदलाव आ सके।

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यह कविता (गांधीगिरी अपनाओ।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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हे मुरारी अब लाज बचाओ।

Kmsraj51 की कलम से…..

Hey Murari Ab Laaj Bachao | हे मुरारी अब लाज बचाओ।

Oh Murari, now save the honour of every woman from such monsters. Oh Murari, now save the honour from the evil eyes of vultures. Oh Murari, now save the honour.

ये कैसी विपदा आन पड़ी,
चहुंओर अंधियारा छाया है।
अपने ही बने भक्षकगण से,
हे मुरारी अब लाज बचाओ।

सृष्टि की जननी का मान नहीं,
जहां नारी का सम्मान नहीं।
ऐसे हैवानों से हर नारी का,
हे मुरारी अब लाज बचाओ।

हे सृष्टि के पालकदाता,
अब तेरा ही बस सहारा है।
गिद्दों की गंदी नजरों से,
हे मुरारी अब लाज बचाओ।

आतताइयों से भरी महफिल में,
द्रौपदी की लाज बचाने।
जिस तरह तुम आए थे,
हे मुरारी सब की लाज बचाओ।

ऐसी घृणित सोंच मिटाने,
सबके दिल को सात्विक बनाने।
मात्र तेरा ही एक सहारा है,
हे मुरारी अब लाज बचाओ।

जग की विनती सुनकर,
हर नारी की पुकार पर,
एक बार फिर आ जाओ,
हे मुरारी अब लाज बचाओ।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस कविता का सारांश है कि समाज में महिलाओं की स्थिति गंभीर हो गई है, जहां उनके सम्मान और सुरक्षा को खतरा है। कवि भगवान कृष्ण से प्रार्थना कर रहे हैं कि वे इस संकट से नारी की रक्षा करें, जैसे उन्होंने महाभारत में द्रौपदी की लाज बचाई थी। कवि कहते है कि जब तक समाज में महिलाओं का सम्मान नहीं होगा, तब तक सृष्टि की जननी का भी मान नहीं होगा। कवि भगवान से निवेदन कर रहे हैं कि वे इस संसार में व्याप्त बुराई, हैवानियत, और घृणित सोच को समाप्त करें और समाज को सात्विक और पवित्र बनाएं।

—————

यह कविता (हे मुरारी अब लाज बचाओ।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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योग करें निरोग रहें।

Kmsraj51 की कलम से…..

Yog Karen Nirog Rahen | योग करें निरोग रहें।

Life Yoga for some time, keep everyone completely healthy, some important yoga postures, Surya Namaskar or Tadasana, Dhruvasana or Chakrasana, Sarvangasana or Halasana, Dhanurasana.

जीवन हमारा है अनमोल,
इसका नहीं है कोई तोल।
शिक्षित सुयोग्य होकर भी,
लापरवाही क्यूं करते सभी।

व्यस्त चर्या में सब है मगन,
रोग का सब दे रहे समन।

यदि काया निरोग रखना है,
तो डेली वेज योग करना है।
अपने लिए वक्त निकालिए,
जीवन स्वास्थ्यकर बनाइए।

कुछ समय का जीवन योग,
रखें सबको बिल्कुल निरोग।
योग के कुछ प्रमुख आसन,
सूर्य नमस्कार या ताड़ासन।

ध्रुवासन हो या हो चक्रासन,
सर्वांगासन हो या हलासन।

धनुरासन हो या भुजंगासन,
पद्मासन के संग वज्रासन।
हर आसन का अपना मोल,
धरा का बच्चा बच्चा बोल,
योग हमसब को करना है।

इसके छात्रछाया में रहना है,
अनुलोम विलोम प्राणायाम,
सबके लिए संजीवनी आम।

खुद जुड़े औरों को जोड़े,
योग से कभी मुंह न मोड़ें।
सब मिलकर आज ये कहे,
डेली योग करें निरोग रहें।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — कवि ने जीवन को अनमोल बताते हुए इसकी कीमत को समझाया है। शिक्षित और सुयोग्य होने के बावजूद लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहते हैं। व्यस्त दिनचर्या के बावजूद, स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। कवि ने सुझाव दिया है कि यदि हम अपनी काया को निरोग रखना चाहते हैं, तो हमें रोजाना योग का अभ्यास करना चाहिए। योग के लिए समय निकालना और इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए ताकि जीवन स्वस्थ और निरोगी बना रहे। कवि ने कुछ प्रमुख योग आसनों का उल्लेख किया है जैसे सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, ध्रुवासन, चक्रासन, सर्वांगासन, हलासन, धनुरासन, भुजंगासन, पद्मासन और वज्रासन। हर आसन का अपना महत्व है और वे शरीर को निरोगी बनाए रखने में सहायक होते हैं। इसके अलावा, अनुलोम विलोम प्राणायाम को भी सभी के लिए संजीवनी के रूप में वर्णित किया गया है। कवि ने यह संदेश दिया है कि हमें न केवल खुद योग से जुड़ना चाहिए, बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। अंत में, कवि सबको मिलकर यह संकल्प लेने के लिए प्रेरित करता है कि “हम नियमित रूप से योग करें और निरोग रहें।”

—————

यह कविता (योग करें निरोग रहें।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। भोला सिंह हाई स्कूल पुरुषोत्तम, कुरहानी में अभी एक शिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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बेबस शिक्षक।

Kmsraj51 की कलम से…..

Bebas Shikshak | बेबस शिक्षक।

studied with great care, Without sleep, without yawning.

बड़े जतन से की पढ़ाई,
बिना नींद बिन जम्हाई।
बड़े शौक थे देंगे ज्ञान,
बढ़ेगा मान और सम्मान।

यही सोच ले भरी उड़ान,
मिली शिक्षा की कमान।
बन गया शिक्षक महान,
न रहा खुशी का ठिकान।

मिली जिम्मेदारी से हुआ रत,
बच्चों की पढ़ाई में हुआ मस्त।
सोचा था शिक्षा का करूंगा दान,
परिवार पर भी रखूंगा ध्यान।

बच्चों को मिले बेहतर शिक्षा बनाया लक्ष्य,
ईमानदारी से किए काम का मिला साक्ष्य।
काम से खुश एवम् संतुष्ट था,
काफी समय गुजर गया था।

अचानक शिक्षा विभाग में,
हुआ आमूलचूल परिवर्तन।
छात्र हित के नाम पर,
शिक्षक के काम पर।

शुरू हुई धमाचौकरी,
कठिन हुई अब नौकरी।
न होली, छठ न ही दिवाली,
सभी त्योहार अब खाली-खाली।

घर छूटा अपने छूटे, छूट गया समाज,
जीना दुर्लभ हो गया आज।
छात्र सह शिक्षक हो रहे बेरंग,
पढ़ाई तभी होगी जब होंगे संग।

आदेशालोक में पर्व त्योहार की छुट्टी हुई रद्द,
छुट्टी में भी शिक्षक स्कूल पहुंचे पढ़ाने गद्द।
जब बच्चे नहीं आयेंगे स्कूल,
शिक्षक क्या करेंगे जाकर स्कूल।

पढ़ाई लगातार हो अच्छी बात है,
रुचिकर हो ये गुणवत्तापूर्ण बात है।
कम समय में बेहतर ज्ञान,
होना चाहिए इसका भान।

पर्व त्योहार भी पढ़ाई का ही है पार्ट,
खुशनुमा माहौल में पढ़ाना भी है आर्ट।

जबर्दस्ती जब मुंह में न जाता खाना,
कैसे मिलेगा ज्ञान का खजाना।
नौकरी में ना कभी करना नहीं,
बेबस शिक्षक हूं कुछ कहना नहीं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता शिक्षक के जीवन की एक दृष्टि प्रस्तुत करती है। शिक्षक ने अपने काम में समर्पित बलिदान दिया, लेकिन अचानक शिक्षा विभाग में परिवर्तन हो गया और उन्हें धमाचौकी झेलनी पड़ी। इसके बाद, उनकी जिंदगी में कई बदलाव आए, जैसे कि त्योहारों की छुट्टियों का रद्द होना और नौकरी की प्रतिस्पर्धा। फिर भी, उन्होंने पढ़ाई को महत्व दिया और अपने छात्रों की शिक्षा में समर्पित रहा। वे यह सिखाते हैं कि पढ़ाई केवल किताबों से ही नहीं, बल्कि प्रसन्नता और रुचि के साथ भी होती है। शिक्षक की भूमिका इस कविता में उजागर की गई है, जो समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण होती है।

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यह कविता (बेबस शिक्षक।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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हमारा बिहार।

Kmsraj51 की कलम से…..

Our Bihar | हमारा बिहार।

आर्यावर्त की जान,
जो है हिंद की पहचान,
आर्यभट्ट की धरती पर, बस एक ही नाम,
बिहार बिहार बिहार, हमारा बिहार।

कुंवर से जिनकी शान,
मुजफ्फरपुर की लीची, जिनकी पहचान।
मां जानकी की नगरी से बढ़ता, राज्य का सम्मान,
बिहार बिहार बिहार, हमारा बिहार।

जहां बुद्ध ने पाया ज्ञान,
जिनपर हमें है अभिमान।
शिक्षा का गौरव नालंदा, देश की पहचान,
वही है मेरा बिहार, वो हमारा बिहार,
बिहार बिहार बिहार, हमारा बिहार।

प्रथम गणराज्य की छवि महान,
वो वैशाली ही एक नाम।
जिनकी अमिट पहचान,
वो हमारा बिहार,
बिहार बिहार बिहार, हमारा बिहार।

पशुओं के मेले सोनपुर से बढ़ता, वैभव और सम्मान,
जैनों के पहले तीर्थंकर, महावीर भगवान।
ये है मेरा बिहार ये हमारा बिहार,
बिहार बिहार बिहार, ये है हमारा बिहार।

लिट्टी चोखा व्यंजन, अपने में है खास,
मधुबनी की पेंटिंग का, नहीं है कोई काट।
सिल्क सिटी का पहनावा, आता सबको रास,
ये है मेरा बिहार, ये हमारा बिहार,
बिहार बिहार बिहार हमारा बिहार।

प्रथम नागरिक बने, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद,
चंपारण से बापू ने किया, आंदोलन शुरुआत।
दशरथ मांझी के सामने, पहाड़ भी हुआ निढ़ाल,
ऐसा मेरा बिहार,
बिहार बिहार बिहार हमारा बिहार।

आरक्षण ने दिलाया, बराबर का अधिकार,
महिलाओं में आया, सबलता का एहसास।
ये है हमारा बिहार, ये हमारा बिहार,
बिहार बिहार बिहार, हमारा बिहार।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — बिहार राज्य प्राचीन काल से ही ज्ञान, धर्म व शिक्षा का केंद्र रहा है, ये बुद्ध की भूमि हैं, यहाँ से ज्ञान व शिक्षा पूरी दुनिया को मिलता आया है। बिहार दिवस (भोजपुरी: 𑂥𑂱𑂯𑂰𑂩 𑂠𑂱𑂫𑂮) हर साल २२ मार्च को मनाया जाता है। यह बिहार राज्य के गठन को चिह्नित करता है। इसी दिन अंग्रेजों ने १९१२ में बंगाल से बिहार को अलग कर एक राज्य बनाया था। इस दिन बिहार में सार्वजनिक अवकाश होता है। बिहार भारत के राज्यों में से एक राज्य है। बिहार को राजनीति तथा सांस्कृतिक का एक केंद्र बिंदु कहा जाता है। बिहार राज्य में गंगा नदी और उनकी अन्य सहायक नदियों का स्थान बसा है।

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यह कविता (हमारा बिहार।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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होली के रंग खुशियों के संग।

Kmsraj51 की कलम से…..

Holi ke Rang Khushiyon ke Sang | होली के रंग खुशियों के संग।

फागुन की बयार लाए, मौसम की फुहार,
उदास मन में लाए नवीनता की बहार।
सूने चमन में छाए, उमंगों की खुमार,
अनकहे रिश्तों में लाए बेहतरीन निखार।

टूटे दिलों को जोड़े ऐसे रंगतों में सुमार,
फगुआ, आमोद प्रमोद का एकमात्र त्योहार।
आपसी भाईचारे को बनाता खास,
प्रेम बंधुत्व में घोलता, नई मिठास।

सूने जीवन को रंगीन बना, करता सपने साकार,
आपसी रंजिश मिटा, लोग होते गुलजार।
एक दूजे संग कड़वाहट भूला, होते एक,
लाल हरी पीली मगर गुलाल होते एक।

गालों पर लगी रंगों की लाली,
हाथ में सजी गुलाल से भरी थाली।
लगाकर एक दूसरे को गले, जतलाते प्यार,
ये बस एक रिवाज नहीं, है अनोखा त्योहार।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — होली अर्थात – प्रेम, स्नेह व स्वार्थ से मुक्त आत्मिक रिश्ता, जहां अपने विकारों को त्याग कर, सभी के प्रति करुणा का भाव मन में रख सबका भला करना। सभी गीले शिकवे भुला कर प्रेम से सबका सम्मान करना व गले लगाना, सबकी मदद करने का भाव मन में प्रकट हो। रंगो की तरह सदैव ही जीवन खुशहाल हो सभी का यही संदेश देता ये महापर्व होली।

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यह कविता (होली के रंग खुशियों के संग।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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