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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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poet vivek kumar

बेबस शिक्षक।

Kmsraj51 की कलम से…..

Bebas Shikshak | बेबस शिक्षक।

studied with great care, Without sleep, without yawning.

बड़े जतन से की पढ़ाई,
बिना नींद बिन जम्हाई।
बड़े शौक थे देंगे ज्ञान,
बढ़ेगा मान और सम्मान।

यही सोच ले भरी उड़ान,
मिली शिक्षा की कमान।
बन गया शिक्षक महान,
न रहा खुशी का ठिकान।

मिली जिम्मेदारी से हुआ रत,
बच्चों की पढ़ाई में हुआ मस्त।
सोचा था शिक्षा का करूंगा दान,
परिवार पर भी रखूंगा ध्यान।

बच्चों को मिले बेहतर शिक्षा बनाया लक्ष्य,
ईमानदारी से किए काम का मिला साक्ष्य।
काम से खुश एवम् संतुष्ट था,
काफी समय गुजर गया था।

अचानक शिक्षा विभाग में,
हुआ आमूलचूल परिवर्तन।
छात्र हित के नाम पर,
शिक्षक के काम पर।

शुरू हुई धमाचौकरी,
कठिन हुई अब नौकरी।
न होली, छठ न ही दिवाली,
सभी त्योहार अब खाली-खाली।

घर छूटा अपने छूटे, छूट गया समाज,
जीना दुर्लभ हो गया आज।
छात्र सह शिक्षक हो रहे बेरंग,
पढ़ाई तभी होगी जब होंगे संग।

आदेशालोक में पर्व त्योहार की छुट्टी हुई रद्द,
छुट्टी में भी शिक्षक स्कूल पहुंचे पढ़ाने गद्द।
जब बच्चे नहीं आयेंगे स्कूल,
शिक्षक क्या करेंगे जाकर स्कूल।

पढ़ाई लगातार हो अच्छी बात है,
रुचिकर हो ये गुणवत्तापूर्ण बात है।
कम समय में बेहतर ज्ञान,
होना चाहिए इसका भान।

पर्व त्योहार भी पढ़ाई का ही है पार्ट,
खुशनुमा माहौल में पढ़ाना भी है आर्ट।

जबर्दस्ती जब मुंह में न जाता खाना,
कैसे मिलेगा ज्ञान का खजाना।
नौकरी में ना कभी करना नहीं,
बेबस शिक्षक हूं कुछ कहना नहीं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता शिक्षक के जीवन की एक दृष्टि प्रस्तुत करती है। शिक्षक ने अपने काम में समर्पित बलिदान दिया, लेकिन अचानक शिक्षा विभाग में परिवर्तन हो गया और उन्हें धमाचौकी झेलनी पड़ी। इसके बाद, उनकी जिंदगी में कई बदलाव आए, जैसे कि त्योहारों की छुट्टियों का रद्द होना और नौकरी की प्रतिस्पर्धा। फिर भी, उन्होंने पढ़ाई को महत्व दिया और अपने छात्रों की शिक्षा में समर्पित रहा। वे यह सिखाते हैं कि पढ़ाई केवल किताबों से ही नहीं, बल्कि प्रसन्नता और रुचि के साथ भी होती है। शिक्षक की भूमिका इस कविता में उजागर की गई है, जो समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण होती है।

—————

यह कविता (बेबस शिक्षक।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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गुरु का वंदन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ गुरु का वंदन। ♦

मिट्टी को प्रभु ने आकार दिया,
दिया जीवन का वरदान।
मां ने नौ महीने गर्भ में ढोकर,
दिया जीवन जीने का सम्मान।

परिवार ने पाल पोसकर बड़ा किया,
बताया मेरी क्या है पहचान।
मैं मिट्टी का कच्चा घड़ा था,
था तपने को तैयार।

पक्का रूप दिया गुरु ने,
पढ़ाया सच्चाई का पाठ।
इंसानियत का मर्म समझाकर,
दिखाया सत्य की राह।

जीवन संघर्ष की गाथा है,
जूझना इससे मुझे सिखाया।
मात-पिता ने तो जीवन दिया,
सार बताया गुरु ने।

ईश्वर को मैने नहीं देखा,
देखा भी तो अपने पालनहार को।
जिनका मान है सर्वोपरि,
उनके बाद कोई है अगर,

वो है हमारे सृजनकार गुरु,
ईश्वर से ऊंचा दर्जा है उनका।
करते है हम उनका सम्मान,
बार-बार शीश झुका करते प्रणाम।

चंद शब्द गुरु के लिए,
आज ये मैं कहता हूं।
गुरु वंदन जग वंदन,
गुरु जीवन आधार।
गुरु बिना कछु ज्ञान नहीं,
हम उनके आभार।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — इस संसार में प्रथम गुरु तो माँ ही हैं। गुरु हमें जिंदगी में एक जिम्मेदार और अच्छा इंसान बनाने में हमारी सहायता करते हैं। वही हमें जीवन जीने का असली तरीका सिखाते हैं; और वही हमें जीवन के राह पर ता-उम्र सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। गुरु हमें अंधकार भरे जीवन से निकालकर प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु एक दीपक की भांति होता है जो अपने शिष्यों के जीवन को प्रकार से भर देते हैं। विद्यार्थी जीवन में गुरु की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

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यह कविता (गुरु का वंदन।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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कुछ कर गुजरने की हसरत अभी बाकी है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ कुछ कर गुजरने की हसरत अभी बाकी है। ♦

ऊपर वाले ने कुछ सोच कर, हमें बनाया होगा,
नाक नक्श संग संस्कारों का, साज सजाया होगा।
मिट्टी के पुतलो में रंगों की, छटा बिखेरा होगा,
बड़े अरमानों से अपने दिल में, सपने संजोया होगा।
हसरतें तो बहुत थी, परवान चढ़ाना बाकी है,
कुछ कर गुजरने की हसरत अभी बाकी है।

दिया होगा, सत्य पर चलने की सनक खास,
बनाकर एक बेहतर इंसान, पुतले में डाला होगा जान।
प्रकृति की रक्षा करेगा, बनाकर एक अपना मुकाम,
रंगमंच का भावी वजीर, करेगा भावनाओं का सम्मान।
दिन फिर बहुरेंगे, फिर बदलेंगी फिजाएं धरा की,
हसरतें तो बहुत थी, परवान चढ़ाना बाकी है।
कुछ कर गुजरने की हसरत अभी बाकी है।

इतनी आशाएं, आकांक्षाओं से लदा आया हूं इस कर्मधाम में,
लेकर एक विश्वास प्यार की, बंधी थी एक डोर।
इतनी बड़ी जवाबदेही थी मिली, सोंचा कैसे चुका पाऊंगा,
था अपना रोल जो मिला, खुद कैसे निभा पाऊंगा।
असत्य के सागर में अपना, सत्य के गोते लगा पाऊंगा,
प्रकृति के भक्षकगण से, रक्षा कैसे कर पाऊंगा।
हसरतें तो बहुत थी, परवान चढ़ाना बाकी है,
कुछ कर गुजरने की हसरत अभी बाकी है।

पूछा जब अंतरात्मा से अपने, पाया एक ही ज्ञान,
सबको न मिल पाता है, इस रंगभूमि की शान।
कर्म पथ पर पग तो बढ़ाओ, मिलेगा जग में मान,
संस्कारों की बात कहां, रग-रग में सबके बसता है।
ढूंढ पाए वो शख्स खड़ा है, लिए जान में जान,
कमर कस मैं खड़ा हो गया, लेकर प्रभु का नाम।
हसरतें तो बहुत थी, परवान चढ़ाना बाकी है।
कुछ कर गुजरने की हसरत अभी बाकी है।

मिले ज्ञान से सीख ले, लिया कर्म को साथ,
ठान लिया जब मैने तो, पाऊंगा अब मंजिल तमाम।
मिले जीवन को सरस बनाकर, दूंगा एक संदेश,
कर्तव्य से न कभी डिगूंगा, देता हूं विश्वास।
बड़ों के आशीष को पाकर, फूला न समा पाऊंगा,
हसरतें तो बहुत थी, परवान चढ़ाना बाकी है,
कुछ कर गुजरने की हसरत अभी बाकी है।

रंगमंच से जो सीखा मैंने, आज ये साझा करता हूं,
कर्म करता हूं करूंगा, भटकूंगा न पथ से अपने।
सहयोग की भावना दिल में भरी हो, भाव ऐसी ही रखता हूं,
सीखा जिनसे सबकुछ, उन गुरुओं का आभार करता हूं।
हसरतें तो बहुत थी, परवान चढ़ाना बाकी है,
कुछ कर गुजरने की हसरत अभी बाकी है।

अंत में यह प्रण लेता हूं, करूंगा दायित्वों का निर्वहन,
सत्य को दिल से सजदा करूंगा, दूंगा उसका साथ।
गुरुओं का सम्मान करूंगा, नमाऊंगा अपना शीश,
ऊपर वाले की आस भरूंगा, चाहे मांगनी पड़े भीख।
हसरतें तो बहुत थी, परवान चढ़ाना बाकी है,
कुछ कर गुजरने की हसरत अभी बाकी है।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — भगवान ने सुंदर प्रकृति बनाया अनगिनत पेड़ पौधे बनाये, लेकिन इंसानो ने अपने स्वार्थ सिद्धि (इच्छा पूर्ति) के लिए प्रकृति को तहस नहस कर दिया। जिसका परिणाम मौसम का ख़राब होना, प्राकृतिक आपदा, और भी अनगिनत आपदा का अम्बार लग गया है, अगर ऐसे ही चलता (प्रकृति को तहस नहस करते रहेंगे) रहा तो पृथ्वी इंसान के रहने लायक नहीं रहेगी, फिर भाग कर जाओगे कहाँ ये कभी सोचा है? अब भी समय है सुधर जाओ इंसान, और प्रकृति से खिलवाड़ करना बंद करो, अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए जो तुम कर रहे हो। आओ हमसब मिलकर ये संकल्प ले आज की हम ऐसा कोई भी कर्म नहीं करेंगे जिससे प्रकृति के पांचो तत्वों को नुकसान हो। हम सभी प्रत्येक वर्ष एक पेड़ जरूर लगाएंगे और तब तक उसका देखभाल करेंगे जब तक वह पेड़ अपना ख़ुराक ज़मीन खुद न लेने लगे।

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यह कविता (कुछ कर गुजरने की हसरत अभी बाकी है।) “विवेक कुमार जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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शुभागमन।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शुभागमन। ♦

निश्छल चंचल मन,
आंखों में संजोएं, सपनों की उमंग।
फंख फैलाए भरने को गगन की उड़ान,
नव आगंतुकों हेतु सज चुका है, शिक्षा का दरबार।
आइए पधारिए हमारे भविष्य के कर्णधार,
शिक्षा की दहलीज पर है आपका वंदन अभिनंदन,
शुभागमन, शुभागमन…।

चली बयार,
आ गई नामांकन की बहार।
नन्हें – मुन्हें की उड़ी फुहार,
मनमोहक, मनभावन लगता जैसे त्योहार।
आमंत्रित करता सूबे सह मुजफ्फरपुर का हर विद्यालय परिवार,
शिक्षा की दहलीज पर है वंदन अभिनंदन,
शुभागमन, शुभागमन…।

सजेगी बगिया चमन होगा गुलजार,
नव कोंपल के आगमन से खिल उठेगा,
शिक्षा का बाग, होगा नया आगाज।
भंवरे गुनगुनाएंगे सुनकर,
प्यारी मीठी मंद मंद मुस्कान।
पधारों हे राष्ट्र के कर्णधार,
शिक्षा की दहलीज पर है वंदन अभिनंदन,
शुभागमन, शुभागमन…।

प्रथम अप्रैल से आपकी राह निहारे,
नामांकन की बांट जोहते।
पाठशाला ही है जिसकी शान,
जो दिलाएगा उन्हें मान और सम्मान।
तभी बढ़ेगा राष्ट्र का अभिमान,
शिक्षा की दहलीज पर है वंदन अभिनंदन,
शुभागमन, शुभागमन…।

सभी अभिभावकों से विवेक की विनती है हरबार,
चल रही नामांकन की बयार।
कराइए छह वर्ष के नन्हें मुन्ने का दाखिला इसबार,
खुद आइए, संग लाइए।
बगिया के फूलों का चहकता मेहमान,
शिक्षा की दहलीज पर करते वंदन अभिनंदन,
शुभागमन, शुभागमन…।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — शिक्षा हमें विभिन्न प्रकार का ज्ञान व कौशल प्रदान करता है। यह सीखने की निरंतर, धीमी और सुरक्षित प्रक्रिया है, जो हमें ज्ञान प्राप्त करने में मदद करती है। यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो हमारे जन्म के साथ ही शुरु हो जाती है और हमारे जीवन के साथ ही खत्म होती है। सजेगी बगिया चमन होगा गुलजार, नव कोंपल के आगमन से खिल उठेगा, शिक्षा का बाग, होगा नया आगाज। भंवरे गुनगुनाएंगे सुनकर, प्यारी मीठी मंद मंद मुस्कान। पधारों हे राष्ट्र के कर्णधार, शिक्षा की दहलीज पर है वंदन अभिनंदन, शुभागमन, शुभागमन…।

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यह कविता (शुभागमन।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली। ♦

जीवन के बयार में, उड़ रही प्रेम की बोली,
लोग हो गए सेल्फिस वेल्फिस, तंग हो गई टोली।
नहीं रहा अब नाज और नखरा, कैद हो गई बोली,
बदल रही फिज़ा, खो रही दोस्तों की खोली।
प्यार के दो मीठे बोल के लिए, तरस रही आली,
दिल से दिलों की टोली, यही है सच्ची होली,
दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

जीवन पथ पर अग्रसर संघर्ष रूपी पथिक को,
न खाने की फुर्सत ही है, न अपनों के लिए वक्त।
इस आपाधापी ने संबंधों में घोला विष,
प्यार ने छोड़ी राह, कड़वाहटों ने दामन थामा।
साल भर के गीले शिकवे मिटाती, रंगों की लाली।
दिल से दिलों की टोली यही है सच्ची होली,
दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

रिश्तों में आई दरार भरती हमारी, रंगों की थाली,
हर चेहरे पर रंग चढ़ाती, खासियत है इसकी निराली।
हर सूखे चेहरे पर लाती, मुस्कान की लाली,
बड़ी निराली बड़ी सुहानी खुशियों की हमझोली।
दिल के ढीले तारों को कसकर, शरगम बजाती ताली,
दिल से दिलों की टोली यही है सच्ची होली,
दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

सादगी और विश्वास का प्रतीक है हमारी होली,
रंगों से रंग मिलकर, दोस्तों दुश्मन भी गले मिल जाते है।
का पावन संदेश जन जन तक फैलती,
भाईचारे संग दिलों का संगम, यही है इसकी बोली।
अनोखा अनूठा विश्वास से भरा है हमारी होली।
दिल से दिलों की टोली यही है सच्ची होली,
दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

मेरे प्रिय पाठकों सपरिवार तहे दिल से होली महापर्व की शुभकामनाएं।–KMSRAJ51

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — होली रंगों का ही नहीं सामाजिक भेदभाव मिटाने एवं सामूहिकता का पर्व भी है। होली बुराई पर अच्छाई के प्रतीक का पर्व भी है। इस बार हम होलिका दहन के साथ कोरोना वायरस का भी दहन करें तो फिर पहले की तरह सौहार्द्र पूर्ण वातावरण में एक-दूसरे से गले मिलते हुए होली मना सकेंगे। होली रंगों का त्योहार है और जीवन में रंग तभी तक हैं, जब तक परिवार-समाज सुरक्षित है।

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यह कविता (दिलों की मेलजोली यही है सच्ची होली।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

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मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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सत्य के राही शिव।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ सत्य के राही शिव। ♦

शिव ही सत्य की ज्योत है,
उनके बिना न कोई होत है।
जीवन संघर्ष रूपी प्याला है,
नीलकंठ ने पिया विष का प्याला है।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

कहा जाता इन्हे सृष्टि के रचनाकार,
ऐसे निराले है हमारे भोले कलमकार।
इनके नाम में ही छुपा है जीवन का सार,
इसी से हम सभी का होगा बेड़ा पार।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

शिव के नाम से दिनचर्या होती आसान,
बढ़ता जग में आन बान और शान।
अन्याय के खिलाफ जो, लड़ना सिखाए,
सत्य के पथ पर हमें चलना।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

दिल और दिमाग के द्वंद से, आत्मनियंत्रण कराए,
खुद को नियंत्रित करने का ज्ञान।
शिव अपने महायोगी रूप से सिखलाते,
शांतचित रहने का सलीका तमाम।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

त्रिशूल और डमरू, धन और संपदा का सूचक,
सिखलाता भौतिकवाद के पीछे तू न भाग।
विष का कर पान, नीलकंठ ने विश्व को दिया,
नकारात्मकता छोड़, सकारात्मकता का संकेत सरेआम।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

शिव अपनी इच्छा को परे रख, दिया संदेश,
इच्छाएं होती जुनून, करती सर्वनाश।
अर्धनारीश्वर शिव पार्वती रूप से,
पत्नी को दिलाया मान और सम्मान।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

हाथ में धारित त्रिशूल बताता,
न कर हावी, न खुद पर घमंड।
महायोगी रूप बताया, पर न मोहमाया में,
नटराज रूप से मिलता, नृत्य की है सीख।
शिव की महिमा से अछूता न कोई आम,
सत्य के राही शिव को मेरा प्रणाम।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

मेरे प्रिय पाठकों आपको सपरिवार तहे दिल से महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं।–KMSRAJ51

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — ज्ञान और बुद्धि के बिना ये जीवन किसी काम का नहीं। भगवान शिव के करोड़ों भक्त महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिवजी की चार पहर की पूजा-अर्चना करते हैं, महादेव उनकी सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करते है। इस दिन भगवान शिव जी को प्रसन्न करने के लिए भक्तों को सच्चे मन से दिन व रात में शिवपुराण का पाठ करना चाहिए। जो भी भक्त सच्चे मन से इस दिन भोलेनाथ की पूजा-अर्चना व ध्यान करता है उसकी सभी तरह की मनोकामना पूर्ण होती है। महाशिवरात्रि मतलब पावन रात्रि वह रात्रि जिसमे अपने सम्पूर्ण विकारों को जलाकर भष्म कर भगवान शिवजी से सर्व सद्गति प्राप्त करने की रात्रि। आओ हम सब मिलकर सच्चे मन से महापर्व महाशिवरात्रि को मनाए।

—————

यह कविता (सत्य के राही शिव।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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माँ शारदे वर दे।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ माँ शारदे वर दे। ♦

मां शारदे की महिमा से अछूता न कोई सार है,
मां के रूपों में ही छुपा जग संसार है।
उन्हीं के चरणों में ज्ञान का भंडार है,
विद्यादायिनी मां से आज रज है हमारी।
मां शारदे वर दे तू अपने ही रंग में रंग दे।

मां की कृपा के बिना न होता ज्ञान का संचार है,
इनकी करुणा बड़ी अपरम्पार है।
अपने रूपों में धारित वस्तु से,
मां जग को सबक देती खास है।
विद्यादायिनी मां से आज रज है हमारी,
मां शारदे वर दे तू अपने ही रंग में रंग दे।

नकारात्मक प्रवृतियों से सकारात्मकता का,
कराए भान, पुस्तक ही बस एक नाम।
निरस जीवन में सरसता का,
रंग भरती, वीणा ही वो सरगम।
विद्यादायिनी मां से आज रज है हमारी,
मां शारदे वर दे तू अपने ही रंग में रंग दे।

स्फटिक माला दर्शाती वैराग्य और,
ध्यान बिन, न मिलता संपूर्णता का है भाव।
अपनाने के लिए तो बहुत है मगर,
कल्याणकारी अपनाने की कला हंस है सिखलाता।
विद्यादायिनी मां से आज रज है हमारी,
मां शारदे वर दे तू अपने ही रंग में रंग दे।

कीचड़ में ही कमल है खिलता,
कोमलता और सुंदरता का क्या अनुपम सार है।
वीणापाणी मां के सर्वस्व संरचना में, सबक बेहिसाब है,
विद्यादायिनी मां से आज रज है हमारी।
मां शारदे वर दे तू अपने ही रंग में रंग दे।

हम अज्ञानी मुरख हमें ज्ञान का दर्श दिखा दे मां,
अपने ज्ञान के रस में हमें तू सराबोर कर दे मां।
विद्यादायिनी मां से आज रज है हमारी,
मां शारदे वर दे तू अपने ही रंग में रंग दे।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

मेरे प्रिय पाठकों आपको सपरिवार बसंत पंचमी की शुभकामनाएं।-KMSRAJ51

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — ज्ञान और बुद्धि के बिना ये जीवन किसी काम का नहीं। ज्ञान, बुद्धि की देवी अपनी कृपा व करुणा का संचार कर हम पर, हे माँ तुम्हारी करुणा बड़ी अपरम्पार है। मां शारदे की महिमा से अछूता न कोई मनुष्य है, मां के रूपों में ही छुपा हुआ पूर्ण जग संसार है। उन्हीं के चरणों में ज्ञान का भंडार है, विद्यादायिनी मां से आज रज है हमारी। मां शारदे वर दे तू अपने ही रंग में रंग दे। जो नकारात्मक प्रवृतियों से सकारात्मकता का कराए सदैव भान, पुस्तक ही बस एक नाम। जो निरस जीवन में सरसता का, रंग भरती, वीणा ही वो सरगम। स्फटिक माला दर्शाती वैराग्य और ध्यान बिन, न मिलता संपूर्णता का है भाव। अपनाने के लिए तो बहुत है मगर, कल्याणकारी अपनाने की कला हंस है सिखलाता। कीचड़ में ही कमल है खिलता, अर्थात: सर्व विघ्न से न्यारे व पवित्र, कोमलता और सुंदरता का क्या अनुपम सार है। वीणापाणी मां के सर्वस्व संरचना में, सबक बहुत बेहिसाब है। आओ हम सब मिलकर सच्चे मन से माँ की वंदना करे।

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यह कविता (माँ शारदे वर दे।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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मां तुझे सलाम।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ मां तुझे सलाम। ♦

जिस
वतन ने
हमें प्यार दिया
उस वतन पे हमें नाज है॥

जिस
वतन ने
हमें महफूज किया
उस वतन पे हमें नाज है॥

जिस
वतन को
दासता से मुक्त किया
उस देश भक्त पे हमें नाज है॥

जिस
वतन ने
मां का आंचल दिया
उस ममता पे हमें नाज है॥

जिस
वतन की
आजादी के लिए
प्राणों की आहुति तक दी
उन देशप्रेमी के जज्बे पे हमें नाज है॥

जिस
वतन ने
समरसता का
पाठ सिखलाया
उस वतन पे हमें नाज है॥

जिस
वतन में
रंग रूप भेष भाषा
सभी को मिलता मान
उस देश पे हमें नाज है॥

जिस
वतन ने हमें
सबकुछ दिया
लहू से कर्ज चुकाएंगे
देश प्रेम के जज्बे को और बुलंद बनाएंगे॥

जिस
वतन का
सबसे बड़ा संविधान
लोकतंत्र जिसकी शान
वो भारत देश महान वो भारत देश महान॥

वतन
हमारी आन
हमारा सम्मान है
उस मां को हमारा सलाम
वंदे मातरम् वंदे मातरम् वंदे मातरम्॥

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

मेरे प्रिय पाठकों आपको सपरिवार गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।-KMSRAJ51

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — यह राष्ट्रीय पर्व हमें देश की एकता और गौरव को बनाये रखने की प्रेरणा देता है। हम सभी को संविधान के सभी नियमों का पालन करना चाहिए। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान पूर्ण रूप से लागू हो गया था। भारत का संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। 26 जनवरी के दिन ही भारत को गणराज्य का सर्वोत्तम दर्जा प्राप्त हुआ। 26 जनवरी के दिन दिल्ली में इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक परेड निकाली जाती है। जिस वतन ने हमें प्यार, मां का आंचल, समरसता, रंग रूप भेष भाषा सभी को मिलता मान दिया उस वतन पे हमें नाज है। जिस वतन का सबसे बड़ा संविधान लोकतंत्र जिसकी शान वो भारत देश महान वो भारत देश महान। वतन हमारी आन हमारा सम्मान है उस मां को हमारा सलाम वंदे मातरम् …वंदे मातरम् …वंदे मातरम्॥

—————

यह कविता (मां तुझे सलाम।) “विवेक कुमार जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मैं एक शिक्षक हूं। मुजफ्फरपुर जिला, बिहार राज्य का निवासी हूं। शिक्षा से शुरू से लगाव रहा है। लेखन मेरी Hobby है। इस Platform के माध्यम से सुधारात्मक संदेश दे पाऊं, यही अभिलाषा है।

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यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

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“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

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संक्रांति का पैगाम।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ संक्रांति का पैगाम। ♦

होशियार खबरदार…….
आ गया मकर संक्रांति का त्योहार।
सभी पर्वों से अलग, अनूठा, अनोखा,
दिलाता एक सुंदर एहसास।

तिल संक्रांति, खिचड़ी पर्व नाम से,
यह है जाना जाता।
प्रत्येक 14 या 15 जनवरी को,
सुनाता एक पैगाम।

गम के अधियारों की छंटा हटाकर,
करो एक नई शुरुआत।
मकर संक्रांति अर्थ बताता,
देता एक संकेत।

सूर्य का एक राशि से,
दूसरी राशि में गोचर का,
कराता है भान,
इस वैदिक उत्सव में, करते सब दान।

खिचड़ी भोग का,
इस दिन होता है मान।
भिन्न भिन्न जगहों पर, भिन्न भिन्न नामों से,
जाना जाता, बड़े ही शान।

दही, चुरा, तिल, गुड़ का पान,
होता बड़ा अभिमान।
नए साल में संग लाती,
सुख शांति और समृद्धि की आस।

पतंग उड़ाने की प्रथा बनाती,
इसे और भी खास।
शुभ संदेश का होता वाहक,
लाता सबको पास।
करता एक नई ऊर्जा का संचार।

आओ मिलकर संग मनाएं,
खुशियों का त्योहार।
करें एक नई शुरुआत,
लाए जीवन में खुशियां अपार।

आप सभी पाठकों को सपरिवार तहे दिल से मकर संक्रांति पर्व की शुभकामनाएं।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

—————

• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — मकर संक्रांति या उत्तरायण या माघी या बस संक्रांति, जिसे बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है, और नेपाल में माघ संक्रांति के रूप में, यहाँ संक्रांति का अर्थ है ‘स्थानांतरण’, इस दिन को सूर्य के मकर राशि में संक्रमण का दिन माना जाता है। मकर संक्रांति, या बस संक्रांति, भगवान सूर्य (सूर्य भगवान) को समर्पित है। आज के दिन तिल के दान को बेहद शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति को तिल संक्रांति भी कहा जाता है। इसलिए इस दिन काले तिल के दान से जीवन की सभी तरह की परेशानियां दूर होती है। मकर संक्रांति के त्योहार को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग रूप में मनाया जाता है। पंजाब में यह लोहड़ी (Lohri), उत्तराखंड में उत्तरायणी, गुजरात में उत्तरायण, केरल (Kerala) में पोंगल (Pongal) और असम में बिहू (Bihu) के रूप में मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे खिचड़ी पर्व के नाम से भी जाना जाता है। आज यानी 14 जनवरी 2022 को शुक्ल पक्ष की द्वादशी की तिथि को यह त्योहार मनाया जा रहा है।

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रहमत के बंदे रहीम।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ रहमत के बंदे रहीम। ♦

आसमां से आया फरिश्ता,
प्यार का सबक सिखलाने।
सरजमीं पर रहमत बरसाने,
चारों तरफ समभाव जताने।

कलम और तलवार था जिनका,
आसानी से एक ही कमान।
मानव प्रेम के सूत्रधार मसीहा,
कहलाए रहमत के बंदे रहीम।

मध्यकालीन युग के उन्मुक्त कवि,
सभी विधाओं में थे पारंगत।
सोंच थी उनकी बेमिशाल,
रखते थे सबका ख्याल।

धार्मिक परंपरा की अद्भुत मिशाल,
बहुमुखी प्रतिभा के धनी भाव थे उनके लाजवाब।
अकबर के नवरत्नों में था उनका नाम,
कहलाए रहमत के बंदे रहीम।

बैरम खां, सुल्ताना बेगम का सितारा,
लाहौर में जन्मा, था सबका दुलारा।
काव्य रचना का गुण था मिला, उन्हें विरासत में,
मुस्लिम होते हुए भी, धर्म अपनाया हिंदू का।

उनके कार्यों के बदले मिर्जा खां की मिली उपाधि,
अवधी, ब्रजभाषा, खड़ी भाषा का करते थे प्रयोग।
बाबर की आत्मकथा का, तुर्की से फारसी में,
किया अनुवाद, कहलाए रहमत के बंदे रहीम।

रहीम के दोहे ने जग को था मोहा,
सबों ने उनके कार्यों को था खूब सराहा।
एक एक दोहे में था, सबक बड़ा ही खास,
सोच समझ और प्रेम, व्यवहार, उनका था दास।

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरे चटकाय,
टूटे पे फिर ना जुड़े, जुड़े गांठ पड़ी जाय।
1627 में ली अंतिम सांस, हो गई शाम,
कहलाए रहमत के बंदे रहीम।

♦ विवेक कुमार जी – जिला – मुजफ्फरपुर, बिहार ♦

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• Conclusion •

  • “विवेक कुमार जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से समझाने की कोशिश की है — रहीम दास के ज्ञान, व्यवहार, और कार्यों का तथा उनके साहित्य के समझ और साहित्य कार्यों का सुन्दर वर्णन किया हैं। रहीम दास के लेख से इतिहास के कई सारी बातों का साबुत मिलता है, एक कवि हृदय रहीम दास की रचनाएँ उस समय की जीवन शैली को भी दर्शाता है। रहीम दास के दोहे आज भी उतने ही कारगर है, जितने उस समय हुआ करते थे। रहीम दास के दोहे से समाज को काफी कुछ सीखने को मिलता है। आज भी रहीम दास के दोहे से लोग बहुत ज्यादा लाभान्वित हो रहे है। रहीम दास अपने समय के महान कवियों में से एक थे। उनकी समझ और साहित्य प्रेम उनकी रचनाओं में साफ़ साफ़ दिखती हैं। उनकी रचनाएँ उस समय के इतिहास को काफी हद तक उजागर करती है।

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