• Skip to main content
  • Skip to primary sidebar
  • Skip to footer
  • HOME
  • ABOUT
    • Authors Intro
  • QUOTES
  • POETRY
    • ग़ज़ल व शायरी
  • STORIES
  • निबंध व जीवनी
  • Health Tips
  • CAREER DEVELOPMENT
  • EXAM TIPS
  • योग व ध्यान
  • Privacy Policy
  • CONTACT US
  • Disclaimer

KMSRAJ51-Always Positive Thinker

“तू ना हो निराश कभी मन से” – (KMSRAJ51, KMSRAJ, KMS)

Check out Namecheap’s best Promotions!

You are here: Home / Archives for अमृतमयी जीवन देता गुरु – सुशीला देवी

अमृतमयी जीवन देता गुरु - सुशीला देवी

अमृतमयी जीवन देता गुरु।

Kmsraj51 की कलम से…..

♦ अमृतमयी जीवन देता गुरु ♦

ये तो हम सभी जानते हैं कि गुरु शब्द ही अपने आप में इतना सार्थकता लिए हुए है कि इस शब्द के मानव-जीवन में आगमन से ही उजाला सर्वत्र फैलता दिखाई देता है।

गुरु शब्द स्वयं में ही अज्ञानता से ज्ञान का मार्ग प्रशस्त करता है। गुरु स्वयं ही शिष्य के मार्ग को अमृतमयी बनाकर उसका नाम इस संसार में रोशन करता है। गुरु के अस्तित्व में ही त्रिदेवों को समाहित माना गया है और इस पूरे ब्रह्मांड में गुरु के नाम का सदैव ही शंखनाद हुआ है जिन्होंने सदैव सत्य के दिये से अपने शिष्यों के पथ को प्रकाशवान किया है।

ये पंक्तियां कुछ अपने शब्दों से गुरु की महिमा व्यक्त करती है:

गुरु के प्रति मनुष्य की आस्था के शून्य हो गए भाव।
तभी से मानव-जीवन में शांति-सुख का हो गया अभाव॥

मनुष्य के जीवन में जीवन-पर्यन्त न जाने कितनी ऐसी बाधायें आई है जब इंसान को कोई रास्ता नही दिखाई देता। तब गुरु ही वो मांझी बनता है जो मानव की नैया को पार लगाता है। उसके जीवन में ज्ञान का उजाला कर देता है।

अब वो समय आ गया है जब गुरु को केवल फल-फूल, दान-दक्षिणा की ही जरूरत नही बल्कि गुरुओं की दी गयी शिक्षाओं और उपदेशों को जीवन में धारण करें और इस अनमोल मानव-जीवन का मिलना इस संसार में सार्थक बनायें।

गुरु-पूर्णिमा की सभी को हार्दिक बधाई! क्योंकि गुरु-पूर्णिमा का विशेष दिन भी इस संसार को ज्ञान के उजाले से प्रकाशवान करता है।

♦ सुशीला देवी जी – करनाल, हरियाणा ♦

—————

  • “श्रीमती सुशीला देवी जी“ ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस लेख के माध्यम से समझाने की कोशिश की है — गुरु शब्द स्वयं में ही अज्ञानता से ज्ञान का मार्ग प्रशस्त करता है। गुरु स्वयं ही शिष्य के मार्ग को अमृतमयी बनाकर उसका नाम इस संसार में रोशन करता है। 2,500 साल से भी अधिक पहले, बुद्ध ने बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया और बोधगया से सारनाथ, उत्तर प्रदेश गए। वहां उन्होंने पूर्णिमा के दिन उपदेश दिया, जिसे आज गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा वह दिन भी है जो महान भारतीय महाकाव्य महाभारत के लेखक महर्षि वेद व्यास की जयंती का प्रतीक है । इस दिन को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। गुरु पूर्णिमा छात्रों और शिक्षकों के बीच संबंधों का प्रतीक है।

—————

यह लेख (अमृतमयी जीवन देता गुरु।) “श्रीमती सुशीला देवी जी“ की रचना है। KMSRAJ51.COM — के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे।

आपका परिचय आप ही के शब्दों में:—

मेरा नाम श्रीमती सुशीला देवी है। मैं राजकीय प्राथमिक पाठशाला, ब्लॉक – घरौंडा, जिला – करनाल, में J.B.T.tr. के पद पर कार्यरत हूँ। मैं “विश्व कविता पाठ“ के पटल की सदस्य हूँ। मेरी कुछ रचनाओं ने टीम मंथन गुजरात के पटल पर भी स्थान पाया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति, माँ अम्बे, दिल की पुकार, हिंदी दिवस, वो पुराने दिन, डिजिटल जमाना, नारी, वक्त, नया जमाना, मित्रता दिवस, सोच रे मानव, इन सभी की झलक है।

अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए – ईमेल सब्सक्राइब करें – It’s Free !!

Please share your comments.

आप सभी का प्रिय दोस्त

©KMSRAJ51

जैसे शरीर के लिए भोजन जरूरी है वैसे ही मस्तिष्क के लिए भी सकारात्मक ज्ञान और ध्यान रुपी भोजन जरूरी हैं।-KMSRAj51

———– © Best of Luck ®———–

Note:-

यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry, Quotes या जानकारी है जो आप हमारे साथ Share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी ID है: kmsraj51@hotmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!!

“सफलता का सबसे बड़ा सूत्र”(KMSRAJ51)

“स्वयं से वार्तालाप(बातचीत) करके जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन लाया जा सकता है। ऐसा करके आप अपने भीतर छिपी बुराईयाें(Weakness) काे पहचानते है, और स्वयं काे अच्छा बनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।”

 

“अगर अपने कार्य से आप स्वयं संतुष्ट हैं, ताे फिर अन्य लोग क्या कहते हैं उसकी परवाह ना करें।”~KMSRAj51

 

 

____ अपने विचार Comments कर जरूर बताएं! ____

Filed Under: 2022-KMSRAJ51 की कलम से, सुशीला देवी जी की रचनाएँ।, हिन्दी साहित्य Tagged With: sushila devi, sushila devi articles, अमृतमयी जीवन देता गुरु, अमृतमयी जीवन देता गुरु - सुशीला देवी, गुरु पूर्णिमा - इतिहास और महत्व, गुरु पूर्णिमा का क्या अर्थ है?, गुरु पूर्णिमा की शुरुआत किसने की थी?, गुरु पूर्णिमा स्टेटस इन हिंदी, सुशीला देवी, सुशीला देवी की रचनाएँ

Primary Sidebar

Recent Posts

  • निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।
  • बात वक्त की।
  • तिरंगा का करें सम्मान।
  • एक सफर।
  • बाल विवाह – एक अभिशाप।
  • क्या बदलाव लायेगा नया साल।
  • है तो नववर्ष।
  • मोह।
  • अपना धर्म सबसे उत्तम।
  • ठंडी व्यार।
  • रिश्तों को निभाना सीखो।
  • तंत्र, मंत्र और तत्व ज्ञान में अंतर।
  • मित्र।
  • आखिर क्यों।
  • समय।
  • काले बादल।
  • सुबह का संदेश।

KMSRAJ51: Motivational Speaker

https://www.youtube.com/watch?v=0XYeLGPGmII

BEST OF KMSRAJ51.COM

निरर्थक रील्स की आरी – गुमराह होती नारी।

बात वक्त की।

तिरंगा का करें सम्मान।

एक सफर।

बाल विवाह – एक अभिशाप।

क्या बदलाव लायेगा नया साल।

है तो नववर्ष।

मोह।

अपना धर्म सबसे उत्तम।

ठंडी व्यार।

रिश्तों को निभाना सीखो।

Footer

Protected by Copyscape

KMSRAJ51

DMCA.com Protection Status

Disclaimer

Copyright © 2013 - 2026 KMSRAJ51.COM - All Rights Reserved. KMSRAJ51® is a registered trademark.