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सनातन संस्कृति पर कविता

थाती की बाती।

Kmsraj51 की कलम से…..

Thati Ki Bathi | थाती की बाती।

दु:ख लहरों में चिघाड़ती है,
नित इक नई विपदा सहती है।
चिंताओं में रहती हमेशा है,
ऐसे ही कथा कहती अपने उर की।

सदा छटपटा कर रोती है,
आँसुओं से आँचल धोती है।
सुख की नींद वह कहाँ होती है,
विकल उद्विग्न वह होती है।

दु:ख-दर्द संकट है,
रंज है आँखों में आकर ठहरा है।
हर इक श्वांसों पर मातम है,
क्षोभ अगाध का गहरा है।

दिवा-रात्रि मचलती रहती है,
करवंट वह बदलती रहती है।
रह-रहकर संभलती रहती है,
न जाने किस अग्नि में जलती है।

विश्व ने इसे क्या समझा है,
बस चंद लोगों का खेल समझा है।
जो समझा है अच्छा समझा है,
इस संस्कृति को कचरा समझा है।

जग जलेगा जब आहों में,
बदला लेगी उन नमकहरामों से।
गुजरेगी जब बर्बादी के राहों से,
कर लेना तब ताजपोशी गुनाहों से।

विश्व को हिला देगी उठकर,
विश्व को दिखा देगी जमकर।
विश्व को जता देगी,
विश्व को बता देगी।

बस इक सहारा हम ही हैं,
समस्त सृष्टि की सनातन हम ही हैं।
सनातन का डंका बजेगा,
सुर-धुन पर ही चलेगा।

हम वो पुरातन है समझायेगी,
कण-कण में सनातन बसायेगी।
जग और जग वालों के होंठों पर,
बस इक नाम ये ही आयेगी।

संस्कृति और संस्कारों की भूमि है,
पावन जिसका हर कण-कण है।
हृदय अंत: में इसको बस जाने दो,
हम भी इसके अंश पुराने हैं।

वक्त बावक्त हम कहां गिरे,
अब लौट चलें अपने साये में।
पहचान हमारी भारत भूमि है,
बसे जिसमें राम – कृष्ण है।

देवी दुर्गा के प्रचंडों में,
पूजी जाती जहाँ अबला नारी।
जह सर्वस्त्र के हम भटके पाही हैं,
कंठ-कंठ में बसी वेद वाणी है।

चलो रज चूम ले उस थाती का,
अंग गात मचल रहा।
उसकी छत्रछाया में जाने को,
भूमंडल का बस इक वही सहारा।

भारत भूमि ही है हमको प्यारा,
चलो समा जायें उस पावन में।
पवित्र कर लें अपने जीवन को,
पुण्य जहां बसता है।
पाप त्याग हमें वहीं जाना है,
सनातन ही पुरातन है।

♦ सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल‘ जी — जिला–सिंगरौली, मध्य प्रदेश ♦

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यह कविता (थाती की बाती।) “सतीश शेखर श्रीवास्तव ‘परिमल’ जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख/दोहे सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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Filed Under: 2023-KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Hindi Poems, sanatan par kavita, Satish Shekhar Srivastava 'Parimal', thati ki bathi, थाती की बाती, थाती की बाती - सतीश शेखर श्रीवास्तव परिमल, भारतीय संस्कृति पर कविता, सतीश शेखर श्रीवास्तव - परिमल, सनातन धर्म पर कविता, सनातन धर्म पर सुविचार, सनातन संस्कृति पर कविता

हमारे संस्कार हमारी धरोहर।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ हमारे संस्कार हमारी धरोहर। ♦

हमारी संस्कार हमारी धरोहर ही हमारा गौरव है,
इससे ही हमारी पहचान और अस्तित्व है।

हमारे संस्कार ही हमारे आदर्श और गुणों की खान है,
रीत रिवाज और संस्कार ही परिवार की पहचान है।

नीति, धर्म, परोपकार ही हमारे झलकते संस्कार है,
बचपन से मृत्यु तक साथ संस्कार रहते है।

सभी पर्व, त्यौहारों पर पूवर्जों के बनायें नियम भी संस्कार है,
जिन्हें मिलते अच्छे संस्कार वो सबसे अच्छा इंसान है।

सोलह संस्कार, मानव के जीवन में होते है,
वैदिक हमारे संस्कार मृत्युपरान्त भी होते है।

संस्कार ही हमारी आन, बान और सम्मान है,
संस्कार ही सनातन धर्म का मूल आधार है।

ऋषि मुनियों के बनायें हुए हमारे संस्कार और नियम है,
जो हमको सिखाते सही राह पर चलना है।

संस्कार हमारे लिए शिरोधार्य और अमूल धरोहर है,
जो बने हमारे हित और भवसागर से तारने के लिए है।

ये पवित्र गंगाजल के समान और इनमें गुण बहुत सारे है,
हमारे संस्कार हमारी धरोहर विश्व की पहचान है।

♦ पूनम गुप्ता जी – भोपाल, मध्य प्रदेश ♦

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  • “पूनम गुप्ता जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — सनातन धर्म में संस्कारों का विशेष महत्व है। इनका उद्देश्य शरीर, मन और मस्तिष्क की शुद्धि और उनको बलवान करना है जिससे मनुष्य समाज में अपनी भूमिका आदर्श रूप मे निभा सके। संस्कार का अर्थ होता है-परिमार्जन-शुद्धीकरण। हमारे कार्य-व्यवहार, आचरण के पीछे हमारे संस्कार ही तो होते हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक व्यक्ति के सोलह (16) संस्कारों में शामिल हैं: गर्भाधान संस्कार, पुंसवन, सीमांतोयंत्रन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म, कर्णवेध, विद्यारम्भ, उपनयन, वेदारम्भ, केशान्त, समावर्तन विवाह सरकार, अंत्येष्टि।

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यह कविता (हमारे संस्कार हमारी धरोहर।) “पूनम गुप्ता जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

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Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, पूनम गुप्ता जी की कविताएं।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Best Poems About Indian Culture In Hindi, poem on bhartiya sanskriti in hindi, poet poonam gupta, poonam gupta, poonam gupta poems, कवयित्री पूनम गुप्ता, कविता : भारत की संस्कृति का यह गौरव गान है।, कविताएं भारतीय संस्कृति पर, पूनम गुप्ता, पूनम गुप्ता जी की कविताएं, भारतीय संस्कृति, भारतीय संस्कृति जीवन की विधि है, भारतीय संस्कृति संस्कारों से पोषित बहुमूल्य निधि है, सनातन संस्कृति पर कविता, हमारे संस्कार हमारी धरोहर - पूनम गुप्ता

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