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KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

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Read Hindi poem

स्त्री प्रकृति है।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ स्त्री प्रकृति है। ♦

स्त्री प्रकृति है,
प्रकृति कभी किसी की,
गुलाम नहीं होती।
हां वह अवश्य ढोती है,
जरूरत से ज्यादा बोझ।

क्योंकि प्रकृति सृजनकर्ता है।
ऊर्जा का नया संचार,
वह स्वर्ण से आच्छादित है।
ठीक इसी तरह…
स्त्री को भी कभी गुलाम नहीं,
बनाया जा सकता है।

हां कुछ समय के लिए,
वह सहन करती है।
हर उस उभरते विचार को,
जो उसके खिलाफ है।
दफन कर लेती है,
सीने में उस आग को।

जो उसके अस्तित्व में,
लगाई जा रही है।
लेकिन
आवश्यकता से अधिक,
दोहन भर देता है उसमें आक्रोश।

उठता है ज्वालामुखी और
आता है प्रलय।
प्रकृति कुछ इस तरह,
प्रतिशोध लेती है अपने दोहन का।

♦ कविता पाल जी – नई दिल्ली ♦

—————

  • “कविता पाल जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए उदाहरण के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — स्त्री (नारी) और प्रकृति अनंत ऊर्जा से संपन्न है। स्त्री की गोद में उत्थान और पालन होता है नई पीढ़ी का। माना की वह बहुत सहनशील है, लेकिन इसका मतलब ये बिलकुल भी नही है की वो कमजोर है। वो जननी है, पालनहार है, उसकी सहनशीलता की परीक्षा ना ले। वह सहन करती है, हर उस उभरते विचार को जो उसके खिलाफ है। दफन कर लेती है, सीने में उस आग को, जो उसके अस्तित्व में लगाई जा रही है। लेकिन आवश्यकता से अधिक दोहन भर देता है उसमें आक्रोश।

—————

यह कविता (स्त्री प्रकृति है।) ” कविता पाल जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत/दोहे/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए, माता रानी की कृपा से।

नाम : कविता पाल
शिक्षा : पुस्तकालय विज्ञान में D.LIS, B.LIS, और M.LIS
PG Diploma in YOGA.

शौक : अध्यापन, लेखन, समाज सेवा द्वारा महिलाओं की स्थिति में जागरूकता लाना।

— अपने बारे में कुछ शब्द साहित्यिक गतिविधियां काव्य लेखन, गद्य लेखन एवं फेसबुक के विभिन्न साहित्यिक समूहों में सक्रिय सहभागिता रहती है अतः सक्रिय लेखक सम्मान एवं पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं।
— मेरे द्वारा फेसबुक पर अनमोल अल्फाज नामक पेज का संचालन भी किया जाता है। जिसका एकमात्र उद्देश्य समाज में मेरी कविताओं द्वारा महिलाओं एवं अन्य क्षेत्र में जागरूकता का कार्य करना है।

—————

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

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आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ® ———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____Copyright ©Kmsraj51.com  All Rights Reserved.____

Filed Under: 2021-KMSRAJ51 की कलम से, कविता पाल जी की कविताएं।, हिंदी कविता, हिन्दी-कविता Tagged With: author kavita pal, Hindi poem on shiksha ka adhikar, kavita pal poems, Poem On Education In Hindi, poet kavita pal, Read Hindi poem, आधुनिक युग की नारी पर कविता, कविता पाल जी की कविताएं, कवि‍ताएँ, नारी और प्रकृति पर कविता हिंदी में, नारी के सम्मान में कविता, नारी के सम्मान में दोहे, नारी के सम्मान में शायरी, नारी पर कविता हिंदी में, नारी सम्मान पर कविता, महिलाओं के सम्मान में कविता, महिलाओं के सम्मान में शायरी, मैं नारी हूँ कविता

शिक्षा का अधिकार।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ शिक्षा का अधिकार। ♦

ना मांगा धन और दौलत,
ना मांगा कोई हीरो का हार।
मुझे तो दे दो हे प्रभु ,
बस – शिक्षा का अधिकार।

कर्तव्य और निधि के जो है पाठ पढ़ाते,
64 कलाओं से युक्त कर जो,
एक ग्वाले को श्रीकृष्ण है बनाते।
करके गीता का निर्माण,
दिया ज्ञान का उपहार।
मुझे तो दे दो है प्रभु ,
बस – शिक्षा का अधिकार।

न मांगा राज्य और शासन,
ना मांगा कोई क्षेत्र और आसन।
मुझे तो दे दो हे प्रभु ,
बस – शिक्षा का अधिकार।

जब जली ज्ञान की अलख,
तब महान अशोक भी गया समझ।
करके बुद्धता को स्वीकार,
दिया शांति का वरदान।
मुझे तो दे दो हे प्रभु ,
बस – शिक्षा का अधिकार।

ना मांगा वर और वैभव,
ना मांगा कोई भी ऐश्वर्य और साधन।
मैं तो हूं नारी प्रभु बस,
मुझे दे दो शिक्षा का अधिकार।

यह कहकर गार्गी ने – जब किया,
राजा जनक के द्वार शास्त्रार्थ।
बृहदारण्यक उपनिषद् की,
ऋचाओं का कर निर्माण,
दिया संसार को वेदों का ज्ञान।

ना मांगा धन और दौलत,
ना मांगा कोई हीरो का हार।
मुझे तो दे दो हे प्रभु ,
बस – शिक्षा का अधिकार।

♦ कविता पाल जी – नई दिल्ली ♦

—————

  • “कविता पाल जी“ ने, बिलकुल ही सरल शब्दों का प्रयोग करते हुए उदाहरण के माध्यम से समझाने की कोशिश की हैं — शिक्षा सभी के लिए जरूरी है चाहे वो किसी भी उम्र का हो। शिक्षा का मतलब है किसी भी इंसान का बौद्धिक विकास करना। शिक्षा किसी भी इंसान का सच्चा मित्र होता है – जो हर समय साथ निभाता है, चाहे परिस्थिति अनुकूल हो या विपरीत। आपका कोई गलत फायदा ना उठा ले, या आपके साथ कोई गलत ना करें, इसलिए शिक्षा जरूरी है। इसलिए सभी (लड़का – लड़की) को शिक्षा का पूर्ण अधिकार मिलना चाहिए।

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यह कविता (शिक्षा का अधिकार।) ” कविता पाल जी “ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें/गीत/दोहे/लेख सरल शब्दों में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी दोहे/कविताओं और लेख से आने वाली नई पीढ़ी और जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूँ ही चलती रहे जनमानस के कल्याण के लिए, माता रानी की कृपा से।

नाम : कविता पाल
शिक्षा : पुस्तकालय विज्ञान में D.LIS, B.LIS, और M.LIS
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शौक : अध्यापन, लेखन, समाज सेवा द्वारा महिलाओं की स्थिति में जागरूकता लाना।

— अपने बारे में कुछ शब्द साहित्यिक गतिविधियां काव्य लेखन, गद्य लेखन एवं फेसबुक के विभिन्न साहित्यिक समूहों में सक्रिय सहभागिता रहती है अतः सक्रिय लेखक सम्मान एवं पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं।
— मेरे द्वारा फेसबुक पर अनमोल अल्फाज नामक पेज का संचालन भी किया जाता है। जिसका एकमात्र उद्देश्य समाज में मेरी कविताओं द्वारा महिलाओं एवं अन्य क्षेत्र में जागरूकता का कार्य करना है।

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