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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Aim of Life

मनुष्य जीवन का लक्ष्य क्या है?

kmsraj51 की कलम से…..

Soulword_kmsraj51 - Change Y M T

मनुष्य जीवन का लक्ष्य क्या है?

मनुष्य जीवन का लक्ष्य  क्या है  ?मनुष्य का वर्तमान जीवन बड़ा अनमोल है क्योंकि अब संगमयुग में ही वह सर्वोत्तम पुरुषार्थ करके जन्म-जन्मान्तर के लिए सर्वोत्तम प्रारब्ध बना सकता है और अतुल हीरो-तुल्य कमाई कर सकता है I वह इसी जन्म में सृष्टि का मालिक अथवा जगतजीत बनने का पुरुषार्थ कर सकता है I परन्तु आज मनुष्य को जीवन का लक्ष्य मालूम न होने के कारण वह सर्वोत्तम पुरुषार्थ करने की बजाय इसे विषय-विकारो में गँवा रहा है I अथवा अल्पकाल की प्राप्ति में लगा रहा है I आज वह लौकिक शिक्षा द्वारा वकील, डाक्टर,इंजिनीयर बनने का पुरुषार्थ कर रहा है और कोई तो राजनीति में भाग लेकर देश का नेता, मंत्री अथवा प्रधानमंत्री बनने के प्रयत्न में लगा हुआ है अन्य कोई इन सभी का सन्यास करके, “सन्यासी” बनकर रहना चाहता है I परन्तु सभी जानते है की म्रत्यु-लोक  में तो राजा-रानी, नेता वकील, इंजीनियर, डाक्टर, सन्यासी इत्यादि कोई भी पूर्ण सुखी नहीं है I सभी को तन का रोग, मन की अशांति, धन की कमी, जानता की चिंता या प्रकृति के द्वारा कोई पीड़ा, कुछ न कुछ तो दुःख लगा ही हुआ है I अत: इनकी प्राप्ति से मनुष्य जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होती क्योंकि मनुष्य तो सम्पूर्ण – पवित्रता, सदा सुख और स्थाई शांति चाहता है Iचित्र में अंकित किया गया है कि मनुष्य जीवन का लक्ष्य जीवन-मुक्ति की प्राप्ति अठेया वैकुण्ठ में सम्पूर्ण सुख-शांति-संपन्न श्री नारायण या श्री लक्ष्मी पद की प्राप्ति ही है I क्योंकि वैकुण्ठ के देवता तो अमर मने गए है, उनकी अकाल म्रत्यु नही होती; उनकी काया सदा निरोगी रहती है I और उनके खजाने में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होती इसीलिए तो मनुष्य स्वर्ग अथवा वैकुण्ठ को याद करते है और जब उनका कोई प्रिय सम्बन्धी शरीर छोड़ता है तो वह कहते है कि -” वह स्वर्ग सिधार गया है ” Iइस पद की प्राप्ति स्वयं परमात्मा ही ईश्वरीय विद्या द्वारा कराते हैइस लक्ष्य की प्राप्ति कोई मनुष्य अर्थात कोई साधू-सन्यासी, गुरु या जगतगुरु नहीं करा सकता बल्कि यह दो ताजो वाला देव-पद अथवा राजा-रानी पद तो ज्ञान के सागर परमपिता परमात्मा शिव ही से प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा ईश्वरीय ज्ञान तथा सहज राजयोग के अभ्यास से प्राप्त होता है Iअत: जबकि परमपिता परमात्मा शिव ने इस सर्वोत्तम ईश्वरीय विद्या की शिक्षा देने के लिए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व-विद्यालय की स्थापना की है I तो सभी नर-नारियो को चाहिए की अपने घर-गृहस्थ में रहते हुए, अपना कार्य धंधा करते हुए, प्रतिदिन एक-दो- घंटे निकलकर अपने भावी जन्म-जन्मान्तर के कल्याण के लिए इस सर्वोत्तम तथा सहज शिक्षा को प्राप्त करे I

इस विद्या की प्राप्ति के लिए कुछ भी खर्च करने की आवश्यकता नही है, इसीलिए इसे तो निर्धन व्यक्ति भी प्राप्त कर अपना सौभाग्य  बना सकते है I इस विद्या को तो कन्याओ, मतों, वृद्ध-पुरुषो, छोटे बच्चो और अन्य सभी को प्राप्त करने का अधिकार है क्योंकि आत्मा की दृष्टी से तो सभी परमपिता परमात्मा की संतान है I
अभी नहीं तो कभी नहींवर्तमान जन्म सभी का अंतिम जन्म है I इसलिय अब यह पुरुषार्थ न किया तो फिर यह कभी न हो सकेगा क्योंकि स्वयं ज्ञान सागर परमात्मा द्वारा दिया हुआ यह मूल गीता – ज्ञान कल्प में एक ही बार इस कल्याणकारी संगम युग में ही प्राप्त हो सकता है I

Note::-

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Your Identity is Your Destiny !!

 kmsraj51 की कलम से…..

“अपने लक्ष्य को इतना महान बना दो, की  व्यथ॔ के लीये समय ही ना बचे” -Kmsraj51

(Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से)

Author Of-

“तू न हो निराश कभी मन से” 

– KMSRAJ51

 

Soulword_kmsraj51 - Change Y M T

Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

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Soul Sustenance 22-04-2014
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Your Identity is Your Destiny 

There is a direct connection between identity and destiny. It’s a simple process to see and understand, even on a daily basis. If you wake up irritated (in a bad mood) it means you are seeing yourself as an irritated being (soul). Perhaps you even think and sometimes say to your self, “I’m irritated today.” 

It means your self-identity is negative. So you filter the world through your negative filter and the world actually looks like an irritable place. As a result, you think negative thoughts, generate a negative attitude and give negative energy to others. They in turn will likely return the same negative energy, which you are sending to them and perhaps avoid you altogether. So your destiny of the day becomes …. Not so positive! Now see the same principle and process in life on larger scale. Look around outside you now, and you will see a reflection of how you see your self inside. Your circumstances, your relationships and even the events of the day reflect back to you how you see yourself. 

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Message for the day 22-04-2014
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The one who is able to discriminate well is able to bring about real benefit. 

Expression: Everyone naturally works for the benefit of the self and others. But the one who discriminates well is able to understand the other person’s need and give accordingly. So whatever is done naturally brings benefit for others and also for the self. 

Experience: When I am able to bring benefit for the right person at the right time with the right thing, I am able to win the trust of the other person. I expect nothing in return, but have the satisfaction of helping at the right time. 


In Spiritual Service,
Brahma Kumaris

brahmakumaris-kmsraj51

 

विशेष:- Coming Soon …..

Brahma Kumaris – Soul Sustenance and Message for the day

in English & Hindi(अंग्रेजी और हिंदी में) …..

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Success Life_kmsraj51

 Picture Quotes By- “तू न हो निराश कभी मन से” किताब से

100 शब्द  या  10 शब्द – एक सफल जीवन के लिए – (100 Word “or” Ten Word For A Successful Life )

“तू न हो निराश कभी मन से” किताब => लेखक कृष्ण मोहन सिंह (kmsraj51)

Soulword_kmsraj51 - Change Y M T

95+ देश के पाठकों द्वारा पढ़ा जाने वाला हिन्दी वेबसाइट है,, –

http://kmsraj51.wordpress.com/

मैं अपने सभी प्रिय पाठकों का आभारी हूं…..  I am grateful to all my dear readers …..

 

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वादा खुद से कर के निकले हैं।

Kmsraj51 की कलम से…..

CYMT-KMSRAJ51-4

ϒ वादा खुद से कर के निकले हैं। ϒ

वादा खुद से कर के निकले हैं।
अब कदम रुक सकते नहीं।
लक्ष्य हासिल किये बिना…
थक के बैठ सकते नहीं।

विपत्ति का सामना जो हंस के कर पायेगा।
जग में उसी का नाम रह जाएगा।
तपने उपरान्त सोने की पहचान बनती है।
सतत परिश्रम ही इंसान बनाती है।

हार के जो बैठ गए घर में…
उनका खुद भी साथ नहीं देता है।
हिम्मत कर के जो उतरते हैं सागर में।
ख़ुदा खुद ही उसे तिनके का सहारा देता है।

पढ़ें – विमल गांधी जी कि शिक्षाप्रद कविताओं का विशाल संग्रह।

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© आप सभी का प्रिय दोस्त ®

Krishna Mohan Singh(KMS)
Editor in Chief, Founder & CEO
of,,  https://kmsraj51.com/

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं। ~ कृष्ण मोहन सिंह(KMS)

 ~Kmsraj51

———– © Best of Luck ® ———–

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Also mail me ID: cymtkmsraj51@hotmail.com (Fast reply)

cymt-kmsraj51

– कुछ उपयोगी पोस्ट सफल जीवन से संबंधित –

* विचारों की शक्ति-(The Power of Thoughts)

* अपनी आदतों को कैसे बदलें।

∗ निश्चित सफलता के २१ सूत्र।

* क्या करें – क्या ना करें।

∗ जीवन परिवर्तक 51 सकारात्मक Quotes of KMSRAJ51

* विचारों का स्तर श्रेष्ठ व पवित्र हो।

* अच्छी आदतें कैसे डालें।

* KMSRAJ51 के महान विचार हिंदी में।

* खुश रहने के तरीके हिन्दी में।

* अपनी खुद की किस्मत बनाओ।

* सकारात्‍मक सोच है जीवन का सक्‍सेस मंत्र 

* चांदी की छड़ी।

kmsraj51- C Y M T

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्सािहत करते हैं।”

In English

Amazing changes the conversation yourself can be brought tolife by. By doing this you Recognize hidden within the buraiyaensolar radiation, and encourage good solar radiation to becomethemselves.

 ~KMSRAJ51 (“तू ना हो निराश कभी मन से” किताब से)

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”

~KMSRAJ51

 

 

 

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20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य

kmsraj51 की कलम से …..
HD - KMSRAJ51

purpose-of-life-kmsraj51


दोस्तों आज http://kmsraj51.wordpress.com/ पर मैं आपके साथ कुछ special share करने जा रहा हूँ . Special इसलिए क्योंकि आज मैंने जो article Hindi में translate किया है वो एक ऐसे व्यक्ति द्वारा लिखा गया है जिन्हें मैं अपना on-line गुरु मानता हूँ . उनका नाम है Steve Pavlina. उन्होंने अपने articles से करोड़ों लोगों के जीवन में एक positive बदलाव लाया है . और आज जो article मैं आपसे share कर रहा हूँ वो उनके द्वारा लिखे गए सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले articles में से एक है . इसे बड़े धयन से पढ़िए क्योंकि यहाँ से आप जान सकते हैं अपने जीवन का उद्देश्य .

How to Discover Your Life Purpose in About 20 Minutes

लगभग 20 मिनट में जानें अपने जीवन का उद्देश्य

आप अपने जीवन का असली उद्देश्य कैसे पता करेंगे ? मैं आपकी job के बारे में बात नहीं कर रहा हूँ , या फिर आपकी रोज़मर्रा की जिम्मेदारियों या आपके long term goals के बारे में भी बात नहीं कर रहा हूँ . मेरा मतलब उस असली वजह से है जिसके लिए आप यहाँ हैं —वो वजह जिसके
लिए आप exist करते हैं .

या शायद आप एक नास्तिक व्यक्ति हैं जो ये सोचता है कि उसके जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है , और ज़िन्दगी का कोई मतलब नहीं है . इससे कोई फरक नहीं पड़ता . इस बात में यकीं रखना की life का कोई purpose नहीं है आपको इसे discover करने से नहीं रोकता , ठीक वैसे ही जैसे गुरुत्वाकर्षण में यकीं नहीं होना आपको घूमने-घामने से नहीं रोक सकता . यकीं ना होने से बस समय थोडा ज्यादा लगेअगा , तो अगर आप इस तरह के व्यक्ति हैं तो इस पोस्ट के Title में जो नंबर है उसे 20 से बढ़ा कर 40 कर दें (या 60 अगर आप सच -मुच जिद्दी हैं ). ज्यादा chance है कि अगर आप ये believe करते हैं कि आपकी life का कोई purpose नहीं है तो मैं जो कुछ कह रहा हूँ आप उसमे भी believe नहीं करेंगे , पर फिर भी , एक घंटा देने में क्या जाता है , क्या पता कुछ पता ही चल जाये ?

Bruce Lee के बारे में एक छोटी सी कहानी बात कर मैं इस छोटी सी exercise का stage सेट करता हूँ . एक martial artist ने Bruce से कहा कि तुम martial arts के बारे में जो कुछ भी जानते हो मुझे सिखा दो .Bruce ने पानी से भरे दो कप लिए और कहा “ पहला कप martial arts के बारे में जो भी तुम्हारा ज्ञान है उसे दर्शाता है , दूसरा कप martial srts के बारे में मेरे ज्ञान को दर्शाता है . अगर तुम अपना कप मेरे ज्ञान से भरना चाहते हो तो पहले तुम्हे अपने कप का ज्ञान कहली करना होगा .”

यदि आप अपनी ज़िन्दगी का असली मकसद जानना चाहते हैं तो पहले आपको सिखाये गए सभी व्यर्थ के मकसदों (including कि आपकी ज़िन्दगी का कोई मकसद ही नहीं है ) को अपने दिमाग से निकलना होगा .

तो आप अपने जीवन का उद्देश्य कैसे पता करेंगे ? वैसे तो यह पता करने के कई तरीके हैं , पर यहाँ मैं आपको एक बहुत ही simple तरीका बताऊंगा जो कोई भी अपना सकता है . आप इस तरीके को जितना ज्यादा accept करंगे , जितना ज्यादा इसके काम करने की अपेक्षा करेंगे यह उतनी ही तेजी से आपके लिए काम करेगा .पर यदि आप इससे ज्यादा उम्मीद ना भी करें , या इसपे कुछ doubt करें , यह सोचें कि ये तो बेवकूफी है , समय की बर्वादी है तो भी यह अप्पके लिए काम करेगा , बस ज़रुरत है कि आप इसके साथ लगे रहिये .—पर हाँ , समय कुछ अधिक लगेगा .

आपको ये करना है :

1) एक blank page ले लीजिये या फिर एक word file खोल लीजिये .

2) Top पर लिखिए , “ मेरी जीवन का असली उद्देश्य क्या है ?”

3) कोई उत्तर लिखिए (कुछ भी ) जो आपके दिमाग में आ रहा हो . पूरा sentence लिखने की ज़रुरत नहीं है . एक छोटा सा phrase काफी है .

4) Step 3 को तब तक repeat कीजिये जब तक की आप कोई ऐसा उत्तर ना लिख लें जिससे आपको रोना आ जाये . यही आपके जीवन का उद्देश्य है .

बस इतना ही . इससे कोई मतलब नहीं है की आप counselor हैं engineer हैं या कोई bodybuilder हैं .कुछ लोगों को ये exercise बिलकुल उपयुक्त लगेगी , कुछ लोगो को कोरी बकवास . Life का purpose क्या है इसको लेकर हमारे मन में जो भी हलचल है और अपनी Social conditioning की वजह से हम जो कुछ भी इस विषय में सोचते हैं उसे clear करने में आम तौर पे 15-20 मिनट लगेंगे.गलत उत्तर आपकी memory और mind से आयेंगे . लेकिन जब आपको सही उत्तर मिल जायेगा , आपको अहसास होगा कि यह उत्तर किसी बिलकुल ही अलग जगह से आ रहा है .

वो लोग जो अपनी जड़े जागरूकता के बिलकुल निचले स्तर पर जमा चुके हैं , उन्हें सभी गलत उत्तर निकालने में काफी वक़्त लगेगा , शायद एक घंटे से भी ज्यादा . लेकिन यदि आप , 100, 200 या 500 उत्तर के बाद भी लगे रहेंगे तो आपको वो उत्तर मिल जायेगा जो आपकी भावनाओं को बढ़ा देगा , जो आपको रुला देगा .यदि आपने पहले कभी ये नहीं किया है तो शायद ये आपको बहुत मूर्खतापूर्ण लगे . लगने दीजिये पर इसे करिए ज़रूर .

आप जैसे -जैसे इस प्रोसेस से गुजरेंगे , आपके कुछ उत्तर बहुत एक जैसे लगेंगे , आप चाहें तो पुराने उत्तर दुबारा भी लिख सकते हैं . आप अचानक एक नयी दिशा में सोच सकते हैं और 10-20 नए उत्तर भी लिख सकते हैं . That’s OK. आपके दिमाग में जो उत्तर आये आप वो लिख सकते हैं बशर्ते आप लिखना चालू रखिये .

इस दौरान एक समय ऐसा भी आएगा ( लगभग 50-100 answers के बाद ) जब आप quit करना चाहें , और आप खुद को उस उत्तर तक पहुचते ना देख प् रहे हों . आप को ऐसा लग सकता है कि आप किसी बहाने से उठ कर कुछ और करने लगें . ये normal है . इस अवरोध को पार कीजिये , और बस लिखते रहिये . अवरोध का अहसास कुछ देर में ख़तम हो जायेगा .

शायद आपको बीच में कुछ ऐसे उत्तर मिलें जो आपको थोडा emotional कर दें , पर वो आपको रुला ना पाएं — ऐसे answers को highlight करते हुए आगे बढिए , ताकि बाद में आप इनपर वापस आकर नए संयोग बना सकें . हर एक उत्तर आपके purpose के एक हिस्से को दर्शाता है , पर खुद में वो पूर्ण नहीं है . जब आपको ऐसे उत्तर मिलना शुरू हो जायें तो इसका मतलब है कि आप warm-up हो रहे हैं . बस आगे बढ़ते रहिये .

यह ज़रूरी है कि आप इसे अकेले बिना किसी रूकावट के करिएँ .यदि आप नास्तिक हैं तो आप इस उत्तर से शुरआत कर सकते है कि , “ मेरे जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है ,” या “ जीवन निरर्थक है ,’ और वहां से आगे बढिए , यदि आप लगे रहेंगे तो आपको उत्तर ज़रूर मिलेगा .

जब मैंने यह exercise की तो मुझे लगभग 25 मिनट लगे , और मैं अपने final answer तक 106 वें step में पहुंचा . उत्तर के कुछ parts ( जब मैं थोडा emotional हो गया ) मुझे step no. 17,39 और 53 में मिले .और सबसे ज्यादा step 100-106 में मुझे अपना answer मिला और refine होता गया .. मुझे step 55-60 के आस – पास बहुत अवरोध मह्शूश हुआ , लगा कि मैं ये छोड़ के कुछ और करूँ , लगा कि ये process fail हो जायेगा , मैंने काफी impatient और irritating feel किया . Step no. 80 के बाद मैंने 2 मिनट का break ले लिया , आँखे बंद कर के थोडा relax किया ,अपने mind को clear किया और इस बात पर focus किया कि मेरी intention जवाब पाने की है . –ये मददगार साबित हुआ क्योंकि break के बाद मुझे और भी clear answers मिलने लगे .

Here was my final answer: to live consciously and courageously, to resonate with love and compassion, to awaken the great spirits within others, and to leave this world in peace.

मेरा final answer था : जागरूकता और साहस के साथ जीवन जीना ,प्रेम और दया को अपनाना , दूसरों के अन्दर की महान आत्माओं को जगाना , और इस दुनिया को शांतिमय बनाकर छोड़ना.

जब आपको अपना उत्तर मिल जायेगा कि आप यहाँ क्यों हैं , तब आप feel करेंगे की वो आपके अंत -मन को छू रहा है . वो शब्द आपको energetic लगेंगे , और आप जब भी उन्हें पढेंगे तो आप उस energy को feel करेंगे .

उद्देश्य को जान लेना आसान है . कठिन तो यह है कि उसे हर रोज़ अपने साथ रखना और खुद पर काम करना कि एक दिन आप खुद वो उद्देश्य बन जायें .

अगर आप यह पूछना चाहते हैं कि यह process काम क्यों करता है तो आप पहले इस question को तब तक side में रख दीजिये जब तक आप इस excercise को सफलतापूर्वक complete नहीं कर लेते . और जब आप ये करलेंगे तो शायद आपके पास अपना खुद का एक जवाब होगा कि ये काम क्यों करता है . यदि आप 10 ऐसे लोगों से ( जिन्होंने इस process को successfully complete कर लिया है ) येही प्रश्न करें तो ज्यादा chance है कि आपको दस अलग -अलग उत्तर मिलेंगे , जो उनके अपने belief system के हिसाब से होगा , और हर एक में सच्चाई कि अपनी ही छवि होगी .

जाहिर है कि अगर आप final answer आने से पहले ही quit कर गए तो ये process आपके लिए काम नहीं करेगा . मेरा अनुमान है कि 80-90% लोगों को उत्तर 1 घंटे के अन्दर मिल जायेगा . अगर आप अपनी धारणाओं में बहुत ही ज्यादा उलझे हुए हैं तो शायद आपको 5 sessions लगें और कुल 3 घंटे का वक़्त लगे , पर मुझे संदेह है कि ऐसे व्यक्ति पहले ही quit कर जायेंगे ( शायद पहले 15 मिनट में ) या फिर वो इस attempt ही ना करें . लेकिन आप इस blog को पढने के प्रति आकर्षित हुए हैं ( और अभी तक इस अपने life से बन करने के बारे में नहीं सोचा है ), तो शायद ही आप इस group को belong करें .

निवेदन : यदि यह लेख आपके लिए लाभप्रद रहा हो तो कृपया कृपया comment के माध्यम से मुझे ज़रूर बताएं.

Post inspired by : http://www.achhikhabar.com/ (Lots of thanks to AKC & Mr. Gopal Mishra)
Post main source :: http://www.stevepavlina.com/blog/2011/06/living-your-life-purpose/ (Also Lots of thanks to Mr.Pavlina)

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Contradictions can be a boon !!

kmsraj51 की कलम से …..
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प्रतिकूलताएँ भी वरदान बन सकती हैं
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प्रकृति हमारी जननी है, जो हमें सदैव ऐसी परिस्थिती प्रदान करती है, जिसमें हम सभी का विकास होता है। जीवन में धूप-छाँव की स्थिती हमेशा रहती है। सुख-दुख एवं रात-दिन का चक्र अपनी गति से चलता रहता है। ये आवश्यक नही है कि, हर पल हमारी सोच के अनुरूप ही हो। प्रतिकूलताएँ तो जीवन प्रवाह का एक सहज स्वाभाविक क्रम है। सम्पूर्ण विकास के लिए दोनो का महत्व है। दिन का महत्व रात्री के समय ही समझ में आता है।
मनोवैज्ञानिक जेम्स का कथन है कि, ये संभव नही है कि सदैव अनुकूलता बनी रहे प्रतिकूलता न आए।

कई बार जीवन में ऐसी परिस्थिती आती है, जब लगता है कि सफलता की गाङी सही ट्रैक (रास्ते) पर चल रही है, परन्तु स्पीड ब्रेकर (गति अवरोधक) रूपी प्रतिकूलताएं लक्ष्य की गति को धीमा कर देती हैं। कभी तो ऐसी स्थिती भी बन जाती है कि सफलता की गाङी का पहिया रुक जाता है। अचानक आए अवरोध से परेशान होना एक मानवीय आदत है जिसका असर किसी पर भी हो सकता है। परन्तु जो व्यक्ति मानसिक सन्तुलन के साथ अपनी गाङी को पुनः गति देता है, वही सफलता की सीढी चढता है।

डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल्ल कलाम साहब का मानना है कि,
“Waves are my inspiration, not because they rise and fall,
But whenever they fall, they rise again.”

विपरीत परिस्थिती में निराशा का भाव पनपना एक साधरण सी बात है, किन्तु निराशा के घने कुहांसे से वही बाहर निकल पाता है जो अदम्य साहस के साथ अविचल संकल्प शक्ति का धनि होता है। ऐसे लोग पर्वत के समान प्रतिकूलताओं को भी अपने आशावादी विचारों से अनुकूलता में बदल देते हैं।

रविन्द्र नाथ टैगोर ने कहा है कि, “हम ये प्रर्थना न करें कि हमारे ऊपर खतरे न आएं, बल्कि ये प्रार्थना करें कि हम उनका सामना करने में निडर रहें”

विपरीत परिस्थितियों में भी अपार संभावनाएं छुपी रहती है। अल्फ्रेड एडलर के अनुसार, “मानवीय व्यक्तित्व के विकास में कठिनाइंयों एवं प्रतिकूलताओं का होना आवश्यक है। ‘लाइफ शुड मीन टू यु’ पुस्तक में उन्होने लिखा है कि, यदि हम ऐसे व्यक्ति अथवा मानव समाज की कल्पना करें कि वे इस स्थिती में पहुँच गये हैं, जहाँ कोई कठिनाई न हो तो ऐसे वातावरण में मानव विकास रुक जायेगा।“

अनुकूल परिस्थिती में सफलता मिलना कोई आश्चर्य की बात नही है। परन्तु विपरीत परिस्थिती में सफलता अर्जित करना, किचङ में कमल के समानहै। जो अभावों में भी हँसते हुए आशावादी सोच के साथ लक्ष्य तक बढते हैं, उनका रास्ता प्रतिकूलताओं की प्रचंड आधियाँ भी नही रोक पाती। अनुकूलताएं और प्रतिकूलताएँ तो एक दूसरे की पर्याय हैं। इसमें स्वंय को कूल (शान्त) रखते हुए आगे बढना ही जीवन का सबसे बङा सच है।

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Anita SharmaAnita Sharma

Post inspired by रौशन सवेरा. I am grateful to Mrs. Anita Sharma ji & रौशन सवेरा (http://roshansavera.blogspot.in/) Thanks a lot !!

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Complete Chanakya Niti in Hindi !!


::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
2014-kms


kmsraj51 की कलम से …..
pen-kms

$$ चाणक्य नीति हिन्दी में $$

Chanakya


शक्तिशाली लोगों के लिए कौनसा कार्य कटीं है ? व्यापारिओं के लिए कौनसा जगह दूर है, विद्वानों के लिए कोई देश विदेश नहीं है, मधुभाषियों का कोई शत्रु नहीं!!

राजा लोग अपने आस पास अच्छे कुल के लोगो को इसलिए रखते है क्योंकि ऐसे लोग ना आरम्भ मे, ना बीच मे और ना ही अंत मे साथ छोड़कर जाते है!!

जिस तरह सारा वन केवल एक ही पुष्प अवं सुगंध भरे वृक्ष से महक जाता है उसी तरह एक ही गुणवान पुत्र पुरे कुल का नाम बढाता है!!

जिस प्रकार केवल एक सुखा हुआ जलता वृक्ष सम्पूर्ण वन को जला देता है उसी प्रकार एक ही कुपुत्र सरे कुल के मान, मर्यादा और प्रतिष्ठा को नष्ट कर देता है!!

कुल की रक्षा के लिए एक सदस्य का बिलदान दें,गाव की रक्षा के लिए एक कुल का बिलदान दें, देश की रक्षा के लिए एक गाव का बिलदान दें, आतमा की रक्षा के लिए देश का बिलदान दें!!

ऐसे अनेक पुत्र किस काम के जो दुःख और निराशा पैदा करे. इससे तो वह एक ही पुत्र अच्छा है जो समपूणर घर को सहारा और शान्ति पर्दान करे!!

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उस देश मे निवास न करे जहा आपकी कोई इजजत नहीं, जहा आप रोजगार नहीं कमा सकते,
जहा आपके कोई मित्र नहीं और जहा आप कोई ज्ञान आर्जित नहीं कर सकते।।

वहा एक दिन भी ना रके जहा ये पाच ना हो!!
धनवान व्यक्ति ,
विदान व्यक्ति जो शास्त्रों को जानता हो,
राजा,
नदियाँ,
और चिकित्सक !!

बुद्धिमान व्यक्ति ऐसे देश कभी ना जाए जहा …
रोजगार कमाने का कोई माधयम ना हो!
जहा लोग किसी से डरते न हो!
जहा लोगो को किसी बात की लज्जा न हो!!
जहा लोगो के पास बुद्धिमत्ता न हो!
जहा के लोगो की वृत्ति दान धरम करने की ना हो!!

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इन बातो को बार बार गौर करे…
सही समय
सही मित्र
सही ठिकाना
पैसे कमाने के सही साधन
पैसे खर्चा करने के सही तरीके
आपके उर्जा स्रोत!!

आत्याधिक सुन्दरता के कारन सीताहरण हुआ,
अत्यंत घमंड के कारन रावन का अंत हुआ,
अत्यधिक दान देने के कारन रजा बाली को बंधन में बंधना पड़ा,
अतः सर्वत्र अति को त्यागना चाहिए!!

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यदि कर्म का फल तुरन्त नहीं मिलता तो इससे यह नहीं समझ लेना चाहिए कि उसके भले-बुरे परिणाम से हम सदा के लिए बच गयें । कर्म-फल एक ऐसा अमिट तथ्य है जो आज नहीं तो कल भुगतना अवश्य ही पड़ेगा । कभी-कभी इन परिणामों में देर इसलिये होती है कि ईश्वर मानवीय बुद्धि की परीक्षा करना चाहता है कि व्यक्ति अपने कर्तव्य-धर्म समझ सकने और निष्ठापूर्वक पालन करने लायक विवेक बुद्धि संचित कर सका या नहीं । जो दण्ड भय से डरे बिना दुष्कर्मों से बचना मनुष्यता का गौरव समझता है और सदा सत्कर्मों तक ही सीमित रहता है, समझना चाहिए कि उसने सज्जनता की परीक्षा पास कर ली और पशुता से देवत्व की और बढऩे का शुभारम्भ कर दिया ।

लाठी के बल पर जानवरों को इस या उस रास्ते पर चलाया जाता है और अगर ईश्वर भी बलपूर्वक अमुक मार्ग पर चलने के लिए विवश करता तो फिर मनुष्य भी पशुओं की श्रेणी में आता, इससे उसकी स्वतंत्र आत्म-चेतना विकसित हुई या नहीं इसका पता ही नहीं चलता । भगवान ने मनुष्य को भले या बुरे कर्म करने की स्वतंत्रता इसीलिए प्रदान की है कि वह अपने विवेक को विकसित करके भले-बुरे का अन्तर करना सीखे और दुष्परिणामों के शोक-संतापों से बचने एवं सत्परिणामों का आनन्द लेने के लिए स्वत: अपना पथ निर्माण कर सकने में समर्थ हो । अतएव परमेश्वर के लिए यह उचित ही था कि मनुष्य को अपना सबसे बड़ा बुद्धिमान और सबसे जिम्मेदार बेटा समझकर उसे कर्म करने की स्वतंत्रता प्रदान करे और यह देखे कि वह मनुष्यता का उत्तरदायित्व सम्भाल सकने मे समर्थ है या नहीं ? परीक्षा के बिना वास्तविकता का पता भी कैसे चलता और उसे अपनी इस सर्वश्रेष्ठ रचना मनुष्य में कितने श्रम की सार्थकता हुई यह कैसे अनुभव होता । आज नहीं तो कल उसकी व्यवस्था के अनुसार कर्मफल मिलकर ही रहेगा । देर हो सकती है अन्धेर नहीं । ईश्वरीय कठोर व्यवस्था, उचित न्याय और उचित कर्म-फल के आधार पर ही बनी हुई है सो तुरन्त न सही कुछ देर बाद अपने कर्मों का फल भोगने के लिए हर किसी को तैयार रहना चाहिए ।

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हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ जरूर छिपा होता है। दुनिया में ऐसी कोई दोस्ती नहीं जिसके पीछे लोगों के अपने हित न छिपे हों, यह कटु सत्य है, लेकिन यही सत्य है। और जो मित्र आपके सामने चिकनी-चुपड़ी बातें करता हो और पीठ पीछे आपके कार्य को बिगाड़ देता हो, उसे त्याग देने में ही भलाई है। चाणक्य कहते हैं कि वह उस बर्तन के समान है, जिसके ऊपर के हिस्से में दूध लगा है परंतु अंदर विष भरा हुआ होता है।

चाणक्य कहते है कि जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं है उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए, परंतु इसके साथ ही अच्छे मित्र के संबंद में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है। अत: सावधानी अत्यंत आवश्यक है।

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=> अपने शत्रु को हमेशा भर्म मे रखो! यदि हम कमजोर है तो अपने शत्रु को दिखाओ की हम ताकतवर है , अगर हम ताकतवर है तो अपने शत्रु को दिखाओ की हम कमजोर है।

=> अगर आप उस के पास ( नजदीक ) हँ तो उसे एहसास दिलाओ की आप उस से दूर है! यदि आप उससे दूर हँ तो उसे एहसास दिलाओ की आप उस से पास है हमेसा शत्रु क मन में भर्म की स्थिति पैदा कर के रखे!

=> अगर कोई सांप जहरीला नहीं है, तब भी उसे फुफकारना नहीं छोड़ना चाहिए। उसी तरह से कमजोर व्यक्ति को भी हर वक्त अपनी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।

=> सबसे बड़ा गुरुमंत्र : कभी भी अपने रहस्यों को किसी के साथ साझा मत करो, यह प्रवृत्ति तुम्हें बर्बाद कर देगी।

=> किसी भी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए। सीधे तने वाले पेड़ ही सबसे काटे जाते हैं और बहुत ज्यादा ईमानदार लोगों को ही सबसे ज्यादा कष्ट उठाने पड़ते हैं।

=> अपने बच्चे को पहले पांच साल दुलार के साथ पालना चाहिए। अगले पांच साल उसे डांट-फटकार के साथ निगरानी में रखना चाहिए। लेकिन जब बच्चा सोलह साल का हो जाए, तो उसके साथ दोस्त की तरह व्यवहार करना चाहिए। बड़े बच्चे आपके सबसे अच्छे दोस्त होते हैं।

=> दिल में प्यार रखने वाले लोगों को दुख ही झेलने पड़ते हैं। दिल में प्यार पनपने पर बहुत सुख महसूस होता है, मगर इस सुख के साथ एक डर भी अंदर ही अंदर पनपने लगता है, खोने का डर, अधिकार कम होने का डर आदि-आदि। मगर दिल में प्यार पनपे नहीं, ऐसा तो हो नहीं सकता। तो प्यार पनपे मगर कुछ समझदारी के साथ। संक्षेप में कहें तो प्रीति में चालाकी रखने वाले ही अंतत: सुखी रहते हैं।

=> हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ जरूर छिपा होता है। दुनिया में ऐसी कोई दोस्ती नहीं जिसके पीछे लोगों के अपने हित न छिपे हों, यह कटु सत्य है, लेकिन यही सत्य है।

=> ऐसा पैसा जो बहुत तकलीफ के बाद मिले, अपना धर्म-ईमान छोड़ने पर मिले या दुश्मनों की चापलूसी से, उनकी सत्ता स्वीकारने से मिले, उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए।

=> नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलों को चोट पहुंचाने वाली, उनके विश्वासों को छलनी करने वाली बातें करते हैं, दूसरों की बुराई कर खुश हो जाते हैं। मगर ऐसे लोग अपनी बड़ी-बड़ी और झूठी बातों के बुने जाल में खुद भी फंस जाते हैं। जिस तरह से रेत के टीले को अपनी बांबी समझकर सांप घुस जाता है और दम घुटने से उसकी मौत हो जाती है, उसी तरह से ऐसे लोग भी अपनी बुराइयों के बोझ तले मर जाते हैं।

=> जो बीत गया, सो बीत गया। अपने हाथ से कोई गलत काम हो गया हो तो उसकी फिक्र छोड़ते हुए वर्तमान को सलीके से जीकर भविष्य को संवारना चाहिए।

=> असंभव शब्द का इस्तेमाल बुजदिल करते हैं। बहादुर और बुद्धिमान व्यक्ति अपना रास्ता खुद बनाते हैं।

=> संकट काल के लिए धन बचाएं। परिवार पर संकट आए तो धन कुर्बान कर दें। लेकिन अपनी आत्मा की हिफाजत हमें अपने परिवार और धन को भी दांव पर लगाकर करनी चाहिए।

=> भाई-बंधुओं की परख संकट के समय और अपनी स्त्री की परख धन के नष्ट हो जाने पर ही होती है।

=> कष्टों से भी बड़ा कष्ट दूसरों के घर पर रहना है।

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=> चाणक्य कहते है कि जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं है उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए, परंतु इसके साथ ही अच्छे मित्र के संबंद में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है। अत: सावधानी अत्यंत आवश्यक है।

=> चाणक्य का मानना है कि व्यक्ति को कभी अपने मन का भेद नहीं खोलना चाहिए। उसे जो भी कार्य करना है, उसे अपने मन में रखे और पूरी तन्मयता के साथ समय आने पर उसे पूरा करना चाहिए।

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$$ Chanakya story in hindi $$


एक दिन चाणक्य का एक परिचित उनके पास आया और उत्साह से कहने लगा, ‘आप जानते हैं, अभी-अभी मैंने आपके मित्र के बारे में क्या सुना?’

चाणक्य अपनी तर्क-शक्ति, ज्ञान और व्यवहार-कुशलता के लिए विख्यात थे। उन्होंने अपने परिचित से कहा, ‘आपकी बात मैं सुनूं, इसके पहले मैं चाहूंगा कि आप त्रिगुण परीक्षण से गुजरें।’
उस परिचित ने पूछा, ‘ यह त्रिगुण परीक्षण क्या है?’

चाणक्य ने समझाया , ‘ आप मुझे मेरे मित्र के बारे में बताएं, इससे पहले अच्छा यह होगा कि जो कहें, उसे थोड़ा परख लें, थोड़ा छान लें। इसीलिए मैं इस प्रक्रिया को त्रिगुण परीक्षण कहता हूं। इसकी पहली कसौटी है सत्य। इस कसौटी के अनुसार जानना जरूरी है कि जो आप कहने वाले हैं, वह सत्य है। आप खुद उसके बारे में अच्छी तरह जानते हैं?’

‘नहीं,’ वह आदमी बोला, ‘वास्तव में मैंने इसे कहीं सुना था। खुद देखा या अनुभव नहीं किया था।’

‘ठीक है,’ – चाणक्य ने कहा, ‘आपको पता नहीं है कि यह बात सत्य है या असत्य। दूसरी कसौटी है -‘ अच्छाई। क्या आप मुझे मेरे मित्र की कोई अच्छाई बताने वाले हैं?’
‘नहीं,’ उस व्यक्ति ने कहा। इस पर चाणक्य बोले,’ जो आप कहने वाले हैं, वह न तो सत्य है, न ही अच्छा। चलिए, तीसरा परीक्षण कर ही डालते हैं ।’

‘तीसरी कसौटी है – उपयोगिता। जो आप कहने वाले हैं, वह क्या मेरे लिए उपयोगी है?’

‘नहीं, ऐसा तो नहीं है।’ सुनकर चाणक्य ने आखिरी बात कह दी।’ आप मुझे जो बताने वाले हैं, वह न सत्य है, न अच्छा और न ही उपयोगी, फिर आप मुझे बताना क्यों चाहते हैं?’

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अग्निहोत्र बिनु वेद नहिं, यज्ञ क्रिया बिनु दान ।
भाव बिना नहिं सिध्दि है, सबमें भाव प्रधान ॥

Hindi Meaning –>

बिना अग्निहोत्र के वेदपाठ व्यर्थ है और दान के बिना यज्ञादि कर्म व्यर्थ हैं ।
भाव के बिना सिध्दि नहीं प्राप्त होती इसलिए भाव ही प्रधान है ॥१॥

English Meaning –>
Chanting of the Vedas without making ritualistic sacrifices to the Supreme Lord through the medium of Agni, and sacrifices not followed by bountiful gifts are futile. Perfection can be achieved only through devotion (to the Supreme Lord) for devotion is the basis of all success.

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::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..
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जीवन की नाव !!

::- Krishna Mohan Singh(kmsraj51) …..

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एक संत थे। उनके कई शिष्य उनके आश्रम में रहकर अध्ययन करते थे। एक दिन एक महिला उनके पास रोती हुए आई और बोली, ‘बाबा, मैं लाख प्रयासों के बाद भी अपना मकान नहीं बना पा रही हूं। मेरे रहने का कोई निश्चित ठिकाना नहीं है। मैं बहुत अशांत और दु:खी हूं। कृपया मेरे मन को शांत करें।’

उसकी बात पर संत बोले, ‘हर किसी को पुश्तैनी जायदाद नहीं मिलती। अपना मकान बनाने के लिए आपको नेकी से धनोपार्जन करना होगा, तब आपका मकान बन जाएगा और आपको मानसिक शांति भी मिलेगी।’ महिला वहां से चली गई। इसके बाद एक शिष्य संत से बोला, ‘बाबा, सुख तो समझ में आता है लेकिन दु:ख क्यों है? यह समझ में नहीं आता।’

उसकी बात सुनकर संत बोले, ‘मुझे दूसरे किनारे पर जाना है। इस बात का जवाब मैं तुम्हें नाव में बैठकर दूंगा।’ दोनों नाव में बैठ गए। संत ने एक चप्पू से नाव चलानी शुरू की। एक ही चप्पू से चलाने के कारण नाव गोल-गोल घूमने लगी तो शिष्य बोला, ‘बाबा, अगर आप एक ही चप्पू से नाव चलाते रहे तो हम यहीं भटकते रहेंगे, कभी किनारे पर नहीं पहुंच पाएंगे।

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उसकी बात सुनकर संत बोले, ‘अरे तुम तो बहुत समझदार हो। यही तुम्हारे पहले सवाल का जवाब भी है। अगर जीवन में सुख ही सुख होगा तो जीवन नैया यूं ही गोल-गोल घूमती रहेगी और कभी भी किनारे पर नहीं पहुंचेगी। जिस तरह नाव को साधने के लिए दो चप्पू चाहिए, ठीक से चलने के लिए दो पैर चाहिए, काम करने के लिए दो हाथ चाहिए, उसी तरह जीवन में सुख के साथ दुख भी होने चाहिए।

जब रात और दिन दोनों होंगे तभी तो दिन का महत्व पता चलेगा। जीवन और मृत्यु से ही जीवन के आनंद का सच्चा अनुभव होगा, वरना जीवन की नाव भंवर में फंस जाएगी।’ संत की बात शिष्य की समझ में आ गई।

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