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poem on tongue

मैं हूँ जीभ।

Kmsraj51 की कलम से…..

Main Hoon Jeebh | मैं हूँ जीभ।

I am very soft, I always stay in the mouth, I come out sometimes. I am expert in tasting the taste, I make it clear in a moment.

हूँ बड़ी कोमल मुंह में रहती सदा,
बाहर भी निकलती हूँ यदा कदा।
स्वाद चखने में हूँ माहिर,
पल में कर देती हूँ जाहिर।

शब्दों को हूँ मैं सजाती,
दूसरों तक हूँ पहुंचाती।
कभी जोर से हूँ बोलती,
तो कभी मुंह में ही शब्द हूँ घोलती।

बचपन हो या हो बुढ़ापा,
मुझमें जोर होता है ज्यादा।
शरीर के रोगों को भी हूँ जताती,
दवा भी मुझे छू कर ही जाती।

कष्ट बहुत हूँ देती,
उलजलूल शब्द जब हूँ कहती।
बड़ाई भी होती है तब,
अच्छी बात करती हूँ जब।
नहीं है सम्भालना मुझे आसान,
जिसने सम्भाला बन गया वो महान।

♦ विनोद वर्मा जी / (मझियाठ बलदवाड़ा) जिला – मंडी – हिमाचल प्रदेश ♦

—————

  • “विनोद वर्मा जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — यह कविता “जीभ” के गुणों और प्रभावों को दर्शाती है। जीभ एक कोमल अंग है, जो स्वाद चखने में माहिर होती है और शब्दों को सजाकर दूसरों तक पहुंचाती है। यह कभी जोर से बोलती है, तो कभी चुप भी रह जाती है। जीभ का प्रभाव बचपन से बुढ़ापे तक बना रहता है। यह न केवल भोजन का स्वाद पहचानती है, बल्कि शरीर में किसी रोग के संकेत भी देती है। दवाएं भी जीभ के संपर्क में आने के बाद ही शरीर में असर करती हैं। यहअच्छे और बुरे दोनों तरह के शब्दों का माध्यम बन सकती है। जब यह गलत शब्द कहती है, तो कष्ट देती है, लेकिन जब यह अच्छी बातें बोलती है, तो प्रशंसा भी पाती है। कवि अंत में कहते हैं कि जीभ को नियंत्रित रखना आसान नहीं होता, और जो व्यक्ति इसे संभालना सीख लेता है, वही सच्चे अर्थों में महान बनता है।

—————

यह कविता (मैं हूँ जीभ।) “विनोद वर्मा जी” की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी लेख/कवितायें सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम विनोद कुमार है, रचनाकार के रुप में विनोद वर्मा। माता का नाम श्री मती सत्या देवी और पिता का नाम श्री माघु राम है। पत्नी श्री मती प्रवीना कुमारी, बेटे सुशांत वर्मा, आयुष वर्मा। शिक्षा – बी. एस. सी., बी.एड., एम.काम., व्यवसाय – प्राध्यापक वाणिज्य, लेखन भाषाएँ – हिंदी, पहाड़ी तथा अंग्रेजी। लिखित रचनाएँ – कविता 20, लेख 08, पदभार – सहायक सचिव हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ मंडी हिमाचल प्रदेश।

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“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

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Filed Under: 2025 - KMSRAJ51 की कलम से, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: Hindi Poems, poem on tongue, vinod kumar, vinod kumar poems, जीभ पर कविता हिंदी में, जुबान पर कविता, मैं हूँ जीभ, मैं हूँ जीभ - विनोद वर्मा, विनोद वर्मा, हिंदी कविताएँ

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